नौकरी हो तो ऐसी

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The Romantic
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Re: नौकरी हो तो ऐसी

Unread post by The Romantic » 26 Dec 2014 09:22


अब एक नीचे बैठ गया और पॅंटी पाँव से बाहर निकाल के बुर मे घुस गया और उन घने बालो की बनी उस दरार मे अपना मुँह घुसा दिया….. उपर दोनो ने ब्लाउज निकाल दिया और एक एक आम को मुँह मे लेके चूसने लगे…. आअहह आहह की आवाज़ अभी गोदाम मे गूंजने लगी…. उपरके दोनो ने भी अपने हाथ नीचे लाके बुर के बालो को सहलाना शुरू किया… तीन तीन बड़े काले हाथ बुर को घिसने से मैनी जी पूरी पागल हुए जा रही थी … नीचे जो बैठा था उसने बुर के लाल लाल होंठो को चाटने के साथ बुर मे एक उंगली घुसा दी और मस्त अंदर बाहर करने लगा… बुर थूक से चमक रही थी …उपर दोनो निपल्स को अपने मुँह मे भरके चुसते चुसते पप्पिया लेते हुए उम्म्म्म… उम्म्म्मम आवाज़े निकाल रहे थे….

अब उन्होने उसे घोड़ी की तरह झुका दिया और गांद और बुर मे उंगलिया डालना शुरू किया… सामने से एक ने लंड मैनी जी के मुँह घुसा के चुसवाने लगा….

अब एक काले ने मैनी जी को अपने हाथो से उठाया और छोटी बच्ची की तरह उपर उठा कर कमर के उपर तक ले आया… और नीचेसे बराबर निशाना लगा के मैनी जी की बुर मे अपना लॉडा घुसेड दिया…. मररर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर गाइिईईईईईईईईईईईईईई बचााआआआआाआऊऊऊ…. इस जुन्गाआआआआअलिईईए से बचाआााू……. एक दम आवाज़ आई… वो काला लंड नीचे से एक दम बुर मेघुसने के कारण पूरा अंदर तक घुस गया था इस वजह से वो चिल्ला रही थी… और वो कला मैनी जी की एक ना सुनते हुए उनको अपने बड़े काले हाथो मे उठाए लंड पे उपर नीचे करते जा रहा था ….. मैनी जी एक दम बड़ी साँसे ले रही थी… और अपनी आवाज़ को नियंत्रण मे लाने की कोशिस कर रही थी …उस काले ने अब और ज़ोर्से दबा के गपॉगप लंड अंदर बाहर चालू किया और मैनी जी की पीठ को एक अनाज की बोरी से चिपका के झटके मारने लगा…. उसके झटको के प्रहार से मैनी जी की आँख से पानी निकल आया था, वो लगभा कसमसा रही थी… पाँव अकड़ रहे थे …अभी ऐसी चुदाई का अनुभव ना होने के कारण ये सब हो रहा था…..

उस पहले काले ने अपने पूरे लंड को उस कोमल मुलायम बालोसे भरी बुर मे उतार दिया था और घुड़सवारी किए जा रहा था… झटको की गति अचानक बहुत बढ़ गयी…मैनी जी पूरी कोशिश के साथ अपनी आवाज़ पे नियंत्रण पा रही थी … क्यूँ कि उनकी आवाज़े अगर कोई सुन लेता तो पूरा भंडा फुट जाता…. उस काले ने मैनी जी को नीचे उतारा और सारी उपर कर दी…. एक पैर हवा मे उठा के उसे एक हाथ से पकड़ लिया अब मैनी जी के दोनो हाथ सामने वाली बोरी पे थे…. और एक पैर हवा मे और एक ज़मीन पर…. उस काले ने पीछे से आके ज़ोर्से धक्के मारने शुरू किए… मैनी जी के चूतर और दूध बहुत ज़्यादा गति से आगे पीछे हो रहे थे… तभी वो काला रुक गया.. और उसने अपना पानी मैनी जी की चूत के अंदर छोड़ दिया …कुछ पानी नीचे टपकने लगा….

अब दूसरा आया और उपर मुँह करके नीचे सो गया और मैनी जी को लंड पे बिठाया. मैनी जी के हाथ अपने हाथो मे लिए और जमके पकड़के दबा के, नीचेसे बुर मे लंड घुसा दिया और अपनी गांद को उपर हिलाते हुए, उस बहती बुर के अंदर घुसाने लगा….. लंड अंदर घुसते गया… मैनी जी की साँसे बढ़ती गयी थोड़ी देर मे वो भी मैनी जी की बुर के अंदर ढेर हो गया और अब उस सूजी हुई बुर से और ज़्यादा पानी बहने लगा…..


तीसरा भी कहाँ रुकने वाला था उसने मैनी जी की घोड़ी बना दी और सवार हो गया…. मानो जैसे कोई लड़ाई करने जा रहा है ..एक पल मे उसने अपना पूरा लंड मैनी जी की चिकनी फूली सूजी बुर मे घुसा दिया और अपने रथ को बुर की सीमा की तरफ दौड़ने लगा…. ग्ाअपप्प्प्प्प्प…गाप्प्प्पालक्

कक्कक…..पकचह पापक्चह….पचाकककक पकक्ककचहाककक…. आवाज़े आ रही थी…. मैनी जी अभी भी अपनी आवाज़ पे काबू पाई हुई थी … पर उनका शरीर बहुत ही ज़्यादा कसमसा रहा था….. वो एक दम से अकड़ गयी थी … इसलिए एक ने आके मैनी जी की गांद को फैलाया और फिर तीसरे ने अपने धक्के फिरसे पूर्ववत करारे झटके मारने शुरू किए…. उपर से बुर एक दम लाल लाल और फूली हुई दिख रही थी… इन काले लुंडो का प्रहार उससे सहा नही जा रहा था….. आख़िर मे तीसरा भी गिर पड़ा उसने पूरा वीर्य अंदर तक छोड़ दिया….. मैनी जी के बुर के बाल पूरे सफेद लग रहे थे उनपे पूरा वीर्य जम गया था…. और सब बाल एक दूसरे से चिपक गये थे अभी घोड़ी अवस्था मे होनेके कारण तीनो का रस मैनी जी की बुर से नीचे गिर रहा था…..

क्रमशः...................


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Re: नौकरी हो तो ऐसी

Unread post by The Romantic » 26 Dec 2014 09:27

नौकरी हो तो ऐसी--19

गतान्क से आगे…………………………………….
अब तीनो थोड़े सुस्त हो गये और अपने कपड़े पहेन के निकल लिए… उनके पीछे ताइजी का पति निकल गया और अब बस बची थी मैनी जी - वो हल्केसे उठी उसने अपनी सारी के पल्लू से बुर से निकल रही लार को पोछा और सारी पहेन ली और ब्लाउस चढ़ा लिया ….और निकलने लगी… बोरियो का सहारा लेते हुए हल्के हल्के वो पिछले दरवाजे की तरफ बढ़ रही थी…. उसकी चाल से ये ज़रूर पता चल रहा था कि इस चुदाई ने उनकी चूत की लगा डाली है…. धीरे धीरे वो दरवाजे पे पहुचि और दरवाजा बाहर से खिच लिया… बाहर से कड़ी लगाने की आवाज़ आई थोड़ी देर मे गाड़ी जाने की आवाज़ आती रही..

मैं जहाँ छुपा था बोरियो के उपर वही था… और सोच रहा था कि ऐसा कौनसा राज़ होगा जिसके कारण कॉंट्रॅक्टर बाबू की पत्नी – मैनी जी इस चुदाई के लिए तैय्यार हो गयी…. और ताइजी के पति का उन तीनो के पास क्या काम था जो उसने मैनी जी को उनसे चुदवाया…



बाहर बहुत अंधेरा था, मैं बोरियोसे नीचे उतरा… गोदाम के बाहर निकाला और हवेली की तरफ चल दिया. हवेली पहुचते पहुचते 8 बज गये मैं फ्रेश होके बैठा ही था कि मालंबंती – कॉंट्रॅक्टर बाबू की छोटी लड़की आई और मुझे खानेपे बुलाया है कह के चली गयी…

मैं रसोई घर मे पहुचा, सब लोग बैठे थे मैने नीचे गर्दन की और जाके अपनी जगह पे बैठ गया… तभी

रावसाब बोले – और कैसे चल रहा है काम?

मैं- काम ठीक चल रहा है....

राव साब – तुम्हे वसूली का काम भी सौंपा है मैने सुना है?

मैं – हां…..

राव साब – अच्छा काम है …..मेहनत लगन से करोगे तो बहुत कुछ पाओगे


इस बात पर कॉंट्रॅक्टर बाबू और वकील बाबू राव साब की तरफ देख के आँखे मिचकाने लगे और हल्केसे हस्ने लगे…

ताइजी का पति भी वही बैठा था पर वो इन साबो की बातो पर ध्यान ना देते हुए खाना खा रहा था… मैनी जी दिख नही रही थी लग रहा था कि जबरदस्त चुदाई के कारण विश्राम करने गयी हो… ताइजी भी नही थी कही पे कल रात की चुदाई की वजह से उनकी भी हालत पतली होगी शायद…. और उसमे उन्हे पता भी नही था कि उसे चोदा किसने है…..

मैने बाकी महिलाओ पे नज़र डाली, छोटी बहू मेरे लिए खाने की प्लेट लेके आई… वो मस्त पल्लू वाली सारी पहनी हुई थी… और उसमे उसकी गांद के उभार और ज़्यादा घुमावदार लग रहे थे…. मैने एक नज़र सब पे डाली…. तभी मेरे दिमाग़ मे कुछ चमका…. किसी के तो निपल स्पष्ट मेरे दिमाग़ मे चमके…. मैने धीरे फिर नज़र घुमाई तो देखा छोटी बहू ने ब्रा नही पहनी थी और पीले रंग के ब्लाउस मे से उसके निपल चमक रहे है…. छोटी बहू की तरफ एक बार फिर देखा उसने मुझे हलकीसी आँख मारी …और आँख मारते मारते अपनी चुचियो की तरफ इशारा किया…


मैं चुपचाप नीचे देख कर खाना ख़ाता रहा, मुझे अक्सर लगता था कि सभी औरतो की नज़रे इस घर मे मेरे पे ही टिकी रहती है… इसलिए मैं उपर देखना टालता था पर जब भी कोई सब्जी या रोटी देने आता तो अपनी बड़े बड़े आमो का दर्शन दिए बिना नही जाता और अक्सर ज़्यादा टाइम तक मुझे दर्शन मिलता…
थोड़ी देर मे रसोईघर मे नलिनी आई…वोही नलिनी जिसको खुद अपने बाप-वकील बाबू और बाप जैसे दूसरे राव साब ने चलती गाड़ी मे चोदा था….

मैने देखा कि जैसे ही वो आई कॉंट्रॅक्टर बाबू बैचेन हो गये…… उनकी बैचैने का राज़ मुझे भली भाँति पता था ….वो सीधे पीछे चली गयी हाथ धोके आई और जहाँ पे बाकी लड़किया बैठी थी वही बैठ गयी… इधर लड़कियो के बारे मे एक विशिष्ट बात ऐसी थी कि वो ब्रा मतलब कमीज़ के अंदर कुछ भी नही पहनती थी…. इसीलिए उनके दूध जैसे ही वो चलने लगती उछलने लगते…. और मस्त लय ताल मे अपने दर्शन देने लगते…. फिर सामने वाला बूढ़ा भी क्यू ना हो उसका उठना ही उठना है….

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Re: नौकरी हो तो ऐसी

Unread post by The Romantic » 26 Dec 2014 09:28


मेरा खाना ख़तम हो गया मैं मुँह हाथ धोके दीवान खाने मे आ गया…. थोड़ी देर सेठ जी से बात की और उनकेपास ही बैठा रहा…. फिर सब लोग सोने जाने लगे…. मैने देखा मालंबंती- कॉंट्रॅक्टर बाबू की छोटी लड़की और नसरीन- वकील बाबू की छोटी लड़की मेरे पास आई …. और बोलने लगी


मालंबंती – आज हमे कहानी सुनाएँगे ना


नसरीन – हन आज वो हमे ज़रूर कहानी सुनाएगे

मैं – आज अभी……


मालंबंती – हां आपने ही तो कल बोला था

नसरीन – हां हां अपने बोला था कल सुनाउन्गा कहके….

मैं – पर अभी बहुत ज़्यादा वक़्त हो गया है मैं कल संध्या को सुनाउन्गा तुम लोगो को

वहाँ बाजू मे सेठ जी भी बैठे थे, वो हमारी बातें सुन रहे थे, उनको देख के लड़किया बोलने लगी

मालंबंती – दादाजी इन्हे कहिए ना हमे कहानी सुनाए

नसरीन – हां हां दादाजी कहिए ना कहिए ना………… मैं सेठ जी की तरफ देखने लगा

सेठ जी – अरे तुम लोग अभी इतनी बड़ी हो गयी हो अच्छे कॉलेज मे जाती हो अभी क्या कहानी सुनोगी…

मैं – आपका कहना बिल्कुल उचित है सेठ जी

मालंबनती – क्यू नही सुन सकते दादाजी, नलिनी दीदी तो आज भी कहानी सुनती है

नसरीन – वो कुछ नही दादाजी हमे कहानी सुननी ही है….

सेठ जी – ठीक है पर उसे थोड़ा काम है… (और मेरी तरफ देख कर सेठ जी बोले)…. वो छोटी बहू को तुम्हारे पास कुछ काम है… उससे ज़रा मिलके आना…

नसरीन – फिर हमारी कहानी का क्या

सेठ जी – वो आ जाएगा तुम्हे कहानी सुनाने थोड़ी ही देर मे …जाओ तुम लोग तब तक जाके अपनी पढ़ाई करो….

मैं सेठ जी का आदेश लेके छोटी बहू के कमरे पे पहुचा दरवाजे पे थपथपाया… दरवाजा खुला… दरवाजा खोलने वाला और कोई नही सेठानी जी थी ...

मैं बोला – आप्प्प्प…..

सेठानी – अरे तुम्हारी चुदाई बहुत याद आ रही थी

छोटी बहू- हां इसलिए ये इंतज़ाम किया है


मैं – पर मैं यहाँ नही रुक सकता इधर का निपटा के मुझे सेठ जी ने लड़कियो को कहानी सुनाने के लिए कहा है


छोटी बहुत – वो बाद मे देखेंगे पहले तुम अंदर तो आओ


सेठानी और छोटी बहू मस्त दिख रही थी…. सेठानी के गाल और छाती मेरे लंड को आवाहन दे रही थी और छोटी बहू के वो बड़े बड़े ब्लाउस मे से दिखने वाले निपल मुझे चूसने के लिए आम्न्त्रित कर रहे थे…. सेठानी मेरे पास आई और मेरी जाँघो पे हाथ रख के सहलाने लगी… मेरा लंड मे तनतना शुरू हो गया… उधर छोटी बहू ने अपनी सारी और ब्लाउस उतार दी… और बाद मे पॅंटी भी उतार के पूरी नंगी हो गयी… और दीवान पे लेट गयी… और मुझे आँख मारने लगी…

मैने अपनी पॅंट उतार दी उधर सेठानी ने भी अपने सारी निकाल दी…. जैसे ही मैने पॅंट निकाला सेठानी ने मेरा लंड अपने मुँह घुसेड लिया और पच्चाआक पकचाककक पुच पुचह पचाककककक आआवाज़ निकाल के उसे चूसने लगी….. मैने उसके मुँहे से लंड निकाला और सेठानी को छोटी बहू की बुर को गीला करने को कहा

सेठानी ने पचाक से उसकी बुर पे थूक दिया और मस्त बुर और मस्त दिखने लगी मैने अपना सूपड़ा उस कोमल गुलाबी योनीप्रवेश द्वार पे रखा और अगली ही पल अपने गन्ने को बिल मे घुसा दिया…. आअहह आआहह मसत्थत्टटटटटटटटटतत्त………… चोदूऊऊऊऊऊऊ मुज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज ईईई ईईईईई…. .बहुउऊुुुुुउउत्त्त तदपि हहुउऊउ 2 डिन्नस्ीईई …तुम्हरीईई इस लुंदड़ड़ के लिए.ईईईईई मैं धक्के मारते रहा वो मुँह के उपर तकिया रख के आवाज़े निकालती रही….. उतने मे बाजू मे अपनी चूत फैला के सेठानी सो गयी… मैने अपना नाग बिल से निकाला और सेठानी के फूल मे अपना हथौड़ा घुसा दिया… सेठानी मदमस्त होने लगी….. माआआआआआररर्र्र्र्र्र्र्र्ररर मेररीइ….आअहह माआआआआअज़ाआाआआआ आआआआआ रहाआ हाइयाीइ…… ज़ॉर्सीई….. ज़ोर्से…


मेरा इतना बड़ा लंड अभी पूरा का पूरा सेठानी की बुर मे फसने लगा, और किसी के बुर मे मेरा पूरा लंड नही समा सकता था अलावा सेठानी के… सेठानी के चूतर जगह पे ही फैल रहे थे और जमे रहे थे … बहू ने सेठानी की चुचिया अपने मुँह मे भर के उनको मस्त चूसना शुरू किया था उसकी वजह से सेठानी के बूब एक दम कड़क और निपल एक दम सख़्त हो गये….

मैने अपना लंड बाहर निकाला…. छोटी बहू के मुँह मे दिया उसने मस्त थूक डाल के उसको मस्त चूसा और फिर अपनी बुर मे ले लिया बहू की दूध से भरी चुचिया घोड़ी अवस्था मे जबरदस्त हिल रही थी… मैने धक्को की गति को तीव्र किया…. उतने मे सेठानी ने आकर लंड बाहर निकाल के मुँह मे भर लिया…गोतिया मुँह मे भर के उनकी अपनी जीब से मस्त मालिश कर दी…