खिलोना compleet

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raj..
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खिलोना compleet

Unread post by raj.. » 22 Oct 2014 02:51

खिलोना पार्ट--1



हेल्लो दोस्तों मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा आपके लिए एक और नई कहानी लेकर हाजिर हूँ

आज रीमा बहुत खुश थी & होती भी क्यू ना-उसकी शादी की पहली सालगिरह जो थी.पिच्छले एक-डेढ़ महीने से उसका पति रवि कुच्छ उखड़ा-2 सा & परेशान रह रहा था,पर आज सवेरे ऑफीस जाने से पहले उसने पहले की तरह उसे बाहों मे भर कर जम कर चूमा & प्यार किया था & जाते-2 कह गया था की ऑफीस से आधे दिन की च्छुटी लेकर आ जाएगा.रीमा भी उसे रिझाने & खुश करने मे कोई कसर नही छ्चोड़ना चाहती थी.

बाथरूम मे घुस उसने सारे कपड़े उतारे & शवर ओन कर उसके नीचे खड़ी हो गयी & रवि से हुई वो पहली मुलाकात याद करने लगी.पुणे के जिस हॉस्पिटल मे वो नर्स थी,रवि उसमे अपनी टूटी टाँग का इलाज करने के लिए अड्मिट हुआ था.उस दिन नया ड्यूटी रॉस्टर मिलने पे उसके वॉर्ड मे आज रीमा का पहला दिन था.रवि वाहा कुच्छ दीनो पहले ही अड्मिट हुआ था.जब वो उसे दवा देकर & उसका चार्ट चेक कर जाने लगी तो वो बोला,"नर्स."

"जी?"

"मैं आपके हॉस्पिटल मॅनेज्मेंट की चाल समझ गया हू?"

"जी?",रीमा ने हैरत भरी सवालिया नज़रो से उसे देखा.वॉर्ड के बाकी पेशेंट्स,नर्सस & स्टाफ भी दोनो की बात सुनने लगे थे.

"जी हां.आपका मॅनेज्मेंट बहुत चालक है.उसने जान-बुझ कर इतनी अच्छी नर्सस यहा रखी हैं की पेशेंट को आराम तलबि की लत लग जाए & वो ठीक ही ना होना चाहे,या फिर ठीक हो भी जाए तो यही पड़ा रहे & आराम की ज़िंदगी जीता रहे & हॉस्पिटल जूम के पैसे कमा सके."

उसकी बात सुनते ही वॉर्ड मे सभी की हँसी च्छुत गयी.रीमा भी मुस्कुरा दी & वॉर्ड से निकल गयी.रवि की इस बात पे किसी दूसरी नर्स ने कुच्छ जवाब दिया & वॉर्ड मे हँसी-मज़ाक का सिलसिला चल पड़ा.जहा सब दिल खोल कर हंस रहे थे वही रीमा बस मुस्कुराते हुए वाहा से निकल आई थी.

रीमा को शायद ही कभी किसी ने खुल कर हंसते या जम कर गप्पे लड़ाते देखा हो.लगता था जैसे वो खुद को रोक लेती थी अपनी भावनेयो का खुल कर इज़हार कर लेने से.शायद इसका कारण ये था कि वो 1 अनाथाश्रम मे पली-बढ़ी थी.1 आम बच्चा जैसे-2 बड़ा होता है तो अपने माता-पिता से चीज़ो के लिए ज़िद करता है,कभी उनसे रूठ जाता है तो कभी उनकी गोद मे चढ़ उनसे दुलार करवाता है.पर 1 अनाथ इन सब चीज़ो से महरूम रहता है & शायद इसी कारण वो अपनी चाह,अपने एहसास अपने दिल मे दबाना सीख जाता है.

रीमा अनाथ थी.उसने जब से होश संभाला खुद को अनाथाश्रम मे पाया.अनाथाश्रम की कर्ता-धर्ता थी मौसी.मौसी यानी मिसेज़.भटनागर,पता नही कब किसी बच्चे ने उन्हे मौसी कह दिया था.उसके बाद तो उनका नाम ही मौसी पड़ गया.मौसी का अपना भरा-पूरा परिवार था पर फिर भी वोआनाथाश्रम को पूरा वक़्त देती थी &रीमा को तो बहुत मानती थी.रीमा जल्द से जल्द अपने पैरो पे खड़ी होना चाहती थी सो स्कूल ख़त्म करते ही उसने नर्सिंग मे ग्रॅजुयेशन किया & इस हॉस्पिटल को जाय्न कर लिया.पर आज भी वो अपने अनाथाश्रम & मौसी को नही भूली थी & जब भी मौका मिलता वाहा उनसे मिलने ज़रूर जाती.

रवि के वॉर्ड मे ड्यूटी लगी तो रोज़ उस से मुलाकात होने लगी.उसे रवि 1 बड़ा ज़िंदाडिल & खुशमिजाज़ शख्स लगा.हर वक़्त हल्की-फुल्की बातें या फिर कोई मज़ाक करता रहता पर कोई भी बात तमीज़ के दायरे के बाहर नही जाती.इसी कारण सभी उसे पसंद करते थे.उस से मिलने आने वाले उसके दोस्त भी उसी के जैसे थे.

रीमा को 1 बात थोड़ा खाटकी.हॉस्पिटल मे मरीज़ो के पास उनका कोई रिश्तेदार ज़रूर रहता था पर रवि के पास कोई नही बस बीच मे 3-4 दीनो के लिए उसका बड़ा भाई शेखर आया था पर मा-बाप कभी नही आए.कोई और नर्स होती तो अब तक रवि के दूर के रिश्तेदारो का भी पता पूच्छ चुकी होती पर रीमा अपने काम से काम रखती थी & उसने उस से कभी कुच्छ नही पूचछा.

हा,हर दिन उसे उसके वॉर्ड जाने मे अच्छा लगता था.वो लड़का बातें ही ऐसी करता था.फिर रीमा की 2 दीनो की छुट्टी हो गयी.जब वापस आई तो पता चला कि रवि डिसचार्ज हो चुका है.उस दिन उसे वॉर्ड खाली-2 सा लगा.इसी तरह 4-5 दिन बीत गये.हॉस्पिटल मे मरीज़ आते हैं चले जाते हैं पर पता नही क्यू रवि का जाना उसे अच्छा नही लगा.

उस दिन शाम ड्यूटी ख़त्म कर जैसे ही वो निकली कि किसी ने उसे आवाज़ दी,"नर्स!"

उसने मूड कर देखा तो रवि खड़ा था.इतने दीनो तक उसने उसे बेड पे लेटे देखा था,आज पहली बार खड़े देख रही थी.रवि 6 फ्ट का लंबा,हॅंडसम नौजवान था,उम्र यही कोई 23-24 साल होगी.रीमा भी 22 साल की जवान लड़की थी & रवि की मारदाना खूबसूरती की दिल ही दिल मे तारीफ किए बिना ना रह सकी.

"हाई!नर्स.कैसी हैं?"

"हेलो.मैं ठीक हू.आपका पैर अब कैसा है?"

"बिल्कुल ठीक.डॉक्टर.साहब ने बुलाया था इसीलिए आया था.अच्छा हुआ आप भी मिल गयी.1 बहुत ज़रूरी काम था."

"अच्छा.कैसा काम?"

"आपको थॅंक यू कहना था & कॉफी पिलानी थी."

"क्या?!",रीमा हँसे बिना ना रह सकी.

"हां.जब डिसचार्ज हो रहा था तो मैने सभी डॉक्टर्स ,नर्सस & स्टाफ जिन्होने ने मेरा ध्यान रखा था,उन्हे थॅंक्स कहा था & कॉफी पिलाई थी.आप आई नही थी तो आपकी कॉफी बाकी थी."

रीमा को याद आया,जब वापस आने पे उसने रवि के बारे मे पूचछा था तो बाकी नर्सस ने बताई थी ये कॉफी वाली बात.

"अरे,रवि इसकी कोई ज़रूरत नही.बेकार मे परेशान मत होइए."

"इसमे परेशानी क्या है?कॉफी पीनी है कौन सा एवरेस्ट पे चढ़ना है."

रीमा को फिर हँसी आ गयी.,"वो ठीक है पर फिर भी रहने दीजिए."

"देखिए नर्स,मैं समझ रहा हूँ आप क्यू झिझक रही हैं.मेरा यकीन कीजिए मैं बस आपको थॅंक्स देने के लिए 1 कप कॉफी पिलाना चाहता हू,बस.वादा करता हू ना कोई उल्टी-सीधी बात करूँगा ना ही ऐसी-वैसी हरकत!ये जो बगल वाला केफे है ना वाहा बस 1 कप कॉफी पिएँगे जिसमे 15 या 20 मिनिट लगेंगे बस.फिर आप अपने रास्ते मैं अपने रास्ते."

raj..
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Re: खिलोना

Unread post by raj.. » 22 Oct 2014 02:51

"अरे,आप मुझे ग़लत समझ रहे हैं?आपके बारे मे ऐसा कुच्छ नही सोचा था मैने."

"तो फिर चलिए."

रीमा उसे मना नही कर पाई,"ओके.चलिए.",और दोनो केफे की ओर बढ़ गये.

केफे मे बैठ के रवि ने ऑर्डर कर दिया.

"आप क्या करते हैं,रवि?",रीमा ने पूचछा.

"मैं एस.एन इन्स्टिट्यूट से एमबी ए कर रहा हू."

"वह,वो तो बड़ा अच्छा इन्स्टिट्यूट है.आपकी तो लाइफ बन गयी!"

"क्या लाइफ बन गयी,नर्स!बस अपने पैरो पे खड़ा हो जाऊँगा,अपने खर्चे निकाल लूँगा."

"तो और क्या चाहिए 1 इंसान को?"

"नर्स,काम तो वो हो जिसे इंसान दिल से करना चाहे.मेरी नज़र मे सचिन तेंदुलकर दुनिया का सबसे लकी इंसान है.वो बचपन से क्रिकेट खेलना चाहता था सो खेल रहा है.केवल खेल ही नही रहा बल्कि शायद अब तक का सबसे महान क्रिकेटर है.और सोने पे सुहागा ये की इस के लिए उसे करोड़ो रुपये भी मिलते हैं.इंसान को तो ऐसा ही काम करना चाहिए पर सबकी ऐसी किस्मत कहा होती है."

"तो तुम क्या बनाना चाहते थे?"

"फाइटर पाइलट."

"तो बने क्यू नही?"

"मा के चलते.जैसे ही उसे पता चला की मैं एनडीए का फॉर्म भरने जा रहा हू,उसने ऑर्डर जारी कर दिया कि मैं सपने मे भी ऐसा नही सोचु.उसने कहा की उसका कोई बेटा उस से दूर फौज मे नही जाएगा...मैने उसे कहा की मा शेखर भैया तो तुम्हारे पास रहेंगे ही.मुझे जाने दे एर फोर्स मे & अगर कही जंग मे मर गया तो तू शहीद की मा कहल्एगी."

"फिर मा ने क्या कहा?"

"उसने खींच के 1 थप्पड़ लगाया & फिर रोते हुए मुझे अपने गले से लगा के प्यार करने लगी.ये माएँ भी अजीब होती हैं नर्स,निराला ही होता है इनका बच्चों को प्यार करने का तरीका."

रीमा बस हल्के से मुस्कुरा दी.उसे क्या पता था मा के प्यार के बारे मे.वेटर कॉफी रख गया तो वो कप उठाकर पीने लगी.,"तब तो रवि जब तुम्हारा फ्रॅक्चर हुआ तो वो बहुत परेशान हो गयी होंगी?"

"पता नही,नर्स."

"क्या मतलब?"

"पिच्छले 2 सालों से मा बीमार है.उसका दिमाग़ धीरे-2 काम करना बंद कर रहा है.दिमाग़ का वो हिस्सा जो इंसान का चलना,बोलना कंट्रोल करता है वो तो पूरा बेकार हो चुका है.मा केवल अपनी पलके झपका पाती है & खा पाती है,गर्दन & उसके नीचे का पूरे शरीर का 1 भी अंग ना हिला पाती है ना उनसे वो कोई काम ले पाती है...बस बेड पे खामोश लेटी रहती है,क्यूकी बोल भी नही पाती."

"डॉक्टर्स क्या कहते हैं?"

"पिताजी कहा-2 नही दौड़े मा के इलाज के लिए पर हर डॉक्टर ने यही कहा की बीमारी लाइलाज है."

"ओह."

थोड़ी देर दोनो खामोश रहे फिर रवि ने खामोशी तोड़ी,"..अच्छा तो नर्स-ये लो.यहा हम साथ मे कॉफी पी रहे हैं & मुझे अभी तक आपका नाम भी नही पता.आपके नाम क्या है,नर्स?"

"मेरा नाम रीमा है.",रीमा हंस पड़ी.

"अच्छा तो आपकी मा कैसी है?"

"पता नही.मैं अनाथ हू,रवि.",& रीमा ने उसे अपनी पूरी कहानी सुना दी.उसने उसे मौसी के बारे मे भी बताया & रवि ने अपने बाकी परिवार के बारे मे.उसके पिता विरेंड्रा साक्शेणा 1 बहुत ऊँचे सरकारी ओहदे पे थे & बड़े भाई शेखर ने अभी कॅल्कटा मे अपनी पहली नौकरी जाय्न की थी.उसका परिवार पंचमहल नाम के शहर मे रहता था.

"अच्छा रीमा जी,आप क्या बनना चाहती थी?"

"मैं...मैं सिंगर बनना चाहती थी."

"रियली!फिर आपने कभी कोशिश की."

"जिस स्कूल मे हम अनाथाश्रम के बच्चे पढ़ते ते थे वाहा म्यूज़िक भी सिखाया जाता था तो स्कूल तक तो मैने सीखा लेकिन उसके बाद मुझे अपने पैरो पे खड़े होने की जल्दी थी & म्यूज़िक के ज़रिए वो संभव नही था."

"ह्म्‍म्म.",रवि ने कॉफी ख़त्म कर कप नीचे रखा,"ये तो बड़ी अच्छी बात पता चली आपके बारे मे.म्यूज़िक का मुझे भी शौक है खास कर इंडियन क्लॅसिकल का.इस सनडे हुमारे इन्स्टी ऑडिटोरियम मे ट.जसराज का प्रोग्राम है.तो आप सनडे को वाहा आएँगी,मेरे साथ प्रोग्राम देखेंगी & मैं जो भी म्यूज़िक के बारे मे सवाल करूँगा उनका जवाब देंगी."

"अरे नही,रवि.मैं नही आ सकती."

"क्यू?आप इतना झिझकति क्यू हैं?मैं आपको आवारा लगता हू?"

"वो बात नही है,रवि."

"तो क्या बात है?सनडे को आपकी छुट्टी है,आपको म्यूज़िक से इतना लगाव है,फिर क्यू नही आ सकती? "

"रवि,बुरा मत मानो,प्लीज़.पर...मैं टिकेट -"

"-अरे,कोई टिकेट नही,मेरे इन्स्टी का प्रोग्राम है.मेरे पास फ्री पासेज हैं.अब तो आएँगी ना?"

"ठीक है,आऊँगी."

"ये हुई ना बात!",रवि ने बिल पे किया & दोनो केफे से बाहर आ गये.

"अच्छा,रीमा जी बाइ1सनडे को 5 बजे मेरे इन्स्टी के मैं गेट पे मैं आपका इंतेज़ार करूँगा."

"ठीक है,रवि.बाइ!"

रीमा को बड़ी हैरत हुई कि कैसे उसने 1 लगभग अजनबी से इंसान को अपनी कहानी सुना दी & उसके साथ अगली मुलाकात के लिए भी तैय्यार हो गयी.वो उस सनडे रवि से मिली & फिर दोनो आए दिन मिलने लगे,कभी किसी कॉन्सर्ट तो कभी किसी एग्ज़िबिशन मे.रीमा की सहेलिया तो उसे रवि के नाम से चिढ़ने लगी थी.उसकी रूम मेट सोनी तो हुमेशा उसे छेड़ती रहती थी.

raj..
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Re: खिलोना

Unread post by raj.. » 22 Oct 2014 02:52

"आ गयी हेरोयिन अपने हीरो से मिलके?"

"चुप कर,सोनी.वो बस दोस्त है."

"शुरू मे सब यही कहते हैं डार्लिंग,फिर कब दोस्त जान बन जाता है पता ही नही चलता!"उसने बेड पे बैठी रीमा को पीछे से पकड़ कर शरारत से कहा.

"अच्छा!तुझे बड़ा पता है इन बातो के बारे मे.तेरा 'दोस्त' कौन है भाई?"

"हमारी ऐसी किस्मत कहाँ!",उसने बड़े नाटकिया अंदाज़ मे कहा तो दोनो सहेलिया हंस पड़ी.

रीमा सचमुच रवि को दोस्त से ज़्यादा नही मानती थी ना कभी रवि ने कोई ऐसी हरकत की थी कि उसे लगता कि रवि कुच्छ ऐसा सोचता था,पर उसकी ये सोच उसे खुद ही तब ग़लत लगी जब रवि अपने भाई की शादी के लिए 10 दीनो के लिए पंचमहल चला गया.रीमा के लिए वो 10 दिन बड़े मुश्किल थे.उसका मूड उखड़ा-2 रहने लगा,वो रवि को इतना मिस करेगी उसने सोचा भी ना था.

उस रात बिस्तर पे करवटें बदलते उसने सोचा कि क्या सचमुच वो रवि को दोस्त से कुच्छ ज़्यादा समझने लगी थी.रवि आज सवेरा वापस आ गया था.उसने फोन किया तो रीमा ने मिलने की बात की पर उसने काम मे बिज़ी होने की बात कह कर मना कर दिया & परसो मिलने को कहा.पर उसी दिन रीमा अपने हॉस्पिटल की बस मे बाकी नुर्सो के साथ किसी ट्रैनिंग प्रोग्राम के लिए जा रही थी जब उसने सेंट्रल मार्केट के पास रवि को किसी लड़की के साथ बात करते देखा.वो लड़की बार-2 रवि का हाथ पकड़ रही थी.

ये देख कर जैसे रीमा के तन मे आग लग गयी.उसे उस लड़की पे बहुत गुस्सा आ रहा था.करवट बदलते हुए अपने इस रिक्षन का कारण खोजने लगी.क्या वो रवि से प्यार करने लगी थी?नही तो उसे उस लड़की से जलन क्यू हुई?पर क्या ये सही था.रवि इतने अमीर परिवार से था,क्या वो कभी उस जैसी अनाथ को अपनाएगा?उसे इस धोखे मे नही रहना चाहिए.उसने अपने दिल को बहुत समझाया कि रवि उसके लिए नही है पर दिल पे आज तक किस इंसान का ज़ोर चला है!