बदनाम रिश्ते

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rajaarkey
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Re: बदनाम रिश्ते

Unread post by rajaarkey » 02 Nov 2014 10:08



"नहीं नहीं बेटे .... गांड मत मार .... दुखता है रे ... तेरा यह मूसल तो फ़ाड़ देता है मेरी ... तू गांड खोलता है मेरी तो दिल धक धक करने लगता है रे बेटा डर के मारे ..."

"क्या अम्मा तुम भी ... कितना नखरा कर रही है आज ... इतने दिन से गांड मरा रही है और फ़िर भी कहती है कि दुखता है... सच बोल हफ़्ते में दो तीन बार नहीं मरवाती तू?"

"सच में दुखता है रे ... तू नहीं समझेगा .... मैं कहां मरवाती हूं, तू ही मार लेता है जिद करके .... गांड मत मार राजा ... ले मैंने चूत खोल दी तेरे लिये ... चोद ही ले पर गांड मत मार!"

"ये बात हुई ना, अब आई रास्ते पर. जरा और फ़ैला टांगें, रखने दे लंड तेरी चूत के दरवाजे पर .... ये ऽ ये घुसा अंदर ऽ ... अम्मा तू फ़ालतू में किरकिर कर रही है पर तेरी चूत कितनी पसीज रही है देख ... एक झटके में अंदर चला गया मेरा लौड़ा देख!"

"हां बेटे मैं क्या करूं ... तू आगोश में होता है तो पागल हो जाती है ये ... रस छोड़ती रहती है ... आह ऽ ... धीरे धीरे बेटे ... हौले हौले चोद ना .... चुम्मा दे ना बेटे ... चुम्मा ले लेकर चोद ... जरा प्यार से चोद ना अपनी मां को ... ऐसे रंडी के माफ़िक ना चोद"

"ठीक है मां ... धीरे धीरे चोदता हूं पर वायदा नहीं करता ... मेरा लंड बहुत मस्ती में है तेरी चूत का भूसा बनाना चाहता है ... असल में मां तू किसी रंडी से कम नहीं ... तेरे को देखते ही लंड खड़े हो जाते हैं लोगों के ... मेरे को मालूम है ... ले ... ऐसे ठीक है" ... चुम्मा दे ... तेरा चुम्मा बहुत मीठा है अम्मा .... जरा जीभ दे न चूसने को"

"ऊं ऽ अंम ऽ म ऽ चुम्म ऽ अं ऽ अं ऽ मं ऽ चप ऽ अरे जीभ क्यों चबाता है मेरी, खा जायेगा क्या ऽ ?"

"हां अम्मा चमचम है चमचम रसीली मीठी, चूसने दे जरा सप ऽ सुर्र ऽ अं ऽ ..... अम्मा तेरे मम्मे क्या नरम नरम हैं, रबर के बंपर जैसे लगते हैं छाती पर, भोंपू हैं भोंपू ऽ."

"हां राजा तभी तू ये भोंपू बजाता रहता है ना? ले और बजा, दबा ना और ऽ ... बहुत अच्छा लगता है रे .... हां ऐसे ही .... ओह ऽ कितना अच्छा चूसता है रे ... चूस मेरे लाल .... चूस .... चूस ले मेरे निपल मेरे राजा ... पी जा मां का दूध .... हाय ऽ ओह ऽ अरे काट मत ... कैसा करता है? ... हां ऐसे ही चूस ... और ... और जोर से .... हाय चोद ना अब"

"अम्मा, अब देख कैसे चूतड़ उछाल उछाल कर चुदवा रही है .... अभी कह रही थी कि धीरे धीरे बेटे .... रंडी जैसे ना चोद ... अब खुद रंडी जैसी चूतड़ उछाल कर मेरा लौड़ा खा रही है"

"अरे तू नहीं समझेगा मेरे लाल एक मां के दिल की हालत जब उसका जवान बेटा उसकी चूंचियां चूसता हुआ उसे चोद रहा हो ... चोद बेटे चोद ... और जोर से चोद ... तोड़ दे मेरी कमर ... मैं कुछ न बोलूंगी ... चोद चोद कर अधमरी कर दे मुझे ... चोद मेरे लाल .... और जोर से चोद ... जोर से धक्का लगा ना .... पेल दे मेरे लाल लाल ... पूरा पेल दे अंदर ... ओह ऽ ओह ऽ ... हाय ऽ ... ऐसे ही मेरे बेटे .... और जोर से मार .... लगा जोर से ... घुस जा अपनी मां की बुर में ऽ ... उई ऽ मां ऽ आह आह उई मां ऽ ऽ ऽ ऽ चोद चोद कर मार डाल मेरे बेटे ... खतम कर दे रे मुझे ऽ ऽ इस रंडी से पैसा वसूल कर ले रे चोद चोद के ... मैं सच में तेरी रंडी हूं मेरे राजा बेटा ..."

"ले अम्मा ऽ ... ले ... चोद डालता हूं तुझे आज ... ले ... और जोर से मारूं ऽ ? .. ये ले ... और ये ले ... तेरी चूत का आज भुजिया ऽ बना ऽ दे ऽ ता ऽ हूं ऽ ये ले ऽ आया मजा? ऽ नहीं आया ? ऽ तो ये ले .... ओह ऽ ओह ऽ आह ऽ आह ऽ ओह अम्मा ऽ ऽ ओह ऽ आह ऽ आह आ ऽ आ ऽ आ ऽ आह ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ"

..... कुछ देर के बाद ....

"मेरे राजा ऽ मेरे लाल ऽ थक गया ना? बहुत मेहनत की है तूने रे बेटे आज .... अपनी मां को पूरा सुखी कर दिया बेटे ... भगवान तुझे लंबी उमर दे ... ले चूस मेरी चूंची जैसा बचपन में करता था और सो जा अब ... रात बहुत हो गयी है."

"अम्मा ऽ बहुत मजा आया अम्मा ... तू कितनी मस्त है ... रूप की खान है ... अम्मा .... तेरा दूध पीने का मन करता है अम्मा."

"अब दूध कहां से आयेगा मेरे लाल ... मेरी उमर हो गयी है ... जवान होती तो कहती कि बेटे चोद चोद कर मेरे से बच्चा पैदा कर दे और पी मेरा दूध. अच्छा ऐसा कर बहू ले आ ... शादी कर ले ... फ़िर बहू का दूध पीना."

"मुझे नहीं करनी शादी अम्मा ... तेरे से ज्यादा रूपवती कौन होगी ... तेरे ये मोटे मोटे पपीते से मम्मे ... ये रसीली लाल लाल चूत .... ये मतवाली पहाड़ सी गांड ... ये मोटे मोटे चिकने पैर ... ये गोरी फ़ूली रान .... तेरा ये गोरा गोरा थुलथुला बदन .... माल है अम्मा .... असल माल है .... खोवा है खोवा ... मावा... मुझे शादी की क्या जरूरत है?"

"पगला है रे तू पगला ! .... बिलकुल मां का दीवाना है. अच्छा चल सो जा."
..... दूसरे दिन ....


"आ गया बेटे, आज फ़िर से देर हो गयी आफ़िस में?"

"हां अम्मा, क्या करूं बहुत काम था, चल मैं आता हूं नहा कर, बहुत भूख लगी है"

"मैं हूं ना मेरे लाल तेरी भूख मिटाने को. चल आ जा जल्दी"

"जानता हूं अम्मा, सिर्फ़ तू ही है जो मेरी भूख मिटाती है. अभी आता हूं"

"ठीक है, वैसे पराठे बना रही हूं आज, तेरी ही राह देख रही थी."

..... कुछ देर के बाद ....

"आ गया मेरा राजा बेटा! अरे ये क्या कर रहा है? कैसा चिकना लग रहा है नहा धो के!"

"चिकनी अम्मा का चिकना बेटा, है ना अम्मा? जरा ऐसे सरक ... बस ठीक है"

"अरे ये क्या कर रहा है मेरे पीछे बैठ कर ... और साड़ी क्यों उठा रहा है रे नालायक?"

"चुप कर अम्मा. और तू भी इसी की राह देख रही थी ना? तभी अंदर चड्डी नहीं पहनी, तुझे मालूम है मेरी चाहत"

"अरे ... अरे भूख लगी है ना? ... मुझे पराठे बनाने तो दे"

"तू बेल ना अम्मा, तेरे हाथ थोड़े पकड़ रहा हूं. मुझे तो बस मन कर रहा है इन गोरे गोरे तरबूजों में मुंह मारने का ... अं ... अं ... हं .."

"छोड़ ना, हमेशा करता है ऐसा, मैं यहां रसोई में रोटी बनाती हूं तो पीछे से मेरी साड़ी उठा कर मेरी गांड चूसने लगता है ... अरे छोड़ ... उई ऽ जीभ क्यों डालता है रे अंदर ... गुदगुदी होती है ना"

"चूसने दे अम्मा, मजा आता है ... स्वाद भी मस्त है ... सौंधा सौंधा मेरे लंड को भी भाता है ... आज उसे भी चखाऊंगा"

"हाय ऽ गांड मारेगा मेरी? परसों ही तो मारी थी रे ... आज मत मार ना ऽ."

"मेरा बस चले तो रोज मारूं अम्मा. पर तू कहां मारने देती है! अब नखरा मत कर. मुझे जरा वो घी का डिब्बा दे, तेरी गांड में चुपड़ दूं."

rajaarkey
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Re: बदनाम रिश्ते

Unread post by rajaarkey » 02 Nov 2014 10:09

"अरे ... रुक ना ... मत मार मेरे लाल .... पिछले हफ़्ते मैं रोटी बना रही थी तब कैसा चिपक गया था मेरे से ... तेरे धक्कों से एक रोटी नहीं बनी मेरी आधे घंटे, एक दो बनाई वो सब टूट गई ... देख ... तेरे को ही खाने में देर लगेगी ..."

"अभी नहीं मारूंगा अम्मा ... वैसे तेरी कसम, अगर जोर की भूख नहीं लगी होती तो यहीं रसोई में मार लेता तेरी इस प्लटफ़ॉर्म पे दबा के ... अभी बस घी लगा देता हूं ... बाद में फाल्तू टाइम बरबाद होगा"

"तू मानेगा नहीं..... आज घी से चिकनी कर रहा है मेरे भाग ... नहीं तो तू है बड़ा बेरहम, पिछली बार सूखी ही मार ली थी .... कितना दुखा था मुझे!

"कुछ दुखा वुखा नहीं था अम्मा, सब तेरा नखरा है, कैसे कमर हिला हिला कर मरवा रही थी परसों कि मार बेटे और जोर से मार."

"वो तो बेटा तू मेरे बदन से कहीं भी लगता है तो मुझसे रहा नहीं जाता ... पर दुखता है सच ... आह तेरी उंगली जाती है तो गुदगुदी होती है बेटे .... हां ऐसे ही ... और अंदर तक लगा ना ... ओह ... अरे ऽ दुखता है ना .... दो उंगलियां क्यों डालता है रे दुष्ट?"

"अम्मा दो ही तो हैं ... मेरा लंड कैसे ले लेती है? ... वो तो चार उंगली के बराबर है ... हां जरा अपनी साड़ी उठा कर पकड़, बीच में आती है और फ़ालतू पकर पकर मत कर, लगाने दे अंदर तक. चल हो गया"

"अरे ये उंगली क्या चाटता है ... गंदा कहीं का ... गांड में उंगली की था ना ... अब उसी को ... छी छी"

"घी लगा है अम्मा, उसे क्यों बरबाद करूं? और मां, तू जानती है कि तेरी कोई बात, तेरा कोई अंग मुझे गंदा नहीं लगता ... मेरा बस चले तो तेरी गांड में मिठाई भर दूं और फ़िर वहीं से खाऊं"

"छी छी ... दिमाग खराब हो गया है तेरा ..."

"छी छी कर रही है और अपनी जांघें घिस रही है ... मजा आ रहा है ना अम्मा मेरे को तेरी गांड का स्वाद लेता हुआ देख कर?"

"चल बदमाश ... अब खाना बनाने देगा या नहीं?"

"बना ना अम्मा, सच अब नहीं रहा जाता, फटाफट पराठे बना ले और फ़िर तू भी मेरे साथ बैठ जा खाने पे, नहीं तो फ़िर बाद में खायेगी, साफ़ सफ़ाई में आधा घंटा बरबाद करेगी और ये तेरा गुलाम, तेरे रूप का मतवाला बेटा लंड पकड़कर बैठा रह जायेगा"
"चल हो गया बेटा, आ जा और खा ले"

"मां ... तेरे मुंह से खाऊंगा आज"

"अरे ये क्या हो गया है तेरे को? भूख लगी है ना? तो खा ना हाथ से, वैसे देरी हो जायेगी बेटा"

"मैं खा रहा हूं अम्मा पर बीच बीच में एक एक निवाला दे ना तेरे मुंह से, तेरे मुंह के स्वाद से खाने का जायका दूना हो जाता है अम्मा"

"ठीक है मेरे लाल ... अं... अं .... ये ऽ ले ऽ "

"और चबा अम्मा, जरा मुंह का स्वाद लगने दे ..."

"अं ... क्यां ... नॉलॉ..यंक ... लं ... ड़का है ... अं अं .. ले"

"मजा आगया मां, बस हर दो मिनिट में एक निवाला देती जा .... आज मस्त पिक्चर लाया हूं ... बेडरूम चल और मेरी बाहों में आ, फ़िर दिखाता हूं, तुझे मजा आ जायेगा"

"सच बेटे? पिछले हफ़्ते वाली भी बहुत अच्छी थी ....वैसी ही है क्या?"

"थोड़ी अलग है अम्मा पर मजा आयेगा तुझे. पिछले वाले में लंड ही लंड थे, आज बस चूतें ही चूतें हैं."

"अं ... अं .... ले बें ... टा ... तें ...रा ... निवॉला ... फ़िर तेरी ज्यादा पसंद की है, मुझे क्यों दिखाना चाहता है?

"अम्मा नाटक मत कर, उस दिन जिस औरत को वो चार चार मर्द चोद रहे थे, उस औरत की गोरी गोरी चूत देख कर कैसे बोल रही थी कि बेटा कितनी प्यारी चूत है ... चूसने को मन करता है मेरा भी ..., और पिछले महने वाली पिक्चर देखते वक्त बोल रही थी कि वो औरत कैसे मस्त चूत चाट रही थी उस लड़की की, काश कोई औरत मेरी भी ऐसी चाटती"

"नालायक ... अम्मा की बात पकड़ कर रखता है तू ... अब मस्ती में तो कुछ भी मुंह से निकल जाता है रे ..."

"नहीं अम्मा, मस्ती में मन की बात होंठों पर आ जाती है. वैसे इसीलिये आज बस चूतें और बुरें दिखलाऊंगा तेरे को, तेरी हर खुशी में मेरी खुशी है. अच्छा ये बता मां, तेरा मन होता है और किसी से चुदवाने को? याने तू इतनी गरम है, मैं थक जाता हूं पर तेरी भूख नहीं मिटती, बोल तो इंतजाम करूं कूछ, तेरी जैसी मतवाली माल औरत को चोदने को तो कोई भी तैयार हो जायेगा खुशी से ... लाऊं आपने यार दोस्तों को? या नौकर रख लूं एकाध, दिन भर तुझे चोदा करेगा."

"बेटा ... क्यों अपनी अम्मा को ऐसे शब्द कह रहा है ... मुझसे नाराज है क्या ... बोल ना ... तेरे सिवा मैंने किसी की ओर आंख उठा कर भी नहीं देखा मेरे बच्चे और तू .... हं ..."

"अरे बुरा मत मान मां, मैं नाराज होकर नहीं कह रहा, सच कह रहा हूं, तुझे मैं हर खुशी देना चाहता हूं ... मैं जानता हूं कि तेरी तबियत कितनी गरम है ... अगर तेरे मन में और लंडों से चुदवाने का खयाल आता हो तो ये तेरा अधिकार है अम्मा .... अपने मन को मत मार"

rajaarkey
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Re: बदनाम रिश्ते

Unread post by rajaarkey » 02 Nov 2014 10:11

ये क्या कहता है बेटे ... तेरे सिवा किसी से चुदाने की मैं सोच भी नहीं सकती ... तू इतना प्यारा है ... मेरा लाड़ला बेटा है ... मेरी ही चूत से निकला है, खूबसूरत जवान है.... तुझसे चुदाने में जो मजा है वो और कहां मेरे लाल?"

"वो तो ठीक है अम्मा पर तू है बड़ी गरम, एक आदमी से तेरी ये गरमी ठंडी नहीं होगी. मेरे को मालूम है कि दिन में मैं नहीं होता तब तू तड़पती रहती है बदन की इस गरमी से, मेरा बस चलता तो दिन भर घर रहता पर मां ... नौकरी करना है ... और वैसे भी लंड आखिर कितनी बार खड़ा होगा ... मुझे कभी कभी लगता है मां के तेरे को कम से कम एक और लंड चाहिये"

"चल अब इस विषय की बात मत कर ... मैं देख लूंगी ... अरे मैं लाती हूं ना केले और ककड़ी ... तुझे तो मालूम ही है ... भले ही उनमें वो बात न हो जो ... और तू चूसता भी तो है मेरे लाल ... इतना अच्छा लगता है मुझे बुर चुसवा कर ... मेरी बुर पूरी खुश हो जाती है ... चल खाना हो गया ना, अब ले चल मुझे. साफ़ सफ़ाई सुबह उठ कर कर लूंगी"

"वा अम्मा अभी अभी नखरे कर रही थी और अब खुद ही बेताब है. .... क्या बात है ... चूत वाली पिक्चर के नाम से मजा आ रहा है लगता है."

"तू कुछ भी समझ पर चल ना अब."

"चल अम्मा, नंगी होकर आजा मेरे कमरे में, मैं तब तक पिक्चर लगाता हूं. आज ब्रा और पैंटी भी निकाल दे, पूरी नंगी हो जा, ब्रा पैंटी में तेरे से मुहब्बत करने का टाइम नहीं है, पिक्चर भी लंबी है."

..... कुछ देर के बाद ....

"अरे ये कुरसी में क्यों बैठा है, लेटे लेटे नहीं देखेगा पिछली दफ़ा जैसे?"

"वो उसमें ठीक से नाहीं दिखता अम्मा, गर्दन दुखती है"

"अरे पिछली बार तो मजे से देखी थी, याने मैं नीचे पट लेटी थी और तू मेरे ऊपर चढ़ कर ... बस हिल बहुत रहा था तू ... बार बार बस धक्के लगा रहा था."

"अब लंड तेरी गांड में हो तो धक्के लगाने का मन तो होगा ही मां, इसीलिये आज तुझे गोद में बिठा कर दिखाऊंगा, चल जल्दी आ, ऐसे खड़े हो जा मेरे सामने... अरे ऐसे नहीं, मेरी ओर पीठ करके ... पिक्चर नहीं देखनी है क्या? चल लंड ले मेरा अपनी गांड में और बैठ गोद में"

"पिक्चर देखनी है बेटे पर तू ऐसे बैठता है तो तेरे ऊपर बैठ कर चोदने में बड़ा मजा आता है मेरे लाल. चोद लेने दे ना एक बार, तेरी कसम. एक बार लंड तूने पीछे डाला कि आगे की मेरी इस सौतन की तुझे सुध ही नहीं रहती "

"मां, अब उतावली न हो, तेरी इस जालिम सौतन की ... चूत के लिये भी इंतजाम किया है मां, ये देख"

"हाय, ये केले कहां से लाया रे? बहुत बड़े हैं, पिछले हफ़्ते तो छोटे वाले लाया था. पर बेटे, वो टूट जाते हैं बार बार. मजा नहीं आता, और बिना छिले तू डालता नहीं है"

"और क्या मां, बिना छिले डाले तो तेरी चूत का रस कैसे लगेगा उसमें. फ़िकर मत कर, ये आधे कच्चे हैं, टूटेंगे नहीं. वो आज आते आते ये केले दिख गये, मद्रासी केले, एक एक फ़ुट के, ये हैं तेरी चूत के लायक - नहीं तो वो छोटे वाले तो तेरी चूत ऐसे खा जाती है जैसे ..... अब बक बक मत कर और आ जा .... हां ऐसे .... लौड़ा तेरी गांड पर रखता हूं .. अरे चूतड़ पकड़कर खींच ना, जरा छेद खोल ... हां ऐसे ... अब बैठ जा मेरे लंड पर

"ओह ... उई मां ... दुखता है बेटे"

मां अभी तो बस सुपाड़ा अंदर गया है ... पूरी नीचे बैठ जा मेरी गोद में .... ये ... अब देख कैसे सप्प से अंदर गया .... आ जा चुम्मा दे मुझे ... तेरे मम्मे दबाने में मजा आता है अम्मा ऐसे गोद में बिठा कर गांड मारते वक्त. ले पिक्चर शुरू करता हूं"

जोर से दबा ना मम्मे ऽ हाऽ य ऽ कैसा खड़ा है रे तेरा .... दुखता है ... इतना मोटा है .... लगता है जैसे मेरे पेट में घुस गया है .... कैसा मेरी गांड के पीछे पड़ा रहता है रे नालायक, ओह ...."

"मां मैं तो तेरे पूरे बदन के पीछे दीवाना हूं और खास कर तेरी गांड का .... सच अम्मा, किसी बेटे को अपनी मां की गांड मारने में क्या आनंद आता है तू नहीं जानती ... लगता है कि कोई बड़ा बुरा गंदा सा ... हरामीपन का काम किया जा रहा है ... अब चपर चपर बंद कर और पिक्चर देख. देख उस जवान लड़की को, तू चपर चपर कर रही थी तब तक वो नंगी भी हो गयी देख"

"कितनी अच्छी लड़की है बेटे... बहुत खूबसूरत है .. देख कैसे मुठ्ठ मार रही है ... अकेली ही है ... तू कहता था कि और भी औरतें हैं इस पिक्चर में .... ये लड़की छोटी लगती है ना? लगता है स्कूल में है"

"छोटी वोटी कुछ नहीं अम्मा, बीस बाईस की होगी ... ये पिक्चर वाले बनी देते हैं उन्हें ऐसा ... स्कूल की लड़की जैसी चोटी बांध देते हैं ... अब देख उसकी मौसी आई ... देख कैसे भांजी को प्यार कर रही है .... अब देख पूरा पिक्चर ... अब कुछ देर में लड़की की मां भी आयेगी."

..... कुछ देर के बाद ....


"बेटे ... बेटे ... जोर से कर ना .... मन नहीं मानता रे ... झड़ा दे ना मुझको .... वो देख वो छिनाल औरत कैसे अपनी बेटी से जबरदस्ती चूत चुसवा रही है ... वो देख ... कैसे उसके बाल पकड़कर अपनी बुर पर उसका मुंह रगड़ रही है और वो दूसरी औरत .... उसकी मौसी ....हाय देख ना बेटे ... कैसे उस बच्ची की चूत पर पिल पड़ी है .... बेटे .... जोर से चोद ना मुझे केले से .... कितना जुल्मी है रे .... बस तरसाता जाता है .... मां की परवा नहीं है तुझे? ओह ऽ ओह ऽ"

....
....

"परवा कैसे नहीं है मां, तभी तो ये पिक्चर लाया हूं आज, मुझे पता था तुझे अच्छी लगेगी. अब ये केला अंदर बाहर तो कर रहा हूं, तू झड़ती नहीं है तो मेरा क्या कुसूर है, ये भी टूट जायेगा अगर ज्यादा जोर से किया तो, दो केले तो तोड़ चुकी है अब तक, देख कैसे यहां प्लेट पर पड़े हैं .... मां देखा ये केले कैसे लगते हैं ... जैसे घी और शहद में डुबोए हों ... मैं बाद में खाऊंगा मां मस्ती ले लेकर ..... ओह ऽ .... गांड सिकोड़ती है तो मजा आता है अम्मा.... और कर ना ... लगता है कि अभी तेरी कस के मार लूं, सच अम्मा .... तेरी गांड बहुत गरमा गरम है ... ले नीचे से ही तेरी मारता हूं ... ले .... ले .... ले ऽ"

...
...

ओह बेटे ... उई मां ... झड़ गयी रे मैं मेरे लाल ... ओह ऽ ओह ऽ कितना अच्छा लगता है रे ... ओह ... हाय ... पिक्चर खतम हो गयी रे ... उस लड़की पे क्या क्या करम किया उन दोनों छिनालों ने ... मैं होती तो और करती बेटे ... और लगा ना .... और पिक्चर नहीं है? ... ये वाला ही लगा दे ना फ़िर से .... वो देखा कैसे वो मौसी उस लड़की के मुंह में मूत भी रही थी ... और वो मुंहजली भी मजे लेकर पी रही थी जैसे शरबत हो ... तभी तूने झड़ा दिया ... ठीक से देख भी नहीं पाई ... लगा ना पिक्चर फ़िर से ...

"अब कल लगाऊंगा मां ... मेरे से सहन नहीं होता ... इन पिक्चरों में तो कुछ भी दिखाते हैं ... और गंदे गंदे करम होते हैं ... मैं और ले आऊंगा पर ओह ओह ऽ अब नीचे लिटा कर कायदे से तेरी मारता हूं .... मां कसम क्या गरम है तेरी गांड मां .... ले .. ये ले ... और जोर से पेलूं ... तेरी गां ऽ ड का ऽ ... कचू ऽ ...मर ... बना ऽ देता ऽ हूं आज ...ये ले ... ओह ... ओह .... ओह ... आह .... आह ऽ ऽ आह ऽ ऽ ऽ"

..... कुछ देर के बाद ....

"बेटे एक बात कहूं?"

"हां बोलो मां, हुकुम करो. आज तो मजा आ गया मां तेरी मारने में ... और वो केले भी क्या जायकेदार थे .... तेरी चूत का रस तो अमरित है मां अमरित. बोल क्या कह रही थी? और पिक्चर ले आऊं ऐसा ही? क्या बात है मां? चूतें भी भा गयीं आखिर तुझे."

"हां बेटे, कितनी खूबसूरत थी वो दोनो औरतें और वो लड़की तो सच में बहुत सुंदर थी. मुझे कमला की याद आ गयी बेटे."

"कौन कमला मां?"

"अरे वो मेरी चचेरी ननद की भांजी, बेचारी का कोई नहीं है, मां बाप बचपन में ही गुजर गये ना, वो उसकी मौसी ने ही पालपोसकर बड़ा किया है, वहीं रहती है, अब शादी की उमर हो गयी है करीब करीब."

"हां तो अम्मा? चाची शादी रचा रही है उसकी?"

"हां बेटे ... बोली नहीं पर लगता है मन में है उसके"

"चलो अच्छा है मां, लड़का देख तू भी उसके लिये"

"बेटे ... तू कर ले ना उससे शादी."

"मैं शादी वादी नहीं करने वाला अम्मा"

"अरे बहुत सुंदर लड़की है, जरा छोटी है, अभी उन्नीस की हुई होगी पर तू हां कहेगा तो मैं मना लूंगी सब को, आखिर मेरा बेटा भी तो जवान है, इतना कमाता है. वो लोग तो उछल पड़ेंगे, उनको भी कहां तुझसे अच्छा लड़का मिलेगा"

"अब मां, मैंने पहले ही कहा था कि शादी ब्याह की जरूरत नहीं है मुझे, तू जो है मेरी हर जरूरत पूरी करने को. और मैंने तेरे को वो मंगलसूत्र नहीं पहनाया था उस दिन?"

"अरे वो तो ऐसे ही ... बदमाश कहीं का ... मेरे को तेरा मंगलसूत्र पहना देख कर तेरा लंड ऐसा हो गया था जैसे लोहे की सलाख ... वो बात अलग है बेटा ... वो तो मेरे तेरे बीच की बात है"

"पर मां, मेरे लिये तो तू ही मां है, तू ही मेरी बीवी, लुगाई, सब कुछ. अब उस लड़की से शादी करके मैं क्या करूंगा?"

"अरे कर ले ना. सच में बड़ी रूपवती है. तुझे बहुत पसंद आयेगी. बहू घर में आये तो मुझे भी कुछ आराम मिलेगा."

"तो क्या मैं तुझे इतना रगड़ता हूं कि तेरे को मेरे से आराम चाहिये?"

"हंस रहा है ना, हंस, और हंस, तेरे को मालूम है कि तू मुझे चौबीस घंटे रगड़ेगा फ़िर भी मैं तेरे को आशिर्वाद ही दूंगे मेरे राजा. अरे घर का भी काम होता है, अब मेरी उमर हो चली है, घर के काम को तो जवान बहू चाहिये ना?"

"ऐसा बोल. पर अम्मा, घर में कमला हो ना हो, चोदूंगा तो मैं बस तुझे ही. अब वो बालिका घर में रहेगी तो उसे पता चल ही जायेगा कि ये बेटा अपनी मां के पीछे दीवाना है. तब वह हाय तोबा नहीं मचायेगी?"

"अरे मैं सब संभाल लूंगी. उसे बता भी दूंगी."