खेल खिलाड़ी का compleet

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raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 04 Nov 2014 10:41

गतान्क से आगे..............

जसजीत प्रधान की रॅली ख़त्म हो चुकी थी & अब भैया जी भी लोक विकास के दफ़्तर से निकल अपने सरकारी बंगले मे चले गये थे.शहर मे उनका अपना बंगला था जहा उनका परिवार रहता था मगर भैया जी अपने ज़रूरी काम अपने सरकारी बंगले से ही करते थे.बंगले मे दाखिल हो वो सीधा अपने बेडरूम मे गये.

"आइए,हुज़ूर.कितना इंतेज़ार करवाया आपने!",पलंग से उठ राम्या उनके करीब आई & उनकी गर्दन मे अपनी बाहे डाल खड़ी हो गयी.ऐसा करने से उसका आँचल ढालक गया & उसका गोरा क्लीवेज भैया जी की आँखो के सामने चमक उठा.उन्होने अपने हाथ उसकी कमर की बगलो मे लगाए & हल्के से वाहा के माँस को दबाया.

"उन्न्न्न..!",राम्या ने मस्तानी आह भरी जिसने भैया जी का जोश बढ़ा दिया.राम्या आगे हुई & अपने पाँव भैया जी के पाँवो पे रख पंजो पे उचक उनके होंठ छूने लगी.भैया जी ने अपनी मज़बूत बाहे उसकी कमर पे कसी & उसके मुँह मे अपनी ज़ुबान दाखिल कर दी फिर वैसे ही उसकी जीभ से अपनी जीभ लड़ाते उन्होने उसकी कमर पकड़ उसे हवा मे उठा लिया & उसे बिस्तर के पास ले आए & उसे वैसे ही बिस्तर पे लिटा चूमते हुए उसके उपर चढ़ गये.

राम्या ने भी अपने हाथ उनकी पीठ पे फिराते हुए उनके कुर्ते मे घुसा दिए & भैया जी ने जब उसके नखुनो की खरोंच को अपनी पीठ पे महसूस किया तो उनकी कमर अपने आप हिलने लगी & पाजामे मे क़ैद उनके लंड के धक्के राम्या की सारी मे छुपि चूत पे पड़ने लगे.

"ऊनन्न..",राम्या उनके भारी-भरकम बदन के नीचे कसमसा रही थी.उसने वैसे ही उनका कुर्ता निकाला & उनके बालो भरे सीने & पीठ पे बेचैनी से हाथ फिराने लगी.भैया जी ने उसके होंठो को छ्चोड़ अपना सर उठाया & उसके ब्लाउस के बटन्स खोलने लगे,"आपने सच मे कोई फ़ैसला नही लिया है अभी तक डेवाले सेंट्रल सीट के बारे मे?"

"नही ले लिया है.",ब्लाउस खोल उन्होने काले ब्रा के गले मे से दिख रहे उसके सीने के हिस्से पे किस्सस की बौछार कर दी.

"कौन है वो?आआहह....!",भैया जी ने उसकी बाई चूची के नुमाया हिस्से को मुँह मे भर चूस लिया था.

"तुम जानेमन.",उन्होने ब्रा के बाए कप को नीचे कर राम्या की बाई चूची को निकाला & उसके निपल को ऐसे चूसने लगे मानो दूध पीते बच्चे हो.

"क्या?",राम्या ने उनके बाल पकड़ उनका सर उपर किया,"..यही इनाम दे रहे हैं मुझे मेरी मेहनत का!",उसके माथे पे शिकन पड़ी हुई थी.

"हां.",राम्या की आँखो मे आँसू छल्छला आए,"..अरे तुम्हे तो बात बुरी लग गयी.",भैया जी उसके उपर से उठे & पलंग के हेडबोर्ड से टेक लगा के बैठ गये & राम्या को अपनी बाहो मे खींच लिया मगरा राम्या ने अपनी नाराज़गी जताते हुए उनकी ओर अपनी पीठ कर ली.

"अच्छा मैं समझता हू.देखो,प्रधान के खिलाफ खड़ा होना यानी हारना है ना?",उन्होने दाए हाथ से उसकी ठुड्डी पकड़ अपनी ओर घुमाई तो राम्या ने बस हाँ मे सर हिला दिया,"..अब मैं ये कहु कि इस बार जो भी प्रधान के खिलाफ खड़ा होगा वो जीत के ही रहेगा तो तुम क्या कहोगी?"

"ये नामुमकिन है!",राम्या की आँखो से आँसू & शोले 1 साथ बरस रहे थे.

"मेरी जान,तुम बड़ी भोली हो.मैं कह रहा हू तो समझो प्रधान हार गया.",राम्या ने भैया जी की आँखो मे देखा,वो मज़ाक नही कर रहे थे.उन्होने उसके ब्लाउस को उसकी बाहो से नीचे खींचा & ब्रा के हुक्स खोल उसे भी उतार दिया.

"लेकिन ये कैसे होगा?",राम्या ने अपनी पीठ उनकी छाती से टीका दी तो भैया जी के बड़े-2 हाथ उसकी चूचियो को मसल्ने मे लग गये.

"प्रधान मेरी राह का सबसे बड़ा काँटा है & अब तो उसकी नज़र सीधा सीयेम की कुर्सी पे है & अगर 1 बार वो उसपे बैठ गया तो उसे हिलाना बहुत ही मुश्किल होगा..",राम्या ने अपनी बाहे पीछे ले जाके उनके गले मे डाली & उनके सर को अपने बाए कंधे के उपर झुकाया तो उन्होने उसका चेहरा चूम लिया & फिर उसकी आँखो मे देखने लगे,"..इस बार मैं ऐसी चाल चलूँगा कि प्रधान चुनाव हारेगा & तुम जीतगी.",उन्होने उसके कंधे के उपर से अपना सर & नीचे कर उसकी बाई चूची को अपने हाथ मे दबोच कर उपर किया & उसके निपल को चूसने लगे.

"ऊन्न्न्न्न..!",राम्या ने बेचैनी से उनके बाल खींचे & उनके सर को चूम लिया.

"ज़रा सोचो राम्या,प्रधान को हराने के बाद राज्य की सियासत मे तुम्हारा कितना नाम होगा & अगर हमारी सरकार बनी तो तुम उसमे मेरे नीचे मंत्री बन जाओगी.",राम्या के जिस्म मे बिजलिया दौड़ रही थी.भैया जी के हाथो ने ही नही उनकी बातो ने भी उसे काफ़ी गरम कर दिया था.भैया जी की बातो से उसके आगे बढ़ने के सपने सच होते दिख रहे थे.भैया जी अपनी जीभ की नोक के उसके निपल के भूरे दायरे पे घुमा रहे थे.

उसने उनके बाल पकड़ उन्हे आगे खींच के बिस्तर पे गिराया & फिर दोनो घुटने उनके जिस्म के दोनो ओर बिस्तर पे जमा के उनके पाजामे पे बैठ गयी & उनके सीने के बालो मे अपनी गोरी उंगलिया फिराने लगी.गुलाबी नैल्पोलिश से सजे नाख़ून वाली उंगलियो को भैया जी ने अपने हाथो मे थामा 1-1 करके चूसने लगे.राम्या आहे भरती बहुत हौले-2 उनके लंड पे कमर हिला अपनी चूत रगड़ने लगी.उनका तना लंड उसकी चूत के नीचे दबा उसे गुदगुदी कर रहा था.

raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 04 Nov 2014 10:42

भैया जी ने उसकी उंगलिया चूसने के बाद उसकी गुदाज़ बाहे पकड़ उसे अपने उपर खींच के लिटा लिया & उसके चेहरे को थाम उसके गले को चूमने लगे.उनके हाथ उसकी नंगी,संगमरमरी पीठ से फिसल कर नीचे गये & सारी के उपर से ही उसकी मस्त,चौड़ी गंद को दबोच लिया.अब राम्या पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी.वो उपर उठी & उनके पाजामे की डोर खीच उनके तड़प्ते लंड को बाहर निकाला फिर उनके उपर से उतरी & उनका पजमा निकाल उन्हे पूरा नंगा कर दिया.

भैया जी के सर के बाल पूरे सफेद थे & सीने के खिचड़ी मगर उनकी झांते अभी तक काली थी & उनसे घिरा उनका 8 इंच लंबा & निहायत मोटा लंड देख राम्या ने थूक गटका....इस लंड को देख उसकी खुमारी आसमान छुने लगती थी.बेझिझक वो झुकी & उनके लंड को अपने मुँह मे भर लिया.भैया जी कराह उठे.उन्होने ना जाने कितनी लड़कियो को चोदा था मगर कमसिन से कमसिन लड़की बिस्तर मे राम्या का मुक़ाबला नही कर सकती थी.

दाए हाथ से लंड को हिलाते हुए राम्या लंड के सूपदे को चूस्ते हुए उसपे अपनी कोमल जीभ फिरा रही थी.भैया जी जन्न्त मे थे.उन्होने राम्या का चेहरा पकड़ थोड़ा उपर कर आँखो से इशारा किया तो लंड मुँह से निकाले बिना राम्या मुस्कुराइ & अपनी कमर घुमा 69 पोज़िशन मे आ गयी.भैया जी ने उसकी सारी को उपर कर कमर तक किया तो उनकी खुशी का ठिकाना ना रहा क्यूकी उसने पॅंटी नही पहनी थी.

उन्होने अपनी बाहे उसकी कमर पे कस अपनी बड़ी-2 हथेलिया उसकी गान्ड की कसी,मांसल फांको पे जमा के दबाई & अपनी जीभ राम्या की बिना बालो की चिकनी,गुलाबी चूत से सटा दी.उनकी जीभ राम्या की चूत की दरार पे फिर उसके अंदर बाहर होने लगी.उसकी चूत से लगातार बहते रस को वो चाटे जा रहे थे मगर जैसे रस बहना बंद ही नही हो रहा था.राम्या का मुँह भैया जी के मोटे लंड से भरा था मगर तब भी उसके गले से मस्तानी आवाज़े निकल रही थी.भैया जी ने उसकी गंद को दबाते हुए अपने बाए हाथ की बड़ी उंगली को उसके गंद के छेद मे घुसा दिया & उसके दाने को जीभ से छेड़ा तो राम्या ने लंड छ्चोड़ दिया & अपनी गर्दन घुमा अपना दाया गाल उनके लंड के बगल मे उनकी बाई जाँघ पे लगा दिया & आहे भरते हुए झड़ने लगी.

भैया जी ने उसे अपने उपर से उतरा तो उसने लेट के अपनी टाँगे हवा मे फैला दी.इस उम्र मे भी भैया जी का बदन बिल्कुल चुस्त था & जब वो उसके उपर झुक रहे थे तो राम्या उनके चौड़े सीने & मज़बूत बाजुओं की दिल ही दिल मे तारीफ किए बिना नही रह सकी.उसने गर्दन उठा के नीचे देखा-उनका लंड उसकी गीली चूत मे धीरे-2 घुस रहा था.उसे यू लंड को अपने अंदर जाते देखना बहुत अच्छा लगता था,उसका जोश और भी बढ़ जाता था.हाथो पे वज़न टिकाए लंड को पूरा अंदर घुसाने के बाद भैया जी ने जब हल्के धक्के लगाए तो राम्या ने उनकी बाहे थाम उन्हे सहलाना शुरू कर दिया.

"ऊहह..अपनी तरकीब मुझे नही बताएँगे?",उसने उनके गले मे बाने डाल उनकी गर्दन को नीचे किया तो भैया जी उसपे लेट गये,"...ऊन्नह....!",राम्या ने उन्हे अपनी बाहो मे भर लिया & उनके बदन को सहलाने लगी.

"जब वक़्त आएगा तो बताउन्गा जानेमन.अभी तो तुम बस डेवाले सेंट्रल से अपना पर्चा भरने की तैय्यरी करो.",भीयया जी ने अपने हाथ नीचे ले जाके उसकी गंद को दबोचा & ज़ोर-2 के धक्के लगाने लगे.8 इंच का लंड जब लगभग पूरा बाहर निकाल वो ज़ोर से दोबारा अंदर धंसा देते तो राम्या की मस्ती भरी चीख निकल जाती.उनकी पीठ पे उसके नखुनो के निशान गहरे होने लगे थे & वो दोबारा मदहोश होने लगी थी.

"कुच्छ तो बताइए...ऊओवव्वव.....!",भैया जी ने उसकी गंद को हाथो से मलते हुए बहुत ज़ोर का धक्का लगाया.इस उमर मे भी राम्या की चूत किसी 25-26 साल की लड़की जैसे कसी थी & उनका दिल भी मस्ती से भरा था.

राम्या ने अपनी टाँगे अब उनकी कमर पे कस दी थी & अपनी कमर उच्छाल रही थी.उसकी आँखे मूंद गयी थी.वो अपना सर दाए-बाए हिलाते बहुत ज़ोर से आहे भर रही थी & उसके हाथ भैया जी के बालो को खीच रहे थे & भैया जी उसकी गर्दन चूम रहे थे.

"आआन्न्न्नह....!",तभी उन्होने उसकी दाई चूची को मुँह मे भर के चूस्ते हुए खींचना शुरू कर दिया तो राम्या बहुत ज़ोर से कराही & उनके सर को थामे हुए उनसे और चिपक गयी.उसकी आँखे अभी भी बंद थी & उसका मुँह "ओ" के आकर मे खुला हुआ था उसका सीने बिस्तर से उठ भैया जी के मुँह मे घुसा हुआ था & उसका पूरा बदन जैसे अकड़ गया था.भैया जी के धक्के उसे अब बहुत असहनीय लग रहे थे & पूरे बदन मे 1 मीठा दर्द हो रहा था.तभी भैया जी ने 1 ज़ोर का धक्का लगाया & वो दर्द ख़त्म हो गया उसकी जगह ले ली उस अनूठे मज़े ने जिसकी चाह मे इंसान ये जिस्मो का खेल खेलता है.

raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 04 Nov 2014 10:42

मदहोश राम्या झाड़ चुकी थी & आँखे बंद किए बेहोश जैसी पड़ी थी.तभी उसे महसूस हुआ कि भैया जी उसके बदन को खींच रहे हैं.उसने अपनी आधी पलके खोली तो देखा की वो उसकी सारी & पेटिकोट उतार रहे हैं.उसने हल्के से अपनी गंद उचकाई & इस काम मे उनकी मदद की.

उसके कपड़े उतारने के बाद भैया जी उसके करीब आए & उसके सर पे बाया हाथ फेरते हुए दाए से उसकी चूचिया बहुत हल्के से दबाते हुए उसे चूमने लगे.इस किस मे थोड़ी देर पहले की बेसब्री नही थी बल्कि झड़ने के बाद का संतोष था.राम्या को पता था की भैया जी अभी झाडे नही हैं & अभी चुदाई और बाकी है.वो उसकी बाई तरफ अधलेटे से थे,उसने अपना बाया हाथ नीचे ले जाके उनके लंड को पकड़ के दबा दिया.

भैया जी उसे चूमते हुए मुस्कुराए & उसके निपल्स को अपने अंगूठे & 2 उंगलियो के बीच पकड़ के मसल दिया.उनके हाथ उसकी चूचियो से उतर उसके पेट पे घूमने लगे & फिर जहा तक उनकी पहुँच थी वो उसके गोरे,गुदाज़ जिस्म को सहलाते,दबाते रहे.

कुच्छ पॅलो बाद वो उठे & अपने घुटनो पे राम्या के सिरहाने बैठ गये.राम्या ने अपनी मांसल बाँहे उठाई & हाथ पीछे ले जा उनकी कमर को थामा & अपने सर को ज़रा से पीछे कर उसँके लंड के टोपे को चूम लिया.भैया जी ने अपने हाथ आगे बढ़ाए & उसकी मोटी चूचियो को 1 बार फिर मसल्ने लगे.राम्या ने अपने हाथो से उनके लंड को पकड़ कर उपर किया & फिर उनके आंडो पे जीभ फिराने के बाद उन्हे अपने मुँह मे भर चूसने लगी.

भैया जी के हाथ उसकी छाती की गोलाईयो को जी भर के मसलने के बाद आगे बढ़ उसके पेट पे पहुँचे & फिर उन्होने उसकी मोटी,भारी मगर पुष्ट जाँघो को फैलाया & आगे झुक उसकी रस बहाती चूत पे झुक गये.राम्या ने भी उनके प्रेकुं & उसके रस से भीगे लंड को अपने मुँह मे भर लिया & चूसने लगी.भैया जी हल्के से कमर हिला उसका मुँह चोद रहे थे & वो उनकी कमर को थामे उनकी गंद सहलाती अपनी कमर उचका उनकी जीभ का लुत्फ़ उठा रही थी कि तभी उसके बॅग मे रखा उसका मोबाइल बजा.

वो जानती थी कि किसका फोन है मगर इस वक़्त वो इस नशीले लम्हे मे कोई खलल नही चाहती थी & इसलिए उसने फोन की घंटी को नज़रअंदाज़ कर दिया लेकिन भैया जी ने ऐसा नही किया.राम्या का सर पलंग के सिरहाने या पैर की तरफ नही था बल्कि 1 साइड पे था.भैया जी ने उसकी चूत छ्चोड़ी तो उसे बहुत बुरा लगा मगर उसके मुँह मे उनका बड़ा लंड तो अभी भी था & वो उसे छ्चोड़ना नही चाहती थी.भैया जी ने अपना बाया हाथ बढ़ा के साइड-टेबल पे रखा बॅग उठा के मोबाइल निकाला & नंबर देख मुस्कुराए.बॅग किनारे रख उन्होने लंड चुस्ती राम्या के बाए हाथ को अपनी कमर से हटाया & उसमे फोन थमा दिया.

राम्या ने नंबर देखा तो लंड को मुँह से निकाला & फिर दाए हाथ से लंड को पकड़ अपने दाए गाल से सटा लिया,"हेलो."

"कहा हो तुम?कितनी देर हो गयी है?"

"सॉरी,दीपक.भैया जी के साथ हू..",उसने अपनी नज़रे उपर से उसे देख रहे भैया जी से मिलाई तो उन्होने ने अपना दाया हाथ उसके गाल पे लंड दबाए हाथ पे रख दिया & मुस्कुरा दिए,"..1 मसला खड़ा हो गया था..",राम्या ने लंड को मुट्ठी मे कस गाल से लगाए हुए ही हिलाया,"..उसे ही उनके साथ सुलझा रही थी.आने मे थोड़ी देर हो जाएगी.",वैसे ही उनसे नज़रे मिलाए हुए वो बड़ी शोखी से मुस्कुराइ तो भैया जी का जोश दुगुना हो गया.थोड़ी देर बाद जब उसने फोन रखा तो वो 1 बार फिर उसके उपर सवार हो गये & अपना लंड उसकी चूत मे उतार दिया.

"ऊऊव्व्वव....हाईईईईईई.....हान्ंनणणन्....आह...और ज़ोर से करिए.....आननह..!"

"तुम्हारा पति था?",भैया जी के हाथ उसके कंधो के नीचे से हो उसे अपनी बाँहो मे भरे हुए थे.

"हां.",राम्या ने 1 बार फिर अपनी क़ातिल बाँहो & टाँगो मे उनके जिस्म को क़ैद कर लिया.

"उसे ज़रा भी नही पता कि तुम यहा क्या करती हो?"

"उन..हुंग...आआहह......ऐसे ही ज़ोर से चोदिये..ऊऊओववववव......और अंदर..और अंदर डालिए अपने लंड को...आआआअहह....!",राम्या को पता था कि इस ख़याल से कि वो किसी और की बीवी को चोद रहे हैं,भैया जी जोश से पागल हो जाते थे,"..मेरे पति को तो चोदना ही नही आता...आहह...!",वो अपनी बातो से उनके जोश को बढ़ाए जा रही थी.

"उसका लंड कैसा है?",उन्होने उसे बाहो मे भरे हुए करवट ली & अपनी बाई बगल पे हो गये फिर उसकी गंद को दाए हाथ से थामा & ज़ोर-2 के धक्के लगाने लगे.

"बिल्कुल सूखा सा....हााईयईईईईई....पतला....छ्होटा......आपके तगड़े,मोटे...ऊऊऊहह..",भैया जी ने फिर उसे चित लिटा दिया था & उसके उपर चढ़ तेज़ी से धक्के लगा रहे थे.जोश के मारे राम्या की चूत कुच्छ और कस गयी थी & उनके मज़े की कोई इंतेहा नही थी,"..लंड के आगे तो वो कुच्छ भी नही...उउन्न्ञणनह....!",राम्या ने अपनी टाँगे उनकी कमर से उतार उनकी टाँगो के पीछे घुटनो के पिच्छले हिस्से के उपर फँसा के उनपे अपने तलवे जमाए,उसकी बाई बाँह उनकी पीठ को पकड़े थी & दाई से वो उनके बाए कंधे को थामे अपना सर बिस्तर से उठा उनके गर्दन के नीचे बाए कंधे के उपर काटते हुए नीचे से तेज़ी से अपनी कमर हिलाते हुए आहे भर रही थी.भैया जी भी सर उठाए उसकी हर्कतो का मज़ा उठाते हुए आहे भर रहे थे.तभी राम्या उनसे बिल्कुल चिपक गयी & उसके होंठ उनके कंधे पे बिल्कुल जम गये & उसका बदन उनके बदन के गिर्द बिल्कुल कस गया-वो फिर झाड़ रही थी & इस बार बहुत ज़्यादा शिदत के साथ.उसकी चूत और कस गयी थी & इस बार भैया जी ने अभी अपनी मंज़िल पे पहुँच अपना सफ़र ख़त्म करने का फ़ैसला किया-उनके आंडो से गाढ़े,गर्म वीर्य का सैलाब निकला जो उनके लंड के छेद से पिचकारियो की शक्ल मे निकला & राम्या की चूत को भरने लगा.भैया जी का जिस्म झटके खा रहा था & थोड़ी ही देर बाद वो अपनी पार्टी की उमीड़वार के उपर पड़े हाँफ रहे थे.

क्रमशः...........