मस्तानी ताई

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raj..
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Re: मस्तानी ताई

Unread post by raj.. » 05 Nov 2014 04:02


खाना खाने के बाद ताइजी ने पार्वती से कहा के तुम खाना खलो और भोला के लिए बाँध लो फिर में तुम्हे छोड़ आती हूँ, मेने कहा ताइजी में छोड़ आता हूँ आप थक गयी होंगी आप आराम कर लीजिए, कहने लगी कोई बात नही, अगर तू चलना चाहे तो तू भी चल मेरे साथ, जब पार्वती ने खा लिया फिर हम उससे छोड़ ने निकल गये, ताइजी और मेरे पास दोनो के हाथ में टॉर्च थी, में ताइजी के पीछे चल रहा था, ताइजी और पार्वती साथ साथ चल रहे थे, में बारी बारी उन दोनो की गांद पे टॉर्च की लाइट रखता, ताइजी की गांद पार्वती से बड़ी थी, और चलते हुए ताइजी की गांद सारी में मदमस्त होके नाच रही थी, पार्वती की गांद ताइजी से छोटी थी पर उसकी गांद टाइट थी और जवान होने के कारण कसी हुई भी थी, खैर हम पंप हाउस आगाये, भोला बाहर खाट पे सो रहा था, फिर हमारे आने की आहट से उठ गया, और फिर ताइजी का धन्यवाद किया के वो पार्वती को छोड़ने यहाँ तक आई, फिर ताइजी ने उससे इधेर उधेर की बात की और हम घर की ओर लौट चले, चारों ओर उंधेरा छाया हुआ था, और टॉर्च के सिवाय चाँद की रोशनी थी, पंप हाउस से कुछ दूर आते ही मेने ताइजी की गांद पे हाथ रखा और उसपे छुट्टी काटी, वो चौक गयी और प्यार से मेरी छाती पे मारते हुए कहने लगी तू बाज नही आएगा ना अपनी हरकतों से, मेने अब भी अपना हाथ गांद से हटाया नही और उसे सहला रहा था, मेने उनसे कहा के अब आप हो ही इतनी सुन्दर के में अपने आप को रोक नही पाता हूँ, वो कहने लगी चल रहने दे, फिर मेने ताइजी का हाथ पकड़ा और अपनी ओर खिचते हुए उनके होंठों पे होंठ रख दिए, वो कुछ कहना चाह रही थी, पर मैं मा की गांद के स्पर्श के बाद चुदाई के लिए बेताब था, ताई भी कुछ ही देर में मेरा पूरा साथ दे रही थी, हम दोनो ही बोहत गरम हो चुके थे, ताइजी ने मेरे मूह में अपनी जीभ डाल के मेरी जीभ से खेलना शुरू कर दिया, में भी एक हाथ से ताइजी की गांद सहला रहा था और दूसरे हाथ से उनकी चूत को सारी के उपर से ही घिस रहा था, ताइजी भी बोहत गरम हो रही थी, उम्म्म्म आआअहह उूउउफफफफफफफ्फ़ कर रही थी, फिर मेने गांद से हटाया और उनकी चुचियों को सारी के उपर से दबाने लगा, वो अब बोहत ज़्यादा उत्तेजित हो रही थी, कहने लगी, ज्ज्ज्जाअल्ददिईइ कारूव घर्ररर लातीए हूओ गाईए तो साआबब्ब परेशाआं हूओ जाआईनगीए, उनकी साँसे फूल रही थी, फिर मेने उन्हे एक पेड़ के सहारे खड़ा किया, उनकी सारी उठा के कमर तक चड़ा के, उनकी पॅंटी निकाल ली और अपनी जेब में डाल दी, और अपनी पॅंट भी खोल के अंडरवेर नीचे करके अपने लंड को बाहर निकाला, उन्होने तुरंत मुझे अपने से चिपकाया और मेरा लंड पकड़ के अपनी चूत के छेद के यहाँ रखा, में हल्का सा नीचे हुआ और फिर लंड उनकी चूत में अंडर डाल दिया, ताइजी की चूत एक दम गीली और गरम हो चुकी थी, उन्होने मेरा लंड अपनी चूत में अंडर तक लेने के लिए अपना एक पाँव मेरी कमर के यहाँ रख दिया, मेने एक हाथ से उनके पाँव को घुटनो से पकड़ा जो मेरी कमर पे था और दूसरा उनके कंधो पे रख के धक्के मारने लगा, ताइजी खड़े खड़े छटपटा रही थी और कहने लगी, ऊओह बीएटाअ कित्न्न्न्नीए डीननूओ बाद्द्ड़ यहह अनानन्न्ँद्दद्ड मिलाआ हाईईईई, अयाया आौरर्र करूऊओ आआआहह, आआहह बोाआतत्त अककचहाा लागगग राआहहाा हाईईइ, उफफफफ्फ़ उईईइइंमाम्माआअ, में भी धक्के लगा रहा था, और कहने लगा, कबब्ब्बबसीई आअप्प्प्पक्कक्कीिई राआह डीएक राअहहाअ थाअ के कबब्ब्ब आप्प्प्प मौऊउकाअ ढूनडड़ड़ के मईएरीए पाअससस्स आाू, पाआररर आआप्प्प्प टूऊ आअपन्ंनईए हिी काअम मेंन्न्न् व्ययययाससस्त त्ीईीईई, वो बोली आआहह बीएटाअ आअनना तूओ मेंन्न भीईीई चाआहहतिई त्ीईिइ पाअर क्याअ कर्ररूउन्न्ञन् क़िस्स्स्सिईई कूओ शाआक्ककक करन्ननईए काअ मौकाअ नह्ह्हीइ डेन्न्नाअ चाआहहति थी, हम दोनो बोहत उत्तेजित हो गये थे, वो कहने लगी, बेटाअ जूऊओररर सीए काआरूऊ मेंन्न्न् झाआदन्‍न्‍न्णनईए वलल्ल्लीइी हुन्न्ञणन्, आआअहह उईईइमाआअ, मेराअ बसस्स चलीए तूओ मेंन्न्न् तेरीए स्ाआतह हीईिइ राहहूनन्ं औरर्र तेरीए सातह इसस्स सुख(चुदाई) का आन्न्न्नाद ल्ल्लीए सक्ककुउउन्ण, आआहह, ऊऊओह हाआनन्न बीताआ और्र्रर जोर्र्र्र से ऊओह मेंन्न्न् एयेए रहिी हुन्न्ञन्, में भी झाआद ने वाला था, और अपने होंठ उनके होंठ पे रख के ज़ोर ज़ोर से धक्के माआरन्‍नन्नईए लगाअ तकीइ वो ज़्यादा आवाज़ ना कर सके, वो भी बोहत गरम हो चुकी थी और ग्रोन कर रही थी, ह्म्‍म्म्मममम हमम्म, फिर मेने अपने होंठ उनके होंठ से हटाए तो वो कहने लगी ऐसे ही ज़ोर ज़ोर से झटके मारो, जल्दी करो में आने वाली हूँ आआअहह, मेने भी झटके तेज कर दिए, और मेने कुछ तेज तेज झटके लगाए, सन्नाटे में झटको की आवाज़्ज़ ताप्प्प ठप्प्प आ रही थी, और ताइजी के मूह से ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ निकल रही थी, और वो सुन के में और गरम हो गया, वो कह रही थी, आआहह बएटाा अओउउर्र्र जूऊर्रर हाआअन्णन्न् आआईीससीए हीई आआअहह मीईईँन्न आआरहियिइ हुन्न्ञन्, ऊऊऊहह म्माआअ आआहह ककक्कीत्ट्तांन्न्नाअ मज्ज़ज़जाअ आआअरर्रााहहाअ हाऐईयईई आआआअ ऊऊऊऊहह उउउइइइइम्म्म्ममाआआ और्र्रर वो झाआद गाइइ, में भी कुछ देर बाद झाड़ गया और अपना सारा पानी ताइजी की चूत में ही निकाल दिया, हम ऐसे ही एक दूसरे का सहारा लेकर खड़े रहे, जब जान में जान आई तो अलग हुए, ताइजी ने मुझे माथे पे एक किस दी और कहने लगी के तुमने मुझे बोहत खुशी दी है, और फिर हम दोनो घर की ओर चल पड़े, ताइजी चलते हुए कहने लगी के मेरी टांगे गीली हो गयी है, तब मेने उन्हे याद दिलाया के उनकी पॅंटी मेरे पास है, उन्होने फिर मुझे प्यार से कंधे पे मारते हुआ कहा नलायक चल अब जल्दी दे मुझे घर आने वाला है, मेने ताइजी की पॅंटी जेब से निकाली और उसे सूंघते हुए उनको दे दी वो हंस ते हुए बोली पागल, फिर उन्होने वो पॅंटी पहनी और हम घर आगाये, मा उपर रूम में थी पूजा अपने कमरे में और दीदी हमारी राह देख रही थी, ताइजी ने दीदी को सारा काम बताया और अपने रूम में चली गयी, दीदी भी अंडर चली गयी, में भी उपर रूम में आगेया,
क्रमशः................

raj..
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Re: मस्तानी ताई

Unread post by raj.. » 05 Nov 2014 04:03

gataank se aage...............

phir meine uske haath apne kandhe pe set kiye taki usse latake mein aasani ho, aur tej tej jhatke maarne laga, subeh ke najare ki wajah se mein bohat jyada uttejit ho chukka tha, aur parvati meri hawas ka shikaar ban rahi thi, woh bhi apne aap ko mujhse chipkaye keh rahi thi, aaaah saaaheebbbb aaapkeee lundddd meinnnn jaaduuu haaiiii, aissiiii chudaaiiii meriiii aajjjj takkkk kisiiiii neeee nahiiii kiii, aaaaahhh ooooooohhhhhhh uuuuiiiimmmmmaaaa, aaaauuuurrrr jorrrrr seeeeee, haaaannn aaaaurrr underrrr dalooooo saaaahebbbbb aaaaah, uuuuuimmmmmaaaa, meine usse kaha le meri raniiii aurrr le lee, aur tej tej jhatke maaaarne laga, woh bhi pura saath de rahi thi, uski chut ke diwaal mere lund ko nichod rahi thi, phir meine apne haath ussski kamar ke niche lagaya aur uski gaand pakad ke upar neeche karne lage, ohhhh doston mein bata nahi sakta kitna maja aaraha tha, woh bhi mere saath uccchall rahi thi, aur chudaai ka pura aanana le rahi thi, phir meine uske muh pe apna muh rakha aur jitni taakat se jhatke maar sakta tha usse maarne laga, woh mere muh se apna muh hata ke kuch bolne ki koshish kar rahi thi, par meine kuch nahi kehne diya, aur apne honth uske honth se chipkaye rakha, wohhh groan aur moan kar rahiiii thi, hhhhhhhhmmmmmmmmmm hhhhhhooooooooooooo aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ab mera pani chutne wala tha, meine apne honth hataye to woh kehne lagi ke kyaaaaa jaaaan loooogeeee meriiiii, meriiiii chutttt puriiii faaaadddd diiii hai,,, meineee kahaa meriii jaaaann meinnnn jhaaadneee walaaaa hun, wohhhh boli underrrr nahiii nikallll na, phir meineee usse bithaya aur apna lund uske muh mein de diya, woh bhi mast hoke lund ko lollypop ki tarah chaatne aur chusne lagi, meine uska sar pakda aur uske muh ko chodne laga, wohhh bhiiii randdii kit rah pura saaaath de rahi thi, phir meine apne jhatke uske muh pe tej kiye aur usse kaha, ohhhh meriiii raniiiii meiinnnn aaa rahhaaaa hun, woh bhi aur jor se chusne lagi, kuch hi palon mein mere lund se garam fawara uske muh mein chuttt gaya, meine uske sar apne haath se pakad rakha tha, woh pura ras pi gayi aur kuch uske muh se bahar aagaya tha, mein thak ke chur ho chukka tha, mein wahin khaat pe let gaya aur parvati haath muh dhoke apne kaam mein lag gayi, kuch der baad jab meri aankh khuli to meine dekha ke parvati ghar mein akeli hai aur abhi tak bhola nahi aaya tha, woh ghar ka kaam kar rahi thi, woh thoda apni tango ko chauda kar ke chal rahi thi, usne mujhe jaga hua dekh ke kaha, dekha saheb aapne meri chaal bigaad di ab mujhe ghar ka kaam karne mein taklif ho rahi hai, meine usse ke mujhe bata do mein kar deta hun tumhara kaam, woh boli rehne do, meine usse kaha ke tumne aaj mujhe khush kar diya hai bolo tumhe kya chahiye, woh kehne lagi ke saheb aap sach mein mujhe kuch tohfa doge, meine kaha haan bolo, to woh kehne lagi ke saheb abki aap sheher jao to mere liye kuch saree le aana, meine kaha thik hai, mein wahan se chalte samay usse 500 rupees diye woh khush ho gayi aur mujhe ek badi se kiss ki, phir mein jaise hi ghar ki taraf bad raha tha to mujhe yaad aaya ke maa aur taiji aam ke bag ki taraf gaye hain to mein bhi wahin jane laga, kuch der chalne ke baad meine dekha ke maa aur taiji bhi laut rahi thi, unhone mujhe dekha aur pucha kya kiya ab tak meine kaha kuch nahi, aur phir hum teeno ghar ke ore chal diye, dopeher ho chuki thi, hum ghar pohche to dekha didi ne sara kaam kar liya tha aur khana bhi taiyaar tha, ab pehli baar meine didi ko dhyan se dekha, unka kad kareeban 5’6 inch hoga, aur unka sharer na mota na patla ek dum fit tha, aur unki chuchiyan bhari bhari thi aur unki gaand ka shape bhi mast tha, achanak didi mujhe kisi vishwa sundari jaisi lagne lagi thi, mein apne aap kos bhi raha tha yeh sab karne pe, aur under hi under mujhe maja bhi aaraha tha, mein janta tha ke mere under ka shaitaan jag chukka hai, aur ab mujhe har auratko vaasna ki najar se dekhne ki aadatho chuki thi, ab woh aurat chahe meri maa ho behan ho yan taiji yan koi aur, matlab to sharer ki anant bhookh mitane se tha, didi jab chal ti thi to unke chutad dekhne layak hote the, khair hum sab ne saath mein khana khaya aur mein apne room mein jake let gaya,



Thakan ki wajah se meri aankh lag gayi, kuch der baad maa ne mujhe uthaya shaam kareeban 4.00 - 4.30 baje the, maa ne mujhe kaha haath muh dhole aur neeche aake chai pi le, mein fresh hoke neeche chala gaya, maa taiji aur didi baithe the, tabhi taiji ne kaha ke woh aaj shaam ki aarti ke liye pass hi ke ek prasidh mandir mein jana chahti hai, maa ne kaha taiji se, didi mein bhi chalungi aur didi bhi jana chahti thi, taiji ne kaha ke mein unhe mandir le chalun, aur taiji ne mujh se kaha ke jake parvati aur bhola ko bula aao taki ghar mein tauji ka dhyan rakh sake, aur parvati ghar ka kaam aur khana bana sake, mein turant pump house ki ore chal pada, wahan dekha parvati aur bhola kheton mein kaam kar rahe hain, meine unhe bataya ke taiji ne ghar bulwaya hai, woh dono turant mere saath ghar ki ore chal pade, bhola aage chal raha tha uske peeche parvati aur uske peeche mein, mera dhyan parwati ki gaand pe pada, woh ek dum gol thi aur saree ke under naach rahi thi jab woh chal rahi thi, phir woh peeche mudi aur dekha mein uski gaand ko dekh raha hun, ek kaatil muskaan deke puchne lagi kya dekh rahe ho saheb, bhola humari baat nahi sun sakta tha, meine kaha tumhari gaand badi lajawab hai, agli baar isse jarur marunga woh kehne lagi, ke naa baba aapka woh bohat bada hai, mujhe abhi bhi dard ho raha hai, baatein karte karte hum kuch der mein ghar pohch gaye dekha taiji didi aur maa taiyaar thi, maa ne cream colour ki saree aur matching blouse pehna tha, aur taiji ne peele rang ki saree pehni thi aur didi ne gulabi colour ka suit pehna tha, teeeno hi kaatil lag rahi thi, aur parwati ki gaand ne meri bhookh aur bada di thi, hum mandir ke liye chal pade, mandir kareeban aadhe ghante ki duri pe tha aur main road se rikshaw yan bus mil jati thi, mein jaan bujh ke teeno ke peeche chal raha tha, mujhe teeno ki matwali gaand ko dekhne mil rahi thi, sabse badi taiji ki thi phir maa aur didi ki un dono se choti thi, taiji ne peeche mud ke dekha, aur ishare se pucha kya hua, meine ishare mein unse kaha kiss do, woh ishare mein boli baad mein, kuch der chalne ke baad hum main road pe aagaye aur hume ek rikshaw bhi mil gayi, ab hum 4 log the aur kisi ek ko kisi na kisi ki godi mein baithna tha, pehle taiji baith aur phir didi taiji ki god mein baith gayi phir maa aur mein, maa mere right side baith thi, aur humara badan ek doosre se chipka hua tha, aur maa ke badan ka sparsh mujhe uttejit kar raha tha, maa ke sharer se ek bheeni bheeni khushbu aarahi thi, mein thodi thodi der mein apne aap ko maa se chipka liya karta tha, aur aise behave karta jaise road kharab hone ki wajah se aisa ho raha hai, maa mere right mein hone ki wajah se mein jaan bujhkar kisi na kisi karan maa ke boobs ko apni koni se touch kar raha tha, kuch der aisa karne pe jab maa ne koi reaction nahi diya to mein koni maa ki chuchiyon pe ghisne laga, maa ne kuch reaction nahi diya, aur waise hi baithi rahi, mein samajh nahi paya ke unhe ehsas hua ke nahi, ke mein apni koni se unke chuchiyon se khel raha hun, maa ki chuchiyan komal aur mulayam thi, mujhe rasta kaise kata pata nahi chala aur hum mandir pohch gaye, wahan bohat bheed thi, aur woh ek bohat purana mandir tha, aur bohat se log darshan ke liye aaye hue the, aur badi lambi line thi darshan ki, steel ke pipes se line banayi hui thi, khair humne puja ki thali li aur line mein khade ho gaye, bheed ko dekh ke lag raha tha ke kum se kum 1 se 1-1.30 ghanta lag jayega, taiji sabse aage khadi hui thi aur phir didi aur phir maa aur mein last mein khada hua tha, hum line mein ghuse to bheed kam thi par dheere dheere jaise jaise aarti ka samay najdeek aa raha tha, bheed bohat bad gayi aur khade rehne ko khali jagah nahi the, ab maa aur mere beech mein ek inch ka fasla tha, kuch der aage badhne ke baad, bheed bohat jyada hone lagi, aur log dhakka mukki karne lage, aur garmi bhi ho rahi thi, ab mein na chahte hue bhi maa se jud gaya, aur isme mera koi haath nahi tha, yeh bheed ki wajah se ho raha tha, ab dheere dheere peeche se dhakke badne lage aur bheed bhi bohat bad gayi, ab mera sharer maa se chipak hua tha, achanak dekha mere lund mein hulchul ho rahi hai, aur uska karan tha maa ki gaand, mera lund maa ki gaand se juda hua tha, aur dheere dheere bada ho raha tha, maa ki gaand mulayam thi, aur mere lund ko bada maja aaraha tha, ab jab bhi peeche se dhakka aata mein apne aap ko maa se aur sata leta aur apna lund unki gaand pe ghis deta, mujhe darr tha ke iss harkat shayad maa naaraj hogi aur shayad mujhe daant bhi padne wali hai, par aisa kuch nahi hua, aur maa bhi kuch nahi bol rahi thi shayad unhe lag raha hoga yeh sab bheed ki wajah se ho raha hai, dheere dheere bheed aur bad gayi aur dhakke bohat jyada aane lage the, ab maa ki gaand aur mera lund ek dum sata hua tha, hawa tak ke jane ki jagah nahi thi, mein bhi bheed ka fayda utha ke maa ki gaand se apna lund ghis raha tha, aur uss stithi ka anand le raha tha, kuch samay baad mera lund puri tarah khada ho gaya tha aur ab mein janta tha maa usko mehsus bhi kar rahi hogi, mein unke reaction ka intzar karne laga, kuch der baad maa peeche mudi aur mujhe dekha, uss waqt na maa ke chehre pe smile thi na gussa tha, mein samajh nahi paa raha tha ke woh kya soch rahi hai, ab jaise jaise hum mandir ke under daakhil hue bheed ke dhakke aur bad gaye, mandir ki entrance pe seedi thi, maa do seedi chad gayi aur mein nahi chad paya kyun ki jagah nahi thi, aur ab dhakka lagne pe mere muh maa ki peeth se touch ho jata, mera muh maa ke blouse ke neeche wale hisse pe lag raha tha, maa ka paseena mere lips pe touch hua aur unke paseene se ek ajeeb se khushbu aarahi thi, meine unke paseene ka swad pehlo baar chakha tha aur mujhe bada acha laga, meine bhi stithi ka fayda utha ke unke peeth se apna muh har dhakke pe chipka de deta hai, aur meine kai baar maa ki peeth ko kiss kiya aur ek baar to apni jeebh se lick bhi kiya, mujhe aisa karne mein bada maja aaraha tha, ab dheere dheere hum mandir ke under aagaye, aur aarti shuru ho chuki thi, sab ka dhyan aarti pe tha aur mere dhyan maa pe tha, meine himmat karke apna ek haath maa ki kamar pe rakha aur aise jataya jaise dhakke ki wajah se mein apna balance banane ke liye unki kamar ka sahara liya woh kuch nahi boli, aur aarti mein apna dhyan de rahi thi, maa ki kamar ki skin bohat mulayam thi, mein dheere dheere apna haath unki kamar pe ghuma raha tha, phir jab aarti khatam hui hum sab bahar aaye, hum bohat thak chuke the, meine dekha maa meri taraf dekh nahi rahi hai na mujh se baat kar rahi hai, aur jab hum ghar ke liye lautne ke liye rickshaw pakad li, maa mere pass hi baithi hui thi, mein ghabra gaya tha, isliye laut te waqt meine kuch bhi nahi kiya, kuch der mein hum ghar pohch gaye aur wahan pooja parvati dono the, parvati ne bataya ke bhola sab kaam karke ghar chala gaya kyun ki us ki tabiyat thik nahi hai, khair hum sab ne haath muh dhoya aur khana khane baith gaye, khana khate waqt meine dekha maa meri taraf abhi bhi dekh nahi rahi thi, aur mujhe bohat chinta ho rahi thi ke aage kya hone wala hai,

raj..
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Re: मस्तानी ताई

Unread post by raj.. » 05 Nov 2014 04:04


khana khane ke baad taiji ne parwati se kaha ke tum khana khalo aur bhola ke liye bandh lo phir mein tumhe chod aati hun, meine kaha taiji mein chod aata hun aap thak gayi hongi aap aaram kar lijiye, kehne lagi koi baat nahi, agar tu chalna chahe to tu bhi chal mere saath, jab parwati ne kha liya phir hum usse chod ne nikal gaye, taiji aur mere pass dono ke haath mein torch thi, mein taiji ke peeche chal raha tha, taiji aur parwati saath saath chal rahe the, mein baari baari un dono ki gaand pe torch ki light rakhta, taiji ki gaand parwati se badi thi, aur chalte hue taiji ki gaand saree mein madmast hoke naach rahi thi, parwati ki gaand taiji se choti thi par uski gaand tight thi aur jawan hone ke karan kasi hui bhi thi, khair hum pump house aagaye, bhola bahar khaat pe so raha tha, phir humare aane ki aahat se uth gaya, aur phir taiji ka dhanyawad kiya ke woh parwati ko chodne yahan tak aayi, phir taiji ne usse idher udher ki baat ki aur hum ghar ki ore laut chale, chaaron ore undhera chahya hua tha, aur torch ki siway chaand ki roshni thi, pump house se kuch dur aate hi meine taiji ki gaand pe haath rakha aur uspe chutti kaati, woh chauk gayi aur pyaar se meri chhati pe marte hue kehne lagi tu baaj nahi aayega na apni harkaton se, meine ab bhi apna haath gaand se hataya nahi aur usse sehla raha tha, meine unse kaha ke ab aap ho hi itni sunder ke mein apne aap ko rok nahi pata hun, woh kehne lagi chal rehne de, phir meine taiji ka haath pakda aur apni ore khichte hue unke honthon pe honth rakh diye, woh kuch kehna chah rahi thi, par meiin maa ki gaand ke sparsh ke baad chudaai ke liye betaab tha, taijji bhi kuch hi der mein mera pura saath de rahi thi, hum dono hi bohat garam ho chuke the, taiji ne mere muh mein apni jeebh daal ke meri jeebh se khelna shuru kar diya, mein bhi ek haath se taiji ki gaand sehla raha tha aur doosre haath se unki chut ko saree ke upar se hi ghis raha tha, taiji bhi bohat garam ho rahi thi, ummmm aaaaahhhh uuuuffffffff kar rahi thi, phir meine gaand se hataya aur unki chuchiyon ko saree ke upar se dabane laga, woh ab bohat jyada uttejit ho rahi thi, kehne lagi, jjjjaaalddiiii karooo gharrrr lateee hooo gayeee to saaabbb pareshaaan hooo jaaayeengeee, unki saanse phul rahhi thi, phir meine unhe ek ped ke sahare khada kiya, unki saree utha ke kamar tak chada ke, unki panty nikal li aur apni jeb mein daal di, aur apni pant bhi khol ke underwear neeche karke apne lund ho bahar nikala, unhone turant mujhe apne se chipkaya aur mere lund pakad ke apni chut ke ched ke yahan rakha, mein halka sa neeche hue aur phir lund unki chut mein under daal diya, taiji ki chut ek dum gili aur garam ho chuki thi, unhone mera lund apni chut mein under tak lene ke liye apna ek paanv meri kamar ke yahan rakh diya, meine ek haath se unke paanv ko ghutno se pakda jo meri kamar pe tha aur doosra unke kandho pe rakh ke dhakke maarne laga, taiji khade khade chatpata rahi thi aur kehne lagi, ooohhhhh beeetaaa kitnnnneee dinnooo baaddd yehhhh anaannnndddd milaaaa haiiiii, aaaah aaaurrr karooooo aaaaaahhhh, aaaahhhh bohhaaattt accchhhhaaaa laaggg raaaahhhaaaa haiiii, ufffff uiiiimmammaaaaa, mein bhi dhakke laga raha tha, aur kehne laga, kabbbbbseeee aaappppkkkkiii raaah deeekhhh raaahhhaaa thaaa ke kabbbb aapppp mauuukaaa dhunddd ke meeereee paaassss aaaaoooo, paaaarrr aaaapppp toooo aaapnnneee hii kaaam meinnnn vyyyyassst thiiiiii, woh boli aaaahhhh beeetaaa aaannaa tooo meinnn bhiiiii chaaahhhtii thiiii paaar kyaaa karrruunnnn kissssiii kooo shaaakkkk karnnneee kaaa maukaaa nahhhiii dennnaaa chaaahhhhti thiii, hum dono bohat uttejit ho gaye the, woh kehne lagi, betaaa jooooorrr seee kaaaroooo meinnnn jhaaadnnnnneee walllliii hunnnnn, aaaaahhhh uiiiimaaaaa, meraaa basss chaleee tooo meinnnn tereee saaathhh hiiii rahhhunnn aurrr tereee saathhh isss sukhhhhh(chudaai) ka aannnnaad llleee sakkkuuunn, aaaahhhhh, ooooohhhhh haaaannn beetaaaa aurrrr jorrrr se ooohhhhh meinnnn aaa rahiii hunnnn, mein bhi jhaaad ne wala tha, aur apne honth unke honth pe rakh ke jor jor se dhaakkke maaarnnnneee lagaaa takiiii woh jyada awaaj na kar sake, woh bhi bohat garam ho chuki thi aur groan kar rahii thi, hmmmmmmm hhhmmm, phir meine apne honth unke honth se hataye to woh kehne lagi aise hi jor jor se jhatke maaro, jaldi karo mein aane wali hun aaaaahhhh, meine bhiii jhatke tej kar diye, aur meine kuch tej tej jhatke lagaye, sannaate mein jhatko ki awaazz thaappp thappp aa rahi thi, aur taiji ke muh se jor jor se siskiyan nikal rahi thi, aur woh sun ke mein aur garam ho gaya, woh keh rahi thi, aaaahhhh betaaaa aauuurrr joooorrr haaaaannnn aaaaiiisseee hiiii aaaaahhhh meeeeinnn aaaarahiiii hunnnn, oooooohhhh mmaaaaa aaaahhhh kkkkitttannnnaaa majjjjaaa aaaaarrraaahhhhaaa haaaiiiii aaaaaaa oooooooohhhhhh uuuiiiiimmmmmaaaaaa aurrrr wohhh jhaaad gayii, mein bhi kuch der bad jhaad gaya aur apna sara pani taiji ki chut mein hi nikal diya, hum aise hi ek dooosre ka sahara lekar khade rahe, jab jaan mein jaan aayi to alag hue, taiji ne mujhe mathe pe ek kiss di aur kehne lagi ke tumne mujhe bohat khushi di hai, aur phir hum dono ghar ki ore chal pade, taiji chalte hue kehne lagi ke meri taange gili ho gayi hai, tab meine unhe yaad dilaya ke unki panty mere pass hai, unhone phir mujhe pyaar se kandhe pe marte hua kaha nalayak chal ab jaldi de mujhe ghar aane wala hai, meine taiji ki panty jeb se nikali aur usse sunghte hue unko de di woh hans te hue boli paagal, phir unhone woh panty pehni aur hum ghar aagaye, maa upar room mein thi pooja apne kamre mein aur didi humari raah dekh rahi thi, taiji ne didi ko sara kaam bataya aur apne room mein chali gayi, didi bhi under chali gayi, mein bhi upar room mein aagaya,
kramashah................