बात एक रात की compleet

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rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 13 Dec 2014 00:55

बात एक रात की--103

गतान्क से आगे.................

नितंबो पर लिंग की चुअन से पहले ही पद्‍मिनी के शरीर में अजीब सी तरंगे दौड़ रही थी. गर्दन पर बरस रही किस्सस से उसकी हालत और पतली होती जा रही थी.

“बोलिए ना क्या हटा लूँ. आप नही बताएँगी तो कैसे मदद करूँगा आपकी.”

पद्‍मिनी छटपटाने लगी राज शर्मा की बाहों में मगर राज शर्मा की पकड़ से निकलना आसान नही था.

“क्या मेरा लंड आपकी गांद को परेशान कर रहा है?”

“शट अप! हट जाओ वरना जींदगी भर बात नही करूँगी तुमसे.” पद्‍मिनी चिल्लाई.

राज शर्मा तुरंत हट गया और बिस्तर पर आकर लेट गया आँखे बंद करके.

“हां अब नाराज़ हो जाना ताकि मैं तुम्हे मनाने आउ और तुम्हे फिर से मेरे शरीर से खेलने का मोका मिले.आइ हेट यू. मेरे करीब मत आना अब. तुम बहुत गंदे हो. इतनी गंदी बात नही सुनी कभी मैने.” पद्‍मिनी ने कहा.

“अब आपको कभी कुछ नही कहूँगा…ना ही आपके शरीर से खेलूँगा. सॉरी फॉर एवेरितिंग.” राज शर्मा ने कहा.

राज शर्मा बिस्तर से उठा और ज़मीन पर एक चटाई बिछा कर उस पर तकिया रख कर लेट गया. पद्‍मिनी समझ गयी कि राज शर्मा ने बिस्तर उसके लिए छोड़ दिया है. पद्‍मिनी बिस्तर पर बैठ गयी और घुटनो में सर छुपा कर शूबकने लगी.

“मेरी भावनाओ की ज़रा भी कदर नही करते तुम…प्यार क्या निभाओगे तुम. जब से प्यार हुआ है क्या तुमने कुछ भी जान-ने की कोशिस की मेरे बारे में. क्या पूछा तुमने कभी कि कैसा फील करती हूँ मैं अपने मम्मी पापा के बिना. क्या पूछा तुमने कभी कि क्यों मेरी पहली शादी बिखर गयी. नही तुम्हे मेरे दुख दर्द से कोई लेना देना नही है. बस मेरा शरीर चाहिए तुम्हे और वो भी तुरंत. थोड़ा सा भी वेट नही कर सकते. हवस के पुजारी हो तुम…जिसे औरत के शरीर के सिवा कुछ नही दीखता. क्यों मेरे दिल में झाँकने की कोशिस नही करते तुम.क्यों मेरे शरीर पर ही रुक जाते हो तुम. क्या इसी को प्यार कहते हो तुम. क्या तुम्हे पता भी है किस हाल में हूँ मैं एर कैसे एक-एक दिन जी रही हूँ.मम्मी पापा की मौत के बाद पूरी तरह बिखर चुकी हूँ. तुम्हारे प्यार ने जीवन में एक उम्मीद की किरण सी देखाई थी मगर अब सब ख़तम सा होता दीख रहा है. ये प्यार बस शरीर तक ही रह गया है...इस से आगे नही बढ़ पा रहा है.,” पद्‍मिनी सुबक्ते हुए सोच रही थी.

राज शर्मा पद्‍मिनी के दिल की मनोस्थिति से बेख़बर चुपचाप पड़ा था आँखे बंद किए. “मैं प्यार करता हूँ आपको और आप इसे शरीर से खेलना समझती हैं. पता नही कौन सी दुनिया से हैं आप. ज़रा सी नज़दीकी और छेड़ छाड़ बर्दास्त नही आपको. शादी के बाद भी यही सब चलेगा शायद. ये प्यार मुझे बर्बादी की तरफ ले जा रहा है. आपका योवन मुझे भड़का देता है और मैं आपकी तरफ खींचा चला आता हूँ. बदले में मुझे गालियाँ और तिरस्कार मिलता है आपका. प्यार ये रंग देखायगा सोचा नही था कभी.”

अचानक पद्‍मिनी ने अपने आँसू पोंछे. उसने मन ही मन कुछ फ़ैसला किया था. वो बिस्तर से उठी और कमरे की लाइट बंद कर दी. कुछ देर बाद वो झीजकते हुए राज शर्मा की चटाई के पास आ गयी और उसके पास लेट गयी. राज शर्मा को पता तो चल गया था कि पद्‍मिनी उसके पास लेट गयी है आकर पर फिर भी चुपचाप आँखे बंद किए पड़ा रहा.

“राज शर्मा नाराज़ रहोगे मुझसे?”

“आपका रोज का यही नाटक है. पहले मुझे कुत्ते की तरह खुद से दूर भगा देती हो फिर खुद मेरे पास आ जाती हो.” राज शर्मा ने कहा.

“क्या करूँ तुम्हे बहुत प्यार करती हूँ. तुमसे दूर नही रह सकती. ना ही तुम्हारी नाराज़गी बर्दास्त कर सकती हूँ.”

“कल भी यही कहा था आपने ये सब मज़ाक है और कुछ नही.” राज शर्मा ने कहा.

“मज़ाक नही है ये सच है. तुमसे बहुत नाराज़ हूँ फिर भी यहा तुम्हारे पास आई हूँ क्योंकि तुमसे बहुत प्यार करती हूँ.” पद्‍मिनी सुबक्ते हुए बोली.

राज शर्मा मन ही मन मुस्कुरा रहा था ये सब सुन कर. बाहों में भर लेना चाहता था पद्‍मिनी को इस मासूम प्यार के लिए पर पता नही क्यों पद्‍मिनी को थोड़ा और सताने का मूड था उसका. “तो क्या कोई अहसान कर रही हो मुझ पर.” राज शर्मा ने कहा.

“नही अहसान तो खुद पर कर रही हूँ..तुमसे दूर रह कर जी नही सकती ना इसलिए अहसान खुद पर कर रही हूँ. तुम पर अहसान क्यों करूँगी…तुम तो जींदगी हो मेरी.” पद्‍मिनी ने फिर से सुबक्ते हुए कहा.

अब राज शर्मा से रहा नही गया और उसने बाहों में भर लिया पद्‍मिनी को. मगर जैसे ही उसने उसे बाहों में लिया वो हैरान रह गया. वो फ़ौरन पद्‍मिनी से अलग हो गया.

“पद्‍मिनी ये सब क्या है तुम कपड़े उतार कर क्यों आई हो मेरे पास.”

“पता नही क्यों आई हूँ बस आ गयी हूँ किसी तरह. आगे तुम संभाल लो.”

“क्या पागलपन है ये. कहाँ है कपड़े तुम्हारे?”

“ बिस्तर पर पड़े हैं.”

राज शर्मा अंधेरे में बिस्तर की तरफ बढ़ा और वहाँ से कपड़े उठा कर पद्‍मिनी के उपर फेंक दिए, “पहनो जल्दी वरना मुझसे बुरा कोई नही होगा. तुमने ऐसा करके अपमान किया है मेरे प्यार का. मैं तुम्हे कभी माफ़ नही करूँगा. तुमने तमाचा मारा है मेरे मुँह पर ये सब करके. यही साबित करना चाहती हो ना कि मैं हवस का पुजारी हूँ और तुम सती सावित्री हो जिसे मैं मजबूर करता हूँ सेक्स के लिए. मान गये आपको. आप तो साइको से भी ज़्यादा ख़तरनाक गेम खेल गयी मेरे साथ. आइ हेट यू. आप ना प्यार के लायक हैं और ना शादी के लायक हैं. अब समझ में आया क्यों आपकी पहली शादी नही चल पाई. आप रिस्ते निभा ही नही सकती.” राज शर्मा ने कहा.

पद्‍मिनी ने ये सब सुनते ही फूट-फूट कर रोने लगी. इतनी ज़ोर से रो रही थी वो कि राज शर्मा के कान फॅट रहे थे उसका रोना सुन कर.

“ये क्या तमासा है बंद करो ये नाटक!” राज शर्मा ज़ोर से चिल्लाया.

पद्‍मिनी सुबक्ते हुए उठी और अपने कपड़े पहन कर वापिस वही लेट गयी चटाई पर. राज शर्मा पाँव लटका कर बिस्तर पर बैठ गया.

कमरे में एक दम खामोसी छा गयी. पद्‍मिनी पड़ी-पड़ी सूबक रही थी और राज शर्मा अपना सर पकड़ कर बैठा था.

………………………………………………………………………..

रोहित हॉस्पिटल पहुँच तो गया मगर शालिनी के कमरे की तरफ जाने से डर रहा था. “पता नही बात करेंगी या नही. एक बार मिल कर अपना पक्ष तो रख दूं फिर जो उनकी इच्छा होगी देख लेंगी.”

रोहित दबे पाँव कमरे में दाखिल हुआ. शालिनी आँखे बंद किए पड़ी थी. रोहित ने उन्हे जगाना सही नही समझा और वापिस मूड कर जाने लगा.

“रोहित!” शालिनी ने आवाज़ दी.

रोहित तुरंत मुड़ा और बोला, “क्या आप जाग रही हैं.”

“तुम मुझे सोने दोगे तब ना सो पाउन्गि. कहा थे सुबह से. फोन भी नही मिल रहा था तुम्हारा.” शालिनी ने कहा.

“मेडम आपने मुझे सुबह यहाँ से जाने को कहा था. दिल में दर्द और आँखो में आँसू लेकर गया था यहाँ से.”

“जो बात तुम्हे मुझे बतानी चाहिए थी वो चौहान ने बताई. बहुत बुरा लगा था मुझे.”

“मेडम रीमा से प्यार नही किया कभी मैने. हां अच्छे दोस्त ज़रूर बन गये थे हम. वो मुझसे शादी करना चाहती है.”

“क्या?” ये बात चौहान ने नही बताई मुझे.

“जी हां मेडम. वो मुझे प्यार करती है. मेरे दिल में प्यार नही जाग पाया उसके लिए मगर फिर भी मैं शादी के लिए तैयार था. मगर चौहान को ये सब मंजूर नही. इसलिए वो ज़बरदस्ती रीमा की शादी कही और कर रहा है वो भी इतनी जल्दी.”

“अगर चौहान राज़ी हो गया तुम्हारी और रीमा की शादी के लिए तो क्या करोगे शादी उस से?”

“मेडम झूठ नही बोलूँगा. अब नही कर सकता शादी रीमा से.”

“क्यों नही कर सकते?”

“आप जानती हैं सब कुछ पूछ क्यों रही हैं.”

“शायद मुझे पता है और शायद नही भी. खैर छोड़ो. दुख हुआ तुम्हारे सस्पेन्षन का सुन कर. मैं ड्यूटी जाय्न करते ही कोशिस करूँगी उसे कॅन्सल करवाने की.”

“सस्पेन्षन की आदत हो चुकी है अब.”

“ह्म्म बी ऑप्टिमिस्टिक रोहित. सब ठीक हो जाएगा.”

“मेडम मैं कुछ मित्रो के साथ मिल कर साइको की तलाश जारी रख रहा हूँ. अभी हमारे पास सबसे बड़ा क्लू कर्नल का घर है. वही से सारे राज खुलने की उम्मीद है. हम उसी पर कॉन्सेंट्रेट करेंगे. संजय तो सस्पेक्ट है ही. मगर उसका अभी कुछ आता पता नही है.”

“वेरी गुड. मेरी कहीं भी ज़रूरत पड़े तो झीजकना मत.मैं हर वक्त तुम्हारे साथ हूँ.”

“थॅंक यू मेडम…मैं चलता हूँ अब. शुकून मिला दिल को आपसे बात करके. सुबह तो भारी मन लेकर गया था यहा से. ऐसा लग रहा था जैसे कि दुनिया ही उजड़ गयी मेरी. गुड नाइट.” रोहित कह कर चल दिया.

“रूको!”

“जी कहिए.”

“कुछ कहना चाहती थी पर चलो छोड़ो. फिर कभी…”

“ऐसा ही होता है अक्सर. हम दिल में छुपाए फिरते हैं वो बात मगर कह नही पाते. और एक दिन ऐसा आता है जब किस्मत कहने का मोका ही नही देती जबकि हम कहने के लिए तैयार रहते हैं. बोल दीजिए मुझे जो बोलना है. हमेशा दिल में छुपा कर रखूँगा आपकी ये बात जो आप कहना चाहती हैं.”

“मैं क्या कहना चाहती हूँ तुम्हे पता भी है?”

“जी हां पता है”

“फिर बोलने की क्या ज़रूरत है. यू कॅन गो नाउ…हहेहहे.” शालिनी ने हंसते हुए कहा.

“एक बार बोल देती तो अच्छा होता. मेरे कान तरस रहे हैं वो सब सुन ने के लिए. प्लीज़.”

“तुम जाते हो कि नही…मेरे पास कुछ नही है कहने को. ईज़ दट क्लियर.”

“जी हां सब कुछ क्लियर है स्प्राइट की तरह.”

“हाहहहाहा…..आआहह” शालिनी खिलखिला कर हंस पड़ी जिस से पेट के झखम में दर्द होने लगा.

“क्या हुआ मेडम?”

“कुछ नही हँसने से पेट का झखम दर्द करने लगा.”

“मेरे उपर हँसने के चक्कर में दर्द मोल ले लिया आपने. शांति रखिए. वैसे बहुत अच्छा लगा आपको हंसते देख कर. भगवान मेरी सारी ख़ुसीया आपको दे दे ताकि आप हमेशा यू ही मुस्कुराती रहें.”

“तुम कुछ भी कर्लो मैं वो बोलने वाली नही हूँ.”

“यही तो मेरी बदक़िस्मती है. खैर जाने दीजिए. गुड नाइट. सो जाओ आप चुपचाप अब. मुझे अभी से इंक्वाइरी शुरू करनी हैं. अब बिल्कुल फ्रेश माइंड से स्टार्ट करूँगा.”

“ऑल दा बेस्ट.” शालिनी ने कहा

रोहित कमरे से बाहर निकला तो शालिनी का डॉक्टर मिल गया उसे.

“डॉक्टर कब तक छुट्टी मिलेगी मेडम को.”

“हम कल दोपहर तक छुट्टी कर देंगे. बाद में बस ड्रेसिंग के लिए आना पड़ेगा. 20 दिन बाद स्टिचस काट देंगे.”

“एसपी साहिब का भी आपने इलाज किया क्या. उनकी तो बड़ी जल्दी छुट्टी हो गयी”

“नही उनका केस तो ड्र अनिल के पास था. बहुत बढ़िया डॉक्टर हैं वो. एसपी साहिब के ख़ास दोस्त भी हैं. मेडम का केस डिफरेंट था. उस लकड़ी ने बहुत गहरा घाव बना दिया था मेडम के पेट में.”

“मगर जो भी हो आपके हॉस्पिटल में अच्छी केर होती है. सभी अच्छे डॉक्टर हैं.”

“जी हां. वी आर प्राउड ऑफ इट.”

अचानक रोहित का फोन बज उठा. फोन अननोन नंबर से था.

“यार कही ये साइको का तो नही?”

रोहित ने फोन उठाया.

“हेलो.”

“हेलो ईज़ दिस इनस्पेक्टर रोहित.”

“जी हां मैं रोहित ही हूँ बोलिए.”

“दोपहर से आपका फोन ट्राइ कर रहा हूँ. मैं देल्ही से बोल रहा हूँ इनस्पेक्टर गणेश.”

“हां बोलिए.”

“देखिए कॉलोनेक की बहन रहती हैं यहाँ. हमने उनसे पूछताछ की है. कर्नल कहाँ है उन्हे भी कुछ नही पता. उनके अनुसार कर्नल का स्वाभाव ऐसा ही है…बिना बताए गायब हो जाता है. देहरादून में जो घर है उसका वो उसने किसी सीसी नाम के आदमी को दिया है शायद.”

“सीसी…पूरा नाम बोलिए ना इस सीसी ने तो परेशान कर रखा है हमें.”

“देखिए कर्नल की बहन को इतना ही पता था. एक महीना पहले कर्नल ने बातो बातो में बोल दिया था उसे कि वो अपना देहरादून वाला घर अपने एक फ्रेंड सीसी को दे रहा है. ज़्यादा बात नही हुई इस बारे में उनकी. यही पता चला यहा, सोचा आपको बता दूं. मीडीया में छाया हुआ है ये साइको का केस. शायद आपको इस से कुछ मदद मिले. ऑल दा बेस्ट” गणेश ने फोन काट दिया.

क्रमशः........................

..

BAAT EK RAAT KI--103

gataank se aage.................

Nitambo par ling ki chuan se pahle hi padmini ke sharir mein ajeeb si tarange daud rahi thi. gardan par baras rahi kisses se uski haalat aur patli hoti ja rahi thi.

“boliye na kya hata lun. Aap nahi bataayengi to kaise madad karunga aapki.”

Padmini chatpataane lagi Raj sharma ki baahon mein magar Raj sharma ki pakad se nikalna aasaaan nahi tha.

“kya mera lund aapki gaand ko pareshaan kar raha hai?”

“shut up! Hat jaao varna jeendagi bhar baat nahi karungi tumse.” Padmini chillaai.

Raj sharma turant hat gaya aur bistar par aakar late gaya aankhe band karke.

“haan ab naraaj ho jaana taaki main tumhe manaane aaun aur tumhe phir se mere sharir se khelne ka moka mile.i hate you. Mere karib mat aana ab. Tum bahut gande ho. Itni gandi baat nahi suni kabhi maine.” Padmini ne kaha.

“ab aapko kabhi kuch nahi kahunga…na hi aapke sharir se khelunga. Sorry for everything.” Raj sharma ne kaha.

Raj sharma bistar se utha aur jamin par ek chataayi beecha kar us par takiya rakh kar late gaya. padmini samajh gayi ki Raj sharma ne bistar uske liye chod diya hai. padmini bistar par baith gayi aur ghutno mein sar chupa kar shubakne lagi.

“meri bhaavnaao ki jara bhi kadar nahi karte tum…pyar kya nibhaaoge tum. jab se pyar hua hai kya tumne kuch bhi jaan-ne ki koshis ki mere baare mein. Kya pucha tumne kabhi ki kaisa feel karti hun main apne mammi papa ke bina. Kya pucha tumne kabhi ki kyon meri pahli shaadi bikhar gayi. Nahi tumhe mere dukh dard se koyi lena dena nahi hai. bas mera sharir chaahiye tumhe aur vo bhi turant. Thoda sa bhi wait nahi kar sakte. Hawas ke pujari ho tum…jise aurat ke sharir ke shiva kuch nahi deekhta. Kyon mere dil mein jhaankne ki koshis nahi karte tum.kyon mere sharir par hi ruk jaate ho tum. Kya isi ko pyar kahte ho tum. kya tumhe pata bhi hai kis haal mein hun main air kaise ek-ek din jee rahi hun.mammi papa ki maut ke baad puri tarah bikhar chuki hun. tumhaare pyar ne jeevan mein ek ummeed ki kiran si dekhayi thi magar ab sab khatam sa hota deekh raha hai. Ye pyar bas sharir tak hi rah gaya hai...is se aage nahi badh pa raha hai.,” padmini shubakte hue soch rahi thi.

Raj sharma padmini ke dil ki manosthiti se bekhabar chupchaap pada tha aankhe band kiye. “main pyar karta hun aapko aur aap ise sharir se khelna samajhti hain. Pata nahi kaun si duniya se hain aap. Jara si nazdiki aur ched chaad bardaast nahi aapko. Shaadi ke baad bhi yahi sab chalega shaayad. Ye pyar mujhe barbaadi ki taraf le ja raha hai. aapka yovan mujhe bhadka deta hai aur main aapki taraf kheencha chala aata hun. Badle mein mujhe gaaliyan aur tiraskaar milta hai aapka. Pyar ye rang dekhayega socha nahi tha kabhi.”

Achaanak padmini ne apne aansu ponche. Usne man hi man kuch faisla kiya tha. vo bistar se uthi aur kamre ki light band kar di. kuch der baad vo jhijakte hue Raj sharma ki chataayi ke paas aa gayi aur uske paas late gayi. Raj sharma ko pata to chal gaya tha ki padmini uske paas late gayi hai aakar par phir bhi chupchaap aankhe band kiye pada raha.

“Raj sharma naraaj rahoge mujhse?”

“aapka roj ka yahi naatak hai. pahle mujhe kutte ki tarah khud se dur bhaga deti ho phir khud mere paas aa jaati ho.” Raj sharma ne kaha.

“kya karun tumhe bahut pyar karti hun. Tumse dur nahi rah sakti. Na hi tumhaari naraajgi bardaast kar sakti hun.”

“kal bhi yahi kaha tha aapne ye sab majaak hai aur kuch nahi.” Raj sharma ne kaha.

“majaak nahi hai ye sach hai. tumse bahut naraaj hun phir bhi yaha tumhaare paas aayi hun kyonki tumse bahut pyar karti hun.” Padmini shubakte hue boli.

Raj sharma man hi man muskura raha tha ye sab sun kar. Baahon mein bhar lena chaahta tha padmini ko is maasum pyar ke liye par pata nahi kyon padmini ko thoda aur sataane ka mood tha uska. “to kya koyi ahsaan kar rahi ho mujh par.” Raj sharma ne kaha.

“nahi ahsaan to khud par kar rahi hun..tumse dur rah kar jee nahi sakti na isliye ahsaan khud par kar rahi hun. Tum par ahsaan kyon karungi…tum to jeendagi ho meri.” Padmini ne phir se shubakte hue kaha.

Ab Raj sharma se raha nahi gaya aur usne baahon mein bhar liya padmini ko. magar jaise hi usne use baahon mein liya vo hairaan rah gaya. vo fauran padmini se alag ho gaya.

“padmini ye sab kya hai tum kapde utaar kar kyon aayi ho mere paas.”

“pata nahi kyon aayi hun bas aa gayi hun kisi tarah. Aage tum sambhaal lo.”

“kya paagalpan hai ye. Kaha hai kapde tumhaare?”

“ bistar par pade hain.”

Raj sharma andhere mein bistar ki taraf badha aur vaha se kapde utha kar padmini ke upar fenk diye, “pahno jaldi varna mujhse bura koyi nahi hoga. Tumne aisa karke apmaan kiya hai mere pyar ka. Main tumhe kabhi maaf nahi karunga. Tumne tamaacha maara hai mere munh par ye sab karke. Yahi saabit karna chaahti ho na ki main hawas ka pujari hun aur tum sati saavitri ho jise main majboor karta hun sex ke liye. Maan gaye aapko. Aap to psycho se bhi jyada khatarnaak game khel gayi mere saath. I hate you. Aap na pyar ke laayak hain aur na shaadi ke laayak hain. Ab samajh mein aaya kyon aapki pahli shaadi nahi chal paayi. Aap riste nidha hi nahi sakti.” Raj sharma ne kaha.

Padmini ne ye sab sunte hi phoot-phoot kar rone lagi. Itni jor se ro rahi thi vo ki Raj sharma ke kaan phat rahe the uska rona sun kar.

“ye kya tamaasa hai band karo ye naatak!” Raj sharma jor se chillaayaa.

Padmini shubakte hue uthi aur apne kapde pahan kar vaapis vahi late gayi chataayi par. Raj sharma paanv latka kar bistar par baith gaya.

Kamre mein ek dam khaamosi cha gayi. Padmini padi-padi subak rahi thi aur Raj sharma apna sar pakad kar baitha tha.

………………………………………………………………………..

Rohit hospital pahunch to gaya magar shalini ke kamre ki taraf jaane se dar raha tha. “pata nahi baat krengi ya nahi. Ek baar mil kar apna paks to rakh dun phir jo unki itcha hogi dekh lengi.”

Rohit dabe paanv kamre mein daakhil hua. Shalini aankhe band kiye padi thi. rohit ne unhe jagaana sahi nahi samjha aur vaapis mud kar jaane laga.

“rohit!” shalini ne awaaj di.

Rohit turant muda aur bola, “kya aap jaag rahi hain.”

“tum mujhe sone doge tab na so paaungi. Kaha the subah se. phone bhi nahi mil raha tha tumhaara.” Shalini ne kaha.

“madam aapne mujhe subah yaha se jaane ko kaha tha. dil mein dard aur aankho mein aansu lekar gaya tha yaha se.”

“jo baat tumhe mujhe bataani chaahiye thi vo chauhan ne bataayi. Bahut bura laga tha mujhe.”

“madam reema se pyar nahi kiya kabhi maine. Haan achche dost jaroor ban gaye the hum. vo mujhse shaadi karna chaahti hai.”

“kya?” ye baat chauhan ne nahi bataayi mujhe.

“ji haan madam. Vo mujhe pyar karti hai. mere dil mein pyar nahi jaag paya uske liye magar phir bhi main shaadi ke liye taiyaar tha. magar chauhan ko ye sab manjoor nahi. Isliye vo jabardasti reema ki shaadi kahi aur kar raha hai vo bhi itni jaldi.”

“agar chauhan raaji ho gaya tumhaari aur reema ki shaadi ke liye to kya karoge shaadi us se?”

“madam jhut nahi bolunga. Ab nahi kar sakta shaadi reema se.”

“kyon nahi kar sakte?”

“aap jaanti hain sab kuch puch kyon rahi hain.”

“shaayad mujhe pata hai aur shaayad nahi bhi. Khair chodo. Dukh hua tumhaare suspension ka sun kar. main duty join karte hi koshis karungi use cancel karvaane ki.”

“suspension ki aadat ho chuki hai ab.”

“hmm be optimistic rohit. Sab theek ho jaayega.”

“madam main kuch mitro ke saath mil kar psycho ki talaash jaari rakh raha hun. abhi hamaare paas sabse bada clue colonel ka ghar hai. vahi se saare raaj khulne ki ummeed hai. hum usi par concentrate karenge. Sanjay to suspect hai hi. Magar uska abhi kuch ata pata nahi hai.”

“very good. Meri kahin bhi jaroorat pade to jhijakna mat.main har vakt tumhaare saath hun.”

“thank you madam…main chalta hun ab. Shukun mila dil ko aapse baat karke. Subah to bhaari man lekar gaya tha yaha se. aisa lag raha tha jaise ki duniya hi ujad gayi meri. Good night.” Rohit kah kar chal diya.

“ruko!”

“ji kahiye.”

“kuch kahna chaahti thi par chalo chodo. Phir kabhi…”

“aisa hi hota hai aksar. Hum dil mein chupaaye phirte hain vo baat magar kah nahi paate. Aur ek din aisa aata hai jab kismat kahne ka moka hi nahi deti jabki hum kahne ke liye taiyaar rahte hain. Bol dijiye mujhe jo bolna hai. hamesha dil mein chupa kar rakhunga aapki ye baat jo aap kahna chaahti hain.”

“main kya kahna chaahti hun tumhe pata bhi hai?”

“ji haan pata hai”

“phir bolne ki kya jaroorat hai. you can go now…hehehehe.” Shalini ne hanste hue kaha.

“ek baar bol deti to achcha hota. Mere kaan taras rahe hain vo sab sun ne ke liye. Please.”

“tum jaate ho ki nahi…mere paas kuch nahi hai kahne ko. Is that clear.”

“ji haan sab kuch clear hai sprite ki tarah.”

“hahahahaha…..aaaahhhh” shalini khilkhila kar hans padi jis se pet ke jhakham mein dard hone laga.

“kya hua madam?”

“kuch nahi hansne se pet ka jhakham dard karne laga.”

“mere upar hansne ke chakkar mein dard mol le liya aapne. Shaanti rakhiye. Vaise bahut achcha laga aapko hanste dekh kar. bhagvaan meri saari khusiya aapko de de taaki aap hamesha yu hi muskuraati rahein.”

“tum kuch bhi karlo main vo bolne wali nahi hun.”

“yahi to meri badkismati hai. khair jaane dijiye. Good night. So jaao aap chupchaap ab. Mujhe abhi se inquiry shuru karni hain. Ab bilkul fresh mind se start karunga.”

“all the best.” Shalini ne kaha

Rohit kamre se baahar nikla to shalini ka doctor mil gaya use.

“doctor kab tak chutti milegi madam ko.”

“hum kal dopahar tak chutti kar denge. Baad mein bas dressing ke liye aana padega. 20 din baad stitches kaat denge.”

“sp saahib ka bhi aapne ilaaj kiya kya. Unki to badi jaldi chutti ho gayi”

“nahi unka case to dr anil ke paas tha. bahut badhiya doctor hain vo. Sp saahib ke khaas dost bhi hain. Madam ka case different tha. us lakdi ne bahut gahra ghaav bana diya tha madam ke pet mein.”

“magar jo bhi ho aapke hospital mein atchi care hoti hai. sabhi achche doctor hain.”

“ji haan. We are proud of it.”

Achaanak rohit ka phone baj utha. Phone unknown number se tha.

“yaar kahi ye psycho ka to nahi?”

Rohit ne phone uthaaya.

“hello.”

“hello is this inspector rohit.”

“ji haan main rohit hi hun boliye.”

“dopahar se aapka phone try kar raha hun. main delhi se bol raha hun inspecto ganesh.”

“haan boliye.”

“dekhiye colonek ki bahan rahti hain yaha. Hamne unse puchtaach ki hai. colonel kaha hai unhe bhi kuch nahi pata. Unke anusaar colonel ka swabhaav aisa hi hai…bina bataaye gaayab ho jaata hai. dehradun mein jo ghar hai uska vo usne kisi kk naam ke aadmi ko diya hai shaayad.”

“kk…pura naam boliye na is kk ne to pareshaan kar rakha hai hamein.”

“dekhiye colonel ki bahan ko itna hi pata tha. ek mahina pahle colonel ne baato baato mein bol diya tha use ki vo apna dehradun wala ghar apne ek friend kk ko de raha hai. jyada baat nahi hui is baare mein unki. Yahi pata chala yaha, socha aapko bata dun. Media mein chaaya hua hai ye psycho ka case. Shaayad aapko is se kuch madad mile. All the best” ganesh ne phone kaat diya.

Kramashah..........................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 13 Dec 2014 00:56

बात एक रात की--104

गतान्क से आगे.................

“यार ये तो गोल चक्कर में घूम रहे हैं हम. फिर बात इस सीसी पर आ कर अटक गयी. पर इतना तो क्लियर है अब कि कर्नल के घर में रहने वाला ही साइको है. उसी का नाम सीसी है. सीसी ईज़ साइको. वेरी फन्नी. ना साइको मिल रहा है ना सीसी. दोनो एक ही हैं तो ये तो होना ही था. देखता हूँ कब तक बचोगे मिस्टर सीसी उर्फ साइको. कुछ ना कुछ तो तुम्हारे बारे में पता चल ही रहा है.”

पद्‍मिनी बुरी तरह सूबक रही थी चटाई पर पड़ी हुई. दिल कुछ इस कदर भारी हो रहा था की ज़ोर-ज़ोर से रोना चाहती थी वो पर राज शर्मा की फटकार ने उसकी आवाज़ दबा दी थी. वो अंदर ही अंदर घुट रही थी. आँखो से आँसू लगातार बह रहे थे. बहुत कोशिस कर रही थी कि मुँह से कोई आवाज़ ना हो पर रह-रह कर सूबक ही पड़ती थी.

राज शर्मा बिस्तर पर बैठा चुपचाप सब सुन रहा था.

“रोती रहो मुझे क्या है. तुम खुद इसके लिए ज़िम्मेदार हो.” राज शर्मा ने मन ही मन सोचा और लेट गया बिस्तर पर चुपचाप.

प्यार में गुस्सा ज़्यादा देर तक नही टिक सकता. प्यार वो आग है जिसमे की जीवन की हर बुराई जल कर खाक हो जाती है. गुस्सा तो बहुत छ्होटी चीज़ है. जब आप बहुत प्यार करते हैं किसी को तो उसके प्रति मन में गुस्सा ज़्यादा देर तक नही टिक पाता. संभव ही नही है ये बात.

राज शर्मा का गुस्सा शांत हुआ तो उसे पद्‍मिनी की शिसकियों में मौजूद उस दर्द का अहसास हुआ जो उसने उसे दिया था.“हे भगवान मैने ये क्या किया? क्या कुछ नही कह दिया मैने पद्‍मिनी को.” राज शर्मा ने सोचा और तुरंत उठ कर पद्‍मिनी के पास आ कर बैठ गया.

पद्‍मिनी अभी भी सूबक रही थी. राज शर्मा ने पद्‍मिनी के सर पर हाथ रखा और बोला, “बस पद्‍मिनी चुप हो जाओ.”

पद्‍मिनी की दबी आवाज़ जैसे आज़ाद हो गयी और वो फूट-फूट कर रोने लगी. राज शर्मा घबरा गया उस यू रोते देख.

“पद्‍मिनी प्लीज़…ऐसे रोता है क्या कोई….प्लीज़ चुप हो जाओ मेरा दिल बैठा जा रहा है तुम्हे यू रोते देख कर.” राज शर्मा ने भावुक आवाज़ में कहा.

“क्यों आए हो मेरे पास तुम. ना मैं प्यार के लायक हूँ ना शादी के लायक हूँ.”

“प्लीज़ ऐसा मत कहो तुम तो भगवान की तरह पूजा के लायक हो. मैने वो सब गुस्से में बोल दिया था. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो. ”

“गुस्से में दिल की बात ही तो कही ना तुमने. और सच ही कहा. मैं बिल्कुल लायक नही हूँ तुम्हारे प्यार के. अच्छा हो कि साइको मेरी आर्ट बना दे ताकि धरती से कुछ बोझ कम हो. मैं और नही जीना चाहती.”

“पद्‍मिनी! खबरदार जो ऐसी बात की तुमने.”

“तो क्या करूँ मैं अगर ऐसा ना कहूँ तो. तुम मुझे नही समझते. मेरे दर्द और तकलीफ़ का अहसास तक नही तुम्हे. मेरे पास बस एक ही चीज़ के लिए आते हो जबकि बहुत सारी उम्मीदे लगाए रखती हूँ मैं तुमसे. मेरे लिए ये प्यार कुछ और है और तुम्हारे लिए कुछ और. मैं अकेली हूँ बिल्कुल अकेली जिसे कोई नही समझता. मैं धरती पर बोझ हूँ जिसे मर जाना चाहिए.”

“अगर ऐसा है तो मैं मर जाता हूँ पहले. कहाँ है मेरी बंदूक.” राज शर्मा उठ कर कमरे की आल्मिरा की तरफ बढ़ा. बंदूक वही रखी थी उसने घर में घुस कर.

ये सुनते ही पद्‍मिनी थर-थर काँपने लगी. इंसान अपनी मौत के बारे में तो बड़ी आसानी से सोच सकता है मगर जिसे वो बहुत प्यार करता है उसकी मौत के ख्याल से भी काँप उठता है. पद्‍मिनी फ़ौरन उठ खड़ी हुई. राज शर्मा अंधेरे में कहाँ है उसके कुछ नज़र नही आ रहा था. उसने भाग कर कमरे की लाइट जलाई. तब तक राज शर्मा पिस्टल निकाल चुका था आल्मिरा से और अपनी कनपटी पर रखने वाला था. पद्‍मिनी बिना वक्त गवाए राज शर्मा की तरफ भागी और बंदूक राज शर्मा के सर से हटा दी. गोली दीवार में जा कर धँस गयी.

पद्‍मिनी लिपट गयी राज शर्मा से और रोते हुए बोली, “तुम्हे नही खो सकती राज शर्मा…बहुत कुछ खो चुकी हूँ…. तुम्हे नही खो सकती. मेरा कोई नही है तुम्हारे सिवा.”

“तो सोचो क्या गुज़री होगी मेरे दिल पर जब तुम मरने की बात कर रही थी. दिल बैठ गया था मेरा. आज के बाद मरने की बात कही तुमने तो तुरंत गोली मार लूँगा खुद को. प्यार करता हूँ मैं तुमसे….कोई मज़ाक नही.”

दोनो एक दूसरे से लिपटे खड़े थे. दोनो की ही आँखे टपक रही थी.

“राज शर्मा मैं जानती हूँ तुम मुझे बहुत प्यार करते हो. पर ये प्यार मेरे शरीर पर ही आकर क्यों रुक गया है. मेरे शरीर में मेरा दिल भी है और मेरी आत्मा भी. मुझे तुम्हारी बहुत ज़रूरत है राज शर्मा…मैं बहुत अकेला फील करती हूँ. तुम मेरे पास आकर बस मेरे शरीर को प्यार करके हट जाते हो. कभी मेरे अंदर भी झाँक कर देखो राज शर्मा. इस सुंदर शरीर के अंदर एक अंधेरा भरा हुआ है जहा सिर्फ़ दर्द और तन्हाई के सिवा कुछ और नही है.”

“पद्‍मिनी तुम्हारी कसम खा कर कहता हूँ मेरा प्यार सिर्फ़ शारीरिक नही है. मैं तुम्हारा हर दर्द समझता हूँ.”

“मम्मी-पापा की मौत के बाद घुट-घुट कर जी रही हूँ मैं. बिल्कुल भी मन नही लगता मेरा कही भी. रोज उनकी याद किसी ना किसी बहाने आ ही जाती है. फिर मैं खुद को गुनहगार मानती हूँ. मेरे कारण उन्हे इतनी बुरी मौत मिली. मेरे गम बाँट लिया करो राज शर्मा कभी-कभी…सिर्फ़ तुमसे ही उम्मीद रखती हूँ. तुम भी निराश करोगे तो कहाँ जाउन्गि मैं.”

“तुम्हे मैने पहले भी बताया है कि 7 साल का था जब मेरे पेरेंट्स गुजर गये. खून के आँसू रोया था मैं. मौत का मतलब भी नही जानता था तब. जब मुझे बताया गया उनके बारे में तो यही लगा कि कही घूमने गये हैं. जानता हूँ तुम्हारे गम को और अच्छे से समझता भी हूँ. पर क्या हम इन गामो में ही डूबे रहेंगे. निकलो बाहर पद्‍मिनी.”

“मैने अपने पेरेंट्स को दुख के सिवा कुछ नही दिया. मेरी शादी बिखर जाने से बहुत दुखी थे वो. पर मेरा यकीन करो राज शर्मा मैने कोशिस की थी रिस्ता निभाने की. पर उनकी हर रोज एक नयी डिमांड होती थी. शरम आती थी मुझे रोज-रोज अपने पापा से कुछ माँगते हुए. इतना कुछ लेकर भी उनका पेट नही भरता था. मैं सब कुछ छोड़ कर हमेशा के लिए अपने घर आ गयी. क्या मैने ये ग़लत किया था राज शर्मा. क्या रिस्ते को हर हाल में निभाना चाहिए. पापा बहुत नाराज़ हुए थे मुझसे जब मैं सब कुछ छोड़ कर घर आई थी. काई दिन तक उन्होने बात तक नही की मुझसे. ये सब कुछ तुम्हे बताना चाहती हूँ और भी बहुत कुछ है दिल में जो तुमसे शेर करना चाहती हूँ. अगर तुम नही सुनोगे, मुझे नही समझोगे तो कहाँ जाउन्गि मैं. अपने मन मंदिर में तुम्हे बैठा चुकी हूँ और किस से उम्मीद करूँ.”

“सॉरी पद्‍मिनी…आइ आम रियली सॉरी फॉर दट. मैं सच में बहुत कमीना हूँ. ये बात साबित हो गयी आज.”

पद्‍मिनी ने राज शर्मा के मुँह पर हाथ रख दिया और बोली, “बस खुद को कुछ मत कहो. तुम्हारे खिलाफ एक शब्द भी नही सुन सकती मैं. हां मैं खुद तुम्हे बहुत कुछ बोल देती हूँ गुस्से में. फिर बाद में बहुत पछताती भी हूँ.”

“अच्छा ये बताओ…कपड़े उतार कर क्यों आई थी तुम मेरे पास?”

“मैने सोचा जब तुम्हे मेरा शरीर ही चाहिए तो समर्पित कर देती हूँ खुद को तुम्हारे आगे. सोच रही थी कि शायद उसके बाद हम प्यार में और आगे बढ़ पाएँगे. ये शरीर तुम्हारा ही तो है…तुम्हे देने में हर्ज़ ही क्या है.”

“पद्‍मिनी हम एक दूसरे को अभी समझ नही पाए हैं इसलिए ये बातें हो रही हैं. देखना आगे से कोई भी शिकायत का मोका नही दूँगा तुम्हे. तुम्हारे हर दुख में साथ हूँ मैं पद्‍मिनी. तुम अकेली नही हो. तुमने अपने पेरेंट्स को अब खोया है…मैने तो बचपन में ही खो दिया था. ये दर्द मेरे लिए इतना कामन और नॅचुरल है कि तुम्हारे दर्द को कभी समझ ही नही पाया. यही मेरी सबसे बड़ी भूल थी. मुझे माफ़ कर दो पद्‍मिनी. आयेज से ऐसा नही होगा. चलो बिस्तर पर लेट कर आराम से बातें करते हैं.”

“राज आइ लव यू सो मच. मुझे उम्मीद थी कि तुम मेरी बात समझोगे. तुम्हारी आँखो में मैने वो इंसान देखा है जो मेरी हर बात समझता है. तुमसे प्यार यू ही नही कर लिया मैने. एक अच्छे इंसान की छवि देखी थी तुम्हारी आँखो में.”

“मैं जितना भी कमीना सही पर बहुत प्यार करता हूँ तुम्हे. कुछ भी कर सकता हूँ तुम्हारे लिए. जितना खुश मैं अब हूँ इतना खुश जींदगी में कभी नही रहा. मम्मी पापा की मौत के बाद अब मैं जीना सीख रहा हूँ वरना तो खुद को यहाँ वहाँ घसीट रहा था. तुमने मेरी जींदगी को खूबसूरत बना दिया है पद्‍मिनी इतना खूबसूरत कि मैं पागल हो गया हूँ. इस पागल पन में तुम्हारे साथ बहुत कुछ कर बैठा…यकीन मानो हर बात में मेरा प्यार ही था.”

“राज शर्मा थोड़ा कन्सर्वेटिव हूँ मैं. कही मेरा ये बिहेवियर तुम्हे मुझसे दूर तो नही कर देगा.”

“पागल हो क्या. तुमसे तो किसी हाल में भी दूर नही जाने वाला. तुम तो मेरी जान हो” राज शर्मा ने पद्‍मिनी को ज़ोर से जाकड़ कर कहा.

“तो थोड़ा कंट्रोल रखोगे ना अब तुम, आटीस्ट जब तक हमारी शादी नही हो जाती.”

“यही पाप मुझसे नही होगा पद्‍मिनी बाकी तुम कुछ भी माँग लो. दीवाना बन गया हूँ तुम्हारा…चाहूं भी तो भी खुद को रोक नही सकता.”

“उफ्फ मतलब बात वही की वही रही…”

“बिल्कुल नही…अब से तुम्हारे दिल की धड़कनो को ध्यान से सुनूँगा. तुम्हारी म्रिग्नय्नि आँखो में ध्यान से देखूँगा. समझने की कोशिस करूँगा अपनी पद्‍मिनी को. चेहरे पर कोई भी शिकन नही आने दूँगा. आँखो में आँसू आएँगे तो मैं उन्हे अमृत समझ कर पी लूँगा. तुम्हारे दुख और तकलीफ़ खुद ब खुद मेरी आत्मा तक पहुँच जाएँगे. सब कुछ करूँगा पर मेरा हक़ नही छोड़ सकता. आख़िर आशिक़ हूँ तुम्हारा तुम्हारे हुस्न से खेलने का हक़ बनता है मेरा…”

“बहुत खूब मेरे दीवाने…तुम तो प्यार की नयी मिसाल कायम करोगे शायद.”

“बिल्कुल करूँगा. तुम साथ दोगि तो मिसाल कायम हो ही जाएगी.” राज शर्मा ने हंसते हुए कहा.

“फिर तो जंग रहेगी तुम्हारे मेरे बीच.” पद्‍मिनी ने भी हंसते हुए कहा.

“जंग तो शुरू से चल रही है हमारे बीच इसमे नया क्या है. लेकिन अब और मज़ा आएगा.”

“चलो छोड़ो मुझे मैं अपने दुश्मन के गले लग कर क्यों रहूं.”

“क्योंकि प्यार करती हैं आप मुझसे कोई मज़ाक नही…जंग में कयि बार दुश्मन भी गले मिलते हैं.”

“तुम सच में पागल हो राज शर्मा.”

“हां तुम्हारे प्यार में पागल हहेहहे…चलो अब सोते हैं.” राज शर्मा पद्‍मिनी को लेकर बिस्तर की तरफ चल दिया.

“मैं भला अपने दुश्मन के साथ क्यों लेतू.”

“अभी जंग में विराम चल रहा है…साथ लेट सकती हो कोई दिक्कत नही है.” राज शर्मा ने कहा.

पद्‍मिनी चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान लिए राज शर्मा के साथ बिस्तर पर आ गयी. राज शर्मा ने लाइट बंद कर दी और पद्‍मिनी को बाहों में भर लिया.

“कब करोगी मुझसे शादी”

“मैं तो कल कर लूँगी पर डाइवोर्स नही हुआ अभी. वो होते ही कर लेंगे हम शादी.”

“वैसे तुमने बहुत बड़ा जोखिम लिया था कपड़े उतार कर मेरे पास आने का.”

“बहुत भावुक हो गयी थी राज .. सॉरी …दुबारा ऐसा नही होगा. मैं भी कम पागल नही हूँ तुम्हारे लिए. गुस्सा थी तुमसे बहुत ज़्यादा फिर भी तुम्हारे पास आ गयी थी वो भी कपड़े उतार कर.”

“मैं भड़क जाता ना तो पछताती तुम बहुत. आज रात ही काम्सुत्र के सारे आसान आज़मा लेता तुम्हारे उपर फिर तुम्हे पता चलता कि मेरे पास कपड़े उतार कर आने का क्या मतलब होता है.”

“डराओ मत मुझे तुम वरना शादी नही करूँगी तुमसे.”

“मत करना शादी… ये प्यार काफ़ी है मेरे लिए तुम पर हक़ जताने के लिए. तुम्हे मन से पत्नी मान चुका हूँ.”

“अब क्या कहूँ तुम्हे…आइ लव यू. लेकिन अपनी जंग जारी रहेगी…शादी से पहले कुछ नही हहेहहे.”

“एक पप्पी तो दे दो फिलहाल उसमें तो कोई जंग नही है हमारे बीच. कोल्गेट तो कर ही रखा होगा तुमने.”

“हां कोल्गेट तो कर रखा है.” बस इतना ही कहा पद्‍मिनी ने.

राज शर्मा आगे बढ़ा और अपने होंतों को पद्‍मिनी के होंटो पर टिका दिया. पद्‍मिनी ने राज शर्मा के होंटो को अपने होंटो में जकड़ने में ज़रा भी देरी नही की. ये एक ऐसी किस थी जिसमे प्यार के साथ साथ एक अंडरस्टॅंडिंग भी शामिल थी. दोनो एक प्यारी सी जंग के लिए तैयार थे.

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अगली सुबह सिकेन्दर रोहित की जगह जाय्न करने से पहले सीधा रोहित के घर पहुँच गया. रोहित ने गरम्जोशी से उसका स्वागत किया.

“ सरकार आपसे इस केस में मार्गदर्शन की आशा रखता हूँ. उम्मीद है कि आप मुझे इस केस के हर पहलू से अवगत करवाएँगे.” शिकेन्दर ने कहा.

“बिल्कुल मैं आपकी हर संभव मदद करूँगा. पहले आप ये बतायें कि इतनी दिलचस्पी क्यों थी आपको यहा आने की और इस केस को लेने की.”

“वो सब छोड़िए सरकार. हर कोई किसी ना किसी काम में दिलचस्पी रखता है. हमें बस साइको को पकड़ने पर ध्यान रखना चाहिए.”

रोहित ने साइको के केस की सभी डीटेल्स सिकेन्दर को बता दी.

“सरकार इसका मतलब बात कर्नल के घर पर आकर अटक गयी है. आपको क्या लगता है ये सीसी कौन हो सकता है.” सिकेन्दर ने पूछा.

“कोई भी हो सकता है. आप भी हो सकते हैं.” रोहित ने मज़ाक में कहा.

“सरकार मुझे तो पैंटिंग के नाम से ही डर लगता है. स्कूल में एक आपल तक ठीक से नही बना पाता था. आपल बनाते बनाते भींडी की तस्वीर बन जाती थी.” सिकेन्दर ने कहा.

“ऐसा क्यों सरकार भींडी बहुत पसंद थी क्या आपको?” रोहित ने चुस्की ली.

“छोड़िए सरकार अब क्या रखा है इन बातों में. चलता हूँ मैं और जाकर जाय्न करता हूँ. जब भी कोई शंका होगी आपसे कॉंटॅक्ट करूँगा.”

“बिल्कुल बेझीजक मुझे कॉल कर लेना.” रोहित ने कहा.

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क्रमशः........................

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BAAT EK RAAT KI--104

gataank se aage.................

“yaar ye to gol chakkar mein ghum rahe hain hum. phir baat is kk par aa kar atak gayi. Par itna to clear hai ab ki colonel ke ghar mein rahne wala hi psycho hai. usi ka naam kk hai. kk is psycho. Very funny. Na psycho mil raha hai na kk. Dono ek hi hain to ye to hona hi tha. dekhta hun kab tak bachoge mr kk urf psycho. kuch na kuch to tumhaare baare mein pata chal hi raha hai.”

Padmini buri tarah subak rahi thi chataayi par padi hui. Dil kuch is kadar bhaari ho raha tha ki Jor-jor se rona chaahti thi vo par Raj sharma ki phatkaar ne uski awaaj daba di thi. vo ander hi ander ghut rahi thi. aankho se aansu lagaatar bah rahe the. Bahut koshis kar rahi thi ki munh se koyi awaaj na ho par rah-rah kar subak hi padti thi.

Raj sharma bistar par baitha chupchaap sab sun raha tha.

“roti raho mujhe kya hai. tum khud iske liye jimmedaar ho.” Raj sharma ne man hi man socha aur late gaya bistar par chupchaap.

Pyar mein gussa jyada der tak nahi tik sakta. Pyar vo aag hai jisme ki jeevan ki har buraayi jal kar khaak ho jaati hai. gussa to bahut chhoti cheez hai. jab aap bahut pyar karte hain kisi ko to uske prati man mein gussa jyada der tak nahi tik paata. Sambhav hi nahi hai ye baat.

Raj sharma ka gussa shaant hua to use padmini ki shiskiyon mein maujud us dard ka ahsaas hua jo usne use diya tha.“hey bhagvaan maine ye kya kiya? Kya kuch nahi kah diya maine padmini ko.” Raj sharma ne socha aur turant uth kar padmini ke paas aa kar baith gaya.

Padmini abhi bhi subak rahi thi. Raj sharma ne padmini ke sar par haath rakha aur bola, “bas padmini chup ho jaao.”

Padmini ki dabi awaaj jaise azaad ho gayi aur vo phoot-phoot kar rone lagi. Raj sharma ghabra gaya us yu rote dekh.

“padmini please…aise rota hai kya koyi….please chup ho jaao mera dil baitha ja raha hai tumhe yu rote dekh kar.” Raj sharma ne bhaavuk awaaj mein kaha.

“kyon aaye ho mere paas tum. na main pyar ke laayak hun na shaadi ke laayak hun.”

“please aisa mat kaho tum to bhagvaan ki tarah puja ke laayak ho. Maine vo sab gusse mein bol diya tha. please mujhe maaf kar do. ”

“gusse mein dil ki baat hi to kahi na tumne. Aur sach hi kaha. Main bilkul laayak nahi hun tumhaare pyar ke. Achcha ho ki psycho meri art bana de taaki dharti se kuch bojh kam ho. Main aur nahi jeena chaahti.”

“padmini! Khabardaar jo aisi baat ki tumne.”

“to kya karun main agar aisa na kahun to. Tum mujhe nahi samajhte. mere dard aur takleef ka ahsaas tak nahi tumhe. Mere paas bas ek hi cheez ke liye aate ho jabki bahut saari ummeede lagaaye rakhti hun main tumse. Mere liye ye pyar kuch aur hai aur tumhaare liye kuch aur. Main akeli hun bilkul akeli jise koyi nahi samajhta. Main dharti par bojh hun jise mar jaana chaahiye.”

“agar aisa hai to main mar jaata hun pahle. Kaha hai meri bandook.” Raj sharma uth kar kamre ki almira ki taraf badha. Bandook vahi rakhi thi usne ghar mein ghus kar.

Ye sunte hi padmini thar-thar kaanpne lagi. Insaan apni maut ke baare mein to badi aasaani se soch sakta hai magar jise vo bahut pyar karta hai uski maut ke khyaal se bhi kaanp uthta hai. padmini fuaran uth khadi hui. Raj sharma andhere mein kaha hai uske kuch najar nahi aa raha tha. usne bhaag kar kamre ki light jalaayi. Tab tak Raj sharma pistol nikaal chuka tha almira se aur apni kanpati par rakhne wala tha. padmini bina vakt gavaaye Raj sharma ki taraf bhaagi aur bandook Raj sharma ke sar se hata di. goli deewar mein ja kar dhans gayi.

padmini lipat gayi Raj sharma se aur rote hue boli, “tumhe nahi kho sakti Raj sharma…bahut kuch kho chuki hun…. tumhe nahi kho sakti. Mera koyi nahi hai tumhaare shiva.”

“to socho kya gujri hogi mere dil par jab tum marne ki baat kar rahi thi. dil baith gaya tha mera. Aaj ke baad marne ki baat kahi tumne to turant goli maar lunga khud ko. pyar karta hun main tumse….koyi majaak nahi.”

Dono ek dusre se lipte khade the. Dono ki hi aankhe tapak rahi thi.

“Raj sharma main jaanti hun tum mujhe bahut pyar karte ho. Par ye pyar mere sharir par hi aakar kyon ruk gaya hai. mere sharir mein mera dil bhi hai aur meri aatma bhi. Mujhe tumhaari bahut jaroorat hai Raj sharma…main bahut akela feel karti hun. Tum mere paas aakar bas mere sharir ko pyar karke hat jaate ho. Kabhi mere ander bhi jhaank kar dekho Raj sharma. Is sundar sharir ke ander ek andhera bhara hua hai jaha sirf dard aur tanhaayi ke shiva kuch aur nahi hai.”

“padmini tumhaari kasam kha kar kahta hun mera pyar sirf shaaririk nahi hai. main tumhaara har dard samajhta hun.”

“mammi-papa ki maut ke baad ghut-ghut kar jee rahi hun main. bilkul bhi man nahi lagta mera kahi bhi. Roj unki yaad kisi na kisi bahaane aa hi jaati hai. phir main khud ko gunahgaar maanti hun. Mere kaaran unhe itni buri maut mili. Mere gam baant liya karo Raj sharma kabhi-kabhi…sirf tumse hi ummeed rakhti hun. Tum bhi niraash karoge to kaha jaaungi main.”

“tumhe maine pahle bhi bataaya hai ki 7 saal ka tha jab mere parents gujar gaye. khun ke aansu roya tha main. maut ka matlab bhi nahi jaanta tha tab. Jab mujhe bataaya gaya unke baare mein to yahi laga ki kahi ghumne gaye hain. Jaanta hun tumhaare gam ko aur achche se samajhta bhi hun. Par kya hum in gamo mein hi dube rahenge. Niklo baahar padmini.”

“maine apne parents ko dukh ke shiva kuch nahi diya. Meri shaadi bikhar jaane se bahut dukhi the vo. Par mera yakin karo Raj sharma maine koshis ki thi rista nibhaane ki. Par unki har roj ek nayi deemand hoti thi. sharam aati thi mujhe roj-roj apne papa se kuch maangte hue. Itna kuch lekar bhi unka pet nahi bharta tha. main sab kuch chod kar hamesha ke liye apne ghar aa gayi. kya maine ye galat kiya tha Raj sharma. Kya riste ko har haal mein nibhana chaahiye. Papa bahut naraaz hue the mujhse jab main sab kuch chod kar ghar aayi thi. kayi din tak unhone baat tak nahi ki mujhse. Ye sab kuch tumhe bataana chaahti hun aur bhi bahut kuch hai dil mein jo tumse share karna chaahti hun. Agar tum nahi sunoge, mujhe nahi samjhoge to kaha jaaungi main. apne man mandir mein tumhe baitha chuki hun aur kis se ummeed karun.”

“sorry padmini…I am really sorry for that. Main sach mein bahut kamina hun. Ye baat saabit ho gayi aaj.”

Padmini ne Raj sharma ke munh par haath rakh diya aur boli, “bas khud ko kuch mat kaho. Tumhaare khilaaf ek shabd bhi nahi sun sakti main. haan main khud tumhe bahut kuch bol deti hun gusse mein. Phir baad mein bahut pachtaati bhi hun.”

“achcha ye bataao…kapde utaar kar kyon aayi thi tum mere paas?”

“maine socha jab tumhe mera sharir hi chaahiye to samarpit kar deti hun khud ko tumhaare aage. Soch rahi thi ki shaayad uske baad hum pyar mein aur aage badh paayenge. Ye sharir tumhaara hi to hai…tumhe dene mein harz hi kya hai.”

“padmini hum ek dusre ko abhi samajh nahi paaye hain isliye ye baatein ho rahi hain. Dekhna aage se koyi bhi shikaayat ka moka nahi dunga tumhe. Tumhaare har dukh mein saath hun main padmini. Tum akeli nahi ho. Tumne apne parents ko ab khoya hai…maine to bachpan mein hi kho diya tha. ye dard mere liye itna common aur natural hai ki tumhaare dard ko kabhi samajh hi nahi paaya. Yahi meri sabse badi bhool thi. mujhe maaf kar do padmini. Aage se aisa nahi hoga. Chalo bistar par late kar araam se baatein karte hain.”

“Raj sharma I love you so much. Mujhe ummeed thi ki tum meri baat samjhoge. Tumhaari aankho mein maine vo insaan dekha hai jo meri har baat samajhta hai. tumse pyar yu hi nahi kar liya maine. Ek achche insaan ki chavi dekhi thi tumhaari aankho mein.”

“main jitna bhi kamina sahi par bahut pyar karta hun tumhe. Kuch bhi kar sakta hun tumhaare liye. Jitna khuss main ab hun itna khuss jeendagi mein kabhi nahi raha. mammi papa ki maut ke baad ab main jeena seekh raha hun varna to khud ko yaha vaha ghasit raha tha. tumne meri jeendagi ko khubsurat bana diya hai padmini itna khubsurat ki main paagal ho gaya hun. is paagal pan mein tumhaare saath bahut kuch kar baitha…yakin maano har baat mein mera pyar hi tha.”

“Raj sharma thoda conservative hun main. Kahi mera ye behaviour tumhe mujhse dur to nahi kar dega.”

“paagal ho kya. Tumse to kisi haal mein bhi dur nahi jaane wala. Tum to meri jaan ho” Raj sharma ne padmini ko jor se jakad kar kaha.

“to thoda control rakhoge na ab tum, atleast jab tak hamaari shaadi nahi ho jaati.”

“yahi paap mujhse nahi hoga padmini baaki tum kuch bhi maang lo. Deewana ban gaya hun tumhaara…chaahun bhi to bhi khud ko rok nahi sakta.”

“uff matlab baat vahi ki vahi rahi…”

“bilkul nahi…ab se tumhaare dil ki dhadkano ko dhyaan se sununga. Tumhaari mrignayni aankho mein dhyaan se dekhunga. samajhne ki koshis karunga apni padmini ko. Chehre par koyi bhi shikan nahi aane dunga. Aankho mein aansu aayenge to main unhe amrit samajh kar pee lunga. Tumhaare dukh aur takleef khud b khud meri aatma tak pahunch jaayenge. Sab kuch karunga par mera haq nahi chod sakta. Aakhir aashiq hun tumhaara tumhaare husn se khelne ka haq banta hai mera…”

“bahut khub mere deewane…tum to pyar ki nayi misaal kaayam karoge shaayad.”

“bilkul karunga. Tum saath dogi to misaal kaayam ho hi jaayegi.” Raj sharma ne hanste hue kaha.

“phir to jung rahegi tumhaare mere beech.” Padmini ne bhi hanste hue kaha.

“jung to shuru se chal rahi hai hamaare beech isme naya kya hai. lekin ab aur maja aayega.”

“chalo chodo mujhe main apne dusman ke gale lag kar kyon rahun.”

“kyonki pyar karti hain aap mujhse koyi majaak nahi…jung mein kayi baar dusman bhi gale milte hain.”

“tum sach mein paagal ho Raj sharma.”

“haan tumhaare pyar mein paagal hehehehe…chalo ab sote hain.” Raj sharma padmini ko lekar bistar ki taraf chal diya.

“main bhala apne dusman ke saath kyon letun.”

“abhi jung mein viraam chal raha hai…saath late sakti ho koyi dikkat nahi hai.” Raj sharma ne kaha.

Padmini chehre par pyari si muskaan liye Raj sharma ke saath bistar par aa gayi. Raj sharma ne light band kar di aur padmini ko baahon mein bhar liya.

“kab karogi mujhse shaadi”

“main to kal kar lungi par divorce nahi hua abhi. Vo hote hi kar lenge hum shaadi.”

“vaise tumne bahut bada jokhim liya tha kapde utaar kar mere paas aane ka.”

“bahut bhaavuk ho gayi thi Raj sharma.. sorry …dubara aisa nahi hoga. Main bhi kam paagal nahi hun tumhaare liye. Gussa thi tumse bahut jyada phir bhi tumhaare paas aa gayi thi vo bhi kapde utaar kar.”

“main bhadak jaata na to pachtaati tum bahut. Aaj raat hi kaamsutra ke saare aasan aazma leta tumhaare upar phir tumhe pata chalta ki mere paas kapde utaar kar aane ka kya matlab hota hai.”

“daraao mat mujhe tum varna shaadi nahi karungi tumse.”

“mat karna shaadi… ye pyar kaafi hai mere liye tum par haq jataane ke liye. Tumhe man se patni maan chuka hun.”

“ab kya kahun tumhe…I love you. Lekin apni jung jaari rahegi…shaadi se pahle kuch nahi hehehehe.”

“ek pappi to de do philhaal usmein to koyi jung nahi hai hamaare beech. Colgate to kar hi rakha hoga tumne.”

“haan colgate to kar rakha hai.” bas itna hi kaha padmini ne.

Raj sharma aage badha aur apne honton ko padmini ke honto par tika diya. Padmini ne Raj sharma ke honto ko apne honto mein jakadne mein jara bhi deri nahi ki. Ye ek aisi kiss thi jisme pyar ke saath saath ek understanding bhi shaamil thi. dono ek pyari si jung ke liye taiyaar the.

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Agli subah sikendar rohit ki jagah join karne se pahle seedha rohit ke ghar pahunch gaya. rohit ne garamjoshi se uska sawaagat kiya.

“ sarkar aapse is case mein maargdarsan ki aasha rakhta hun. ummeed hai ki aap mujhe is case ke har pahlu se avgat karvaayenge.” Sikendar ne kaha.

“bilkul main aapki har sambhav madad karunga. Pahle aap ye bataayein ki itni dilchA S Pi kyon thi aapko yaha aane ki aur is case ko lene ki.”

“vo sab chodiye sarkar. Har koyi kisi na kisi kaam mein dilchA S Pi rakhta hai. hamein bas psycho ko pakadne par dhyaan rakhna chaahiye.”

Rohit ne psycho ke case ki sabhi details sikendar ko bata di.

“sarkar iska matlab baat colonel ke ghar par aakar atak gayi hai. aapko kya lagta hai ye kk kaun ho sakta hai.” sikendar ne pucha.

“koyi bhi ho sakta hai. aap bhi ho sakte hain.” Rohit ne majaak mein kaha.

“sarkar mujhe to painting ke naam se hi dar lagta hai. school mein ek apple tak theek se nahi bana pata tha. apple banaate banaate bheendi ki tasveer ban jaati thi.” sikendar ne kaha.

“aisa kyon sarkar bheendi bahut pasand thi kya aapko?” rohit ne chuski li.

“chodiye sarkar ab kya rakha hai in baaton mein. Chalta hun main aur jaakar join karta hun. jab bhi koyi shanka hogi aapse contact karunga.”

“bilkul bejhijak mujhe call kar lena.” Rohit ne kaha.

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rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 13 Dec 2014 00:56

बात एक रात की--105

गतान्क से आगे.................

सुबह नींद में पद्‍मिनी मीठी-मीठी आहें भर रही थी. उसे होश ही नही था कि जिसे वो सपना समझ रही है वो हक़ीक़त है. पद्‍मिनी पीठ के बल पड़ी थी और राज शर्मा उसकी तरफ करवट लिए उस से चिपक कर पड़ा था. उसका हाथ पद्‍मिनी के उभार पर था और उसे हल्का हल्का मसल रहा था. इसी कारण पद्‍मिनी आहें भर रही थी. राज शर्मा पद्‍मिनी की आहें सुन कर मध्यम-मध्यम मुस्कुरा रहा था. उभार को मसल्ते हुए उसने पद्‍मिनी के कान में कहा, “उठ जाओ पद्‍मिनी जंग शुरू हो चुकी है और लगता है तुम हार रही हो.”

पद्‍मिनी की तुरंत आँख खुल गयी. उसने राज शर्मा के हाथ को अपने उभार से हटाया और उठ कर बैठ गयी. पद्‍मिनी दिल पर हाथ रख कर बोली, “तो ये सपना नही था?”

“क्या सपना नही था पद्‍मिनी हहेहहे…”

“और क्या कुछ किया तुमने मेरे साथ नींद में” पद्‍मिनी ने पूछा.

“कुछ और नही कर पाया बस अभी-अभी आँख खुली थी…आपके सुंदर उभारो से जंग लड़ रहा था.”

पद्‍मिनी का चेहरा लाल हो गया शरम से. अचानक उसका ध्यान दीवार घड़ी पर गया.

“अरे 9 बज गये…हम इतनी देर तक सोते रहे.” पद्‍मिनी ने कहा.

“बहुत लेट सोए थे हम…ये तो होना ही था. चलिए आप फ्रेश हो जाओ मैं आपके लिए नाश्ता बनाता हूँ.”

“तुम नाश्ता बनाओगे…मज़ाक मत करो?”

“जी हां मैं बनाउन्गा और आपसे अच्छा बनाउन्गा”

“नही राज मेरे होते हुए ये सब करने की कोई ज़रूरत नही है तुम्हे.मैं खुद बनाउन्गि…अभी फ्रेश हो कर आती हूँ.”

पद्‍मिनी उठ कर वॉशरूम की तरफ चल दी.

“हे रूको…” राज शर्मा ने पीछे से आवाज़ दी.

“हां बोलो.”

“सॉरी फॉर एवेरितिंग.”

पद्‍मिनी राज शर्मा की तरफ मुस्कुरा दी और वॉशरूम में घुस गयी.

………………………………………………………

एक महीने से सहर में शांति है. साइको ने कोई नयी वारदात नही की है. रोहित और मोहित ने इस दौरान कर्नल को तलासने की खूब कोशिस की. वो दोनो देल्ही और मुंबई भी गये कर्नल के रालटिवेस से मिलने. मगर उन्हे कर्नल के बारे में कुछ पता नही चला. कर्नल के सभी रिलेटिव्स से सीसी के बारे में पूछा गया मगर वो सभी किसी सीसी को नही जानते थे.

एक दिन अचानक मोनिका ने राज शर्मा को फोन करके बताया कि संजय घर लौट आया है. राज शर्मा ने ये बात तुरंत रोहित को बताई. रोहित और मोहित दोनो संजय से मिलने उसके घर गये. संजय ने बताया कि वो सिमरन की कार लेकर देल्ही चला गया था और कुछ दिन वही रहा.

“आप अपनी बीवी को यहा अकेला छोड़ कर देल्ही चले गये…वेरी स्ट्रेंज. एक-दो दिन तो चलता है मगर इतने दिन कैसे आप अपनी बीवी को अकेला छोड़ सकते हैं.” मोहित ने कहा.

“उस से आपको कोई मतलब नही होना चाहिए…ये मेरा पर्सनल मामला है. ” संजय ने कहा.

रोहित और मोहित बिना किसी ठोस जानकारी के घर से बाहर आ गये.

“मेरा सस्पेन्षन नही हुआ होता तो साले के मुँह में बंदूक घुसा कर पूछता कि बता कैसे हुआ ये तेरा पर्सनल मामला.” रोहित ने कहा.

“कोई बात नही अब ये वापिस आ गया है तो इस पर हम कड़ी नज़र रखेंगे.” मोहित ने कहा.

“यार मोहित ये सीसी का फुल फॉर्म क्या हो सकता है.”

“कुत्ते कमिने हो सकता है…काला कव्वा हो सकता है…होने को कुछ भी हो सकता है.”

“यही तो दिक्कत है. साला क्लू मिला भी तो ऐसा कि कुछ समझ में नही आता की क्या करें. ये सीसी सुरिंदर को भी जानता था और कर्नल को भी. तुम्हे क्या लगता है क्या सुरिंदर और कर्नल भी एक दूसरे को जानते थे.” रोहित ने कहा.

“ऐसा कुछ मिला नही जिस से ये कह सकें कि सुरिंदर और कर्नल एक दूसरे को जानते थे.”

“साइको कोई शुराग नही छोड़ता अपने बारे में. उसने सुरिंदर को मार दिया था. मोस्ट प्रॉबब्ली उसने कर्नल को भी मार दिया है वरना वो कही तो मिलना चाहिए था. वो ऐसे कैसे गायब हो सकता है.”

“मुझे भी यही लगता है. साइको ने कर्नल से उसका घर हथिया कर उसे जान से मार दिया होगा. और शायद उसकी लाश को कही गाढ दिया होगा. कोई ऐसे ही बिना मतलब दुनिया से गायब नही हो जाता, कुछ तो कारण ज़रूर रहता है.”

“सही कह रहे हो. अच्छा मोहित मुझे तुरंत घर जाना है. तुकझे बताया था ना आज शादी में जाना है.”

“हां बताया था पर तुझे वाहा इन्वाइट नही किया गया है.”

“यार रीमा के लिए जाना ही पड़ेगा मुझे. प्यार बेसक नही हुआ उस से पर हम अच्छे दोस्त तो बन ही गये थे. सूभकामना देने तो जाना ही चाहिए.”

“बेसक जाओ रोहित. पर चौहान से बच कर रहना.”

“शादी के माहॉल में वो ज़्यादा पंगा नही करेगा और वैसे भी मैं बस रीमा को एक बार देख कर और उसे विस करके वापिस आ जाउन्गा.”

“तुम्हारी मेडम भी होंगी वाहा ज़रा ध्यान रखना कही कोई ग़लत फ़हमी हो जाए.”

“मेडम को पता है सब कुछ.”

“हां पर खुद अपनी आँखो से देखने से दिल पर चोट लगती है. वैसे शादी डेले क्यों हो गयी रीमा की.” मोहित ने कहा.

“लड़के वालो ने थोड़ा वक्त माँगा था शायद. आइ आम नोट शुवर.” रोहित ने कहा.

“ह्म्म ठीक है तुम निकलो मैं भी निकलता हूँ. पूजा को कॉलेज से पिक करना है. हमारा आज बाहर डिन्नर का प्रोग्राम है.” मोहित ने कहा.

मोहित टाइम से पूजा के कॉलेज पहुँच गया. कॉलेज से लड़कियों की भीड़ बाहर आ रही थी. मगर मोहित को पूजा कही नज़र नही आ रही थी.

“कम ऑन जान कहा रह गयी तुम…जल्दी आओ…हमें खूब एंजाय करना है आज.”

मगर कॉलेज के गेट से सभी बाहर आ गये पर पूजा नही आई. वॉचमेन ने गेट बंद कर दिया. मोहित ने वॉचमेन से पूछा, “कोई लड़की अंदर तो नही रह गयी.”

“नही मैं चेक करके आया हूँ. सब जा चुके हैं.”

“ऐसा कैसे हो गया मैं तो बाहर ही खड़ा था.”

मोहित ने नगमा को फोन मिलाया.

“हेलो नगमा…पूजा घर पहुँच गयी क्या?”

“नही वो तो नही आई अब तक…क्यों क्या हुआ सब ठीक तो है.”

“मैं बाद में बात करता हूँ…अभी थोड़ा बिज़ी हूँ.”

मोहित को टेन्षन होने लगी कि पूजा कहा गयी.

“कहाँ गयी होगी मेरी जान. ऐसे तो कभी कही नही जाती. उसे पता भी था कि मैं उसे लेने आउन्गा.”

मोहित सोच में पड़ गया.

तभी अचानक उसे ख्याल आया कि कही पूजा को साइको ने तो किडनॅप नही कर लिया. ये ख्याल आते ही उसकी रूह काँप उठी. पूजा से बहुत प्यार करता था मोहित उसके लिए कोई भी बुरी बात नही सोच सकता था.

मोहित ने रोहित को फोन मिलाया और उसे सारी बात बता दी.

“अगर पूजा को साइको ने किडनॅप किया है तो वो ज़रूर तुझसे कॉंटॅक्ट करेगा. तू ऐसा कर अपने घर जा. हो सकता है वहाँ उसने कोई मेसेज छोड़ा हो तेरे लिए.”

“यार मेरे हाथ पाँव काम नही कर रहे. पूजा को कुछ हो गया तो मैं कही का नही रहूँगा.”

“समझ सकता हूँ मोहित. तुम ऐसा करो अपने घर पहुँचो. मैं भी वही पहुँचता हूँ.” रोहित ने कहा.

मोहित तुरंत बाइक स्टार्ट करके अपने घर की तरफ चल दिया. घर पहुँच कर जैसे ही उसने अपना दरवाजा खोला उसे दरवाजे के पास एक काग़ज़ पड़ा मिला उस पर कुछ लिखा था. मोहित ने उसे उठाया और पढ़ने लगा.

“मिस्टर मोहित, कैसे हो तुम. तुमने मुझे बहुत परेशान किया है. मगर अब मेरी बारी है. कब से तुम्हारे लिए एक प्लान ढूंड रहा था. समझ में नही आ रहा था कि कैसी मौत दी जाए तुम्हे. तुम पर नज़र रखी तो पता चला कि तुम एक लड़की पर फिदा हो. मेरा काम आसान हो गया.पूजा मेरे कब्ज़े में है. बिल्कुल नंगी पड़ी है मेरे सामने. वैसे मैं अपने विक्टिम से सेक्स नही करता पर तुम्हारी पूजा ने तो खड़ा कर दिया मेरा लंड. बला की खूबसूरत है साली. मन कर रहा है इसकी लेने का. ले लूँ क्या हाहहहाहा. मेरे दूसरे लेटर का इंतेज़ार करना. और हां अपने दोस्त रोहित से बोलना कि रीमा की शादी में ज़रूर जाए. वाहा उसके लिए कुछ ख़ास करने वाला हूँ मैं हिहिहीही.”

मोहित की आँखे गुस्से से लाल हो गयी. “तुझे वो मौत दूँगा मैं कि तेरी रूह काँप उठेगी साले कुत्ते कमिने साइको.” मोहित चिल्लाया.

क्रमशः..........................

BAAT EK RAAT KI--105

gataank se aage.................

subah neend mein padmini meethi-meethi aahein bhar rahi thi. use hosh hi nahi tha ki jise vo sapna samajh rahi hai vo haqeeqat hai. padmini peeth ke bal padi thi aur Raj sharma uski taraf karvat liye us se chipak kar pada tha. uska haath padmini ke ubhaar par tha aur use halka halka masal raha tha. isi kaaran padmini aahein bhar rahi thi. Raj sharma padmini ki aahein sun kar madham-madham muskura raha tha. ubhaar ko masalte hue usne padmini ke kaan mein kaha, “uth jaao padmini jung shuru ho chuki hai aur lagta hai tum haar rahi ho.”

Padmini ki turant aabkh khul gayi. Usne Raj sharma ke haath ko apne ubhaar se hataaya aur uth kar baith gayi. Padmini dil par haath rakh kar boli, “to ye sapna nahi tha?”

“kya sapna nahi tha padmini hehehehe…”

“aur kya kuch kiya tumne mere saath neend mein” padmini ne pucha.

“kuch aur nahi kar paaya bas abhi-abhi aankh khuli thi…aapke sundar ubhaaro se jung lad raha tha.”

Padmini ka chehra laal ho gaya sharam se. achaanak uska dhyaan deewar ghadi par gaya.

“arey 9 baj gaye…hum itni der tak sote rahe.” Padmini ne kaha.

“bahut late soye the hum…ye to hona hi tha. chaliye aap fresh ho jaao main aapke liye naasta banaata hun.”

“tum naasta banaaoge…majaak mat karo?”

“ji haan main banaaunga aur aapse achcha banaaunga”

“nahi Raj sharma mere hote hue ye sab karne ki koyi jaroorat nahi hai tumhe.main khud banaaungi…abhi fresh ho kar aati hun.”

Padmini uth kar washroom ki taraf chal di.

“hey ruko…” Raj sharma ne peeche se awaaj di.

“haan bolo.”

“sorry for everything.”

Padmini Raj sharma ki taraf muskura di aur washroom mein ghus gayi.

………………………………………………………

ek mahine se sahar mein shaanti hai. psycho ne koyi nayi vaardaat nahi ki hai. rohit aur mohit ne is dauran colonel ko talaasne ki khub koshis ki. Vo dono delhi aur mumbai bhi gaye colonel ke ralatives se milne. Magar unhe colonel ke baare mein kuch pata nahi chala. Colonel ke sabhi relatives se kk ke baare mein pucha gaya magar vo sabhi kisi kk ko nahi jaante the.

Ek din achaanak monika ne Raj sharma ko phone karke bataaya ki sanjay ghar laut aaya hai. Raj sharma ne ye baat turant rohit ko bataayi. Rohit aur mohit dono sanjay se milne uske ghar gaye. Sanjay ne bataaya ki vo simran ki car lekar delhi chala gaya tha aur kuch din vahi raha.

“aap apni biwi ko yaha akela chod kar delhi chale gaye…very strange. Ek-do din to chalta hai magar itne din kaise aap apni biwi ko akela chod sakte hain.” Mohit ne kaha.

“us se aapko koyi matlab nahi hona chaahiye…ye mera personal maamla hai. ” sanjay ne kaha.

Rohit aur mohit bina kisi thos jaankari ke ghar se baahar aa gaye.

“mera suspension nahi hua hota to saale ke munh mein bandook ghusa kar puchta ki bata kaise hua ye tera personal maamla.” Rohit ne kaha.

“koyi baat nahi ab ye vaapis aa gaya hai to is par hum kadi nazar rakhenge.” Mohit ne kaha.

“yaar mohit ye kk ka full form kya ho sakta hai.”

“kutte kamine ho sakta hai…kaala kavva ho sakta hai…hone ko kuch bhi ho sakta hai.”

“yahi to dikkat hai. sala clue mila bhi to aisa ki kuch samajh mein nahi aata ki kya karein. Ye kk surinder ko bhi jaanta tha aur colonel ko bhi. Tumhe kya lagta hai kya surinder aur colonel bhi ek dusre ko jaante the.” Rohit ne kaha.

“aisa kuch mila nahi jis se ye kah sakein ki surinder aur colonel ek dusre ko jaante the.”

“psycho koyi shuraag nahi chodta apne baare mein. Usne surinder ko maar diya tha. most probably usne colonel ko bhi maar diya hai varna vo kahi to milna chaahiye tha. vo aise kaise gaayab ho sakta hai.”

“mujhe bhi yahi lagta hai. psycho ne colonel se uska ghar hathiya kar use jaan se maar diya hoga. Aur shaayad uski laash ko kahi gaad diya hoga. Koyi aise hi bina matlab duniya se gaayab nahi ho jaata, kuch to kaaran jaroor rahta hai.”

“sahi kah rahe ho. Achcha mohit mujhe turant ghar jaana hai. tukjhe bataaya tha na aaj shaadi mein jaana hai.”

“haan bataaya tha par tujhe vaha invite nahi kiya gaya hai.”

“yaar reema ke liye jaana hi padega mujhe. Pyar besak nahi hua us se par hum achche dost to ban hi gaye the. Subhkaamna dene to jaana hi chaahiye.”

“besak jaao rohit. Par chauhan se bach kar rahna.”

“shaadi ke maahol mein vo jyada panga nahi karega aur vaise bhi main bas reema ko ek baar dekh kar aur use wis karke vaapis aa jaaunga.”

“tumhaari madam bhi hongi vaha jara dhyaan rakhna kahi koyi galat fahmi ho jaaye.”

“madam ko pata hai sab kuch.”

“haan par khud apni aankho se dekhne se dil par chhot lagti hai. vaise shaadi delay kyon ho gayi reema ki.” mohit ne kaha.

“ladke walo ne thoda vakt maanga tha shaayad. I am not sure.” Rohit ne kaha.

“hmm theek hai tum niklo main bhi nikalta hun. puja ko college se pick karna hai. hamaara aaj baahar dinner ka program hai.” mohit ne kaha.

Mohit time se puja ke college pahunch gaya. college se ladkiyon ki bheed baahar aa rahi thi. magar mohit ko puja kahi nazar nahi aa rahi thi.

“come on jaan kaha rah gayi tum…jaldi aao…hamein khub enjoy karna hai aaj.”

Magar college ke gate se sabhi baahar aa gaye par puja nahi aayi. Watchmen ne gate band kar diya. Mohit ne watchmen se pucha, “koyi ladki ander to nahi rah gayi.”

“nahi main check karke aaya hun. sab ja chuke hain.”

“aisa kaise ho gaya main to baahar hi khada tha.”

Mohit ne nagma ko phone milaaya.

“hello nagma…puja ghar pahunch gayi kya?”

“nahi vo to nahi aayi ab tak…kyon kya hua sab theek to hai.”

“main baad mein baat karta hun…abhi thoda busy hun.”

Mohit ko tension hone lagi ki puja kaha gayi.

“kaha gayi hogi meri jaan. Aise to kabhi kahi nahi jaati. Use pata bhi tha ki main use lene aaunga.”

mohit soch mein pad gaya.

Tabhi achaanak use khyaal aaya ki kahi puja ko psycho ne to kidnap nahi kar liya. Ye khyaal aate hi uski rooh kaanp uthi. Puja se bahut pyar karta tha mohit uske liye koyi bhi buri baat nahi soch sakta tha.

Mohit ne rohit ko phone milaaya aur use saari baat bata di.

“agar puja ko psycho ne kidnap kiya hai to vo jaroor tujhse contact karega. Tu aisa kar apne ghar ja. Ho sakta hai vaha usne koyi message choda ho tere liye.”

“yaar mere haath paanv kaam nahi kar rahe. Puja ko kuch ho gaya to main kahi ka nahi rahunga.”

“samajh sakta hun mohit. Tum aisa karo apne ghar pahuncho. Main bhi vahi pahunchta hun.” rohit ne kaha.

Mohit turant bike start karke apne ghar ki taraf chal diya. Ghar pahunch kar jaise hi usne apna darvaaja khola use darvaaje ke paas ek kaagaz pada mila us par kuch likha tha. mohit ne use uthaaya aur padhne laga.

“mr mohit, kaise ho tum. Tumne mujhe bahut pareshaan kiya hai. magar ab meri baari hai. kab se tumhaare liye ek plan dhund raha tha. samajh mein nahi aa raha tha ki kaisi maut di jaaye tumhe. Tum par nazar rakhi to pata chala ki tum ek ladki par phida ho. Mera kaam aasaan ho gaya.puja mere kabje mein hai. bilkul nangi padi hai mere saamne. Vaise main apne victim se sex nahi karta par tumhaari puja ne to khada kar diya mera lund. Bala ki khubsurat hai saali. Man kar raha hai iski lene ka. Le lun kya hahahahaha. Mere dusre letter ka intezaar karna. Aur haan apne dost rohit se bolna ki reema ki shaadi mein jaroor jaaye. Vaha uske liye kuch khaas karne wala hun main hihihihi.”

Mohit ki aankhe gusse se laal ho gayi. “tujhe vo maut dunga main ki teri rooh kaanp uthegi saale kutte kamine psycho.” Mohit chillaayaa.

Kramashah.....................

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