कौन सच्चा कौन झूठा--एक्शन थ्रिलर सस्पेंस compleet

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007
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Re: कौन सच्चा कौन झूठा--एक्शन थ्रिलर सस्पेंस

Unread post by 007 » 13 Dec 2014 04:05

दीपक चंपा की खोली मे घुसा चंपा खोली के कोने मे बैठी खाना बनाने की तैयारी
कर रही थी ..चंपा दीपक को देख कर खड़ी हुई.

दीपक: घर गयी थी.

चंपा: हां साहेब अभी थोड़ी देर पहले ही आई हू .

दीपक: मा कैसी है .

चंपा: साहब मा जी अब पहले से ठीक है खाना भी टाइम से खा रही है.

दीपक: (ये सुन के दीपक को रिलीफ हुआ) चंपा दुबारा पोलीस तो नही आई थी.

चंपा: आज तो नही पर शाम को दो हवलदार आए थे कुछ सवाल किए और चले गये.

दीपक: तुमने मेरे बारे मे तो..

चंपा: नही साहेब अगर आपके बारे मे कुछ बोलू तो ज़बान कट जाए मेरी .

चंपा: साहेब मुझे बहुत दुख है कि जागया भी उनलोगो के साथ मिला हुआ था .

दीपक: चंपा तुम जागया के कोई करीबी दोस्त को जानती हो जो हर वक्त उसके साथ
रहता हो.

चंपा: साहेब यहा तो वो अकेला आता था पर एक लड़का है जिसका नाम वो बार-2
लेता था .

दीपक: कौन ?

चंपा: मदन .

दीपक: ह्म्म. तुम कुछ जानती हो इस मदन के बारे मे.

चंपा: साहेब ज़यादा तो नही पर यही इन गलियो मे जागया के साथ घूमते हुए देखा
है उसी ने मुझे बताया था के ये मदन है

दीपक: चंपा अब मुझे जाना है अगर तुम्हे मदन के बारे मे कुछ भी चले मुझे
ज़रूर बताना .

चंपा: जी साहेब .

दीपक चंपा की खोली से बाहर हुआ थोड़ा आगे बढ़ा मेन रोड पर दीपक कोने से जा
रहा था उसे ऐसा लगा मानो कोई उसका पीछा कर रहा है.


होटेल के रूम मे घुसा बाथरूम का दरवाज़ा खोला बाथरूम की खिड़की से नीचे
मैनरोड पर नज़र मारी दीपक ने बड़े ध्यान से नीचे खड़े एक एक इंसान पर नज़र
डाली .

बाथरूम से बाहर आया होटेल के रिसेप्षन पे फोन करके लंच का ऑर्डर दिया .

लंच ख़तम किया घड़ी पर नज़र डाली शाम के 5:00 बज चुके थे . फिर बाथरूम मे
घुसा खिड़की से नीचे नज़र मारी एक आदमी काली कमीज़ पहने काला चश्मा लगाए
अभी भी वही खड़ा था . दीपक ने सोचा ये आदमी 2घंटे से खड़ा हे पर गया नही
उसे लगा के कुछ तो गड़बड़ है.


रात की 9:00 बज चुके थे और आदमी वही खड़ा था

दीपक ने फिर से नीचे देखा वो अभी भी वही खड़ा था. दीपक ने सोचा अगर वो इस
आदमी को पकड़ ले तो शायद उसे कुछ पता चल सकता है

दीपक को ये तो पता था के ये पोलीस वाला नही है अगर ये पोलीस वाला होता तो
अब तक वो जैल मे होता

दीपक होटेल की पीछे वाली सीडियो से नीचे उतरा पीछे की गली से छिपते हुए आगे
को आया पर उसने दीवार के आड़ ली हुए थी ताकि वो उसे देख ना सके

सामने खड़े आदमी ने जेब से सिग्ग्रेट निकाली और पीने लगा .दीपक ने ध्यान से
उसकी पूरी जाँच की कही उसके पास कोई हथियार तो नही

वो आदमी पिशाब करने के लिए होटेल के पीछे आया जहा दीपक छुपा हुआ था .दीवार
पे पिशाब करने के बाद जैसे ही वो आदमी मुड़ा दीपक को सामने खड़ा देख कर
घबरा गया

दीपक ने अपने हाथ मे पहले ही पत्थर लिया था.दीपक ने पूछा कौन है तू वो आदमी
भागने लगा पर दीपक उसे आज कही भागने नही दे सकता था ज़ोर से पत्थर उसके
सिर पे मारा .वो आदमी नीचे गिरा दीपक उसके पास गया और ज़ोर से पेट मे लात
मारी बोला बता कौन है तू.

उस आदमी ने दीपक की लात पकड़ी और उसे गिरा दिया

जैसे ही दीपक नीचे गिरा वो आदमी भागने के लिए खड़ा हुआ दीपक ने पीछे उसकी
गर्देन पकड़ ली और गला दबाने लगा उस आदमी ने अपनी जेब से कुछ निकाला और
दीपक के आँखों मे स्प्रे कर दिया दीपक की आँखों मे जलन हुई और वो चीखने लगा
.

उस आदमी ने इस का फ़ायदा उठाया और दीपक को ज़ोर से धक्का दिया दीपक नीचे
ज़मीन पर गिरा जब तक हल्की सी आँखें खुलती सामने कोई नही था वो भागने मे
कामयाब हो चुका था.

दीपक जल्दी से अपने कमरे मे गया अपनी आँखें सॉफ की पर अभी तक उसको जलन हो
रही थी . होटेल के काउंटर पे आया पेमेंट की और रात मे ही होटल छ्चोड़ दिया
उसको पता था कि ये जो भी था उसे अब डर लग रहा होगा .

...
सुबह -2 राणे थाने पहुचा सामने टेबल पर 9एमेम पिस्टल के ओनर्स के रिपोर्ट
पड़ी थी राणे ने हवलदार को चाइ के लिए बोला ओर फाइल खोल के देखने लगा
.हवलदार 2 मिनट बाद चाइ ले कर आया .

राणे: बाबू राम तुम्हरे फॅमिली मे कोई ऐसा है जो तुम से जलता हो .

हवलदार: साहेब एक हो तो बताउ , मेरी बीवी इतने अछी है इतने प्यारी इतने
खूबसूरत ,इतनी न्यारी है..

राणे: बाबू राम हम समझ गये तुम जाओ .

हवलदार: जी साहेब.

राणे ने फोन उठाया और कमिशनर को फोन किया गुड मॉर्निंग सर इनस्पेक्टर राणे
स्पीकिंग सर.

कमिशनर: या राणे केसे हो .

राणे: सर एक दम फिट न्ड फाइन .

कमिशनर : पर मुझे नही लगता ,तुम्हारे इलाक़े मे 3 खून हो चुके हे पीछे 1
महीने मे कोई पकड़ा गया .

राणे: सर उसी केस के सिलसिले मे ही फोन किया है आपको ,कुछ क्लू मिले हैं पर
..

कमिशनर: पर क्या राणे आइ वॉंट रिज़ल्ट ,.

राणे: सर मुझे ये काम प्राइवेट लोगो से कराना पड़ेगा .

कमिशनर : ओके राणे जो करना है करो बट रिज़ल्ट जल्दी .

राणे ने फोन रखा दुबारा फोन उठाया और किसी को फोन करके पोलीस स्टेशन आने को
बोला .
.....

दीपक ने पिछली रात एक दूसरे होटल मे बिताई ,अब वो और ज़यादा चोकन्ना हो
चुका था हर किसी पर नज़र रखने लगा था .दीपक चंपा के घर की तरफ हुआ .

खोली के बाहर पहुचा दीपक अंदर जाने लगा चंपा नहा रही थी उसकी खोली मे ही एक
पर्दे के पीछे लेकिन परदा बड़ा बारीक था और चंपा का आध नंगा शरीर सॉफ देखा
जा सकता था ...

ये नज़ारा देखते ही दीपक खोली के बाहर आ गया उसको लगा के चंपा उसी की तरफ
देख रही थी .थोड़ी देर वही खड़ा रहा चंपा ने दीपक को अंदर बुलाया दीपक
थोड़ा झिझक रहा था

चंपा: साहेब आपने नाश्ता किया

दीपक: नही अभी नही किया

चंपा: मे बनाती हू आप बैईठये

दीपक को भूक तो बहुत तेज़ लगी थी 2 दिन पहले केदार अंकल के घर पे ही ठीक से
खाना खाया था. पिछली रात तो खाना ही नही खा पाया था

चंपा ने बेड के उपर नाश्ता रखा दीपक को इतने तेज़ भूक लगी थी के उसको स्वाद
का तो कुछ पता ही नही चला जल्दी से नाश्ता ख़तम करने के बाद दीपक ने हाथ
धोए

दीपक: चंपा मदन के बारे मे कुछ पता चला

चंपा: साहेब मेने कल यहा आस पास के लोगो को बोल दिया था जिसको भी उसके बारे
मे पता चलेगा वो मुझे बता देगा .

दीपक: आज घर गयी थी तुम

चंपा: आज मालकिन ने छुट्टी दी है आज घर पे कोई काम नही था इसलिए

चंपा ने अपने बालों से तोलिया खोला और वही कोने मे अपना बालों को सुखाने
लगी उसके हाथ से तोलिया छूटा और ज़मीन से तोलिया उठाने के लिए झुकी ....

चंपा जैसे ही झुकी उसने ब्रा नही पहना हुआ था दीपक की आँखों के सामने दोनो
गोलाइयाँ थी निपल्स सॉफ देखे जा सकते थे दीपक ने जल्दी से अपनी नज़र वाहा
से दूर की खड़ा हुआ और चंपा को बोला के वो शाम को भी आएगा कौशिश करना अगर
मदन का कुछ पता कर सको ये बोलता हुआ खोली से बाहर हो गया .


चंपा की खोली से थोड़ा दूर गया था के कोई छोटी सी गली से निकल कर आया और
दीपक को पकड़ लिया एक ने दीपक के हाथ उसकी कमर पर कर दिए दूसरे ने एक
ज़ोरर्र से घूँसा दीपक के मुँह पर मारा दीपक की आँखों के आगे अंधेरा हुआ वो
नीचे को गिरा .

दूसरा आदमी बड़े गुस्से मे बोला साले हरामजादे तेरे वजह से मेरा दोस्त मारा
गया ये बोलते ही उसने एक लात दीपक के पैट मे मेरीयी दीपक के मुँह से
घूटीघुतती आवाज़ निकली वो एक पल के लिए बेहोश हो चुका था वो दोनो उसको वही
छ्चोड़ कर वाहा से भागे .

5मिनट बाद दीपक केसे भी कर के खड़ा हुआ और मैन रोड पर पहुचा एक ऑटो को रोका
उसमे बैठा और अपने होटेल की तरफ चल दिया

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Re: कौन सच्चा कौन झूठा--एक्शन थ्रिलर सस्पेंस

Unread post by 007 » 13 Dec 2014 04:06

राणे: आओ आओ कैसे हो .

प्राइवेट डिटेक्टिव: जै हिंद सर, बिल्कुल ठीक हू सर.

राणे: बैठो यार , तुमने हमारे नीचे ट्रनिंग ली पर पोलीस फोर्स जाय्न नही की
,पता है एक ईमानदार पोलीस वाला कम हो गया .

डीटेक्टिव: सर जो कुछ मेरे साथ हुआ है वो आप जानते ही है ,इसलिए मेने
प्राइवेट जासूसी करना ही सही समझा .

राणे: ह्म्*म्म्म ... यार एई लो ( एक फाइल आगे बढ़ते हुए दी) दो लोगो के
जनम कुंडली चाहिए पूरी की पूरी और हां ज़रा होशियार बहुत तेज़ है ई लोग .

डिटेक्टिव: सर आपका का काम जल्दी हो जाएगा( ये कहते हुए खड़ा हुआ और चल
दिया)

राणे कुर्सी पर आराम से बैठे हुए कुछ सोच रहा था ,फोन की घंटी बाजी ,..हेलो
इनस्पेक्टर राणे , फोन पे जो भी था राणे एक बार हिल सा गया जल्दी से खड़ा
हुआ पोलीस स्टेशन से बाहर निकला और गाड़ी मे बैठ के ड्राइवर को बोला चलो
दीपक के घर पे .

राणे की जीप दीपक के घर के बाहर रुकी ,राणे जैसे ही घर मे घुसा आस पास के
पड़ोसी वही घर मे थे राणे को पोलीस की वर्दी मे देख के सब लोग थोड़ा पीछे
को हुए राणे सीडिया चढ़ ते हुए उपर पहुचा दरवाज़ा खोला.

सामने दीपक की मा इंदु अपने बेड पर बैठी थी , कमरे का सारा समान बिखरा हुआ
था .

अलमारी का लॉक भी टूटा पड़ा था राणे अलमारी के पास पहुचा लॉकर खोला पर सारी
ज्यूयलरी वही थी कुछ कॅश भी था राणे के दिमाग़ की घंटी बजी अगर चोर चोरी
करने आया था तो इतना बड़ा पागल था क्या जो सारा माल यहा छ्चोड़ गया .

राणे इंदु के पास गया .

राणे: इंदु जी क्या चोरी हुआ आप के घर से .

इंदु: डाइमंड्स.

राणे की दोनो आँखें फैली पर वो अभी भी कुछ समझा नही .

राणे: डाइमंड्स कहा से .

इंदु: सामने जो अलमारी का लॉक टूटा पड़ा है उसी मे से निकाले गये है.

राणे का दिमाग़ फिर भागा कैसा चोर था जिसको ये भी पता था के डाइमंड्स कहा
पड़े है पर साले ने बाकी सामान को हाथ भी नही लगाया .

राणे: कितने के हीरे थे इंदु जी.

इंदु: मुझे पूरा तो नही पता क्यूकी ये राज ने ही खरीदे थे लगभग 5 करोड़ के
होंगे.

राणे: राणे की आँखों की भुए उपर हुई .हवलदार को इशारा किया फोरेन्सिक वालो
को बुलाओ .

राणे ने नीचे आकर लोगो से कुछ पूछताछ की और गाड़ी मे बैठ के पोलीस स्टेशन
चल दिया

दीपक होटेल के बेड पर लेटा था उसके मूह मे बहुत दर्द हो रहा था कुछ देर
पहले ही उसे दो लोगो ने बड़ी बहरहमी से मारा था . दीपक को एहसास था के वो
लोग शायद जागया के दोस्त थे क्यूकी उन्होने उसे मारते वक्त ये बोला था के
उसकी वजह से उसके दोस्त की जान गयी है .

दीपक ने होटेल के एक आदमी को भेज कर केमिस्ट से पेन किल्लर मॅंगा ली थी
.उसको अब लग रहा था के कातिल उसकी पहुच से दूर नही हे .मेडिसिन का असर होने
लगा और दीपक नींद के आगोश मे सो चुका था .

शाम के 6:00पीयेम बज चुके थे दीपक की आँख खुली उसको याद आया के उसने चंपा
को मिलने जाना था .दीपक जल्दी से खड़ा हुआ मूह हाथ धोया और होटेल से बाहर
हुआ .

चंपा की खोली मे पहचते ही दीपक जल्दी से अंदर को हुआ वो चंपा को किसी
मुश्किल मे नही डालना चाहता था .चंपा अंदर चाइ बना रही थी.

चंपा: आई साहेब जी चाइ पेएँगे .

दीपक: हां.

चंपा: मदन की खबर मिली है वो आज रात को वो पीछे वाले खंदर मे अपने दोस्तो
के साथ आएगा.

दीपक: चलो अभी कहा हे जगह बताओ मुझे .

चंपा: साहेब अभी नही वो रात को आएगा 10: बजे के बाद पक्की खबर है साहेब जी.

दीपक: किसने बताया तुम्हे.

चंपा: पड़ोसी का बेटा उसका दोस्त हे और वो आज रात वाहा इकट्ठे हो कर दारू
पीने वाले है .

दीपक: ह्म्*म्म्म... आज कुछ भी हो मुझ से भाग नही पाएगा .

चंपा चाइ का कप दीपक के पास ले कर आई जैसे ही दीपक ने कप लिया उसका हाथ ने
चंपा के हाथ को छुआ दोनो ने एक दूसरे को देखा चंपा हल्का सा मुस्कुराइ और
पीछे हो गयी.

ऐसे ही थोड़ी देर वाहा वक्त बिताने पर दीपक ने घड़ी पर नज़र डाली 9:00 बज
चुके थे .

दीपक: चलो चंपा मुझे वो जगह बताओ जहा वो आने वाला है.

चंपा की खोली से निकलने से पहले दीपक ने चंपा की रसोई से एक चाकू अपने पास
रख लिया था.

दोनो गलियो से निकलते हुए खंदार के पास पहुचे .

चंपा: यही पे आने वाला है (चंपा ने इशारा करते हुए बताया )

दीपक: तुम यही रूको मे अंदर देख के आता हू कुछ भी हो अंदर मत आना .

चंपा: पर आप पहचानोगे कैसे मदन को.

दीपक: वो तुम मुझ पर छ्चोड़ो वो खुद बता देगा .

दीपक खंदार के अंदर गया चारो तरफ का मुआयना किया कोई भी नही था ,बाहर आया
और चंपा को घर भेज दिया ,वो सोच रहा था के कही चंपा को कुछ ना हो
जाए,क्यूकी यहा ख़तरा था.

जैसे चंपा गयी दीपक खंदार के अंदर पहुचा एक कोने मे दीवार थी जहा वो छुप के
खड़ा हो गया और इंतेज़ार करने लगा ,थोड़ी देर बाद घड़ी पर नज़र डाली 10:30
बज चुके थे पर अभी तक कोई आया क्यू नही .

5मिनट बाद कुछ आवाज़ आई दीपक चौकन्ना हुआ .

अरे यार आज तो मज़ा आगेया लंबा चौड़ा हाथ मारा है सब मिल के मज़े करेंगे
(दीपक ने आती हुई आवाज़ सुनी) .

दीपक ने दीवार से थोड़ा झाँक के देखा उसे कोई नज़र नही आया , आराम से दब्बे
पाँव दीपक बाहर आया थोड़ा आगे गया कुछ लोग उसे थोड़ी दूर बैठे नज़र आए ,
झट से दीपक ने फिर दीवार की ओट ली .

उसको पता था के अगर किसी ने उसे देखा तो वो लोग भाग खड़े होंगे ,या फिर
उसको मारने की कोशिश करेंगे .

अरे यार ये मदन क्यू नही आया अभी तक ,तूने उसको बोला था ना यहा मिलने को ,
हां यार मेने उसे बता दिया था के खंदार मे मिलेंगे .
दीपक समझ चुका था के मदन अभी तक आया नही है और ये लोग उसका इंतेज़ार कर रहे
है और वो खुद भी.

दीपक थोड़ा आगे हुआ छ्होटा सा पत्थर उठाया और दूसरी तरफ की झाड़ियो के तरफ
फैका थोड़ी से आवाज़ हुई.

आबे कौन है ,अरे तू देख तो सही कौन रात को यहा अपनी शादी करने आया है ,.
उसमे से एक आदमी खड़ा हुआ और झाड़ियो की तरफ गया ,,ज़ोर से बोला कौन है बे
साले मज़ा खराब कर रहा है ये बोल के वो जैसे ही पीछे मुड़ा दीपक ने उसका
सिर पकड़ कर दीवार पे ज़ोर से मारा वो आदमी नीचे गिरा .

दीपक ने उसे आराम से घसीट के दीवार के पीछे ला के डाल दिया .

अबे तू कहा मर गया साले मैं दारू खोल रहा हू जल्दी आ वरना सारी पी
जाउन्गा.ज़ोर से हस्ने की आवाज़ आई ,,अबे आता है या मे आओ , दूसरा आदमी भी
खड़ा हुआ और वही झाड़ियो की तरफ चला,,, अब कहा गया अपनी जीजा को छ्चोड़ कर
साला भोसड़ी का.

दीपक ने फिर एक छ्होटा पत्थर उठाया और जहा वो खड़ा था उसी दीवार पर मारा .

उस आदमी ने वो आवाज़ सुनी , साले रात को क्या आँख मिचोली खेल रहा है बाहर
निकल दारू पीने का टाइम है.

वो आदमी उस दीवार के पास आया जहा दीपक छुप के खड़ा था ,, साले बाहर निकल ना
मुझसे अब बर्दाश्त नही हो रहा पूरे दिन से दारू नही पी और अब तू कहा छुप
गया

ये बोलते ही वो आदमी थोड़ा आगे आया सामने उसे उसका दोस्त नीचे ज़मीन पे
गिरा दिखा ,भागते हुए वो उसके पास आया .. अबे उठ ,क्या हुआ तुझे उस आदमी को
पीछे से कुछ आवाज़ सुनाई दी जैसे ही उसने पीछे देखा दीपक ने ज़ोर से उसके
मूह और कंधे के बीच अपनी लात ज़ोर से मारी वो जैसे ही गिरा ,नीचे पड़ा
पत्थर उसके सिर पर लगा और वो भी बेहोश हो गया

007
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Re: कौन सच्चा कौन झूठा--एक्शन थ्रिलर सस्पेंस

Unread post by 007 » 13 Dec 2014 04:07

चंपा ने दीपक के सीने पे कान लगाया धड़कन चल रही थी.

चंपा: इनकी साँस चल रही है,चल इनको उठाने मे मदद कर .

दोनो ने मिल कर दीपक को उठाया और बस्ती की तरफ जाने लगे .

चंपा: अगर ऐसे जाएँगे तो ये बच नही पाएँगे एक काम कर सामने वो हाथ गाड़ी
पड़ीहै जा चुपके से उसे उठा ला .

वो लड़का भाग कर गया एक ठेली ले कर आया दोनो ने दीपक को उस पर लेटया और उस
लड़के ने धक्का लगाना शुरू किया चंपा पीछे भाग रही थी, वो लड़का तेज़ी से
तेली ले कर भाग रहा था .

बस्ती के पास पहुच कर चंपा ने बस्ती के एक घर पे दरवाज़े को खटखटाया ,अंदर
से खटपट की आवाज़ हुई दरवाज़ा खुला.
दीपक ज़मीन पर गिरा और ज़ोर ज़ोर से साँस लेने लगा गोली उसके पेट मे लगी थी
उसको पता था के मौत उसके करीब है उसकी आँखें बंद होने लगी ,उसे ऐसा लगा
सामने से कोई आ रहा हे , चंपा थी साथ मे एक लड़का भी था .





कॉमपाउंडर: क्या बात चंपा रात को भी तुझे चैन नही हे ,क्या चाहिए बोल.

चंपा: बचा ले इनको.(ईश्वर दीपक की तरफ था)

कॉमपाउंडर: किसे बचा लो (अपनी खोली से बाहर निकला सामने दीपक को थेली पर
खून मे लत पथ देख उसकी हालत पतली हो गयी) कौन है ये (ज़ोर से बोला,अंदर से
उसकी बीवी भी बाहर आगाई) .

चंपा: मेरे साहेब जी है बड़े उपकर है इनके हम पर इनको बचा ले.(रोते हुए)

कॉमपाउंडर: क्या हुआ इसे ,इतना खून केसे.(ये बोल कर वो दीपक के पास गया
,शर्ट पर खून था थोड़ा सा कपड़ा हटाया उसकी हवा फिर निकली) ले कर जा इसे
यहा से ,इसको गोली लगी है ,चली जा यहा से.

चंपा: इनको बचा ले ,ये बहुत शरिफ्फ आदमी है ,ये बस वाहा खंदर मे घूम रहे थे
किसे ने इन्हे गोली मार दी ,बचा ले मे तेरे पाँव पड़ती हू (रोते हुए).
कॉमपाउंडर: इसको हॉस्पिटल ले कर जा मे कुछ नही कर सकता ,और वैसे भी ये
पोलीस केस हे ,मे कुछ नही करूँगा ,पोलीस मुझे पकड़ लेगी चल भाग यहा से.

चंपा : हॉस्पिटल नही ले कर जा सकती ,वक्त बहुत कम हे अगर रास्ते मे कुछ हो
गया तो...(रोते हुए)

कॉमपाउंडर: क्या होगा मर जाएगा ,मरने दे ,पर मे क्यू इसको बचाने के चक्कर
मे जैल जाउ

चंपा: देख तू हमेशा से हमारी मदद करता आया है आज भी कर दे

कॉमपाउंडर: वो सब बस तेरी मा के लिया किया था क्यूकी उसने मुझे मेरे बुरे
वक्त मे मदद की थी ,पर मे ये काम नही कर सकता

चंपा उसकी बीवी के कदमो मे गिर पड़ी ,और मदद की गुहार करने लगी

उसकी बीवी ,बचा लो उसे अगर रास्ते मे ले जाते हुए उसे कुछ हो गया तो पाप हम
पर चढ़ेगा

कॉमपाउंडर: पाप पुन्य तब सोच लियो जब मे जैल जाउन्गा समझी अंदर जा

चंपा: किसी को कुछ पता ही नही चलेगा बस तू गोली निकाल दे मे यहा से इन्हे
उसी वक्त ले कर चली जाउन्गी

कॉमपाउंडर: मेरा घर है कोई हॉस्पिटल नही ,गोली निकालने के लिए डॉक्टोरी
समान चाहिए होता है हाथ से निकालु

उसकी बीवी ने ये सुनते ही बोला, समान है वो आप पिछली बार क्लिनिक से लाए थे
पर वापस लेकर नही गये

चंपा: तू गोली निकाल दे हम अभी चले जाएँगे

कॉंपौंदर: इसे अंदर ले कर आ ,देखता हू क्या कर सकता हू ,और अगर इसे कुछ हो
गया तो भी तू किसी को कुछ नही बोलेगी

चंपा और वो लड़का दीपक को उठा कर अंदर लेकर आए गदे पर लेटाया

कॉंपौंदर: ज़रा पीछे हट (चंपा को बोला ,और दीपक की नबाज़ चेक करने लगा)
इसके शरीर मे जान बहुत कम है मुझे डर है गोली निकालते वक्त ही कही ये मर
गया तो

चंपा: तू कौशिश तो कर , भगवान इसके साथ है ,इसे कुछ नही होगा

कॉमपाउंडर: जा समान ले के आअंदर से (अपनी बीवी को बोला) चंपा तू गॅस पर
पानी चढ़ा दे .हे भगवान कहा फसा दिया इंसान तो बनाया इंसानियत क्यू बनाई

उसकी बीवी अंदर से एक डब्बा ले कर आई जिस पे फर्स्ट एड का साइन बना हुआ था

कॉमपाउंडर ने एक कँची से उसकी शर्ट काटी,और ज़ख़्म पर हल्का सा हाथ लगाया
,दीपक की आहह निकल पड़ी मूह से .उसने जैसे ही उसके सिर पर हाथ लगाया सिर जल
रहा था

कॉमपाउंडर: अरे इसे तो भूखार भी बहुत तेज़ है इसका बचना बहुत मुश्किल है
(चंपा की तरफ देख कर बोला)

कॉमपाउंडर को बहुत डर भी लग रहा था , उसका खुद का ब्लड प्रेशर बढ़ गया था
जल्दी से दो ग्लास पानी पिया और दीपक के पास आया

चंपा को गरम पानी लाने को बोला ,
उसने अपना काम शुरू किया ,जैसे ही गोली बहार निकाली दीपक की आवाज़ नही हुई .
उसने पास आकर दीपक की छाती पर दवाब बनाया और बार बार छाती दबाने लगा

कॉमपाउंडर: इसे अपने मूह से साँस दे इसके शरीर मे कोई हरकत है जल्दी कर

चंपा अपने मूह से साँस दे रही थी कॉमपाउंडर उसकी छाती दबा रहा था और उस
लड़के ने ज़ख़्म को कॉटन से दबा रखा था ताकि खून ना निकल सके

उसने फिर उसकी नब्ज़ चेक की थोड़ी जान अगेयी थी

कॉमपाउंडर: तू साँस देती रह मे टाँकें लगा देता हू ,शायद बच जाए

निडल को गरम पानी डुबोया धाग्गा डाला जखम पर बिना इंजेक्षन दिए ही टाँकें
लगाने थे उसे पता था के दीपक शायद नही बच पाएगा

कॉमपाउंडर: मुझे बहुत डर लग रहा हे अगर ये मर गया तो

चंपा: तू डर मत तूने तो गोली भी निकाल दी ,अब मत डर भगवान हमारे साथ है
,इसे कुछ नही होगा

कॉमपाउंडर ने टाँकें लगाने शुरू किया दीपक को होश नही था पर मूह से हल्की
हल्की आवाज़ निकल रही थी . हर टाँकें के साथ उसके हाथ भी काँप रहे थे दूर
बैठी उसकी बीवी भी डर रही थी
जैसे ही टाँकें लगा कर कॉमपाउंडर वाहा से हटा,उसकी बीवी भागते हुए उसके पास
आई ,उसको उठाया और पूछी क्या हुआ आपको

कॉमपाउंडर: कुछ नही बस जैल का दरवाज़ा नज़र आ रहा था . मुझे लगा के मे शायद
जैल की सलाखें पकड़ के खड़ा हू

कुछ नही होगा, आप ने तो भला काम किया है,अगर ये ठीक हो गया तो हमे दुआए
देगा

कॉमपाउंडर: अरे तू चुप कर , चंपा तू इसे अब यहा से ले कर जा ,और किसी को ये
मत बोलना के मेने ये काम किया था

चंपा ने सर हाँ मे हिलाया

चंपा: आ इधर इन्हे उठा और बाहर ले कर चल

वो लड़का चंपा की मदद से दीपक को बाहर ले कर आया रात के 2:00 बज रहे थे
कुत्ता भी नज़र नही आ रहा था दोनो ने मिल के उसे ठेली पे डाला

चंपा: एक काम और कर दे

कॉंपौंदर: अब क्या चाहिए

चंपा: दवाई लिख दे , जखम का दर्द केसे जाएगा एक और उपकार कर दे.

कॉंपौंदर अंदर गया और एक पर्ची पर दवाई लिख के लाया

कॉंपौंदर: ये ले ,सब दवाई पीने वाली है ये अभी बेहोश है ना दवाई केसे
खाएगा,और एक काम कर इसके सिर पर पानी से पट्टी कर दियो बुखार उतर जाएगा

दोनो वाहा से चंपा की खोली के तरफ को चले ,चंपा ने अपनी खोली को खोला और
दोनोने दीपक को आराम से अंदर ले कर आए,बिस्तेर पर लिटाया.

चंपा: इधर आ ये ले पैसे और ये पर्ची ,वो हॉस्पिटल के पास जो दवाई की दुकान
है ना जा उससे ये दवाई ले कर आ और हाँ उससे पूछ लेना के दवाई केसे देनी है
समझा

लड़के ने सिर हां मे हिलाया और खोली से बाहर हुआ

चंपा ने पानी गॅस पर चढ़ाया ,और दीपक के पास आकर उसकी छाती पर कान लगाया और
सुनने लगी के साँसे तो चल रही हैं के नही

गरम पानी मे पट्टी डाल कर उसके सिर पर डाली और बारी बारी पट्टी बदलने लगी ,
थोड़ी देर बाद वो लड़का भी दवाइया ले कर आया और चंपा को समझाने लगा के कौन
सी दवाई कैसे देनी है