गन्ने की मिठास compleet

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rajaarkey
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Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 15 Oct 2014 02:25

मैने संगीता की गुदाज जवानी को सहलाते हुए उससे कहा मेरी रानी आज मैं तेरी सारी शिकायत दूर कर दूँगा और तू एक दम मस्त हो जाएगी, कुच्छ देर बाद मैं और संगीता तैयार हो गये और फिर अपनी बाइक पर संगीता को बैठा कर मैं हरिया और रामू के गाँव की ओर चल दिया,

मैं बाइक बड़े आराम से चला रहा था और संगीता मेरे पिछे मुझसे सॅट कर बैठी थी, संगीता ने जीन्स और टीशर्ट पहना हुआ था और अपनी टाँगे बाइक के दोनो तरफ करके मेरी कमर पकड़ कर मुझसे पूरी तरह सटी हुई थी जब कोई ब्रकेर आता तो संगीता मुझसे और भी सॅट जाती और मेरा लंड खड़ा हो चुका था, कुच्छ ही देर मे हम साइट पर पहुच गये और मैने मजदूरो को काम पर लगाने के बाद पेदल संगीता का हाथ पकड़ कर उसे तालाब के आसपास घुमाने लगा और गाँव का नज़ारा दिखाने लगा, संगीता काफ़ी खुस लग रही थी और अपनी मोटी गंद मतकाते हुए मेरे आगे आगे चल रही थी, मैं थोड़ा उसके बराबर मे पहुच कर धीरे से उसकी मोटी गंद पर हाथ मारते हुए उससे पुच्छने लगा- संगीता कैसा लगा तुमको गाँव का महॉल संगीता- अच्छा लग रहा है भैया यहा तो पेड़ की च्चाँव मे बैठ कर ठंडी हवा लेने का मज़ा ही कुच्छ और है,राज- चल तुझे गाँव के गन्ने चुस्वाता हू, बड़े मीठे गन्ने है यहा केसंगीता और मैं पेदल घूमते हुए हरिया के खेत की ओर चल देते है कुच्छ देर बाद हम दोनो हरिया के खेत मे पहुच जाते है और हमे वहाँ चंदा मिल जाती है,राज- अरे चंदा तुम्हारा बाबा हरियाकहाँ हैचंदा- बाबू जी वह सुधिया चाची के खेत की ओर गये है और हमे कह गये है जब तक हम आए ना तुम कही नही जाना,राज- अच्छा चंदा देखो यह संगीता है और संगीता यह चंदा है तुम दोनो बाते करो मैं हरिया के पास से आता हू उसके बाद मैं वहाँ से चला गया और संगीता चंदा से बाते करने लगी,जब मैं रामू के खेतो की ओर पहुचा तो सुधिया बैठी बैठी घास काट रही थी और हरिया उसके सामने बैठा हुआ अपने लंड को धोती के उपर से मसल रहा था, मैने दूर से उसे आवाज़ दी और वह दौड़ कर मेरी तरफ आ गया

राज- अरे माफ़ करना हरिया मैने तुम्हे डिस्टर्ब किया लेकिन मैं अपनी बहन संगीता को लेकर आया हू और कुच्छ देर के लिए मैं उसे यही छ्चोड़ कर साइट पर जा रहा हू तब तक तुम उसे थोड़ा गरम करने की कोशिश करो, उसकी चूत से पानी बहने लगना चाहिए ताकि बाद मे मुझे उसे चोदने मे कोई दिक्कत ना हो,हरिया- आप फिकर ना करो बाबूजी बस आप हम पर छ्चोड़ दो, उसके बाद मैं वहाँ से चला गया और हरिया सुधिया से यह कह कर चला गया कि वह अभी आता है,हरिया जब अपने खेत मे गया तो संगीता और चंदा उसे देख कर खड़ी हो गई,हरिया- अरे बैठो संगीता बैठो हम जानते है तुम हमारे बाबूजी की प्यारी सी बहना हो ना, आपके भैया आपके बारे मे हमसे बहुत बाते करते है, वह आपको बहुत प्यार करते है,संगीता- अच्छा और क्या कहते है भीया मेरे बारे मे हरिया- वो सब हम आपको बताएगे संगीता लेकिन पहले कुच्छ पानी वग़ैरह तो पीलो, चंदा जा संगीता बहन के लिए पानी लेकर आ और फिर चंदा पानी लेकर आ जाती है, हरिया झोपड़ी मे जाता है और चंदा को इशारे से बुला कर उसके कान मे कुच्छ समझा कर बाहर आ जाता है, हरिया- अरे चंदा मैं ज़रा रामू भैया के खेतो मे काम से जा रहा हू तू संगीता बहन को गन्ने के खेतो मे घुमा कर उन्हे अच्छे मीठे मीठे गन्ने चूसने को दे दे तब तक मैं आता हू, हरिया वहाँ से चला गया और चंदा संगीता के पास आकरछंदा- चलो दीदी मैं आपको मस्त गन्ने चुस्वाउंगी, आपको देख कर लगता नही है कि कभी आपने गन्ने चूसे है,संगीता- गन्ने तो नही चूसे चंदा लेकिन हाँ गन्ने का रस ज़रूर पिया हैचंदा- ज़ोर से हस्ते हुए, अरे दीदी जब तक गन्ना चुसोगी नही रस कहाँ से निकलेगसांगीता- अरे पगली रस गन्ने को मशीन मे डाल कर निकाला जाता हैचंदा- मुस्कुराते हुए कौन सी मशीन उपर वाली या नीचे वाली या फिर पिछे वालीसंगीता उसे गौर से देख कर मैं तुम्हारा मतलब नही समझी,चंदा- दीदी कभी तुमने गन्ना देखा हैयसंगीता- अरे पागल वो सामने लगे तो है


rajaarkey
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Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 15 Oct 2014 02:26

चंदा- मुस्कुराते हुए अरे दीदी मैं उस गन्ने की बात नही कर रही हू मैं तो उस गन्ने की बात कर रही हू जो मर्दो के आगे झूलता रहता है,चंदा की बाते सुन कर संगीता एक दम से चौक जाती है और उसे गौर से देखती हुई, मुस्कुरा कर तू बहुत बदमाश है चंदा कैसी बाते करती है,चंदा - दीदी हमारे गाँव मे तो गन्ना उसी हथियार को कहते है जो मेरे बाबा और तुम्हारे भैया के पास है और उसी गन्ने को हम गाँव की औरते खूब कस कर चुस्ती है,संगीता- उसे आश्चर्या से देखती हुई, क्या तुमने वह गन्ना चूसा हैचंदा- हाँ खूब जी भर कर और मैं तो उसे अपने नीचे भी खूब लेती हू,संगीता- क्या तेरी शादी हो गई हैचंदा- अरे दीदी अभी शादी कहाँ हुई है अभी तो मैं बहुत छ्होटी हुसांगीता- तो क्या बिना शादी के ही तू सब कर चुकी हैचंदा- हाँ मैं तो रोज ही चुदवाती हू,संगीता- अपने गले का थूक गटकते हुए, क्या तू रोज चुदवाती है लेकिन किससे चंदा- अपने बाबा से और किससे संगीता- क्या बकती है भला कोई अपने बाबा से भी चुदवाता हैचंदा- लो कर लो बात हमे तो हमारे बाबा रोज पूरी नंगी करके खूब कस कस कर चोद्ते है,

संगीता- उसे आश्चर्या से देखती हुई क्या बात कह रही है चंदा,

चंदा- कसम से दीदी मैं भला आपसे बेकार मे झूठ क्यो बोलूँगी, सच दीदी चूत मरवाने मे बड़ा मज़ा आता है, क्या आपका मन नही करता अच्छे मोटे मोटे लंड से चुदने का,

संगीता- करता तो है पर क्या करू

चंदा- अपने भैया को क्यो नही फसा लेती हो, मस्त ठुकाई करेगे वह तुम्हारी चूत की

संगीता- नही नही मुझसे यह सब नही होगा तू अपना आइडिया अपने पास रख

चंदा- अच्छा दीदी कभी तुमने किसी को चुदाई करते देखा है,

संगीता- नही रे भला मैं किसे देख सकती हू

चंदा- आपका मन करता है चुदाई करते हुए देखने का

संगीता- करता तो है लेकिन उससे क्या होगा,

चंदा- आप कहे तो मैं आपको मस्त चुदाई करते हुए दिखा सकती हू

संगीता - वह कैसे

चंदा- मेरे बाबा है ना वह अभी मेरी चाची सुधिया को चोदने ही तो गये है

संगीता- क्या बात कह रही है

चंदा- तुम चलो मैं तुम्हे आज मस्त चुदाई दिखाती हू और फिर चंदा संगीता का हाथ पकड़ कर रामू के गन्नो के खेत की ओर ले गई जहाँ हरिया सुधिया के सामने बैठा बाते कर रहा था, हरिया बार बार सुधिया को अपने लंड का टोपा खोल खोल कर दिखा रहा था और सुधिया अपने काम मे लगी हुई मंद मंद मुस्कुरा रही थी,

संगीता और चंदा दोनो की निगाहे हरिया और सुधिया पर लगी हुई थी,

क्रमशः........


rajaarkey
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Re: गन्ने की मिठास

Unread post by rajaarkey » 15 Oct 2014 02:26

GANNE KI MITHAS--31

gataank se aage......................

maine uske hontho ko chumte huye uski chut par jaise hi hath rakha maine dekha uski janghe pahle se hi khub phaili hui thi aur is bar mai puri tarah khul kar uski gudaj phuli chut ko uski panty ke upar se sahla raha tha,

sangita ki puri panty gili ho chuki thi aur ab mujhse raha nahi ja raha tha aur maine uske mote mote bobe dabate huye uski panty ko ek side dhire se hata kar jab sangita ki chikni phuli hui chut ko sahlaya to sangita ne apni jangho ko aur bhi chuada kar liya aur ek dam se mujhse sat gai,

maine sangita ke hontho ko apne muh mai bhar kar chusna shuru kar diya aur uske mote mote doodh ko khub kas kas kar masalne laga, sangita ki chut ki fanko ko sahlate huye mai dhire dhire uski chut ke dane ko sahla raha tha aur uski chut ke chhed ko apni ungli se upar hi upar ragad raha tha mai janta tha ki agar maine ungli uski chut mai ghusane ki koshish ki to kahi uske muh se aawaj na nikal jaye,

rat ko 3 baje hum aurangabad pahuch gaye aur phir achanak mummy ne mujhe dhire se aawaj di

rati- bete raj

raj- ha mummy

rati- beta kahi gadi rukwa na mujhe bathroom jana hai,

maine mummy ki bat sun kar driver ko ek dhabe ke pas gadi rokne ko kaha aur usse kah diya jao chai pi lo uske bad mummy ko maine idhar udhar dekh kar ek taraf jakar mutne ka ishara kar diya aur mummy apni gand ki darar mai fasi sadi ko nikalte huye mere samne apne bhari chutado ko matkate huye mutne chal di,

maine dekha driver dhabe ke andar chala gaya hai aur gadi jaha khadi thi uske viprit disha mai mummy ja rahi thi, mummy jidhar ja rahi thi udhar ek do ped the mai bhi mutne ke bahane un pedo ke pichhe khada hokar apne land ko bahar nikal liya aur mummy ko chhup kar dekhte huye apne land ko sahlane laga, mera land bahar aate hi masti mai khada ho chuka tha,

mujhe mummy saf dikhai de rahi thi tabhi mummy ne ek bar idhar udhar dekha aur apni moti gand se sadi utha kar phir idhar udhar dekhte huye apni panty bhi niche sarka di, mai mummy ki nangi bhari gand dekh kar mast ho gaya, jaise hi mummy niche bethi uski gand puri khul kar mere samne aa gai aur mai uski gadrai gori gand dekh kar mast hone laga, sach kahu to mummy ki moti gand sudhiya ki gudaj gand se kai guna jyada bhari aur chodne layak lag rahi thi,

kuchh der tak mummy mutne ke bad uthi aur apni panty chadha kar apni sadi niche karke vapas aane lagi, mummy ko vapas aata dekh maine jaldi se apna land andar kiya aur gadi mai aakar beth gaya,

maine jab gadi mai sangita ko nahi paya to mai dhabe mai dekhne laga jaha vah chai ki chuskiya le rahi thi, mai mand mand muskurate huye uske pas gaya aur maine puchha khul gai madam aapki neend,

aap to badi gahri neend soti ho koi utha kar bahar bhi phek deta to pata nahi chalta,

sangita- muskurate huye bhaiya aap to jante hai safar mai mujhe kitni neend aati hai,

raj- achcha thik hai jaldi se chai khatam karo aur phir ek chai mummy ko pilane ke bad mummy ne mujhe kaha raj sangita ko bhi bathroom lagi hai ja jara use bata de kidhar jana hai, mai mummy ki bat sun kar sangita ki aur dekhne laga to vah mand mand muskurate huye idhar udhar dekhne lagi,

maine use ishare se apne sath aane ko kaha aur phir samne wala ped dikhate huye kaha jao aur vaha jakar kar lo,

sangita- bhaiya aap yahi rahna mujhe dar lag raha hai,

raj- are itna kyo dar rahi hai tu ja kar le mai tere pichhe hi khada hu, uske bad sangita us ped ke pichhe jakar apni skirt utha kar apni panty nichhe sarka kar mutne lagi aur uske mutne ki aawaj mujhe saf sunai de rahi thi, kuch der bad sangita aa gai aur hum gadi mai beth kar chal diye, is bar mummy beech , mai beth gai thi aur sangita unki dusri taraf bethi thi,

ab mai mummy se sat kar betha tha aur mummy ke badan se uthti hui khushboo ne mere land ko phir se khada hone ke liye majboor kar diya tha, mai samajh gaya tha ki mummy ko agar chodne ko mil jaye to sali mast kar degi, uski bhari bharkam gudaj jawani ne mujhe pagal kar rakha tha aur mai himmat karke mummy ki moti jangho par apne hath ko rakh kar unki jangho ki motai aur gudaj mulayam ehsas ko mehsus karke mast ho raha tha,

karib 5 baje ke lagbhag hum log shirdi pahuch gaye aur phir us din hum logo ne darshan karne ke bad khub ghume phire aur sham ko 4 baje vapas chal diye, is bar na mummy soi aur na hi sangita ko sone ka moka mila aur hum log raste bhar bate karte huye ghar pahuch gaye,

agle din subah se hi sangita mere aas pass mandra rahi thi aur mai samajh gaya tha ki meri randi bahna ki chut khub pani chhod rahi hai maine dekha mummy kichan mai hai aur maine sangita ko pakad kar apni god mai betha kar uske galo ko chumte huye halke se uske doodh ko chhu liya aur sangita mere sine se chipakte huye gahri sanse lene lagi,

sangita- bhaiya aaj mujhe bhi apne sath ghumane le chalo na

raj- are baby mai vaha ghumne thode hi jata hu jo tu kah rahi hai mai vaha kam karne jata hu

sangita- bahiya aap ne hi kaha tha ki tujhe ganne chusane le jaunga aur ab mana kar rahe ho

raj- achcha ja mummy se puchh le yadi mummy ha kah degi to le chalunga,

sangita meri god se uthi aur duad kar kichan mai chali gai aur mummy se kahne lagi aaj mujhe bhi bhaiya ke sath ganv ghumne jana hai,

rati- are pagal tu kya karegi vaha ganv mai bor ho jayegi

sangita- muh bana kar mai kuchh nahi janti mujhe to bas bhaiya ke sath jana hai,

rati- thik hai ja lekin apne bhaiya ko pareshan mat karna

sangita khushi se mummy ka muh chum leti hai aur phir mere sine se aa kar lipatte huye kahti hai bhaiya ab to mummy ne bhi ha kah diya hai ab to mujhe le chaloge na,

raj- maine sangita ke hontho ko ek dam se gahrai se chum liya aur sangita mujhse chipak gai, maine kaha ek shart par tujhe le jaunga

sangita- vo kya

raj- vaha mai tujhse jo kahunga vah tujhe karna padega,

sangita- muskurate huye, bhaiya aap mujhe nahi bhi le jate to bhi aap jo kahte mai vah jarur karti aakhir apne bhaiya ki bat kaise tal sakti hu

raj- maine sangita ki chhatiyo ko apne dono hatho se halke se dabate huye kaha meri gudiya rani ko bada khyal hai apne bhaiya ka, ab to mujhe apni bahna ko aaj lejana hi padega aur khub mast ganne chuswana padega, bol chusegi apne bhaiya ka ganna

sangita- ithlate huye, mai to kab se yahi chahti hu bhaiya lekin aapko mera khyal hi kaha rahta hai

maine sangita ki gudaj jawani ko sahlate huye usse kaha meri rani aaj mai teri sari shikayat dur kar dunga aur tu ek dam mast ho jayegi, kuchh der bad mai aur sangita taiyar ho gaye aur phir apni byke par sangita ko betha kar mai hariya aur ramu ke ganv ki aur chal diya,

mai byke bade aaram se chala raha tha aur sangita mere pichhe mujhse sat kar bethi thi, sangita ne jeans aur tshirt pahna hua tha aur apni tange byke ke dono taraf karke meri kamar pakad kar mujhse puri tarah sati hui thi jab koi braker aata to sangita mujhse aur bhi sat jati aur mera land khada ho chuka tha, kuchh hi der mai hum site par pahuch gaye aur maine majduro ko kam par lagane ke bad pedal sangita ka hath pakad kar use talab ke aaspass ghumane laga aur ganv ka najara dikhane laga, sangita kaphi khus lag rahi thi aur apni moti gand matkate huye mere aage aage chal rahi thi, mai thoda uske barabar mai pahuch kar dhire se uski moti gand mai hath marte huye usse puchhne lagaraj- sangita kaisa laga tumko ganv ka maholsangita- achcha lag raha hai bhaiya yaha to ped ki chhanv mai beth kar thandi hawa lene ka maja hi kuchh aur hai,raj- chal tujhe ganv ke ganne chuswata hu, bade mithe ganne hai yaha kesangita aur mai pedal ghumte huye hariya ke khet ki aur chal dete hai kuchh der bad hum dono hariya ke khet mai pahuch jate hai aur hame vaha chanda mil jati hai,raj- are chanda tumhara baba hariya kaha haichanda- babu ji vah sudhiya chachi ke khet ki aur gaye hai aur hame kah gaye hai jab tak hum aaye na tum kahi nahi jana,raj- achcha chanda dekho yah sangita hai aur sangita yah chanda hai tum dono bate karo mai hariya ke pass se aata hu uske bad mai vaha se chala gaya aur sangita chanda se bate karne lagi,jab mai ramu ke kheto ki aur pahucha to sudhiya bethi bethi ghas kat rahi thi aur hariya uske samne betha hua apne land ko dhoti ke upar se masal raha tha, maine dur se use aawaj di aur vah daud kar meri taraf aa gaya

raj- are maf karna hariya maine tumhe disturb kiya lekin mai apni bahan sangita ko lekar aaya hu aur kuchh der ke liye mai use yahi chhod kar site par ja raha hu tab tak tum use thoda garam karne ki koshish karo, uski chut se pani bahne lagna chahiye taki bad mai mujhe use chodne mai koi dikkat na ho,hariya- aap fikar na karo babuji bas aap hum par chhod do, uske bad mai vaha se chala gaya aur hariya sudhiya se yah kah kar chala gaya ki vah abhi aata hai,hariya jab apne khet mai gaya to sangita aur chanda use dekh kar khadi ho gai,hariya- are betho sangita betho hum jante hai tum hamare babuji ki pyari si bahna ho na, aapke bhaiya aapke bare mai hamse bahut bate karte hai, vah aapko bahut pyar karte hai,sangita- achcha aur kya kahte hai bhiya mere bare mai hariya- vo sab hum aapko batayege sangita lekin pahle kuchh pani vagairah to pili, chanda ja sangita bahan ke liye pani lekar aa aur phir chanda pani lekar aa jati hai, hariya jhopadi mai jata hai aur chanda ko ishare se bula kar uske kan mai kuchh samjha kar bahar aa jata hai, hariya- are chanda mai jara ramu bhaiya ke kheto mai kam se ja raha hu tu sangita bahan ko ganne ke kheto mai ghuma kar unhe achche mithe mithe ganne chusne ko de de tab tak mai aata hu, hariya vaha se chala gaya aur chanda sangita ke pass aakarchanda- chalo didi mai aapko mast ganne chuswaungi, aapko dekh kar lagta nahi hai ki kabhi aapne ganne chuse hai,sangita- ganne to nahi chuse chanda lekin ha ganne ka ras jarur piya haichanda- jor se haste huye, are didi jab tak ganna chusogi nahi ras kaha se nikalegasangita- are pagli ras ganne ko machine mai dal kar nikala jata haichanda- muskurate huye kaun si machin upar wali ya niche wali ya phir pichhe walisangita use gaur se dekh kar mai tumhara matlab nahi samjhi,chanda- didi kabhi tumne ganna dekha haisangita- are pagal vo samne lage to hai

chanda- muskurate huye are didi mai us ganne ki bat nahi kar rahi hu mai to us ganne ki bat kar rahi hu jo mardo ke aage jhulta rahta hai,chanda ki bate sun kar samgita ek dam se chauk jati hai aur use gaur se dekhti hui, muskura kar tu bahut badmash hai chanda kaisi bate karti hai,chanda - didi hamare ganv mai to ganna usi hathiyar ko kahte hai jo mere baba aur tumhare bhaiya ke pass hai aur usi ganne ko hum ganv ki aurte khub kas kar chusti hai,sangita- use ashcharya se dekhti hui, kya tumne vah ganna chusa haichanda- ha khub jee bhar kar aur mai to use apne niche bhi khub leti hu,sangita- kya teri shadi ho gai haichanda- are didi abhi shadi kaha hui hai abhi to mai bahut chhoti husangita- to kya bina shadi ke hi tu sab kar chuki haichanda- ha mai to roj hi chudwati hu,sangita- apne gale ka thuk gatkte huye, kya tu roj chudwati hai lekin kissechanda- apne baba se aur kissesangita- kya bakti hai bhala koi apne baba se bhi chudwata haichanda- lo kar lo bat hame to hamare baba roj puri nangi karke khub kas kas kar chodte hai,

sangita- use ashcharya se dekhti hui kya bat kah rahi hai chanda,

chanda- kasam se didi mai bhala aapse bekar mai jhuth kyo bolungi, sach didi chut marwane mai bada maja aata hai, kya aapka man nahi karta achche mote mote land se chudne ka,

sangita- karta to hai par kya karu

chanda- apne bhaiya ko kyo nahi fasa leti ho, mast thukai karege vah tumhari chut ki

sangita- nahi nahi mujhse yah sab nahi hoga tu apna idea apne pass rakh

chanda- achcha didi kabhi tumne kisi ko chudai karte dekha hai,

sangita- nahi re bhala mai kise dekh sakti hu

chanda- aapka man karta hai chudai karte huye dekhne ka

sangita- karta to hai lekin usse kya hoga,

chanda- aap kahe to mai aapko mast chudai karte huye dikha sakti hu

sangita - vah kaise

chanda- mere baba hai na vah abhi meri chachi sudhiya ko chodne hi to gaye hai

sangita- kya bat kah rahi hai

chanda- tum chalo mai tumhe aaj mast chudai dikhati hu aur phir chanda sangita ka hath pakad kar ramu ke ganno ke khet ki aur le gai jaha hariya sudhiya ke samne betha bate kar raha tha, hariya bar bar sudhiya ko apne land ka topa khol khol kar dikha raha tha aur sudhiya apne kam mai lagi hui mand mand muskura rahi thi,

sangita aur chanda dono ki nigahe hariya aur sudhiya par lagi hui thi,

kramashah........