खेल खिलाड़ी का compleet

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raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 12 Nov 2014 04:27

प्रोफेसर की ज़ुबान की हर्कतो से परेशान हो उसने किस तोड़ी & उसके आगोश से छूट के घूम गयी मगर प्रोफेसर ने उसी वक़्त उसे पीछे से अपनी बाहो के घेरे मे ले लिया & उसके पेट को सहलाते हुए उसके दाए गालो को चूमने लगा.ऐसा करते ही प्रोफेसर का लंड अब उसकी गंद के उपर आ लगा था & खुमारी अब उसके उपर हावी होने लगी थी.पेट पे फिसलते उसके हाथो की कलाईयो को पकड़ वो उसकी किस्सस का मज़ा ले रही थी.1 बार फिर प्रोफेसर ने उसके होंठो को चूमना चाहा तो उसने मुस्कुराते हुए मुँह फेर लिया.प्रोफेसर ने उसके लंबे,घने बालो को उसके बाए कंधे के उपर से आगे उसकी बाई छाती पे किया & उसकी गर्दन के दाई तरफ चूमने लगा.दिव्या प्रोफेसर से आड़ के खड़ी हो गयी & हल्की-2 आहे भरने लगी.

चूमते हुए प्रोफेसर गर्दन के पीछे आया & वाहा से नीचे उसके ब्लाउस की बॅक से झाकती पीठ पे.दिव्या को यकीन था की अब वो उसका ब्लाउस उतारेगा मगर प्रोफेसर ने उसे 1 बार फिर ग़लत साबित किया & वाहा से नीचे उसके पेटिकोट & ब्लाउस के बीच के नुमाया हिस्से को चूमने लगा.पेटिकोट काफ़ी नीचे से बँधा था & इस वजह से दिव्या की गंद की फांको के उपर उसकी रीढ़ के दोनो तरफ के हल्के गड्ढे या डिंपल्स सॉफ दिख रहे थे.दिव्या की कमर की मांसल बगलो को अपने मज़बूत हाथो से दबाते हुए प्रोफेसर ने जब उन डिंपल्स को चूमा तो दिव्या & बेचैन हो गयी.यहा पे ऐसे आज तक किसी ने प्यार नही किया था उसे & इस अनूठे एहसास ने 1 बार फिर उसकी चूत को परेशान कर दिया.वो अपनी भारी जाँघो को आपस मे रगड़ने लगी.

प्रोफेसर उसकी कमर से अपने हाथ & होंठ चिपकाए था.उसका बाया हाथ दिव्या की कमर की बाई तरफ लगे हुक & ज़िप को खोल रहा था & वो दाई तरफ कमर के मांसल हिस्से को चूम रहा था.पेटिकोट खुलते ही बहुत छ्होटी सी मोवरेज पॅंटी मे दिव्या की चौड़ी गंद प्रोफेसर की आँखो के सामने आ गयी.पॅंटी के नीचे से उसकी गंद की बाई फाँक पे चाँद की रोशनी सीधे पड़ रही थी & वो संगमरमर की तरह चमक रही थी के फर्श पे गिरते ही शर्म की 1 नयी लहर दिव्या के दिल मे उठी & उसने अपने महबूब की नज़रो से च्छूपना चाहा लेकिन प्रोफेसर फ़ौरन उठ खड़ा हुआ & उसे घुमा के अपनी बाहो मे कस लिया.प्रोफेसर ने उसे चूमना शुरू कर दिया,उसकी बाई बाँह दिव्या के बाए कंधे को पकड़े उसकी पीठ को घेरे हुए थी & उसकी दाई बाँह उसकी कमर को थामे थी.

प्रोफेसर ने दाई बाँह को थोड़ा नीचे कर दिव्या की दाई जाँघ को थामा & वैसे ही चूमते हुए अपने आगोश मे कसे उसे उठा लिया & बिस्तर पे ले गया.बिस्तर पे उसने दिव्या को घुटनो के बल बिठा दिया.मोमबत्तियो की मद्धम रोशनी मे केवल ब्लाउस & पॅंटी मे दिव्या बहुत दिलकश लग रही थी.उसकी आँखो मे झाँकते हुए प्रोफेसर ने अपनी पॅंट उतरी तो हया का रंग दिव्या के गालो पे और गहरा हो गया & वो वैसे ही घुटनो पे बैठी घूम गयी & अपनी पीठ प्रोफेसर की ओर कर ली..आख़िर आज उसकी ऐसी हालत क्यू थी?..क्यू वो 1 अनच्छुई कली की तरह शर्मा रही थी?..क्या ये इस कमरे के माहौल का असर है?..सुना है पहले के ज़मानो की लड़किया अपने पति को भी अपना पूरा नंगे जिस्म नही देखने देती थी..मगर वो तो आजके ज़माने की है..बेबाक..निडर..

तभी उसके ख़यालो को तोड़ते उसकी जाँघो से जाँघ सटाके अपने घुटनो पे प्रोफेसर उसके पीछे आ बैठा & उसकी गुदाज़ उपरी बाहो को सहलाते हुए उसके सर को चूमने लगा.दिव्या ने अपना सर दाई तरफ घुमा अपने गुलाबी लब अपने आशिक़ के लिए पेश कर दिए,उसने भी बड़ी खुशी के साथ उन्हे कबूल किया & उनका रस पीने लगा.प्रोफेसर के हाथ थोड़ी देर तक तो उसकी गोरी बाहो पे ही फिसलते रहे फिर उसने उन्हे उसकी जाँघो पे उतार दिया.उसका हाथ उसकी जाँघो के बाहरी हिस्से पे फिराते फिर उपर आ जाते & फिर उसकी सटी जाँघो के अन्द्रुनि हिस्से पे चलाने लगते.प्रोफेसर का लंड उसकी गंद पे दबा हुआ था.दिव्या बहाल हो गयी थी.इतनी मस्ती शायद ही कभी उसने महसूस की थी.

प्रोफेसर के हाथो & होंठो की हर्कतो ने उसे पागल कर दिया था & बहाल हो उसने उसके अपनी जाँघो पे फिराते हाथो को पकड़ लिया.प्रोफेसर ने फ़ौरन अपने हाथो को उलट कर अपनी हथेलियो को उपर कर उसकी उंगलियो मे अपनी उंगलिया फँसा के उसके हाथो को पकड़ लिया.उसकी ज़ुबान ने दिव्या के मुँह के अंदर जो खलबली मचा दी थी उस से परेशान हो उसने किस तोड़ी तो प्रोफेसर उसकी गर्दन चूमने लगा & वैसे ही उसके हाथो को पकड़े नीचे हो उसकी पीठ पे आ गया.दिव्या थोड़ा आगे झुक गई & प्रोफेसर के तपते होठ उसकी पीठ को भी तपने लगे.

दिव्या को लगा कि इस बार प्रोफेसर उसका ब्लाउस नही खोलेगा क्यूकी उसके हाथ तो उसके हाथो मे थे मगर वो 1 बार फिर ग़लत थी.प्रोफेसर ने अपने दन्तो से ही उसकी गाँठ को खोल दिया था..ज़रूर फ्लॅट पे प्रोफेसर ने जान बुझ के ऐसी गाँठ बँधी होगी..तो क्या वो आज उसे यहा जान बुझ के लाया था..उसके होंठो पे मुस्कान फैल गयी.तभी प्रोफेसर ने 1 बार फिर उसके पीछे के डिंपल्स को चूम लिया था.दिव्या ने हाथ च्छुड़ाए & बेचैन हो उस से अलग होने लगी.

प्रोफेसर फुर्ती से उठा & उसे अपनी बाहो मे भर लिया.अब प्रोफेसर टाँगे फैलाए बैठा था & दिव्या उसके सीने से अपना दाया कंधा सटा उसके आगोश मे थी.प्रोफेसर ने ढीले ब्लाउस को उसकी बाहो से अलग किया & उसे अपने सवाल का जवाब मिल गया.दिव्या ने ब्रा तो पहना था मगर स्ट्रेप्लेस्स इसलिए उसे कंधो पे ब्रा स्ट्रॅप्स नज़र नही आए थे.ऑरेंज स्ट्रेप्लेस्स ब्रा मे से उसकी भारी-भरकम छातियो का उपरी हिस्सा दोनो तरफ से पड़ रहे उसकी बाहो के दबाव से मानो ब्रा मे से छलक्ने को बेताब था.प्रोफेसर ने अपना दाया हाथ उसके सीने के उपर से ले जाते हुए उसकी पीठ पे लगे उसके ब्रा के हुक्स को खोला & ब्रा को उच्छाल दिया.

अब उसके सामने दिव्या की 38डी की चूचियाँ पूरी तरह नगी उसकी सांसो के उतार-चढ़ाव के साथ उपर-नीचे होती नुमाया थी.प्रोफेसर 1 तक उन्हे देखे जा रहा था,"ऐसी बड़ी & कसी,खूबसूरत छातियाँ मैने आज तक नही देखी.",दिव्या ने शर्मा के अपना सर दाई तरफ घुमा के प्रोफेसर के बाए कंधे मे छुपा लिया & चोर निगाहो से नीचे देखा,प्रोफेसर ने अंडरवेर नही उतरा था मगर उसके वेयैस्टबंड से लंड का सूपड़ा झाँक रहा था.लंड की लंबाई & मोटाई का अंदाज़ा लगते ही उसके बदन मे सनसनाहट दौड़ गयी.प्रोफेसर ने सर झुका के उसके बाए गाल को चूमा & फिर उसकी बाई चूची को नीचे से अपने दाए हाथ मे ऐसे भरा जैसे की कोई नाज़ुक फूल को उठाता हो.दिव्या के जिस्म मे झुरजुरी दौड़ गयी.प्रोफेसर झुका & दाई चूची को दबाते हुए बाई को उसने अपने मुँह मे भरा & चूसने लगा.

अब दिव्या की मदहोशी उसके उपर पूरी तरह हावी हो गयी & वो निढाल हो प्रोफेसर की बाई बाँह के उपर गिर गयी.उसने दिव्या को बिस्तर पे लिटाया & उसकी हवा मे उठी ऊँची चूचियो को चूमने लगा.प्रोफेसर उसके गुलाबी निपल्स का दीवाना हो गया था.दाए निपल को अपनी उंगलियो के बीच मसल के जब उसने बाई चूची को मुँह मे भरा दिव्या ने ज़ोर से आह भरी & अपना सीना बिस्तर से उठा अपनी चूची से प्रोफेसर के मुँह को और भरने लगी.उसका सर पीछे हो गया & जंघे आपस मे रगड़ खाने लगी.

प्रोफेसर ने उसकी चूचियों को बिल्कुल अनोखे अंदाज़ मे प्यार किया.वो उन्हे वाहा पे चूमता जहा से उनका उभार दिव्या के सीने से शुरू होता था फिर वो उनकी बाहरी बगलो को चूस लेता.चूचियो के नीचे होंठ लगा के लब वो निपल्स को अंगूठे से ऐसे दबाता जैसे बटन दबा रहा हो तो दिव्या जोश से पागल हो जाती & जब प्रोफेसर ने उसकी बाई चूची को हाथ मे दबोच के दाई को मुँह मे भर चूस्ते हुए उसके निपल को अपनी जीभ से छेड़ा तो दिव्या सुबकने लगी & उसका बदन कसमसाने लगा.वो 1 बार फिर झाड़ गयी थी.प्रोफेसर ने उसके सीने को छ्चोड़ दिया & घुटनो पे बैठ उसे देखने लगा.दिव्या मस्ती की खुमारी मे खोई आँखे बंद किए बिस्तर पे सिसक रही थी.

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क्रमशः........

raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 12 Nov 2014 04:28

KHEL KHILADI KA paart--32

gataank se aage....

professor uske hath thame use bahut haule-2 chum raha tha.divya ki baaho ke upar apne hath sarkate hue usne uske pyare chehre ko tham liya & apne daye hath ki sari ungliya uske baye kaan ke peechhe le gaya & baye ko uske dahine gaal pe laga diya.jab usne apne daye hath ki ungliyo se divya ke kaan ke peechhe sehlaya to divya ne aah bharte hue kiss tod di.

ye uske jism ka bada hi nazuk hissa tha & yaha chhute hi uski masti badh jati thi.vo professor ke daye hath pe apna gaal ragadne lagi.professor uske daye gaal ko chumne laga & vaise hi uske kaan ke peechhe sehlata raha.gaal ko sehlana chhod baye hath ke anguthe ko usne hotho pe dabate hue firaya to divya tadap uthi & professor 1 baar fir uske honth chumne laga.uske hath divya ke chehre se neeche uski narm,gudaz upari baaho pe the & unhe sehla rahe the.divya ke jism me jhurjhuri ho rahi thi.professor bahut haule-2 use chum raha tha balki uski zuban ne to abhi tak divya ke hotho ka swad bhi nahi chakha tha.

professor ke hatho ne uski baaho ko sehlate hue uske kandho ka rukh kiya & unhe sehlane lage.divya ki bechaini pal-2 badhti ja rahi thi & usi se tadap usne apne honth peechhe khinch liye to professor uske chehre ko chumte hue neeche hua & uski gori gardan ko apne garm labo se chumne laga.professor ke hath uske kandho se uske blouse straps ko neeche sarka rahe the.straps ke neeche hote hi professor ke honth pehle uske daye kandhe pe gaye & vahape chumne laga & fir uski gardan se hote uske baye kandhe pe aa gaye.

divya ko laga ki ab professor uska blouse utarega magar professor ne uski soch ko galat sabit karte hue uske straps vapas uske kandho pe chadha diya & uski gardan ke neeche seene ke upar jo gaddhe jaisi jagah hoti hai vaha pe chumne laga.vaise professor ke dil me bhi 1 sawal uth raha tha ki aakhir divya ke bra straps kaha gaye?..chalo thodi der me hi is sawal ka jawab mil jayega.vo man hi man muskuraya & uski gardan ke neeche chumta raha.1 baar fir vo divya ke daye kandhe pe pahuncha & is baar uske honth vahi nahi ruke balki us se bhi neeche uski baanh se hote hue uske hath tak pahunch gaye.

professor neeche baith khadi divya ki dayi hatheli ko chum raha tha.chum raha tha kehna galat hoga kyuki vo uski hatheli ko halue-2 chus raha tha.divya ki chut ki kasak aur badh gayi & usne bechaini se apni janghe aapas me ragdi.professor ne uski hateli chhodi & bari-2 se uski ungliya chusne laga.baat yehi tak rehti to divya shayad bardasht kar leti lekin professor uski 1 ungli me munh me bhar ke chusta & fir us ungli ki jud tak jake jaha pe 2 ungliya hatheli se judti hain,vaha pe apni jibh ki nok fira deta.divya ko laga ki uski tango me jaan nahi hai & vo khade rehne ke liye sahara dhundhne lagi.

jis khidki pe vo khade the vo thoda nikal ke bani thi & is karan khidki ke bagal me & kamre ki deewar ke beech thodi si jagah thi & divya peechhe ho usi jagah ki deewar se pith tika ke khadi ho gayi.professor ne jab uski sari ungliyo ko chum,chus liya to uska dhyan divya ke gore pet pe gaya.divya ki sanse bahut tez chal rahi thi & us vajah se uska pet bhi upar neeche ho raha tha.professor uske pet ko niharne laga & apne daye hath ki 1 ungli uske blouse ke neeche uski bagal me rakh di.divya us halki si chhuan se bhi tadap uthi & apna sar upar utha apni aankhe band kar li.professor ki ungli uske pet pe rengne lagi & professor ne bahut halke se uske pet ke upri hisse pe chum liya.

professor bahut chhoti-2 kisses se uske pet ko dhankte hue uski nabhi ki or badhne laga.kuchh hi palo me vo uski nabhi tak pahunch gaya.divya ki halat bahut kharab ho chuki thi.uski chut se ras behne laga tha & vo bechaini se apni janghe ragad rahi thi.use ab intezar tha professor ke hotho ka apninabhi ko chumne ka.uski sanse aur tez ho gayi & sath hi uski bechaini bhi.professor ki garm sanse use apni nabhi pe mehsus hui to usne dum sadh liya.uske dim me josh tha & 1 ajib sa ehsas-kuchh ghabrahat ka & kuchh maze ka.

professor jhuka & usne divya ki soch ko 1 baar fir galat sabit kiya.uske hotho ne divya ki nabhi ke neeche ke hisse ko pakda & thod sa khinchte hue apne danto tale bahut hi zyada halke se daba diya,"..aaaahhhhh..!",divya ne aah bhari & daye hath ko sar ke upar le jake deewar ko thama & baye se professor ke sar ko & jhad gayi.uska badan jhatke kha raha tha & professor uski nabhi ki gehrai ko ab apni zuban se naapne me juta tha.vo gir hi jatui agar professor ke mazbut hatho ne uski kamar ki baglo ko pakad ke use tham nahi liya hota to.jab vo jhadne ki khumari se bahar aayi to usne dekha ki professor uske pet & nabhi ko pyar se chum raha hai & uske daye hath ne uske baye hath ko tham liya hai.

professor ke baye hath ki ungli uske pet pe chalne lagi & vaha phunch gayi jaha uski sari atki thi.hath andar ghusa professor ne uski sari khol di & fir apne honth uski bayi hatheli se chipka diye.yaha bhi usne vahi harkate dohrayi jo usne daye hath ke sath ki thi.divya abhi khumari se ubri nahi thi & professor ki harkato ne use dobara mast karna shuru kar diya tha.uski ungliyo ko chusne ke baad vo upar badhne laga & uski gudaz baaho ko chumta vo 1 baar fir uske chehre tak pahunch gaya.1 baar fir usne usne uske khubsurat chehre ko tham chumna chaha to divya ne uske seene pe hath rakh use rok diya.khidki se aati chandni me divya us petticoat & blouse me sadiyo pehle ki koi ladki lag rahi thi.is kamre me hotel ki gehmagehmi ka zara bhi ehsas nahi tha.khidki se bhi bas pahadiya dikhti thi & us pal professor ko laga ki vo waqt me peechhe chala gaya hai.

divya ke hath uske seene se thoda upar hue & usne uske coat ko neeche sarka diya.uske hath professor ke shirt ke buttons ko kholne me lag gaye & unke khulte hi usne professor ki shirt ko bhi utar diya.uski nazro ke samne chand ki roshni me professor ka gathila upri jim chamak raha tha.professor ke kandhe bahut hi chaude the & uska seena bhi.bazuo ke daule to bahut hi bade the & pura jism fauladi tha.divya ne baya hath badha ke professor ke daye bazu pe rakha & daye ko uske seene ke ghane baalo me firaya to use uska jism ka ehsas komal laga.is anuthe ehsas se uske hotho pe halki muskan fail gayi.usne professor ke kandho,bazuo & sene ko hatho se sehlaya & uske seene ke beechobeech pahunch gayi.

uske mazbut pecs pe hath firate hue uska dil kiya ki vo unke beechobeech professor ke seene ko chum le.dil ki maante hue vo aage jhuki & apne kaanpte lab professor ke seene pe rakh diye.uske bazu pakde vo uske seene ko apni kisses se dhankne lagi.professor ke baalo bhare seene se balo ki 1 lakir neeche ja rahi thi.uske honth usi lakir pe chalne lage lekin jyu hi vo uski nabhi tak pahunchi vo jaise nind se jagi..ye kya kar rahi thi vo?..kaha ja rahi thi?..sharm ne use apne agosh me le liya & vo hairat me pad gayi.aisa pehle to nahi hota tha..balki jab usne pehli baar 1 ladke ko chuma tha uske baad to use aisi jhijhak,aisi haya kabhi mehsus nahi hui..fir aaj kyu?

laaj ke mare vo seehi khadi hui & apni haya chhupane ke liye jab use aur koi rasta nazar nahi aaya to usne samne dikh rahe professor ke baalo bhare seene me hi apna chehra chhupa liya.professor ne use apne agosh me bhar liya & uski pith & baalo ko sehlane laga.uske agosh me pyar tha hawas nahi,garmjoshi thi lekin vehshiyat nahi.is ehsas se khush ho divya ne abhi apni baahe uski pith ke gird kas di.kuchh palo baad professor ne daye hath se divya ki thuddi pakad uska chehra upar kiya.divya ki palke to sharm ke mare khul hi nahi rahi thi!uske dil ki hairat ka to koi ant hi nahi tha.uske jaisi bebak ladki aaj kisi aam sharmili,kunwari ladki ki tarah pesh aa rahi thi.

"tumhare jaisi rupsi ka pyar pake to main dhanya ho gaya.mujhe to apni kimat pe yaki nahi hota!"

"kyu jhuthi tarif karte ho!",laaj ke mare 1 baar fir usne professor ke chaude sene ki panah li.

"maine aaj tak kisi ladki ki jhuthi tarif nahi ki,divya.",professor uske baalo ko sehla raha tha,"..tumhare jaisi haseena se main aaj tak nahi mila.pata hai tumhari sabse zyada khubsurat chiz kya hai?..tumhari shakhsiyat.tum khuddar ho & bahadur bhi.case suljhate waqt tumhare chehre pe jo hausla & apne upar bharosa dikhta hai,vo tumhari khubsurti me 4 chand laga deta hai.",professor ne 1 baar fir uski thuddi pakad uska chehra upar kiya.divya ke chehre pe tarif sunke halki muskan fail gayi thi magar aankhe abhi bhi haya ke bojh tale band thi.

professor ne apni mehbooba ki band palko ko chuma & fir bari-2 se uske dono gulabi galo ko jinpe haya ki surkhi bhi faili thi.divya ko laga ki ab vo uske honth chumega & is asha me uske honth apne aap khul gaye lekin professor ne hontho ko chhod uski naak ko chum liya.divya ne hairat me pad aankhe kholi to use professor ki nazro me shararat dikhi & use hansi aa gayi.dono premi hanste hue 1 baar fir 1 dusre ke gale se lag gaye.thodi der baad use bahao me bhar professor ne fir se chuma & is baar apni zuban uske hotho pe fira di.is position me professor ka lund uske pet se aa laga & uska badan sihar utha.

divya ke badan me to sansani daud gayi thi & vo kanp gayi thi.usne alag hona chaha magar professor ki mazbut baaho ne use aisa nahi karne diya.professor ki zuban uske munh ke andar ghusi & uski zuban se mil gayi.divya ne bhi professor ki zuban ko jawab dena shuru kiya lekin uske jism me jo bijli daud rahi thi usne use bechain kar diya tha.aisa pehle kabhi nahi hua tha.chuai me vo jitni madhosh ho jaye magar vo humesha bebak rehti thi & masti ke is khel me apne sathi ki barabari karti thi magar aaj professor ki harkato ne uske dil me bhi aam ladkiyo vala ghabrahat & maze ka mila-jula bhav paida kar diya tha.

professor ki zuban ki harkato se pareshan ho usne kiss todi & uske aagosh se chhut ke ghum gayi magar professor ne usi waqt use peechhe se apni baaho ke ghere me le liya & uske pet ko sehlate hue uske daye gaalo ko chumne laga.aisa karte hi professor ka lund ab uski gand ke upar aa laga tha & khumari ab uske uapr hawi hone lagi thi.pet pe fisalte uske hatho ki kaliyo ko pakd vo uski kisses ka maza le rahi thi.1 baar fir professor ne uske hotho ko chumna chaha to usne muskurate hue munh fer liya.professor ne uske lumbe,ghane balo ko uske baye kandhe ke upar se aage uski bayi chhati pe kiya & uski gardan ke dayi taraf chumne laga.divya professor se ad ke khadi ho gayi & halki-2 aahe bharne lagi.

chumte hue professor gardan ke peechhe aaya & vaha se neeche uske blouse ki back se jhankti pith pe.divya ko yakin tha ki ab vo uska blouse utarega magar professor ne use 1 bar fir galat sabit kiya & vaha se neeche uske petticoat & blouse ke beech ke numaya hisse ko chumne laga.petticoat kafi neeche se bandha tha & is vajah se divya ki gand ki fanko ke upar uski reedh ke dono taraf ke halke gaddhe ya dimples saaf dikh rahe the.divya ki kamar ki mansal baglo ko apne mazbut hatho se dabate hue professor ne jab un dimples ko chuma to divya & bechain ho gayi.yaha pe iase aaj tak kisi ne pyar nahi kiya tha use & is anuthe ehsas ne 1 baar fir uski chut ko pareshan kar diya.vo apni bhari jangho ko aapas me ragadne lagi.

professor uski kamar se apne hath & honth chipkaye tha.uska baya hath divya ki kamar ki bayi taraf lage hook & zip ko khol raha tha & vo dayi taraf kamar ke mansal hisse ko chum raha tha.petticoat khulte hi bahut chhoti si morange panty me divya ki chaudi gand professor ki aankho ke samne aa gayi.panty ke neeche se uski gand ki bayi fank pe chand ki roshni seedhe pad rahi thi & vo sangmarmar ki tarah chamak rahi thipetticoat ke farsh pe girte hi sharm ki 1 nayi lehar divya ke dil me uthi & usne apne mehboob ki nazro se chhupna chaha lekin professor fauran uth khada hua & use ghuma ke apni baaho me kas liya.professor ne use chumna shuru kar diya,uski bayi banh divya ke baye kandhe ko pakde uski pith ko ghere hue thi & uski dayi banh uski kamar ko thame thi.

professor ne dayi banh ko thoda neeche kar divya ki dayi jangh ko thama & vaise hi chumte hue apne agosh me kase use utha liya & bistar pe le gaya.bistar pe usne divya ko ghutno ke bal bitha diya.mombattiyo ki maddham roshni me keval blouse & panty me divya bahut dilkash lag rahi thi.uski aankho me jhankte hue professor ne apni pant utari to haya ka rang divya ke galo pe aur gehra ho gaya & vo vaise hi ghutno pe baithi ghum gayi & apni pith professor ki or kar li..aakhir aaj uski aisi halat kyu thi?..kyu vo 1 anchhui kali ki tarah sharma rahi thi?..kya ye is kamre ke mahaul ka asar hai?..suna hai pehle ke zamano ki ladkiya apne pati ko bhi apna pura nanag jism nahi dekhne deti thi..magar vo to aajke zamane ki hai..bebak..nidar..

tabhi uske khayalo ko todte uski jangho se jangh satake apne ghutno pe professor uske peechhe aa baitha & uski gudaz upri baaho ko sehlate hue uske sar ko chumne laga.divya ne apna sar dayi taraf ghuma apne gulabi lab apne aashiq ke liye pesh kar diye,usne bhi badi khushi ke sath unhe kabul kiya & unka ras pine laga.professor ke hath thodi der tak to uski gori baaho pe hi fisalte rahe fir usne unhe uski jangho pe utar diya.uska hath uski jangho ke bahri hisse pe firte fir uapr aa jate & fir uski sati jangho ke andruni hisse pe chalne lagte.professor ka lund uski gand pe daba hua tha.divya behal ho gayi thi.itni masti shayad hi kabhi usne mehsus ki thi.

professor ke hatho & hotho ki harkato ne use pagal kar diya tha & behal ho usne uske apni jangho pe firte hatho ko pakad liya.professor ne fauran apne hatho ko ulat kar apni hatheliyo ko upar kar uski ungliyo me apni ungliya fansa ke uske hatho ko pakad liya.uski zuban ne divya ke munh ke andar jo khalbali macha di thi us se pareshan ho usne kiss todi to professor uski gardan chumne laga & vaise hi uske hatho ko pakde neeche ho uski pith pe aa gaya.divya thoda aage jhuk agyi & professor ke tapte hoth uski pith ko bhi tapane lage.

divya ko laga ki is baar professor uska blouse nahi kholega kyuki uske hath to uske hatho me the magar vo 1 baar fir galat thi.professor ne apne danto se hi uski ganth ko khol diya tha..zarur flat pe professor ne jaan bujh ke aisi ganth bandhi hogi..to kya vo aaj use yaha jaan bujh ke laya tha..uske hotho pe muskan fail gayi.tabhi professor ne 1 baar fir uske peechhe ke dimples ko chum liya tha.divya ne hath chhudaye & bechain ho us se alag hone lagi.

professor furti se utha & use apni baaho me bhar liya.ab professor tange failaye baitha tha & divya uske seene se apna daya kandha sataye uske agosh me thi.professor ne dhile blouse ko uski baaho se alag kiya & use apne sawal ka jawab mil gaya.divya ne bra to pehna tha magar strapless isliye use kandho pe bra straps nazar nahi aaye the.orange strapless bra me se uski bhari-bharkam chhatiyo ka upri hissa dono taraf se pad rahe uski baaho ke dabav se mano bra me se chhalakne ko betab tha.professor ne apna daya hath uske seene ke upar se le jate hue uski pith pe lage uske bra ke hooks ko khola & bra ko uchhal diya.

ab uske samne divya ki 38D ki chhatiya puri tarah nagi uski sanso ke utar-chadhav ke sath upar-neeche hoti numaya thi.professor 1 tak unhe dekhe ja raha tha,"aisi badi & kasi,khubsurat chhatiya maine aaj tak nahi dekhi.",divya ne sharma ke apna sar dayi taraf ghuma ke professor ke baye kandhe me chhupa liya & chor nigaho se neeche dekha,professor ne underwear nahi utara tha magar uske waistband se lund ka supada jhank raha tha.lund ki lumbai & motai ka nadaza lagate hi uske badan me sansanahat daud gayi.professor ne sar jhuka ke uske baye gaal ko chuma & fir uski bayi chhati ko neeche se apne daye hath me aise bhara jaise ki koi nazuk phool ko uthata ho.divya ke jism me jhurjhuri daud gayi.professor jhuka & dayi chhati ko dabate hue bayi ko usne apne munh me bhara & chusne laga.

ab divya ki madhoshi uske upar puri tarah hawi ho gayi & vo nidhal ho professor ki bayi banh ke upar gir gayi.usne divya ko bistar pe litaya & uski hawa me uthi oonchi choochiyo ko chumne laga.professor uske gulabi nipples ka deewana ho gaya tha.daye nipple ko apni ungliyo ke beech masal ke jab usne bayi chhati ko munh me bhara divya ne zor se aah bhari & apna seena bistar se utha apni chhati se professor ke munh ko aur bharne lagi.uska sar peechhe ho gaya & janghe aapas me ragad khane lagi.

professor ne uski chhatiyo ko bilkul anokhe andaz me pyar kiya.vo unhe vaha pe chumta jaha se unka ubhar divya ke seene se shuru hota tha fir vo unki bahri baglo ko chus leta.choochiyo ke neeche honth laga ke lab vo nipples ko anguthe se aise dabata jaise button daba raha ho to divya josh se pagal ho jati & jab professor ne uski bayi chhati ko hath me daboch ke dayi ko munh me bhar chuste hue uske nipple ko apni jibh se chheda to divya subakne lagi & uska badan kasmasane laga.vo 1 baar fir jhad gayi thi.professor ne uske seene ko chhod diya & ghutno pe baith use dekhne laga.divya masti ki khumari me khoyi aankhe band kiye bistar pe sisak rahi thi.

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kramashah........


raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 12 Nov 2014 04:29

खेल खिलाड़ी का पार्ट--33

कुच्छ पॅलो बाद जब वो होश मे आई तो उसने प्रोफेसर को खुद को निहारते पाया.उसने अपना बाया हाथ उसकी ओर बढ़ाया तो प्रोफेसर ने उसे थामा & उठा के बिठा लिया फिर वो खड़ा हुआ & अपना अंडरवेर उतार दिया & फिर घुटनो पे खड़ा हो गया.दिव्या की नज़रे प्रोफेसर के लंड से चिपक के रह गयी.लंड 9.5 इंच लंबा & लगभग 1.5-2 इंच मोटा था.प्रोफेसर के सीने से जो बालो की लकीर नीचे की ओर बढ़ी थी वो लंड के उपर आकर ख़त्म हो गयी थी क्यूकी प्रोफेसर ने अपनी झांतो & लंड के आस-पास के बालो को शेव कर लिया था.

इस वजह से लंड और लंबा लग रहा था & उसके नीचे लटके अंडे गोल्फ बॉल्स की तरह लग रहे थे.दिव्या ने अपनी ज़िंदगी मे ऐसा लंड नही देखा था & खुद बा खुद उसका हाथ आगे बढ़ा & उसने लंड को थाम लिया.लंड बहुत गर्म था & उसका एहसास दिव्या को बहुत भला लगा.उसने उसपे मुट्ठी कसी तो पाया कि उसकी उंगलिया & अंगूठा बमुश्किल लंड को घेर पा रहे हैं.उसने 1 बार धीरे से हिलाया तो प्रोफेसर की आह निकल गयी.दिव्या ने हिलाने की रफ़्तार थोड़ी बढ़ाई & थोड़ा आगे हो उसके सूपदे को हल्के से चूम लिया,प्रोफेसर ने मज़े मे उसके सर को पकड़ लिया & उसके बाल सहलाने लगा.लंड प्रेकुं से गीला था जिसे दिव्या ने चाट लिया.

दिव्या ने लंड को प्रोफेसर के पेट से सटा दिया & उसकी जड से लेके नोक तक अपनी जीभ की नोक फिरा दी.प्रोफेसर ने 1 और आह भरी.दिव्या ने जीभ वापस नीचे फिराई & प्रोफेसर के बिना बालो के आंडो को बारी-2 से मुँह मे भर ज़ोर से चूस लिया.प्रोफेसर ने अब तेज़ आह भरी.दिव्या ने लंड को थामा & हिलाते हुए अपने मुँह मे भर लिया.लंड के आकार ने उसे मदहोश कर दिया था.लंड को हिलाते,आंडो को दबाते वो लंड को चूमते अपनी ही दुनिया मे खो गयी थी जहा बस वो लंड था & कुच्छ नही,उसे तो लंड के मालिक का भी होश नही था.कुच्छ देर बाद जब लंड प्रेकुं से फिर गीला हुआ जिसे उसने खुश-2 चॅटा तो उसे ख़याल आया कि कोई उसका मुँह चोदने की कोशिश नही कर रहा है.

आमतौर पे उसके चूसने से पागल होके उसके प्रेमी उसका सर पकड़ उसका मुँह चोदने लगते थे लेकिन प्रोफेसर ऐसा नही कर रहा था.लंड मुँह मे भरे दिव्या ने उपर देखा तो मुश्किल से अपने उपर काबू रखे,अपनी कमर को हिलने से रोके प्रोफेसर का चेहरा उसे दिखा.प्रोफेसर ने हौले से लंड उसके मुँह से खींचा तो वो घुटनो पे खड़ी हो गयी & प्रोफेसर के बाज़ू थाम लिए.उसे उसका इतना ख़याल था इस बात से उसके दिल मे उसके लिए बहुत प्यार उन्माद आया था.दोनो अगले ही पल 1 दूसरे की बाहो मे थे.

प्रोफेसर ने उसे चूमते हुए उसे बिस्तर पे लिटाया & 1 बार फिर उसके होंठो से उसके पेट तक का सफ़र तय किया.इस बार उसके पेट को चूमने के बाद उसने उसकी पॅंटी की वेयैस्टबंड मे उंगलिया फँसाई तो उसने पानी गंद उचका दी & अगले ही पल उसका हुस्न अपने पूरे शबाब मे प्रोफेसर की आँखो के सामने था.प्रोफेसर घुटनो पे बैठ के उसे निहारने लगा & फिर उसकी दाई टांग उठा ली.अपने होंठ उसने उसके दाए पाँव से लगाए & उसकी उंगलियो को भी वैसे ही चूसा जैसे हाथो की उंगलियो को चूसा था.उंगलिया चूस्ते हुए जब उसने उसकी रस से भीगी पॅंटी उठा के उसे चूमा तो दिव्या की मस्ती फिर बढ़ गयी.

प्रोफेसर ने दोनो पाँवो को बारी-2 वैसे ही चूमा & फिर उसकी टाँगो को चूमता हुआ उसके घुटनो तक आ गया.उसके घुटनो को जी भर के चूमने के बाद उसने उसकी टाँगे फैलाई & उसकी दाई अन्द्रुनि जाँघ को चूमता हुआ उसकी चूत तक पहुँच गया.वाहा पहुँच उसने चूत के आस-पास तब तक चूमा जब तक दिव्या बेचैन हो उसके सर को पकड़ अपनी चूत पे दबाने की कोशिश करते हुए अपनी कमर नही हिलाने लगी.

"आननह..!",प्रोफेसर ने उसकी टाँगे अपने कंधो पे चढ़ाई & बिस्तर पे पेट के बल लेट गया.उसकी जाँघो के बाहरी हिस्सो को सहलाते हुए जैसे ही उसने अपने होंठो को दिव्या की चूत पे रख उस से बह रहे रस को कुत्ते की तरह लपलपाति जीभ से चाटने लगा तो दिव्या ने आह भरी.प्रोफेसर की जीभ उसकी चूत के अंदर दाखिल हो उसके रस को पिए जा रही थी & वो बेचैनी मे आहे भर रही थी.थोड़ी देर बाद र्पोफ्सर ने जीभ चूत से निकाल उसके दाने पे रख दी & उसे चाटने लगा & ठीक उसी वक़्त अपनी 2 उंगलिया चूत मे घुसा चूत को चोदने लगा.

"ऊन्न्नह..!",दिव्या इस दोहरे हमले को नही झेल पाई & झाड़ गयी.झाड़ते ही उसकी कसी चूत & ज़्यादा कस गयी & प्रोफेसर की उंगलियो को अपने भीतर क़ैद कर लिया.प्रोफेसर को उसकी कसावट पे बड़ी हैरत हुई & उसके दिल मे ख़याल आया कि उसकी उंगलियो की जगह कुच्छ ही देर मे उसका लंड होगा & उस वक़्त के मज़े के एहसास से वो मुस्कुरा उठा.

दिव्या झाड़ रही थी & प्रोफेसर डिक्सिट ने अपनी उंगलियो & ज़ुबान को उसकी चूत से अलग कर लिया था & उसकी टांगो के बीच बैठा उसे देख रहा था.कुच्छ पलो बाद जब दिव्या ने आँखे खोली & प्रोफेसर को उसके संभलने का इंतेज़ार करता पाया तो वो उसकी कायल हो गयी..कितना ख़याल था उसे उसका!..कोई और होता तो अभी तक उसके उपर सवार हो चुका होता!

"प्रोफेसर..",दिव्या ने अपनी टाँगे थोड़ी और फैलाई & अपने हाथ अपने सर के पीछे ले जाके फैला अपनी ऊँची छातियो को और उभार दिया,"..मुझे चोदो.",अपनी महबूबा की बात भला प्रोफेसर कैसे टाल सकता था.उसने उसके घुटने मोड तो दिव्या ने अपने निचले होंठ के बाए कोने को अपने दन्तो तले दबा लिया.प्रोफेसर ने अपने बाए हाथ मे लंड को थामा & उसकी चूत की दरार पे रखा & 1 धक्का दिया & सूपदे को अंदर धकेला.

"आहह..!",मोटे सूपदे ने उसकी चूत को फैला दिया था & दिव्या को हल्का दर्द महसूस हुआ था.प्रोफेसर रुक गया था.दिव्या ने उसे देखा & आँखो से लंड को अंदर डालने का इशारा किया तो प्रोफेसर धीरे-2 लंड को अंदर धकेलने लगा.दिव्या ने आँखे मींच ली.उसे दर्द हो रहा था.प्रोफेसर का लंड ना केवल बेहद लंबा था मगर कुच्छ ज़्यादा ही मोटा था & उसकी चूत को बहुत ज़्यादा फैला रहा था.

"ऊहह..!",लंड जब 7 इंच से आगे गया तो दिव्या दर्द से कराह उठी.प्रोफेसर रुक गया & उसने लंड को आगे नही ठेला.दिव्या ने उसे खींच के अपने उपर लिटा लिया तो प्रोफेसर उतने ही लंड से उसके बाए कान & गाल को चूमता उसे चोदने लगा.दिव्या हल्की-2 आहे भरने लगी & कुच्छ देर बाद उसके उपर मस्ती छाने लगी.उसने अपने पैरो के तलवो को प्रोफेसर की मज़बूत टाँगो पे जमा दिया.

"प्रोफेसर..",उसने अपने चेहरे के दाई तरफ पड़े प्रोफेसर के मज़बूत बाज़ू के दौले को चूमा,"..अपना पूरा लंड अंदर घुसाओ ना!"

"तुम्हे दर्द नही होगा?",प्रोफेसर ने अपने चेहरे से उसके चेहरे को सीधा कर उसके होंठ चूमे & उसकी आँखो मे झाँका.

"उम्र भर के मज़े के लिए पल भर के दर्द को सह लूँगी मैं!",इस बात ने प्रोफेसर के दिल मे प्यार & जिस्म मे जोश की लहर दौड़ा दी & 1 ही धक्के मे उसने बचा हुआ लंड भी दिव्या की चूत मे घुसा दिया.

"ऊव्वववव..!",दिव्या चीख उठी.लंड वाहा पहुँचा था जहा अभी तक कोई भी लंड नही पहुँचा था-उसकी कोख के मुँह तक.प्रोफेसर रुक गया था & उसके चेहरे को चूम रहा था.उसे पता था कि दिव्या अभी तकलीफ़ मे है & वो उसे संभलने का वक़्त दे रहा था.थोड़ी देर बाद दिव्या ने अपने चेहरे के बगल मे फैले उसके मज़बूत बाजुओ पे पाने हाथ फिराते हुए उसके कंधो को सहलाया & फिर उसकी पीठ सहलाने लगी.

"रुक क्यू गये?चोदो ना!",दिव्या ने उसके बाए कान मे अपनी जीभ फिराई तो प्रोफेसर ने 1 बार फिर उसकी चुदाई शुरू कर दी.पहले तो वो तेज़ धक्के लगा रहा था मगर लंड को बस 2 इंच ही बाहर निकाल के.थोड़ी देर बाद जब उसने पूरे लंड को बाहर निकाल के अंदर डालना शुरू किया तो दिव्या पागल ही हो गयी.कोख पे पड़ती हर चोट उसके जिस्म मे बिजली दौड़ा देती.वो पागलो की तरह चीख रहा थी & प्रोफेसर की पीठ को खरोंच रही थी.कुच्छ ही पलो मे प्रोफेसर को अपने लंड पे उसकी चूत बहुत ज़्यादा कसति हुई महसूस हुई & वो समझ गया कि वो झाड़ रही है.दिव्या उसके बदन से चिपकी हुई सूबक रही थी & अपनी कमर हिला रही थी.

उसके झड़ने के बाद प्रोफेसर उसके उपर से उठा & अपनी कोहनियो पे अपना वज़न टीका के उसकी चूचिया चूसने लगा.दिव्या उसके बाल सहला रही थी & वो उसे बहुत धीरे-2 चोद रहा था.दिव्या को अपनी चूत पूरी भरी महसूस हो रही थी & इस एहसास से उसका दिल खुशी से भर गया था.प्रोफेसर ने उसकी छातियो को अपने होंठो के निशान से भर दिया & फिर उठ के अपने घुटनो पे हो गया & उसकी छातियाँ मसलते उसकी टाँगे सहलाते उसे चोदने लगा.कुच्छ ही पलो मे दिव्या फिर से हवा मे उड़ रही थी & उसके गले से मस्तानी आहे निकल रही थी.

प्रोफेसर ने उसकी उपरी बाहे थामी & उसे उपर खींच अपने सीने से लगा लिया.दिव्या चौंक उठी & उसने अपनी बाहे उसके गले मे डाल दी.फुर्ती से प्रोफेसर ने अपनी टाँगे 1-1 करके सामने फैलाई & पेट के बल लेट गया.अब उसकी महबूबा उसके उपर थी.दिव्या ने उसके सीने पे हथेलिया जमाई & अपनी कमर हिलने लगी.उसकी बहो से दबी उसकी चूचिया बड़े मस्ताने अंदाज़ मे छल्छला रही थी.प्रोफेसर ने अपने मज़बूत हाथो से उन्हे गूंधना शुरू किया तो दिव्या ने अपना सर मस्ती मे पीछे फेंक दिया & ज़ोर-2 से कमर हिलाने लगी.प्रोफेसर ने उसकी चूचियाँ छ्चोड़ी तो उसकी गंद की कसी फांको को पकड़ लिया & उन्हे मसलने लगा.

उन्हे पकड़ वो कभी बाहर की तरफ खींचता तो कभी उन्हे 1 साथ आपस मे दबा देता.दिव्या के लिए ये सारा एहसास नया था & वो मस्ती मे मुस्कुराती अपने प्रेमी के हाथो का लुत्फ़ उठा रही थी.तभी प्रोफेसर ने उसकी गंद को बिल्कुल छ्चोड़ दिया & अपने दाए हाथ की बस 1 उंगली को उसकी गंद की दरार पे बहुत हौले से फिरा दिया.हाथो के शदीद एहसासो के बाद इतना हल्का सा मुलायम एहसास!दिव्या के अंदर जैसे बिजली की कोई नयी धारा फुट पड़ी & प्रोफेसर को दोबारा अपने लंड पे उसकी चूत की शदीद कसावट महसूस हुई.प्रोफेसर के लंड ने उसे दूसरी बार झाड़वा दिया था.वो हाँफती हुई उसके सीने पे गिर गयी मगर प्रोफेसर का काम अभी पूरा नही हुआ था.