सलीम जावेद की रंगीन दुनियाँ

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The Romantic
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Re: सलीम जावेद की रंगीन दुनियाँ

Unread post by The Romantic » 06 Nov 2014 15:30

चौधराइन

भाग 16 – मदन की जिज्ञासा




उत्तेजना के मारे मदन का बुरा हाल हो चुका था, उसे कुछ भी समझ में नही आ रहा था। खेलने के लिये मिले इस नये खिलौने के साथ वो जी भर के खेल लेना चाहता था। लण्ड का सुपाड़ा रगड़ते हुए उसके मुंह से मजे की सिसकारियाँ फुट रही थी,
"ओह मामी, शशशीईईईईईई मजा आ गया मामी, शशशशीईईईईईईईई मामी।"
उर्मिला देवी की चूत में तो आग लगी हुई थी उन्होंने झट से मदन को धकेलते हुए बिस्तर पर पटक दिया और उसके ऊपर चढ़ कर अपने पेटीकोट को ऊपर किया एक हाथ से लण्ड को पकड़ा और अपनी झांटदार पनियायी हुई चूत के गुलाबी छेद पर लगा कर बैठ गई। गीली चूत ने सटाक से मदन के पहाड़ी आलु जैसे सुपाड़े को निगल लिया।

मदन का क्यों की ये पहली बार था इसलिये जैसे ही सुपाड़े पर से चमड़ी खिसक कर नीचे गई मदन थोड़ा सा चिहुंक गया।
" ओह मामी, !!!"

"पहली बार है ना, सुपाड़े की चमड़ी नीचे जाने से,,,,,,,,,"

और अपनी चूतड़ों उठा कर खचाक से एक जोरदार धक्का मारा। गीली चूत ने झट से पूरे लण्ड को निगल लिया। जोश में उर्मिला देवी ने पूरा लण्ड अपनी चूत में ठाँस तो लिया पर उनकी साढ़े पाँच इन्ची लन्ड से चुदने वाली चूत मदन के दस इन्ची लण्ड ने चिगुरा दी मारे दर्द के उनकी साँस रुकने लगी जैसे लण्ड चूत से हलक तक आ गया हो। बोली –
“ उईईई माँ बहुत बड़ा है साला।”
नीचे लेटे लेटे ही मदन ने जब फ़िर मामी की गद्देदार माँसल चूचियों सामने देखीं तो फ़िर उनपर झपट पड़ा वो कभी बायीं चूची मुंह में भरता तो कभी दाहिनी चूची को मुंह में दबा लेता। कभी दोनो को एक साथ मिला के चूसता । मामी फ़िर सिसकारियाँ भरने लगी । थोड़ी देर में चूत ने पानी छोड़ दिया और उर्मिला देवी का दर्द कम हो गया तो उन्होंने पेटीकोट को कमर के पास समेट कर खोस लिया और चूतड़ उठा कर दो-तीन और धक्के लगा दिये।

मदन की समझ में खुछ नही आ रहा था। बस इतना लग रहा था जैसे उसके लण्ड को किसी ने गरम भठ्ठी में डाल दिया है। गरदन उठा कर उसने देखने की कोशिश की। मामी ने अपने चूतड़ को पूरा ऊपर उठाया, चूत के रस से चमचमाता हुआ लण्ड बाहर निकला, फिर तेजी के साथ मामी के चूतड़ों नीचे करते ही झांठों के जंगल में समा गया।
"शशशीईईईईईई मामी, आप ने तो अपना नीचे वाला ठीक से देखने भी नही,,,,,,,,,,,"

"बाद में,,,,,,,,,,,,अभी तो नीचे आग लगी हुई है."

"हाय मामी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,दिखा देती तोओओओओओओओओओ.."

"अभी मजा आ रहा है,,,,,,,,??"

"हाय, हां, आ रहा हैएएएएए,,,,,,,,,!!"

"तो फिर मजा लूट ना भोसड़ी के, देख के क्या अचार डालेगा ?,,,,,,,,,,,,,,,"

"उफफ् मामी,,,,,,,,,,,,,,,,शीईईईईईईईई ओह, आपकी नीचेवाली तो एकदम गरम,,,,,,,।"

"हां,,,,,,,,,,,,,,,बहुत गरमी है इसमे, अभी इसकी सारी गरमी निकाल दे. फिर बाद में,,,,,,,,,,,,,भठ्ठी देखना,,,,,,,,,,,अभी बहुत खुजली हो रही थी, ऐसे ही चुदाई होती है समझा, पूरा मजा इसी को शीईईईईईई,,,,,,,,,,,,जब चूत में लण्ड अन्दर बाहर होता है तभी,,,,,,,,,,,,,,हाय पहली चुदाई है ना तेरीईईईईईईईई.."

"हां मामी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,हाय शीईईईईईई."

"क्यों, क्या हुआ,,,,,,??,,,,,,,,,,,शीईईईईईई.."

"ऐसा लग रहा है, जैसे उफफफ्फ्फ्,,,,,,,,,,,,जैसे ही आप नीचे आती है, एकदम से मेरे लण्ड की चमड़ी नीचे उतर जाती है,,,,,,,,,,,,,,,,उफफफ्फ्फ् माआआमीईईईई बहुत गुदगुदी हो रही है"

"तेरा बहुत मोटा है, ना,,,,,,,,,,,,,,,,,,इसलिये मेरी में एकदम चिपक कर जा रहा है,,,,,,,"
इतना कह कर उर्मिला देवी ने खचाक-खाचाक धक्के लगाना शुरु कर दिया। चूत में लण्ड ऐसे फिट हो गया था जैसे बोतल में कोर्क !!। उर्मिला देवी की चूत जो की चुद चुद के भोसड़ी हो गई थी, आज १० इंच मोटे लण्ड को खा कर अनचुदी बुर बनी हुई थी और इठला कर, इतरा कर पानी छोड़ रही थी। लण्ड चूत की दिवारों से एकदम चिपक कर रगड़ता हुआ पूरा अन्दर तक घुस जाता था, और फिर उसी तरह से चूत की दिवारों को रगड़ते हुए सुपाड़े तक सटाक से निकल कर फिर से घुसने के लिये तैयार हो जाता था। चूत के पानी छोड़ने के कारण लण्ड अब सटा-सट अन्दर बाहर हो रहा था।

मदन ने गरदन उठा कर अपना देखने की कोशिश की मगर उर्मिला देवी के धक्को की रफतार इतनी तेज और झटकेदार थी, की उसकी गरदन फिर से तकिये पर गिर गई। उर्मिला देवी के मुंह से तेज तेज सिसकारियाँ निकल रही थी और वो चूतड़ों उठा उठा के तेज-तेज झटके मार रही थी। लण्ड सीधा उसकी बच्चेदानी पर ठोकर मार रहा था और बार बार उसके मुंह से चीख निकल जाती थी। आज उसको बहुत दिनो के बाद ऐसा अनोखा मजा आ राह था। दोनो मामी-भांजा कुतिया-कुत्ते की तरह से हांफ रहे थे और कमरे में गच-गच, फच-फच की आवाजें गुंज रही थी।
"ओहहह,,,,,,,,,,,,,,शीईईईईईई,,,,,,,,,,,,मदन बहुत मस्त लण्ड है,,,,,,,,,उफफफफ्फ्फ्फ्."

"हां,,,,,,,,,,,,,,मामी,,,,,,,,,बहुत मजा आ रहा है,,,,,,,,,,,,,,,,,,आपके खरबूजे ईईईई ???..."

"हां, हां, दबा ना, खरबूजे दबा के खा,,,,,,,,,,,,,,,बहुत दिनो के बाद ऐसा मजा आ रहा है,,,,,,,,,"

"सच माआमीईइ,,,,,,,,आआज तो आपने स्वर्ग में पहुंचा दिया,,,,,,,,,,,"

"हाय तेरे इस घोड़े जैसे लण्ड ने तो,,,,,,,,,,आआआज्ज्ज्ज् मेरी बरसो की प्यास बुझाआअ,,,,,"

खच-खच, करता हुआ लण्ड, बुर में तेजी से अन्दर बाहर हो रहा था। उर्मिला देवी की मोटी-मोटी चूतड़ों मदन के लण्ड पर तेजी से उछल-कूद कर रही थी। मस्तानी मामी की दोनो चूचियाँ मदन के हाथों में थी, और उनको अपने दोनो हाथों के बीच दबा कर मथ रहा था।

"ओह हो, राआजूऊऊऊउ बेटाआआआआ,,,,,,,,,,,,,,मेरा निकलेगा अब श्श्श्श्शीशीईईईईईई हाय निकल जायेगा,,,,,,,,,,,,,,,ओओओओओओओओगगगगगगगगगग,,,,,,,,,,,,,,,,(फच-फच-फच) ,,,,,,,,शीईईईईईईईई हायरेएएएएएए कहा था ततततततूऊऊउ,,,,,,,,,,,,,,मजा आआआ गयाआआआ रेएएएएए, गई मैं,,,,,,,,,,हाय आआआआआज तो चूत फ़ाड़ के पानी निकाल दियाआआआ तूनेएएए,,,,,,,,,उफफफ्फ्.."

"हाय मामी, और तेज मारो,,,,,,,मारो और तेज,,,,,,,,,और जोर सेएएएएएए, उफफफफ्फ्फ्फ् बहुत गुदगुदीईइ होओओओओओओ,,,,,,,,,,,,,,"
तभी उर्मिला देवी एक जोर की चीख मारते हुए,
",,,,,,,,,,,,,,शीईईईईईईईईईईई..."
करते हुए मदन के ऊपर ढेर हो गई। उसकी चूत ने फलफला कर पानी छोड़ दिया। चूत का छेद झड़ते हुए लण्ड को कभी अपनी गिरफ्त में कस रहा था कभी छोड़ रहा था। मदन भी शायद झड़ने के करीब था मगर उर्मिला देवी के रुकने के कारण चुदाई रुक गई थी और वो बस कसमसा कर रह गया। उर्मिला देवी के भारी शरीर को अपनी बाहों में जकड़े हुए नीचे से हल्के हल्के चूतड़ों उठा उठा कर अपने आप को सन्तुष्ट करने की कोशिश कर रहा था। मगर कहते है की थुक चाटने से प्यास नही बुजती।

मदन का लण्ड ऐसे तो झड़ने वाला नही था। हां अगर वो खुद ऊपर चढ़ कर चार पांच धक्के भी जोर से लगा देता तो शायद उसका पानी भी निकल जाता। पर ये तो उसकी पहली चुदाई थी, उसे ना तो इस बात का पता था ना ही उर्मिला देवी ने ऐसा किया। लण्ड चूत के अन्दर ही फुल कर और मोटा हो गया था। दिवारों से और ज्यादा कस गया था। धीरे धीरे जब मामी की सांसे स्थिर हुई तब वो फिर से उठ कर बैठ गई और मदन के बालों में हाथ फेरते हुए उसके होठों से अपने होठों को सटा कर एक गहरा चुम्बन लिया।
"हाय,,,,,,,,,,,,मामी रुक क्यों गई ???,,,,,,,,,,,,,,और धक्का लगाओ ना,,,,,,,,"

"मुझे पता है,,,,,,,,,,तेरा अभी निकला नही है,,,,,,,,,,,मेरी तो इतने दिनो से प्यासी थी,,,,,,,,, की ठहर ही नही पाई,,,,,,,,,,,,,,,"

कहते हुए उर्मिला देवी थोड़ा सा ऊपर उठ गई। पक की आवाज करते हुए मदन का मोटा लण्ड उर्मिला देवी की बित्ते भर की चूत से बाहर निकल गया। उर्मिला देवी जो की अभी भी पेटीकोट पहने हुई थी ने पेटीकोट को चूत के ऊपर दबा दिया। उसकी चूत पानी छोड़ रही थी और पेटीकोट को चूत के ऊपर दबाते हुए उसके कपड़े को हल्के से रगड़ते हुए पानी पोंछ रही थी। अपनी दाहिनी जांघ को उठाते हुए मदन की कमर के ऊपर से वो उतर गई और धड़ाम से बिस्तर पर अपनी दोनो जांघो को फैला कर तकीये पर सर रख कर लेट गई। पेटीकोट तो पूरी तरह से ऊपर था ही, उसका बस थोड़ा सा भाग उसकी झाँटों भरी चूत को ढके हुए था। वो अब झड़ने के बाद सुस्त हो गई थी। आंखे बन्द थी और सांसे अब धीरे धीरे स्थिर हो रही थी।
मदन अपनी मामी के बगल में लेटा हुआ उसको देख रहा था। उसका लण्ड एकदम सीधा तना हुआ छत की ओर देख रहा था। लण्ड की नसें फुल गई थी और सुपाड़ा एकदम लाल हो गया था। मदन बस दो-चार धक्को का ही मेहमान था, लेकिन ठीक उसी समय मामी ने उसके लण्ड को अपनी चूत से बे-दखल कर दिया था। झड़ने की कगार पर होने के कारण लण्ड फुफकार रहा था, मगर मामी तो अपनी झाड़ कर उसकी बगल में लेटी थी।

सुबह से तरह तरह के आग भड़काने वाले कुतेव करने के कारण उर्मिला देवी बहुत ज्यादा चुदास से भरी हुई थी. मदन का मोटा लण्ड अपनी चूत में लेकार झड़ गई पर मदन का लण्ड तो एक बार चूस कर झाड़ चुकी थी इसलिये और भी नही झड़ा। उर्मिला देवी अगर चाहती तो चार-पांच धक्के और मार कर झाड़ देती, मगर उसने ऐसा नही किया। क्योंकि वो मदन को तड़पाना चाहती थी वो चाहती थी की मदन उसका गुलाम बन जाये। जब उसकी मरजी करे तब वो मदन से चुदवाये अपनी चूतड़ों चटवाये मगर जब उसका दिल करे तो वो मदन की चूतड़ों पे लात मार सके, और वो उसकी चूत के चक्कर में उसके तलवे चाटे, लण्ड हाथ में ले कर उसकी चूतड़ों के पीछे घुमे।

उर्मिला देवी की आंखे बन्द थी और सांसो के साथ धीरे धीरे उसकी नंगी चूचियाँ ऊपर की ओर उभर जाती थी। गोरी चूचियों का रंग हल्का लाल हो गया था। निप्पल अभी भी खड़े और गहरे काले रंग के भुरे थे, शायद उनमें खून भर गया था, मदन ने उनको खूब चुसा जो था। मामी का गोरा चिकना माँसल पेट और उसके बीच की गहरी नाभी,,,,,,,,,,,मदन का बस चलता तो लण्ड उसी में पेल देता। बीच में पेटीकोट था और उसके बाद मामी की कन्दली के खम्भे जैसी जांघे और माँसल गुलाबी पिन्डलियाँ । मामी की आंखे बंद थी इसलिये मदन अपनी आंखे फ़ाड़ फ़ाड़ कर देख सकता था। वो अपनी मामी के मस्ताने रुप को अपनी आंखों से ही पी जाना चाहता था, मदन अपने हाथों से मामी की मोटी मोटी जांघो को सहलाने लगा। उसके मन में आ रहा था की इन मोटी-मोटी जांघो पर अपना लण्ड रगड़ दे और हल्के हल्के काट काट कर इन जांघो को खा जाये।

ये सब तो उसने नही किया मगर अपनी जीभ निकाल कर चुमते हुए जांघो को चाटना जरुर शुरु कर दिया। बारी-बारी से दोनो जांघो को चाटते हुए मामी की रानों की ओर बढ़ गया। उर्मिला देवी ने एक पैर घुटनो के पास मोड़ रखा था और दूसरा पैर पसार रखा था। ठीक जांघो के जोड़ के पास पहुंच कर हल्के हल्के चाटने लगा और एक हाथ से धीरे से पेटीकोट का चूत के ऊपर रखा कपड़ा हल्के से उठा कर चूत देखने की कोशिश करने लगा।
तभी उर्मिला देवी की आंखे खुल गई। देखा तो मदन उसकी चूत के पास झुका हुआ आंखे फ़ाड़ कर देख रहा है। उर्मिला देवी के होठों पर एक मुस्कान फैल गई और उन्होंने अपनी दूसरी टांग को भी सीधा फैला दिया।

मामी के बदन में हरकत देख कर मदन ने अपनी गरदन ऊपर उठाई। मामी से नजर मिलते ही मदन झेंप गया। उर्मिला देवी ने बुरा-सा मुंह बना कर नींद से जागने का नाटक किया,
"ऊहहह उह, क्या कर रहा है ?"

फिर अपने दोनो पैरो को घुटनो के पास से मोड़ कर पेटीकोट के कपड़े को समेट कर जांघो के बीच रख दिया और गरदन के पीछे तकिया लगा कर अपने आप को ऊपर उठा लिया और एकदम बुरा सा मुंह बनाते हुए बोली,
"तेरा काम हुआ नही क्या ?,,,,,,,,,,,,नींद से जगा दिया,,,,,,,,,,,सो जा।"

मदन अब उसके एकदम सामने बैठा हुआ था। उर्मिला देवी की पूरी टांग रानो तक नंगी थी। केवल पेटीकोट समेट कर रानो के बीच में बुर को ढक रखा था।

मदन की समझ में नही आया की मामी क्या बोल रही है। वो गिगयाते हुए बोला, "मामी,,,,,,,,,,,वो,,,,,,,,,,मैं बस जरा सा देखना,,,,,,,,,,,"
"हां, क्या देखना,,??,,,,,,,,,,,,चूत,,,,,,,,,,,???"

"हां हां, मामी वही."

उर्मिला देवी मुंह बिचकाते हुए बोली, "क्या करेगा,,?,,,,,,,झांटे गिनेगा ?।"

क्रमश:………………………


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Re: सलीम जावेद की रंगीन दुनियाँ

Unread post by The Romantic » 06 Nov 2014 15:31

चौधराइन

भाग 17- अन्तिम पाठ



मदन चौंक गया, हडबड़ाहट में मुंह से निकल गया, "जी,,,जी मामी,,,,,,,"

"बोल न,,,,,,,,,, ,झांटे गिनेगा क्या?"

"ओह नही मामी,,,,,,,,,,प्लीज बस देखनी है,,,,,,,,,,,,,अच्छी तरह से,,,,,,,,"

चूत पर रखे पेटीकोट के कपड़े को एक बार अपने हाथ से उठा कर फिर से नीचे रखा जैसे वो उसे अच्छी तरह से ढक रही हो और बोली,
"पागल हो गया है क्या,,?,,,,,,,,,जा सो जा।"

उर्मिला देवी के कपड़ा उठाने से चूत की झाँटों की एक झलक मिली तो मदन का लण्ड सिहर उठा, खड़ा तो था ही। उर्मिला देवी ने सामने बैठे मदन के लण्ड को अपने पैर के पंजो से हल्का सी ठोकर मारी।

"साले,,,,,,,,,,,,,,खड़ा कर के रखा है,,,,,,?"

मदन ने अपना हाथ उर्मिला देवी की जांघो पर धीरे से रख दिया, और जांघो को हल्के हल्के दबाने लगा, जैसे कोई चमचा अपना कोई काम निकलवाने के लिये किसी नेता के पैर दबाता है, और बोला,
"ओह मामी,,,,,,,,,,,,,,बस एक बार अच्छे से दिखा दो,,,,,,,,,,,,,,,सो जाऊँगा फिर,,"

उर्मिला देवी ने मदन का हाथ जांघो पर से झटक दिया, और झिड़कते हुए बोली,
छोड़,,,,,,,,,हाथ से कर ले,,,,,खड़ा है, इसलिये तेरा मन कर रहा है,,,,,,,,,,,निकाल लेगा तो आरम से नींद आ जायेगी,,,,,,,,,,कल दिखा दूँगी."

"हाय नही मामी,,,,,,,,अभी दिखा दो ना !"

"नही, मेरा मन नही है,,,,,,,,ला हाथ से कर देती हूँ."

"ओह मामी,,,,,,,,,,,हाथ से ही कर देना पर,,,,,,,,,,,,,,दिखा तो दो,,,,,,,,,,,"

अब उर्मिला देवी ने गुस्सा होने का नाटक किया।

"भाग,,,,,,,,,,,,,,रट लगा रखी है दिखा दो,,,,,,,,,दिखा दो,,,,,,,,,,"

"हाय मामी, मेरे लिये तो,,,,,,,,,,हाय प्लीज,,,,,,,,,,,,"

अपने पैर पर से उसके हाथों को हटाते हुए बोली,
"चल छोड़, बाथरुम जाने दे."
मदन ने अभी भी उसकी जांघो पर अपना एक हाथ रखा हुआ था। उसकी समझ में नही आ रहा था की क्या करे। तभी उर्मिला देवी ने जो सवाल उससे किया उसने उसका दिमाग घुमा दिया।

"कभी किसी औरत को पेशाब करते हुए देखा है,,,,,,,,,,,?"

"क् क् क्क्या मामी,,,,,,,,,,,,,?"

"चुतीये, एक बार में नही सुनता क्या ?,,,,,,,,,,पेशाब करते हुए देखा है,,,,,,,,किसी औरत को,,,,,,,,,?"

"नननही मामी,,,,,,,अभी तक तो चूत ही नही देखी,,,,,,,,तो पेशाब करते हुए कहाँ से ?"

"ओह हां, मैं तो भुल ही गई थी,,,,,,,,,,तूने तो अभी तक,,,,,,,,,,,,चल ठीक है,,,,,,,इधर आ जांघो के बीच में,,,,,,,,उधर कहाँ जा रहा है,,,,,,,,?"

मदन को दोनो जांघो के बीच में बुला कर मामी ने अपने पेटीकोट को अब पूरा ऊपर उठा दिया, चूतड़ों उठा कर उसके नीचे से भी पेटीकोट के कपड़े को हटा दिया अब उर्मिला देवी पूरी नंगी हो चुकी थी। उसकी चौड़ी चकली झाँटेंदार चूत मदन की आंखो के सामने थी। अपनी गोरी रानो को फैला कर अपनी बित्ते भर की चूत की दोनो फांको को अपने हाथों से फैलाती हुई बोली,
"चल देख,,,,,,"
मदन की आंखो में भुखे कुत्ते के जैसी चमक आ गई थी। वो आंखे फ़ाड़ कर उर्मिला देवी की खूबसुरत डबल रोटी जैसी फुली हुई चूत को देख रहा था। काली काली झाँटों के जंगल के बीच गुलाबी चूत।

"देख, ये चूत की फांके है, और ऊपर वाला छोटा छेद पेशाब वाला, और नीचे वाला बड़ा छेद चुदाई वाला,,,,,,,,,,यहीं पर थोड़ी देर पहले तेरा लण्ड,,,,,,,,,।"

"ओह मामी, कितनी सुंदर चूत है,,,,,,,,,,एकदम गद्देदार पाव रोटी सी फुली हुई,,,,।"

"देख, ये गुलाबी वाला बड़ा छेद,,,,,,,,,इसी में लण्ड,,,,,,,,ठहर जा, हाथ मत लगा,,,,,,"

"ओह, बस जरा सा छु कर,,,,,,"

"साले,,,,,,,,,अभी बोल रहा था, दिखा दो,,,,,,,,,,दिखा दो, और अब छूना है,,,,,,"
कहते हुए उर्मिला देवी ने मदन के हाथों को परे धकेला।

मदन ने फिर से हाथ आगे बढ़ाते हुए चूत पर रख दिया, और बोला,
"ओह मामी प्लीज, ऐसा मत करो,,,,,,,,,अब नही रहा जा रहा, प्लीज,,,,,,,"

उर्मिला देवी ने इस बार उसका हाथ तो नही हटाया मगर उठ कर सीधा बैठ गई, और बोली,
"ना,,,,,,रहने दे, छोड़, तु आगे बढ़ता जा रहा है,,,,,वैसे भी मुझे पेशाब लगी है ।"

"उफफफफफ्फ् मामी, बस थोड़ा सा,,,,,,,,"

"थोड़ा सा क्या ?,,,,,,,,,,मुझे बहुत जोर पेशाब लगी है,,,,,,,,,"

"वो नही मामी, मैं तो बस थोड़ा छू कर,,,,,,,"

"ठीक है, चल छू ले,,,,,,,,पर एक बात बता चूत देख कर तेरा मन चाटने का नही करता,,,,,,,,??"

"चाटने का,,,,,,,,,,,?"

"हां, चूत चाटने का,,,,,,,,,देख कैसी पनिया गई है,,,,,,,,,,,देख गुलाबी वाले छेद को,,,,,,,ठहर जा पूरा फैला कर दिखाती हुं,,,,,,,,,देख अन्दर कैसा पानी लगा है,,,,,इसको चाटने में बहुत मजा आता है,,,,,,,,चाटेगा,,,,??,,,चल आ जा,,,,,,"

और बिना कुछ पुछे उर्मिला देवी ने मदन के सिर को बालों से पकड़ कर अपनी चूत पर झुका दिया।
मदन भी मस्तराम की किताबों को पढ़ कर जानता तो था ही की चूत चाटी और चुसी जाती है, और इनकार करने का मतलब नही था. क्या पता मामी फिर इरादा बदल दे ?

इसलिये चुपचाप मामी की दोनो रानो पर अपने हाथों को जमा कर अपनी जीभ निकाल कर चूत के गुलाबी होठों को चाटने लगा। उर्मिला देवी उसको बता रही थी की कैसे चाटना है ।

"हां, पूरी चूत पर ऊपर से नीचे तक जीभ फिरा के चाट,,,,,,। हां, ऐसे ही शशशशशीईई ईईईईईईई ठीक इसी तरह से, हांआआ, ऊपर जो दाने जैसा दिख रहा है ना, सो चूत का भगनशा है,,,,,,,,उसको अपनी जीभ से रगड़ते हुए हल्के हल्के चाट,,,,,,,,,,शशश शशीईईईईईईईईई शाबाश,,,,,,,, टीट को मुंह मेअं लेएएएए।"

मदन ने बुर के भगनशे को अपने होठों के बीच ले लिया और चूसने लगा। उर्मिला देवी की चूत, टीट-चुसाई पर मस्त हो कर पानी छोड़ने लगी। पहली बार चूत चाटने को मिली थी, तो पूरा जोश दिखा रहा था। जंगली कुत्ते की तरह लफड-लफड करता हुआ अपनी खुरदरी जीभ से मामी की चूत को घायल करते हुए चाटे जा रहा था। चूत की गुलाबी पंखुडीयों पर खुरदरी जीभ का हर प्रहार उर्मिला देवी को अच्छा लग रहा था। वो अपने बदन के हर अंग को रगड़वाना चाहती थी, चाहती थी की मदन पूरी चूत को मुंह में भर ले और स्लररप स्लररप करते हुए चुसे।

मदन के सर को अपनी चूत पर और कस के दबा कर सिसयायी,
"ठीक से चुअस,,,,,,,,,,,,मदन बेटा,,,,,, पूरा मुंह में ले कर,,,,,,,,,हां ऐसे ही,,,,,,,,,शशश शशीईईईईईईईईई ,,,,, बहुत मजा दे रहा है। हाय,,,,,,,,,,,, ,,,,,आआआअह्हाआअ,,,,,,,,,,,,सही चूस रहा हैएएएएए, हांआआ ऐसे ही चूऊउस,,,,,,,,एएएएएस्स्स्स्सेएएए ही."
मदन भी पूरा ठरकी था। इतनी देर में समझ गया था की, उसकी मामी एक नंबर की चुदैल, रण्डी, मादरचोद किस्म की औरत है। साली छिनाल चूत देगी, मगर तड़पा-तड़पा कर।

वैसे उसको भी मजा आ रहा था, ऐसे नाटक करने में। उसने बुर की दोनो फांको को अपनी उंगलियों से फैला कर पूरा फ़ैला दिया, और जीभ को नुकीला कर के गुलाबी छेद में डाल कर घुमाने लगा। चूत एकदम पसीज कर पानी छोड़ रही थी। नुकीली जीभ को चूत के गुलाबी छेद में डाल कर घुमाते हुए चूत की दिवारों से रीस रहे पानी को चाटने लगा।

उर्मिला देवी मस्त हो कर चूतड़ों हवा में लहरा रही थी। अपने दोनो हाथों से चूचियों को दबाते हुए, मदन के होठों पर अपनी फुद्दी को रगड़ते हुए चिल्लायी,
"ओह मदन,,,,,,,,मेरा बेटाआआ,,,,,,,,,बहुत मजा आ रहा है, रेएएए,,,,,,,,,,ऐसे ही चाट,,, ,,,,,पूरी बुर चाट ले,,,,,,,,,तूने तो फिर से चुदास से भर दिया,,,,,,,,,,हरामी ठीक से पूरा मुंह लगा कर चाआट नही तो मुंह में ही मुत दूँगीईईइ,,,,,,,,अच्छी तरह से चाआट,,,,,"
ये अब एकदम नये किस्म की धमकी थी। मदन एकदम आश्चर्यचकित हो गया। अजीब कमजर्फ, कमीनी औरत थी। मदन जहां सोचता था अब मामला पटरी पर आ गया है, ठीक उसी समय कुछ नया शगुफा छोड़ देती थी।

सो मदन ने भी एक दाँव फ़ेका, चूत पर से मुंह हटा दिया और गम्भीरता से बोला,
"ओह मामी,,,,,,,,,,तुमको पेशाब लगी है, तो जाओ कर आओ,,,,,,,"

चूत से मुंह हटते ही उर्मिला देवी का मजा कीरकीरा हुआ. मदन के बालो को पकड़ लिया, और गुस्से से भनभनाती हुई उसको जोर से बिस्तर पर पटक दिया, और छाती पर चढ़ कर बोली,
"चुप हराम खोर,,,,,,,,,,अभी चाट ठीक से,,,,,,,,,,अब तो तेरे मुंह में ही मुतुंगी,,,,,,,,,,,,,, पेशाब करने जा रही थी, तब क्यों रोकाआ था,,,,,,,,,,,,,?"

कहते हुए अपनी बुर को मदन के मुंह पर रख कर जोर से दबा दिया। इतनी जोर से दबा रही थी, की मदन को लग रहा था की उसका दम घुट जायेगा। दोनो चूतड़ के नीचे हाथ लगा कर किसी तरह से उसने चूत के दबाव को अपने मुंह पर से कम किया, मगर उर्मिला देवी तो मान ही नही रही थी। चूत फैला कर ठीक पेशाब वाले छेद को मदन के होठों पर दबा दिया, और रगड़ते हुए बोली,
"चाट ना,,,!!?,,,,,,,चाट जरा मेरी पेशाब वाली छेद को,,,,,,,,नही तो अभी मुत दूँगी तेरे मुंह पर,,,,,,,,,हरामी,,,,,,,,,,कभी किसी औरत को मुतते हुए नही देखा है ना ?,,,,,,,, अभी दिखाती हूँ, तुझे."

और सच में एक बुंद पेशाब टपका दिया,,,,,,,,,,अब तो मदन की समझ में नही आ रहा था की क्या करें कुछ बोला भी नही जा रहा था। मदन ने सोचा साली ने अभी तो एक बुंद ही मुत पिलाया है, पर कहीं अगर कुतिया ने सच में पेशाब कर दिया तो क्या करूँगा ?? चुप-चाप चाटने में ही भलाई है, ऐसे भी पूरी बुर तो चटवा ही रही है। पेशाब वाले छेद को मुंह में भर कर चाटने लगा। बुर के भगनशे को भी अपनी जीभ से छेड़ते हुए चाट रहा था।

पहले तो थोड़ी घिन्न सी लगी थी मगर फिर मदन को भी मजा आने लगा। अब वो बड़े आराम से पूरी फुद्दी को चाट रहा था। दोनो हाथों से गुदाज चूतड़ों को मसलते हुए बुर का रस चख रहा था।
उर्मिला देवी अब चुदास से भर चुकी थी,
"उफफफ्फ्,,,,,,,,,शीईईईईई बहुत,,,,,,,मजा,,,,,,,,हाय रेएएएएएएए तूने तो खुजली बढ़ा दी, कंजरे,,,,,,,,,अब तो फिर चुदवाना पडेगा,,,,,,,,भोसड़ी के, लण्ड खड़ा है कि, ?!!!!,,,,,"

क्रमश:……………………

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Re: सलीम जावेद की रंगीन दुनियाँ

Unread post by The Romantic » 06 Nov 2014 15:33

चौधराइन
भाग 18 - माहिर मदन



मदन जल्दी से चूत पर से मुंह हटा कर बोला.
"ख्...खड़ा है, मामी,,,,,,,,एकदम खड़ा हैएएएएएए.."

"कैसे चोदना है ??,,,,,,,चल छोड़ मैं खुद,,,,,,,,"

"हाय, नही मामी,,,,,,,इस बाआर,,,,,,,मैं,,,,,,,,,,"

"फिर आजा सदानन्द के लण्ड,,,,,,,,जल्दी से,,,,,,,,बहुत खुजली हो,,,,,,,,,,,,,",
कहते हुए उर्मिला देवी नीचे पलंग पर लेट गई। दोनो टांग घुटनो के पास से मोड़ कर जांघ फैला दी, चूत की फांको ने अपना मुंह खोल दिया था।

मदन लण्ड हाथ में लेकर जल्दी से दोनो जांघो के बीच में आया, और चूत पर लगा कर कमर को हल्का सा झटका दिया। लण्ड का सुपाड़ा उर्मिला देवी की भोसड़े में पक की आवाज के साथ घुस गया। सुपाड़ा घुसते ही उर्मिला देवी ने अपने चूतड़ों को उचकाया । मोटा पहाड़ी आलु जैसा सुपाड़ा पूरा घुस चुका था। मामी की फुद्दी एकदम गरम भठ्ठी की तरह थी। चूत की गरमी को पाकर मदन का लण्ड फनफना गया।

लण्ड फ़क से मामी की बुर में फिसलता चला गया। कुंवारी लौंडिया होती तो शायद रुकता, मगर यह तो उर्मिला देवी की सेंकडो बार चुदी चूत थी, जिसकी दिवारों ने आराम से रास्ता दे दिया। उर्मिला देवी को लगा जैसे किसी ने उसकी चूत में मोटा लोहे का डन्डा गरम करके डाल दिया हो। लण्ड चूत के आखीरी कोने तक पहुंच कर ठोकर मार रहा था।
उफफफफ्फ्फ्,,,,,हरामी, आराम से नहीं डाल सकता था ?,,,,,,एक बार में ही पूराआआआ,,,,,,,,,,,"

आवाज गले में ही घुट के रह गई, क्योंकि ठरकी मदन अब नही रुकने वाला था। चूतड़ों उछाल उछाल कर पका-पक लण्ड पेले जा रहा था। मामी की बातों को सुन कर भी उनसुनी कर दी। मन ही मन उर्मिला देवी को गाली दे रहा था,
",,,,,,,,,साली कुतिया ने इतना नाटक करवाया है,,,,,,,,,बहन की लौडी ने,,,,,,,,अब इसकी बातों को सुन ने का मतलब है, फिर कोई नया नाटक खड़ा कर देगी,,,,,,,,,जो होगा बाद में देखूँगा,,,,,,,,पहले लण्ड का माल इसकी चूत में निकाल दुं,,,,,,,,,,,,,"

सोचते हुए धना-धन चूतड़ों उछाल-उछाल कर पूरे लण्ड को सुपाड़े तक खींच कर चूत में डाल रहा था। कुछ ही देर में चूत की दिवारों से पानी का सैलाब बहने लगा। लण्ड अब सटा-सट फच-फच की आवाज करते हुए अन्दर बाहर हो रहा था। उर्मिला देवी भी बेपनाह मजे में डुब गई। मदन के चेहरे को अपने हाथों से पकड़ उसके होठों को चुम रही थी, मदन भी कभी होठों कभी गालो को चुमते हुए चोद रहा था।

उर्मिला देवी के मुंह से सिसकारियाँ निकल रही थी,,,,,,,,
"शीईईईईईईईई,,,,,,,,,,,आईईईईईई,,,,,,और जोर सेएएएएएएएएए मदन,,,,,,,,,उफफफफ्फ्फ् बहुत मजा आआआककक्क्क्क्क्,,,,,,,,,,,,,,,,,फाआआड देएएएएएगाआआ,,,,,,,,उफफफफ्फ्फ् मादरच्,,"

"उफफफफ्फ्फ् मामी, बहुत मजा आ रहा हैएएएए,,,,,,,,,,,"

"हां, मदन बहुत मजा आ रहा है,,,,,,,,,,,,,,,,ऐसे ही धक्के माआर,,,,,,,,बहुत मजा दे रहा तेरा हथियार,,,,,हाआये शीईईईईई चोद्,,,,,,,,,,अपने घोड़े जैसे,,,,,,,लण्ड सेएएएएए"
तभी मदन ने दोनो चूचियों को हाथों में भर लिया, और खूब कस कर दबाते हुए एक चूची को मुंह में भर लिया, और धीरे धीरे चूतड़ों उछालने लगा। उर्मिला देवी को अच्छा तो लगा मगर उसकी चूत पर तगडे धक्के नही पड़ रहे थे।

"मादरचोद, रुकता क्यों है ? दुध बाद में पीना, पहले चूतड़ों तक का जोर लगा के चोद."

"हाय मामी, थोड़ा दम तो लेने दो,,,,,,,,,पहली बार,,,,,,,,,,,?"

"चुप हरामी,,,,,,,,,,,चूतड़ों में दम नही,,,,,,,,,,,तो चोदने के लिये क्यों मर रहा था ?,,,,,,, मामी की चूत में मजा नही आ रहा क्या,,,,,,,,,,,?"

"ओह्ह्हह मामी, मेरा तो सपना सच हो गयाआ,,,,,,,,,,,,,,,,हर रोज सोचता था कैसे आपको चोदु ?!!,,,,,आज,,,,,,,मामी,,,,,,,,ओह मामी,,,,,,,,,,बहुत मजा आ रहा हैएएएएएए,,,,,,,,,,,बहुत गरम हैएएएएए आपकी चूत."

"हां, गरम और टाईट भी है,,,,,,,,,चोदो,,,,,,,,,आह्ह्ह,,,,,,,चोदो अपनी इस चुदासी मामी को ओह्ह्ह्हह,,,,,,,,,बहुत तडपी हुं,,,,,,,,,,,,मोटा लण्ड खाने के लिये,,,,,,,,,,तेरा मामा, बहन का लण्ड तो बस्सस,,,,,,,तू,,,,,,,,अब मेरे पास ही रहेगा,,,,,,,,, ,यहीं पर अपनी जांघो के बीच में दबोच कर रखूँगी,,,,,,,,,"

मदन (धक्के लगाते हुए) –“हां मामी, अब तो मैं आपको छोड़ कर जाने वाला नहीईईई,,,,,,,ओह मामी, सच में चुदाई में कितना मजा है,,,,,,,,,, हाय मामी देखो ना कितने मजे से मेरा लण्ड आपकी चूत में जा रहा है और आप उस समय बेकार में चिल्ला,,,,,,,,,?

मामी (मदन के धक्कों की वजह से रुक रुक के) –“अबे साले…लण्ड वाला है ना, तुझे क्या पता,,,,,,,,,,इतना……मोटा…लण्ड किसी…कुंवारी लौंडिया में…घुसा देता तो………अब तक बेहोश………मेरे जैसी चुदक्कड़ औरत……को भी एक बार तो……………बहुत मस्त लण्ड है ऐसे ही पूरा जड़ तक ठेल ठेल कर चोद…आ…आ…आ…ईशईईईईईईईईई ,,,,,,,,तू तो पूरा खिलाडी चुदक्कड़ हो…ग…या है ।"
लण्ड फच फच करता हुआ चूत के अन्दर बाहर हो रहा था। उर्मिला देवी चूतड़ों को उछाल उछाल कर लण्ड ले रही थी। उसकी बहकी हुई चूत को मोटे १० इंच के लण्ड का सहारा मिल गया था। चूत इतरा-इतरा कर लण्ड ले रही थी।

मदन का लण्ड पूरा बाहर तक निकल जाता था, और फिर कच से चूत की गुलाबी दिवारों को रौंदता हुआ सीधा जड़ तक ठोकर मारता था। दोनो अब हांफ रहे थे। चुदाई की रफतार में बहुत ज्यादा तेजी आ गई थी। चूत की नैया अब किनारा खोज रही थी।

उर्मिला देवी ने अपने पैरो को मदन की कमर के इर्द गिर्द लपेट दिया था और चूतड़ों उछालते हुए सिसकाते हुए बोली,
"शीईईईईई राजा अब मेरा निकल जायेगा,,,,,,,,जोर जोर से चोद,,,,,,,,,,पेलता रह,,,,, चोदु,,,,,,,,,मार जोर शीईईईईई,,,,,,,,,,निकाल दे, अपना माआआल्ल अपनी मामी की चूत के अन्दर,,,,,,,,,,ओह ओहहहहह्ह्ह्ह्ह?

"हाय मामीईई, मेरा भी निकलेगा शीईईईईईईईईई तुम्हारी चूत फ़ाड़ डालूँगाआआ,,,मेरे लण्ड काआआ पानीईईई,,,,,,,,,,,ओह मामीईईईइ…। हायएएए,,,,,,,, ,,,,,,,उफफफफ्फ्फ्।"

"हाय मैं गईईईईईईई, ओह आआअहहह्ह्हाआआ शीईईईइए....",
करते हुए उर्मिला देवी ने मदन को अपनी बाहों में कस लिया, उसकी चूत ने बहुत सारा पानी छोड़ दिया। मदन के लण्ड से तेज फुव्वारे की तरह से पानी निकलने लगा। उसकी कमर ने एक तेज झटका खाया और लण्ड को पूरा चूत के अन्दर पेल कर वो भी हांफते हुए ओहहहह्ह्ह्ह्ह्ह करते हुए झड़ने लगा। लण्ड ने चूत की दिवारों को अपने पानी से सरोबर कर दिया। दोनो मामी-भांजा एक दूसरे से पूरी तरह से लिपट गये। दोनो पसीने से तर-बतर एक दूसरे की बाहों में खोये हुए बेसुध हो गये।
करीब पांच मिनट तक इसी अवस्था में रहने के बाद जैसे उर्मिला देवी को होश आया उसने मदन को कन्धो के पास से पकड़ कर हिलाते हुए उठाया,
"मदन उठ,,,,,मेरे ऊपर ही सोयेगा क्या ?"

मदन जैसे ही उठा पक की आवाज करते हुए उसका मोटा लण्ड चूत में से निकल गया। वो अपनी मामी के बगल में ही लेट गया। उर्मिला देवी ने अपने पेटीकोट से अपनी चूत पर लगे पानी पोंछा और उठ कर अपनी चूत को देखा तो उसकी की हालत को देख कर उसको हँसी आ गई। चूत का मुंह अभी भी थोड़ा सा खुला हुआ था। उर्मिला देवी समझ गई की मदन के हाथ भर के लण्ड ने उसकी चूत को पूरा फैला दिया है। अब उसकी चूत सच में भोसड़ा बन चुकी है और वो खुद भोसड़ेवाली चुदक्कड़ । माथे पर छलक आये पसीने को वहीं रखे टोवेल से पोंछने के बाद उसी टोवेल से मदन के लण्ड को बड़े प्यार से साफ कर दिया।"
मदन मामी को देख रहा था। उर्मिला देवी की नजरे जब उस से मिली तो वो उसके पास सरक गई, और मदन के माथे का पसीना पोंछ कर पुछा,
"मजा आया,,,,,,,,???"

मदन ने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "हां मामी,,,,,,,,,बहुत !!!।"

अभी ठीक ५ मिनट पहले रण्डी के जैसे गाली गलोच करने वाली बड़े प्यार से बाते कर रही थी।

"थक गया क्या ?,,,,,,,,,सो जा, पहली बार में ही तूने आज इतनी जबरदस्त मेहनत की है, जितनी तेरे मामा ने सुहागरात को नही की होगी."

मदन को उठता देख बोली, "कहाँ जा रहा है ?"

"अभी आया मामी,,,,,,,,,। बहुत जोर की पेशाब लगी है."

"ठीक है, मैं तो सोने जा रही हूँ,,,,,,,,,,अगर मेरे पास सोना है, तो यहीं सो जाना नही तो अपने कमरे में चले जाना,,,,,,,,,,,,केवल जाते समय लाईट ओफ कर देना."

पेशाब करने के बाद मदन ने मामी के कमरे की लाईट ओफ की, और दरवाजा खींच कर अपने कमरे में चला गया। उर्मिला देवी तुरंत सो गई, उन्होंने इस ओर ध्यान भी नही दिया। अपने कमरे में पहुंच कर मदन धड़ाम से बिस्तर पर गिर पड़ा, उसे जरा भी होश नही था।
सुबह करीब सात बजे की उर्मिला देवी की नींद खुली। जब अपने नंगेपन का अहसास हुआ, तो पास में पड़ी चादर खींच ली। अभी उसका उठने का मन नही था। बन्द आंखो के नीचे रात की कहानी याद कर, उनके होठों पर हल्की मुस्कुराहट फैल गई। सारा बदन गुद-गुदा गया। बीती रात जो मजा आया, वो कभी ना भुलने वाला था। ये सब सोच कर ही उसके गालो में गड्ढे पड़ गये, की उसने मदन के मुंह पर अपना एक बुंद पेशाब भी कर दिया था। उसके रंगीन सपने साकार होते नजर आ रहे थे।

ऊपर से उर्मिला देवी भले ही कितनी भी सीधी सादी और हँसमुख दिखती थी, मगर अन्दर से वो बहुत ही कामुक-कुत्सीत औरत थी। उसके अन्दर की इस कामुकता को उभारने वाली उसकी सहेली हेमा शर्मा थी। जो अब उर्मिला देवी की तरह ही एक शादी शुदा औरत थी, और उन्ही के शहर में रहती थी।

हेमा, उर्मिला देवी के कालेज के जमाने की सहेली थी। कालेज में ही जब उर्मिला देवी ने जवानी की दहलीज पर पहला कदम रखा था, तभी उनकी इस सहेली ने जो हर रोज अपने चाचा-चाची की चुदाई देखती थी, उनके अन्दर काम-वासना की आग भड़का दी। फिर दोनो सहेलीयां एक दूसरे के साथ लिपटा-चिपटी कर तरह-तरह के कुतेव करती थी, गन्दी-गन्दी किताबे पढ़ती थी, और शादी के बाद अपने पतियों के साथ मस्ती करने के सपने देखा करती।

हेमा का तो पता नही, मगर उर्मिला देवी की किस्मत में एक सीधा सादा पति लिखा था, जिसके साथ कुछ दिनो तक तो उन्हे बहुत मजा आया मगर, बाद में सब एक जैसा हो गया। और जब से लड़की थोड़ी बड़ी हो गई मदन का मामा हफ्ते में एक बार नियम से उर्मिला देवी की साड़ी उठाता लण्ड डालता धकम पेल करता, और फिर सो जाता।

उर्मिला देवी का गदराया बदन कुछ नया मांगता था। वो बाल-बच्चे, घर-परिवार सब से निश्चिंत हो गई थी. सब कुछ अपनी रुटीन अवस्था में चल रहा था। ऐसे में उसके पास करने धरने के लिये कुछ नही था, और उसकी कामुकता अपने उफान पर आ चुकी थी। अगर पति का साथ मिल जाता तो फिर,,,,,,,,,, मगर उर्मिला देवी की किस्मत ने धोखा दे दिया। मन की कामुक भावनाओं को बहुत ज्यादा दबाने के कारण, कोमल भावनायें कुत्सीत भावनाओं में बदल गई थी। अब वो अपने इस नये यार के साथ तरह-तरह के कुतेव करते हुए मजा लूटना चाहती थी।
आठ बजने पर बिस्तर छोडा, और भाग कर बाथरुम में गई. कमोड पर जब बैठी और चूत से पेशाब की धारा निकलने लगी, तो रात की बात फिर से याद आ गई और चेहरा शरम और मजे की लाली से भर गया। अपनी चुदी चूत को देखते हुए, उनके चेहरे पर मुस्कान खेल गई की, कैसे रात में मदन के मुंह पर उन्होंने अपनी चूत रगडी थी, और कैसे लौंडे को तड़पा तड़पा कर अपनी चूत की चटनी चटाई थी।

नहा धो कर, फ्रेश हो कर, निकलते निकलते ९ बज गये, जल्दी से मदन को उठाने उसके कमरे में गई, तो देखा लौंडा बेसुध होकर सो रहा है। थोड़ा सा पानी उसके चेहरे पर डाल दिया।

मदन एकदम से हडबड़ा कर उठता हुआ बोला, "पेशशशा,,,,ब,,,,,,मत्,,,,,,,।"

आंखे खोली तो सामने मामी खड़ी थी। वो समझ गई की, मदन शायद रात की बातो को सपने में देख रहा था, और पानी गिरने पर उसे लगा शायद मामी ने उसके मुंह पर फिर से कर दिया। मदन आंखे फ़ाड़ कर उर्मिला देवी को देख रहा था।

"अब उठ भी जाओ,,,,,,,,९ बज गये है, अभी भी रात के ख्वाबो में डुबे हो क्या,,,,,"

फिर उसके शोर्टस् के ऊपर से लण्ड पर एक ठुंकी मारती हुई बोली,
"चल, जल्दी से फ्रेश हो जा.."

उर्मिला देवी रसोई में नाश्ता तैयार कर रही थी। बाथरुम से मदन अभी भी नही निकला था।

"अरे जल्दी कर,,,,,,,,,, नाश्ता तैयार है,,,,,,,,,इतनी देर क्यों लगा रहा है बेटा,,,,,,,,?"
ये मामी भी अजीब है। अभी बेटा, और रात में क्या मस्त छिनाल बनी हुई थी। पर जो भी हो बड़ा मजा आया था। नास्ते के बाद एक बार चुदाई करूँगा तब कही जाऊँगा।

ऐसा सोच कर मदन बाथरुम से बाहर आया तो देखा मामी डाइनिंग़ टेबल पर बैठ चुकी थी। मदन भी जल्दी से बैठ गया और नाश्ता करने लगा। कुछ देर बाद उसे लगा, जैसे उसके शोर्टस् पर ठीक लण्ड के ऊपर कुछ हरकत हुई। उसने मामी की ओर देखा, उर्मिला देवी हल्के हल्के मुस्कुरा रही थी। नीचे देखा तो मामी अपने पैरो के तलवे से उसके लण्ड को छेड़ रही थी।

मदन भी हँस पड़ा और उसने मामी के कोमल पैरो को, अपने हाथों से पकड़ कर उनके तलवे ठीक अपने लण्ड के ऊपर रख कर, दोनो जांघो के बीच जकड़ लिया। दोनो मामी-भांजे हँस पडे। मदन ने जल्दी जल्दी ब्रेड के टुकडो को मुंह में ठुसा और हाथों से मामी के तलवे को सहलाते हुए, धीरे-धीरे उनकी साड़ी को घुटनो तक ऊपर कर दिया। मदन का लण्ड फनफना गया था। उर्मिला देवी लण्ड को तलवे से हल्के हल्के दबा रही थी। मदन ने अपने आप को कुर्सी पर एडजस्ट कर, अपने हाथों को लम्बा कर, साड़ी के अन्दर और आगे की तरफ घुसा कर जांघो को छूते हुए सहलाने की कोशिश की।

उर्मिला देवी ने हस्ते हुए कहा,
"उईइ क्या कर रहा है ?,,,,,,,कहाँ हाथ ले जा रहा है,,,,,,,,??"

"कोशिश कर रहा हुं, कम से कम उसको छू लूँ, जिसको कल रात आपने बहुत तड़पा कर् छूने दिया.."

"अच्छा, बहुत बोल रहा है,,,,,,,रात में तो मामी,,,,मामी कर रहा था.."

"कल रात में तो आप एकदम अलग तरह से व्यवहार कर रही थी.."

"शैतान, तेरे कहने का क्या मतलब है, कल रात मैं तेरी मामी नही थी तब.."

"नहीं मामी तो आप मेरी सदा रहोगी, तब भी और अब भी मगर,,,,,,"

"तो रात वाली मामी अच्छी थी, या अभी वाली मामी,,,,,???"
"मुझे तो दोनो अच्छी लगती है,,,,,,,,पर अभी जरा रात वाली मामी की याद आ रही है.",
कहते हुए मदन कुर्सी के नीचे खिसक गया, और जब तक उर्मिला देवी,
"रुक, क्या कर रहा है ?"
कहते हुए रोक पाती, वो डाइनिंग़ टेबल के नीचे घुस चुका था और उर्मिला देवी के जाँघों और पिंडलियों चाटने लगा था। उर्मिला देवी के मुंह सिसकारी निकल गई. वो भी सुबह से गरम हो रही थी।

"ओये,,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कर रहा है ??,,,,,,,नाश्ता तो कर लेने दे,,,,,,,,"

'''पच्च पच्च,,,,,,,,,''',,,,,,, "ओह, तुम नाश्ता करो मामी. मुझे अपना नाश्ता कर लेने दो."

"उफफफ्फ्,,,,,,,,,,,,मुझे बाजार जाना है. अभीईई छोड़ दे,,,,,,,,,,,बाद मेंएएए,,,,,,,,,"

उर्मिला देवी की आवाज उनके गले में ही रह गई। मदन अब तक साड़ी को जांघो से ऊपर तक उठा कर उनके बीच घुस चुका था। मामी ने आज लाल रंग की कच्छी पहन रखी थी। नहाने के कारण उनकी स्किन चमकीली और मख्खन के जैसी गोरी लग रही थी, और भीनी भीनी सुगंध आ रही थी।
मदन गदराई गोरी जांघो पर पुच्चीयां लेता हुआ आगे बढ़ा, और कच्छी के ऊपर एक जोरदार चुम्मी ली।

उर्मिला देवी ने मुंह से, "आऊचाआ,,,,,,ऐस्स्सेएएए क्या कर रहा है ?, निकल।"

"मामीईइ,,,,,,,,,,मुझे भी ट्युशन जाना है,,,,,,,,पर अभी तो तुम्हारा फ्रुट ज्युस पी कर हीईइ,,,,,,,,"

कहते हुए मदन ने पूरी चूत को कच्छी के ऊपर से अपने मुंह भर कर जोर से चुसा।
"इसससस्,,,,,,,, एक ही दिन में ही उस्ताददद,,,,बन गया हैएएए,,,,,,,चूत काआ पानी फ्रुट ज्युस लगता हैएएएएएए !!!,,,,,,,,उफफ,,,,, कच्छीई मत उताररररा,,,,"

मगर मदन कहाँ मान ने वाला था। उसके दिल का डर तो कल रात में ही भाग गया था। जब वो उर्मिला देवी के बैठे रहने के कारण कच्छी उतारने में असफल रहा, तो उसने दोनो जांघो को फैला कर चूत को ढकने वाली पट्टी के किनारे को पकड़ खींचा और चूत को नंगा कर उस पर अपना मुंह लगा दिया। झांटो से आती भीनी-भीनी खुश्बु को अपनी सांसो मे भरता हुआ, जीभ निकाल चूत के भगनसे को भुखे भेड़िये की तरह काटने लगा।

फिर तो उर्मिला देवी ने भी हथियार डाल दिये, और सुबह-सुबह ब्रेकफास्ट में चूत चुसाई का मजा लेने लगी। उनके मुंह से सिसकारियाँ फुटने लगी। कब उन्होंने कुर्सी पर से अपने चूतड़ों को उठा कच्छी निकलवाई, और कब उनकी जांघे फैल गई, उसका उन्हे पता भी न चला। उन्हे तो बस इतना पता था, की उनकी फैली हुई चूत के मोटे मोटे होठों के बीच मदन की जीभ घुस कर उनकी बुर की चुदाई कर रही थी. और उनके दोनो हाथ उसके सिर के बालो में घुम रहे थे और उसके सिर को जितना हो सके अपनी चूत पर दबा रहे थे।

थोड़ी देर की चुसाई-चटाई में ही उर्मिला देवी पस्त होकर झड़ गई, और आंख मुंदे वहीं कुर्सी पर बैठी रही। मदन भी चूत के पानी को पी कर अपने होठों पर जीभ फेरता जब डाइनिंग़ टेबल के नीचे से बाहर निकला तब उर्मिला देवी उसको देख मुस्कुरा दी और खुद ही अपना हाथ बढ़ा कर उसके शोर्टस् को सरका कर घुटनो तक कर दिया।
"सुबह सुबह तूने,,,,,,,,ये क्या कर दिया,,,,,,,,!!?", कहते हुए उसके लण्ड सहलाने लगी।
"ओह मामी, सहलाओ मत,,,,,,,,,,,,,,,चलो बेडरुम में ।"
क्रमश:…………………………