बात एक रात की compleet

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rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 11 Dec 2014 04:09

raj sharma stories

बात एक रात की--34

गतान्क से आगे.................

मैं दो दिन देल्ही रही और अंकल ने मेरी चार बार ली. उसके बाद मुझे बार इच्छा होने लगी. फिर मेरा टांका दिनेश से भीड़ गया. उसके बाद राज मिल गया. राज के साथ कैसे हुआ वो बड़ी मज़ेदार कहानी है सुनोगी क्या?

नगमा ने ध्यान से देखा तो पाया कि पूजा सो चुकी है.

"ये भी पद्‍मिनी जैसी है मेरी बातो में कोई रूचि नही लेती हा...और ना अपनी बताती है."

नगमा ने घड़ी में देखा की रात के 10 बज चुके थे.

बाहर कुत्तो के भोंकने की आवाज़ से नगमा सहम गयी.

"कही वो यही कही तो नही घूम रहा." नगमा ने सोचा.

"अफ पहले पता होता की आज बापू नही आ रहे तो राज के साथ कोई प्रोग्राम बना लेती आज की रात बेकार जाएगी."

अचानक नगमा को घर के बाहर कुछ हलचल सुनाई देती है. वो लाइट बंद करके खिड़की से बाहर झाँक कर देखती है.

"ये भोलू यहा क्या कर रहा है?" नगमा ने सोचा.

मुझे तो ये भोलू ही कातिल लगता है. राज और मोहित को बेवकूफ़ बनाया है इसने. पर ये इस वक्त मेरे घर के बाहर क्या कर रहा है." नगमा ने सोचा.

बाहर सन्नाटा फैला था और कुत्ते बार बार भोंक रहे थे. भोलू नगमा के घर के बाहर खड़ा था.

"आख़िर ये चाहता क्या है, क्यों खड़ा है मेरे घर के बाहर"

नगमा भोलू पर बराबर नज़र रखे हुए थी. अचानक भोलू वाहा से चल दिया.

"कहा जा रहा है ये, इसका घर तो उस तरफ है" नगमा सोच में डूब गयी.

कुछ देर तक नगमा खिड़की पर खड़ी खड़ी बाहर झाँकति रही. जब उसे कुछ नज़र नही आया तो वापिस अपने बिस्तर पर आकर लेट गयी.

"कुछ तो गड़बड़ है भोलू के साथ.....कामीने ने मेरी गान्ड ले ली. पर इस बात का शूकर है की मेरी जान तो नही ली. राज को आज की बात बताउन्गि. पर वो खड़ा ही तो था मेरे घर के बाहर...कही वो मेरे चक्कर में तो यहा नही था. नही नही पर आज मैं उसके साथ नही जाती बड़ी चालाकी से गान्ड मारता है....अफ पर मेरी रात तो बेकार जा रही है" नगमा पड़े पड़े कुछ ना कुछ सोचे जा रही है.

..............................

..........................................

"ये गुरु कहाँ रह गया...10 बज चुके हैं." राज ने कहा.

पद्‍मिनी अपने ही ख़यालो में खोई थी. उसने कोई रिक्ट नही किया.

"पद्‍मिनी जी आप खाना खाओ ना कब तक आप यू ही चुपचाप बैठी रहेंगी."

"मुझे भूक नही है तुम खा लो"

"आपके बिना नही खाउन्गा मैं"

पद्‍मिनी ने राज की तरफ देखा और बोली,"मुझे भूक नही है कहा ना"

"थोड़ा तो ले लीजिए ऐसा कैसे चलेगा...आज भूक क्यों नही है"

"मुझे अब पोलीस में जा कर सारी सच्चाई बता देनी चाहिए"

"बात तो ठीक है मैं आपके साथ हूँ...पर इस से कुछ हाँसिल नही होगा. आपको पकड़ कर बंद कर दिया जाएगा और केस क्लोज़ कर दिया जाएगा."

"तो मैं क्या करूँ यही पड़ी रहू सारी उमर"

"मुझ पर यकीन रखिए मैं हू ना. मैं उसी इनस्पेक्टर के साथ हूँ जो इस केस को हॅंडल कर रहा है"

"तुम्हारा गुरु कहा है?"

"पता नही पूजा को छ्चोड़ने गया था...ना जाने कहा रह गया"

तभी राज का मोबाइल बज उठा. राज ने फोन उठाया और सुन कर रख दिया.

"गुरु घर नही आएगा आज" राज ने कहा.

"क्यों क्या हुआ?"

"अपने किसी दोस्त के साथ बैठा पी रहा है."

"बहुत बढ़िया मुझे मुसीबत में फँसा के जनाब दारू पी रहे हैं"

"आप कुछ खाओ ना" राज ने कहा.

राज के इतना कहने के बाद थोड़ा खा लेती है. राज भी खा लेता है.

"कल रात सुरिंदर के साथ कोई लड़की थी. उसे ढूँढना पड़ेगा. हो सकता है उसे कुछ पता हो के बारे में"

"वो वाहा क्या कर रही थी." पद्‍मिनी ने पूछा.

"बेडरूम का बिस्तर उथल पुथल था और...."

"बस बस समझ गयी" पद्‍मिनी ने राज को टोक दिया.

"अभी उस लड़की का कुछ आता पता नही लेकिन उम्मीद है की जल्दी पता चल जाएगा."

"ह्म....ठीक है राज तुम अब जाओ...मुझे नींद आ रही है"

"मैं आपको अकेला छ्चोड़ कर नही जाउन्गा"

"नही तुम जाओ मुझे अकेला छ्चोड़ दो" पद्‍मिनी बोल ही रही थी कि उसके सर से अचानक कुछ टकराया.

"आअहह" पद्‍मिनी दर्द से कराह उठी

राज ने ध्यान से देखा तो पाया कि पद्‍मिनी के पैरो में काग़ज़ में लिपटा एक पत्थर पड़ा था. राज ने फ़ौरन उसे उठाया और काग़ज़ को पत्थर से अलग करके पत्थर एक तरफ फेंक दिया. राज ने काग़ज़ फैलाया. उस पर लिखा था "यू कॅन रन बट यू कॅन नेवेर हाइड"

राज ने काग़ज़ पद्‍मिनी को दिया और फ़ौरन बाहर आकर देखा. कुत्ते ज़ोर ज़ोर से भोंक रहे थे और चारो तरफ सन्नाटा था. राज को कुछ दीखाई नही दिया.

पद्‍मिनी ने काग़ज़ पर लिखे शब्द पढ़े तो वो थर थर काँपने लगी. रौ दरवाजा बंद करके वापिस अंदर आ गया. थोड़ा वो भी डरा हुआ था.

"उस रात जंगल में वो चिल्ला चिल्ला कर यही बोल रहा था जो इस काग़ज़ पर लिखा है" पद्‍मिनी ने कहा.

राज ने फ़ौरन खिड़की बंद की और बोला,"उफ्फ वो कॅटा भी नही है आज...गुरु को भी आज ही पीनी थी"

"अरे आपके सर से तो खून निकल आया है" राज ने कहा.

पद्‍मिनी ने सर पर हाथ रखा तो उसकी उंगली पर खून की कुछ बूंदे लग गयी.

राज ने फोन निकाला और इनस्पेक्टर चौहान को फोन लगाया. पर उनका नंबर नही मिला. फिर उसने सब इनस्पेक्टर विजय को फोन किया. उन्होने फोन नही उठाया.

"उफ्फ कैसे पोलीस वाले हैं ये...कोई भी एमर्जेन्सी हो ये नही मिलेंगे" राज बड़बड़ाया.

हार कर राज ने मोहित को फोन किया. पर नशे की हालत में उसने भी फोन नही उठाया.

"सब के सब निक्कममे हैं मुझे ही कुछ करना होगा." राज ने कहा और कुण्डी खोलने लगा.

"क्या कर रहे हो बाहर मत जाओ...वो बहुत ख़तरनाक है" पद्‍मिनी ने कहा.

राज रुक गया और बोला, "पर उसे पकड़ने को अच्छा मोका था."

पद्‍मिनी जी यहा कुछ नही है सर पे लगाने को आप ऐसा करो थोड़ा ठंडा पानी डाल लो चोट पर खून बंद हो जाएगा."

"कोई बात नही खून बंद हो चुका है मामूली सी चोट है ठीक हो जाएगी"

"पद्‍मिनी जी आप की जगह कोई और होता तो ना जाने क्या हाल होता उसका. आप बड़ी बहादुरी से सब सह रही हो"

"बस बस मक्खन मत लगाओ मैं जानती हूँ तुम क्या कोशिस कर रहे हो"

"आप ऐसा क्यों बोलती हैं मुझे...मैं तो बस..."

"उसे पता है की मैं यहा हूँ" पद्‍मिनी ने कहा.

"शायद"

"शायद नही...उसे पता है वरना वो ये पत्थर क्यों फेंकता"

"नगमा के पीछे आया था वह कल यहा...हो सकता है वो उसके पीछे हो. कल आपको उसने नही पहचाना होगा. आज तो वो खिड़की के पास आया ही नही बस पत्थर फेंका है दूर से."

"हां पर ये तुम्हारा अंदाज़ा है...मैं एक पल भी यहा नही रुकूंगी मैं इसी वक्त घर जा रही हूँ"

"ये आप क्या कह रही हैं...ये वक्त कही आने जाने का नही है"

"तो क्या करूँ इस कमरे में बैठे बैठे अपनी किस्मत को रोती रहूं...मुझे अब यहा से जाना ही होगा."

"पद्‍मिनी जी आप समझ नही रही हैं वो बाहर ही कही है" राज ने कहा.

"तुम भी नही समझ रहे हो मेरा यहा रहना भी ठीक नही है"

"मैं समझ रहा हूँ पर...एक मिनट"

"क्या हुआ" पद्‍मिनी ने पूछा.

"एक काम हो सकता है"

"क्या?"

"हम एएसपी शालिनी जी से मिलते हैं और उन्हे सारी बात बताते हैं. मुझे यकीन है कि वो हमारी बात समझेंगी."

"ह्म्म कैसी हैं ये शालिनी."

"बहुत कड़क ऑफीसर है. उनके कारण ही मेरी जाय्निंग हुई है. मुझे यकीन है को वो हमारा साथ देंगी."

"ह्म्म...चलो फिर."

"रुकिये मैं पोलीस की जीप बुलाअता हूँ. एक कॉन्स्टेबल का नंबर है मेरे पास जो की जीप ला सकता है."

राज कॉन्स्टेबल को फोन मिलाता है और उसे जीप लाने को बोलता है.

"शूकर है उसने तो फोन उठाया...वो 20 मिनट में यहा पहुँच जाएगा."

20 मिनट में तो नही पर आधे घंटे में जीप वाहा आ गयी. राज पद्‍मिनी को लेकर कमरे से बाहर निकला. उसने चारो तरफ देखा... कोई दीखाई नही दिया. राज ने कमरे का ताला लगाया और पद्‍मिनी के साथ जीप में बैठ गया.

"हमे एएसपी साहिबा के घर ले चलो" राज ने कॉन्स्टेबल से कहा.

"जी सर"

अंधेरी रात में जीप सड़क पर आगे बढ़े जा रही थी. चारो तरफ सन्नाटा फैला था.

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नगमा रह रह कर करवट बदल रही थी.

"नींद क्यों नही आ रही मुझे?" नगमा धीरे से बोली.

उसे फिर से घर के बाहर कुछ हलचल सुनाई दी. वो फ़ौरन उठ कर खिड़की पर आ गयी.

"क्या ये भोलू अभी भी यही घूम रहा है" नगमा ने सोचा.

बाहर कुछ दीखाई नही दिया. पर आस पास कुछ हलचल ज़रूर हो रही थी.

"कही राज तो नही...उसे पता चल गया होगा कि मेरा बापू यहा नही है आज भी...शायद वो मेरे लिए यहा आया हो...पर वो आएगा तो धीरे से दरवाजा तो खड़काएगा ही. वैसे उसका कुछ नही पता एक बार बहुत देर तक खड़ा रहा था बाहर और मुझे खबर भी नही लगी...दरवाजा खोल कर देखूं क्या...नही...नही...दरवाजा खोलना ठीक नही होगा."

पर नगमा को लग रहा था कि बाहर कोई है ज़रूर. ना जाने उसे क्या सूझी...उसने हल्का सा दरवाजा खोला और बाहर झाँक कर दाए बाए देखा. "यहा तो कोई भी नही है बस कुत्ते भोंक रहे हैं."

नगमा दो कदम बाहर आ गयी और चारो तरफ देखने लगी. अचानक उसे किसी ने पीछे से दबोच लिया. उसके मूह को भी दबोच लिया गया था इसलिए वो चिल्ला नही पाई.

"घबराओ मत मैं हूँ... भोलू" भोलू ने कहा और नगमा के मूह से हाथ हटा लिया.

"तुम यहा क्या कर रहे हो...छ्चोड़ो मुझे." नगमा ने कहा.

"कल तू बड़ी जल्दी भाग गयी थी...मेरा तो एक बार और मन था."

नगमा को अपनी गान्ड पर भोलू का लंड महसूस हुआ. "इस लंड को मेरी गान्ड से हटाओ"

"क्यों अच्छा नही लग रहा क्या."

"पहले ये बताओ तुम यहा कर क्या रहे हो इतनी रात को."

"तेरे लिए भटक रहा था यहा. किसी ने मुझे बताया कि तेरा बापू आज नही आया तो मैने सोचा क्यों ना तेरे साथ एक और रात बिताई जाए."

"तुम झूठ बोल रहे हो छ्चोड़ो मुझे." नगमा ने कहा.

"चल ना नखरे मत कर...चल मेरे घर चलते हैं"

"ना बाबा ना मैं वाहा नही जाउन्गि."

"तो चल तेरे घर में ही करते हैं."

"मेरी छोटी बहन है साथ वो सो रही है"

"उसकी भी ले लूँगा चिंता क्यों करती है."

"चुप कर मेरी बहन के बारे में कुछ भी बोला तो ज़ुबान खींच लूँगी"

"फिर चल ना मेरे घर चलते हैं."

नगमा को अपनी गान्ड पर भोलू का लंड लगातार फील हो रहा था और वो धीरे धीरे बहकने लगी थी. उसका मन भी चुदाई के लिए तड़प रहा था पर वो भोलू के साथ जाने से डर रही थी.

क्रमशः..............................

BAAT EK RAAT KI--34

gataank se aage.................

Main do din delhi rahi aur uncle ne meri chaar baar li. Uske baad mujhe baar ichha hone lagi. Phir mera taanka dinesh se bheed gaya. Uske baad Raj mil gaya. Raj ke saath kaise hua vo badi mazedaar kahaani hai shunogi kya?

Nagma ne dhyaan se dekha to paaya ki puja so chuki hai.

"ye bhi padmini jaisi hai meri baato mein koi ruchi nahi leti huh...aur na apni bataati hai."

nagma ne ghadi mein dekha ki raat ke 10 baj chuke the.

Baahar kutto ke bhonkne ki awaaj se nagma saham gayi.

"kahi vo yahi kahi to nahi ghum raha." nagma ne socha.

"uff pahle pata hota ki aaj bapu nahi aa rahe to Raj ke saath koi program bana leti aaj ki raat bekaar jaayegi."

achchaanak nagma ko ghar ke baahar kuch halchal shunaayi deti hai. Vo light band karke khidki se baahar jhaank kar dekhti hai.

"ye bholu yaha kya kar raha hai?" nagma ne socha.

Mujhe to ye bholu hi kaatil lagta hai. Raj aur mohit ko bevkoof banaaya hai isne. Par ye is vakt mere ghar ke baahar kya kar raha hai." nagma ne socha.

baahar sannaata faila tha aur kutte baar baar bhonk rahe the. Bholu nagma ke ghar ke baahar khada tha.

"aakhir ye chaahta kya hai, kyon khada hai mere ghar ke baahar"

nagma bholu par baraabar nazar rakhe hue thi. Achchaanak bholu vaha se chsl diya.

"kaha ja raha hai ye, iska ghar to us taraf hai" nagma soch mein dub gayi.

Kuch der tak nagma khidki par khadi khadi baahar jhaankti rahi. Jab use kuch nazar nahi aaya to vaapis apne bistar par aakar let gayi.

"kuch to gadbad hai bholu ke saath.....kamine ne meri gaanD le li. Par is baat ka shukar hai ki meri jaan to nahi li. Raj ko aaj ki baat bataaungi. Par vo khada hi to tha mere ghar ke baahar...kahi vo mere chakkar mein to yaha nahi tha. Nahi nahi par aaj main uske saath nahi jaati badi chaalaaki se gaanD maarta hai....uff par meri raat to bekaar ja rahi hai" nagma pade pade kuch na kuch soche ja rahi hai.

........................................................................

"ye guru kaha rah gaya...10 baj chuke hain." Raj ne kaha.

Padmini apne hi khayaalo mein khoyi thi. Usne koi react nahi kiya.

"padmini ji aap khaana khaao na kab tak aap yu hi chupchaap baithi rahengi."

"mujhe bhuk nahi hai tum khaa lo"

"aapke bina nahi khaaunga main"

padmini ne Raj ki taraf dekha aur boli,"mujhe bhook nahi hai kaha na"

"thoda to le lijiye aisa kaise chalega...aaj bhook kyon nahi hai"

"mujhe ab police mein ja kar saari sachchaayi bata deni chaahiye"

"baat to theek hai main aapke saath hun...par is se kuch haansil nahi hoga. Aapko pakad kar band kar diya jaayega aur case close kar diya jaayega."

"to main kya karun yahi padi rahu saari umar"

"mujh par yakin rakhiye main hu na. Main usi inspector ke saath hun jo is case ko handle kar raha hai"

"tumhaara guru kaha hai?"

"pata nahi puja ko chhodne gaya tha...na jaane kaha rah gaya"

tabhi Raj ka mobile baj utha. Raj ne phone uthaaya aur shun kar rakh diya.

"guru ghar nahi aayega aaj" Raj ne kaha.

"kyon kya hua?"

"apne kisi dost ke saath baitha pee raha hai."

"bahut badhiya mujhe musibat mein phansa ke janaab daaru pee rahe hain"

"aap kuch khaao na" Raj ne kaha.

Raj ke itna kahne ke baad thoda khaa leti hai. Raj bhi khaa leta hai.

"kal raat surinder ke saath koi ladki thi. Use dhundhna padega. Ho sakta hai use kuch pata ho ke baare mein"

"vo vaha kya kar rahi thi." padmini ne pucha.

"bedroom ka bistar uthal puthal tha aur...."

"bas bas samajh gayi" padmini ne Raj ko tok diya.

"abhi us ladki ka kuch ata pata nahi lekin ummeed hai ki jaldi pata chal jaayega."

"hmm....theek hai Raj tum ab jaao...mujhe neend aa rahi hai"

"main aapko akela chhod kar nahi jaaunga"

"nahi tum jaao mujhe akela chhod do" padmini bol hi rahi thi ki uske sar se achchaanak kuch takraaya.

"aaahhh" padmini dard se karaah uthi

Raj ne dhyaan se dekha to paaya ki padmini ke pairo mein kaagaz mein lipta ek pathar pada tha. Raj ne fauran use uthaaya aur kaagaz ko pathar se alag karke pathar ek taraf fenk diya. Raj ne kaagaz failaaya. Us par likha tha "you can run but you can never hide"

Raj ne kaagaz padmini ko diya aur fauran baahar aakar dekha. Kutte jor jor se bhonk rahe the aur chaaro taraf sannaata tha. Raj ko kuch deekhaayi nahi diya.

Padmini ne kaagaz par likhe shabd padhe to vo thar thar kaanpne lagi. Rau darvaaja band karke vaapis ander aa gaya. Thoda vo bhi dara hua tha.

"us raat jungle mein vo cheella cheella kar yahi bol raha tha jo is kaagaz par likha hai" padmini ne kaha.

Raj ne fauran khidki band ki aur bola,"uff vo katta bhi nahi hai aaj...guru ko bhi aaj hi peeni thi"

"arey aapke sar se to khun nikal aaya hai" Raj ne kaha.

Padmini ne sar par haath rakha to uski ungli par khun ki kuch bunde lag gayi.

Raj ne phone nikaala aur inspector chauhan ko phone lagaaya. Par unka number nahi mila. Phir usne sub inspector vijay ko phone kiya. Unhone phone nahi uthaaya.

"uff kaise police waale hain ye...koi bhi emergency ho ye nahi milenge" Raj badbadaaya.

Haar kar Raj ne mohit ko phone kiya. Par nashe ki haalat mein usne bhi phone nahi uthaaya.

"sab ke sab nikkamme hain mujhe hi kuch karna hoga." Raj ne kaha aur kundi kholne laga.

"kya kar rahe ho baahar mat jaao...vo bahut khatarnaak hai" padmini ne kaha.

Raj ruk gaya aur bola, "par use pakadne ko achcha moka tha."

padmini ji yaha kuch nahi hai sar pe lagaane ko aap aisa karo thoda thanda paani daal lo chot par khun band ho jaayega."

"koi baat nahi khun band ho chuka hai maamuli si chot hai theek ho jaayegi"

"padmini ji aap ki jagah koi aur hota to na jaane kya haal hota uska. Aap badi bahaaduri se sab sah rahi ho"

"bas bas makhan mat lagaao main jaanti hun tum kya koshis kar rahe ho"

"aap aisa kyon bolti hain mujhe...main to bas..."

"use pata hai ki main yaha hun" padmini ne kaha.

"shaayad"

"shaayad nahi...use pata hai varna vo ye pathar kyon fenkta"

"nagma ke peeche aaya tha va kal yaha...ho sakta hai vo uske peeche ho. Kal aapko usne nahi pahchaana hoga. Aaj to vo khidki ke paas aaya hi nahi bas pathar fenka hai dur se."

"haan par ye tumhaara andaaja hai...main ek pal bhi yaha nahi rukungi main isi vakt ghar ja rahi hun"

"ye aap kya kah rahi hain...ye vakt kahi aane jaane ka nahi hai"

"to kya karun is kamre mein baithe baithe apni kismat ko roti rahun...mujhe ab yaha se jaana hi hoga."

"padmini ji aap samajh nahi rahi hain vo baahar hi kahi hai" Raj ne kaha.

"tum bhi nahi samajh rahe ho mera yaha rahna bhi theek nahi hai"

"main samajh raha hun par...ek minat"

"kya hua" padmini ne pucha.

"ek kaam ho sakta hai"

"kya?"

"hum ASP shalini ji se milte hain aur unhe saari baat bataate hain. Mujhe yakin hai ki vo hamaari baat samjhengi."

"hmm kaisi hain ye shalini."

"bahut kadak officer hai. Unke kaaran hi meri joining huyi hai. Mujhe yakin hai ko vo hamaara saath dengi."

"hmm...chalo phir."

"rukiye main police ki jeep bulaaata hun. Ek constable ka number hai mere paas jo ki jeep la sakta hai."

Raj constable ko phone milaata hai aur use jeep laane ko bolta hai.

"shukar hai usne to phone uthaaya...vo 20 minat mein yaha pahunch jaayega."

20 minat mein to nahi par aadhe ghante mein jeep vaha aa gayi. Raj padmini ko lekar kamre se baahar nikla. Usne chaaro taraf dekha... koi deekhaayi nahi diya. Raj ne kamre ka taala lagaaya aur padmini ke saath jeep mein baith gaya.

"hame ASP saahiba ke ghar le chalo" Raj ne constable se kaha.

"ji sir"

andheri raat mein jeep sadak par aage badhe ja rahi thi. Chaaro taraf sannaata faila tha.

.............................................................

Nagma rah rah kar karvate badal rahi thi.

"neend kyon nahi aa rahi mujhe?" nagma dheere se boli.

Use phir se ghar ke baahar kuch halchal shunaayi di. Vo fauran uth kar khidki par aa gayi.

"kya ye bholu abhi bhi yahi ghum raha hai" nagma ne socha.

Baahar kuch deekhaayi nahi diya. Par aas paas kuch halchal jaroor ho rahi thi.

"kahi Raj to nahi...use pata chal gaya hoga ki mera bapu yaha nahi hai aaj bhi...shaayad vo mere liye yaha aaya ho...par vo aayega to dheere se darvaaja to khadkaayega hi. Vaise uska kuch nahi pata ek baar bahut der tak khada raha tha baahar aur mujhe khabar bhi nahi lagi...darvaaja khol kar dekhun kya...nahi...nahi...darvaaja kholna theek nahi hoga."

par nagma ko lag raha tha ki baahar koi hai jaroor. Na jaane use kya sujhi...usne halka sa darvaaja khola aur baahar jhaank kar daaye baaye dekha. "yaha to koi bhi nahi hai bas kutte bhonk rahe hain."

nagma do kadam baahar aa gayi aur chaaro taraf dekhne lagi. Achchaanak use kisi ne peeche se daboch liya. Uske muh ko bhi daboch liya gaya tha isliye vo cheella nahi paayi.

"ghabraao mat main hun... bholu" bholu ne kaha aur nagma ke muh se haath hata liya.

"tum yaha kya kar rahe ho...chhodo mujhe." nagma ne kaha.

"kal tu badi jaldi bhaag gayi thi...mera to ek baar aur man tha."

nagma ko apni gaanD par bholu ka lund mahsus hua. "is lund ko meri gaanD se hataao"

"kyon achcha nahi lag raha kya."

"pahle ye bataao tum yaha kar kya rahe ho itni raat ko."

"tere liye bhatak raha tha yaha. Kisi ne mujhe bataaya ki tera bapu aaj nahi aaya to maine socha kyon na tere saath ek aur raat bitaayi jaaye."

"tum jhut bol rahe ho chhodo mujhe." nagma ne kaha.

"chal na nakhre mat kar...chal mere ghar chalte hain"

"na baba na main vaha nahi jaaungi."

"to chal tere ghar mein hi karte hain."

"meri choti bahan hai saath vo so rahi hai"

"uski bhi le lunga chinta kyon karti hai."

"chup kar meri bahan ke baare mein kuch bhi bola to jubaan kheench lungi"

"phir chal na mere ghar chalte hain."

nagma ko apni gaanD par bholu ka lund lagaataar feel ho raha tha aur vo dheere dheere bahakne lagi thi. Uska man bhi chudaayi ke liye tadap raha tha par vo bholu ke saath jaane se dar rahi thi.

Kramashah..............................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 11 Dec 2014 04:10

raj sharma stories

बात एक रात की--35

गतान्क से आगे.................

भोलू नगमा के बूब्स को मसल्ने लगा और खड़े खड़े उसकी गान्ड पर धक्के मारने लगा.

"आअहह हटो ना."

"चलती है कि यही या यही मारु तेरी गान्ड."

"आअहह ठीक है चलती हूँ...मुझे घर को ताला मार देने दो. और मैं गान्ड में नही चूत में लूँगी कहे देती हूँ. आहह"

"जैसी तेरी मर्ज़ी खि..खि" भोलू हसणे लगा.

नगमा ने ताला लगाया और भोलू के साथ चल दी.

भोलू ने कमरे में आते ही नगमा को गोदी में उठा लिया और बोला,"आज रात तू कही नही जाएगी...सारी रात गान्ड मारूँगा तेरी"

"फिर वही बात कहा ना चूत में लूँगी गान्ड में नही."

"अरे एक ही बात है कहने में क्या जाता है."

"तूने बड़ी चालाकी से डाला था कल गान्ड में हा शरम नही आई तुम्हे."

"कोई भी लड़की गान्ड आसानी से नही देती...लेनी पड़ती है."

"पर 2 मिनट की बजाए 2 घंटे मारते रहे तुम मेरी गान्ड...अभी तक दर्द है मुझे. परसो राज ने ली थी कल तुमने ले ली. अब नही दूँगी मैं"

"बिल्कुल बिल्कुल.." भोलू ने कहा और नगमा को बिस्तर पर पटक दिया.

"आहह इतनी ज़ोर से क्यों गिराया."

"गद्दा मखमली है सोचा तुम्हे अच्छा लगेगा." भोलू ने कहा.

भोलू नगमा की छाती पर बैठ गया और अपना लंड बाहर निकाल लिया. लंड नगमा के मूह के बिल्कुल सामने था.

"ये क्या कर रहे हो."

"लंड चूस चुपचाप."

"मैं ये काम नही करती."

"तो अब करले चल मूह में डाल"

"मैं सच कह रही हूँ मैं लंड नही चूस्ति...मैने कभी राज का भी नही चूसा."

भोलू नगमा के होंटो पर अपना लंड रगड़ने लगा.

"नही हटो..."

"मेरी जान चूस के तो देख गन्ने से भी मीठा लगेगा तुझे."

भोलू लगातार नगमा के बंद मूह पर लंड रगड़ता रहा. "जब तक तू मूह नही खोलेगी ये यही रहेगा."

"तूने चूत में डालना है की नही."

"चूत में भी डालूँगा मेरी जान पहले थोडा चूस तो ले."

"उफ्फ क्या मुसीबत है...चल थोड़ी देर चूस लेती हूँ...पर दुबारा नही करूँगी ठीक है."

"ठीक है...हे..हे..हे."

"दाँत मत दीखाओ वरना दाँत मार दूँगी तुम्हारे लंड पे."

"नही ऐसा मत करना वरना..."

नगमा ने मूह खोला और भोलू के लंड को मूह में ले लिया. वो धीरे धीरे लंड चूसने लगी.

"मुझे पता था कि तू बहुत अच्छे से चूसेगी...आअहह."

नगमा लोली पोप की तरह लंड चूस रही थी और भोलू आहें भर रहा था. कुछ देर बाद नगमा ने लंड मूह से बाहर निकाल दिया और बोली, "चल बस बहुत हो गया...फटाफट मेरी चूत में डाल दे."

भोलू ने नगमा की सलवार उतारी और अपनी पॅंट उतार कर उसकी टाँगो के बीच बैठ गया. उसने नगमा की टांगे अपने कंधो पर रखी और एक झटके में नगमा की चिकनी चूत में लंड डाल दिया.

"आअहह भोलू....आआहह आज बस मेरी चूत की प्यास भुजा दे आहह"

"चिंता मत कर सारी रात छोड़ूँगा तुझे मैं" भोलू ने कहा और नगमा की चूत में ज़ोर ज़ोर से लंड अंदर बाहर करने लगा. उसके आँड हर धक्के के साथ नगमा की चूत के मूह से टकरा रहे थे.

"उुउऊहह भोलू....आआहह और तेज आअहह"

"तेरी चूत बहुत मस्त है नगमा सच बता कितने लंड खा चुकी है ये."

"ये वेजिटेरियन है....आआहह एक भी लंड नही खाया इसने आअहह"

"हा..हा..हा..हे..हे...बहुत खूब कही....मज़ा आता है तेरी चूत मारने में."

"तो मार ना और तेज़ी से मार आअहह.... मेरा भी आज बहुत मन था आहह."

भोलू ने थोड़ी स्पीड और बढ़ा दी और नगमा की चूत में लंड के धक्को की बोचार शुरू कर दी. नगमा 2 बार झाड़ चुकी थी.

"ऊओह बस मैं अब पानी छोड़ने वाला हूँ."

"नही रूको थोड़ी देर और करो आआहह." नगमा एक और ऑर्गॅज़म के करीब थी.

भोलू के धक्के चालू रहे और नगमा चीन्ख कर एक बार और झाड़ गयी. भोलू भी उसी के साथ उसके उपर ढेर हो गया.

"आअहह अब नींद आएगी मुझे" नगमा ने कहा.

"तू यहा सोने आई है क्या...अभी तो तेरी गान्ड भी मारनी है"

"ऐसा सोचना भी मत वरना दुबारा नही दूँगी समझे."

..............................

.........................

राज और पद्‍मिनी एएसपी शालिनी के घर के बाहर पहुँच गये.

"क्या सोच रहे हो बेल बजाओ."

"बहुत कड़क मेडम हैं डर लगता है."

"तुम हटो पीछे मुझे बेल बजाने दो."

पद्‍मिनी ने बेल बजाई. पर किसी ने दरवाजा नही खोला.

"लगता है मेडम सो रही हैं" राज ने कहा.

पद्‍मिनी ने फिर से बेल बजाई. किसी के आने की आहट सुनाई दी.

राज का दिल बैठ गया वो डर रहा था की ना जाने एएसपी साहिबा उनकी बात को किस तरह से लेंगी. उसे विस्वास तो था कि वो उनकी बात समझेंगी लेकिन फिर भी उनके गरम मिज़ाज से घबरा रहा था.

दरवाजा खुलता है.

"जी कहिए क्या काम है?" शालिनी की मैड ने पूछा.

"क्या शालिनी जी घर पे हैं?" राज ने कहा.

"हां हैं...क्या काम है?" मैड ने कहा.

"मेडम की तो मैड भी कड़क है" राज सोचने लगा.

"हमे उनसे मिलना है" पद्‍मिनी ने कहा.

"ये वक्त है मिलने का...सुबह आना...जाओ यहा से" मैड ने कहा.

"हमे क्या भीकारी समझ रखा है, मैं सब इनस्पेक्टर राज शर्मा हूँ ...हमारा मेडम से मिलना बहुत ज़रूरी है...जाओ मेडम को मेसेज दे दो."

"मेडम मुझे गुस्सा करेंगी" मैड ने कहा.

"कौन है माला?" घर के अंदर से आवाज़ आई.

"मेम्साब आपसे मिलना चाहते हैं ये लोग."

"ये मिलने का वक्त है क्या रात के सादे ग्यारा हो रहे हैं." शालिनी बोलते बोलते दरवाजे पर आ गयी.

"राज तुम...और ये लड़की कौन है? शालिनी ने कहा.

"मेडम बात ज़रा कॉंप्लिकेटेड है...अगर हम बैठ कर बात करें तो ठीक होगा" राज ने कहा.

"हां-हां आओ अंदर आ जाओ...माला जाओ इनके लिए चाय पानी का इंतज़ाम करो"

मैड ने राज और पद्‍मिनी को घूर कर देखा और अपना नाक शिकोड कर वाहा से चली गयी.

राज और पद्‍मिनी एक ही सोफे पर बैठ गये...शालिनी दूसरे सोफे पर बैठ गयी.

"इन्हे कहीं देखा है" शालिनी ने पद्‍मिनी की तरफ इशारा करते हुए कहा.

"यही पद्‍मिनी है...जिन्हे पूरा पोलीस डिपार्टमेंट ढूँढ रहा है" राज ने कहा.

"क्या?" शालिनी फ़ौरन खड़ी हो गयी. "ये तुम्हारे साथ क्या कर रही है?"

"मेडम इन्होने किसी का खून नही किया...बल्कि सच तो ये है कि सिर्फ़ यही जानती हैं कि किल्लर कौन है"

राज डीटेल में सारी कहानी शालिनी को सुनाता है. शालिनी उसकी पूरी बात बड़े ध्यान से सुनती है.

"ह्म्म अगर ये सच है तो बहुत बुरा हुआ तुम्हारे साथ पद्‍मिनी...पर तुम्हे पहले ही पोलीस को सच बता देना चाहिए था." शालिनी ने कहा.

"कुछ समझ नही आ रहा था की क्या करें....टीवी पर अपनी फोटो देख कर डर गयी थी मैं. पोलीस कातिल समझ कर मुझे ढूँढ रही थी ऐसे में कैसे आती पोलीस के पास मैं" पद्‍मिनी ने कहा.

"आज जब उस ने ये काग़ज़ पत्थर में लपेट कर फेंका तो मुझे आइडिया आया कि मुझे आपसे बात करनी चाहिए. देखिए सिर्फ़ ये जानती हैं कि कातिल कौन है...इसलिए वो इनके पीछे पड़ा है...अब आप ही डिसाइड कीजिए कि क्या किया जाए."

"तुम्हारे पास चौहान का नंबर है." शालिनी ने कहा.

"जी मेडम है" राज ने जवाब दिया.

"उसे तुरंत यहा आने को कहो"

"जी मेडम"

राज ने चौहान को फोन मिलाया, "अब तो मिल गया पहले नही मिल रहा था."

राज ने चौहान को वाहा आने को बोल दिया.

"क्या मैं अब अपने घर जा सकती हूँ?" पद्‍मिनी ने पूछा.

"हां बिल्कुल...पर पूरी सुरक्षा के साथ जाओगी तुम अपने घर. 2 पोलीस वाले तो वाहा पहले से हैं 2 और लगाने पड़ेंगे....अच्छा एक बात बताओ." शालिनी ने कहा.

"जी पूछिए"

"क्या तुम उस किलर का स्केच बनवा सकती हो."

"कोशिस करूँगी...पर मेरे लिए उसके चेहरे को डिस्क्राइब करना थोड़ा मुस्किल है" पद्‍मिनी ने कहा.

"चलो बाद में देखते हैं ये सब"

तभी चौहान भी वाहा आ गया. उसने राज और पद्‍मिनी को घूर कर देखा.

"मिस्टर चौहान किस तरह से हॅंडल कर रहे हैं आप इस केस को"

"क्या हुआ मेडम?" चौहान गिड़गिदाया.

"क्या कोई और सबूत था तुम्हारे पास पद्‍मिनी के खिलाफ उस विटनेस के सिवा."

"जी नही मेडम बस वही काफ़ी था."

"कैसे काफ़ी था..राजवीर जो तुमने मुझे बताया इनको भी बताओ"

राज चौहान को भी सारी कहानी बता देता है.

"कुछ समझ में आया की क्या हो रहा है?"

"हां मेडम पर अगर कोई पोलीस को आके बताएगा ही नही तो हमे कैसे पता चलेगा" चौहान ने कहा.

"जो भी हो तुम ठीक से हॅंडल नही कर रहे हो इस केस को."

"मुझे एक और मोका दीजिए मेडम...असली कातिल जल्द से जल्द पोलीस की हिरासत में होगा."

"ठीक है दिया एक और मोका...पहले पद्‍मिनी को इनके घर छ्चोड़ने का इंतज़ाम करो और इनके घर पर सुरक्षा बढ़ा दो."

"मेडम मीडीया वालो को क्या कहेंगे."

"अभी किसी को कुछ नही कहना...ये बात पोलीस डिपार्टमेंट से बाहर नही जाएगी."

"जी मेडम." चौहान ने कहा.

पद्‍मिनी और राज उसी जीप में बैठ गये जिस में आए थे. साथ में चौहान की जीप थी. अंधेरी रात में दोनो जीपे पद्‍मिनी के घर की ओर बढ़ रही थी. पद्‍मिनी की ख़ुसी का ठीकाना नही था. उसे ऐसा लग रहा था कि वो वरसो बाद घर जा रही है.

क्रमशः..............................

BAAT EK RAAT KI--35

gataank se aage.................

Bholu nagma ke boobs ko masalne laga aur khade khade uski gaanD par dhakke maarne laga.

"aaahhhh hato na."

"chalti hai ki yahi ya yahi maaru teri gaanD."

"aaahhh theek hai chalti hun...mujhe ghar ko taala maar dene do. Aur main gaanD mein nahi chut mein lungi kahe deti hun. Aahh"

"jaisi teri marji khi..khi" bholu hasne laga.

Nagma ne taala lagaaya aur bholu ke saath chal di.

Bholu ne kamre mein aate hi nagma ko godi mein utha liya aur bola,"aaj raat tu kahi nahi jaayegi...saari raat gaanD maarunga teri"

"phir vahi baat kaha na chut mein lungi gaanD mein nahi."

"arey ek hi baat hai kahne mein kya jaata hai."

"tune badi chaalaaki se daala tha kal gaanD mein huh sharam nahi aayi tumhe."

"koi bhi ladki gaanD asaani se nahi deti...leni padti hai."

"par 2 minat ki bajaaye 2 ghante maarte rahe tum meri gaanD...abhi tak dard hai mujhe. Parso Raj ne li thi kal tumne le li. Ab nahi dungi main"

"bilkul bilkul.." bholu ne kaha aur nagma ko bistar par patak diya.

"aahhh itni jor se kyon giraaya."

"gadaa makhmali hai socha tumhe achcha lagega." bholu ne kaha.

Bholu nagma ki chaahti par baith gaya aur apna lund baahar nikaal liya. Lund nagma ke muh ke bilkul saamne tha.

"ye kya kar rahe ho."

"lund choos chupchaap."

"main ye kaam nahi karti."

"to ab karle chal muh mein daal"

"main sach kah rahi hun main lund nahi choosti...maine kabhi Raj ka bhi nahi choosa."

bholu nagma ke honto par apna lund ragadne laga.

"nahi hato..."

"meri jaan choos ke to dekh ganne se bhi meetha lagega tujhe."

bholu lagaataar nagma ke band muh par lund ragadta raha. "jab tak tu muh nahi kholegi ye yahi rahega."

"tune chut mein daalna hai ki nahi."

"chut mein bhi daalunga meri jaan pahle thoda choos to le."

"uff kya musibat hai...chal thodi der choos leti hun...par dubaara nahi karungi theek hai."

"theek hai...he..he..he."

"daant mat deekhaao varna daant maar dungi tumhaare lund pe."

"nahi aisa mat karna varna..."

nagma ne muh khola aur bholu ke lund ko muh mein le liya. Vo dheere dheere lund choosne lagi.

"mujhe pata tha ki tu bahut achche se choosegi...aaahhh."

nagma loli pop ki tarah lund choos rahi thi aur bholu aahein bhar raha tha. Kuch der baad nagma ne lund muh se baahar nikaal diya aur boli, "chal bas bahut ho gaya...fataafat meri chut mein daal de."

bholu ne nagma ki salwaar utaari aur apni pant utaar kar uski taango ke beech baith gaya. Usne nagma ki taange apne kandho par rakhi aur ek jhatke mein nagma ki chikni chut mein lund daal diya.

"aaahhhh bholu....aaaahhhh aaj bas meri chut ki pyaas bhuja de aahhh"

"chinta mat kar saari raat chodunga tujhe main" bholu ne kaha aur nagma ki chut mein jor jor se lund ander baahar karne laga. Uske aand har dhakke ke saath nagma ki chut ke muh se takra rahe the.

"uuuuhhhhh bholu....aaaahhhh aur tej aaahhh"

"teri chut bahut mast hai nagma sach bata kitne lund khaa chuki hai ye."

"ye vegetarian hai....aaaahhhh ek bhi lund nahi khaaya isne aaahhh"

"ha..ha..ha..he..he...bahut khub kahi....maja aata hai teri chut maarne mein."

"to maar na aur teji se maar aaahhhhh.... Mera bhi aaj bahut man tha aahhh."

bholu ne thodi speed aur badha di aur nagma ki chut mein lund ke dhakko ki bochaar shuru kar di. Nagma 2 baar jhad chuki thi.

"ooohhhh bas main ab paani chodne waala hun."

"nahi ruko thodi der aur karo aaaahhhhh." nagma ek aur orgasm ke karib thi.

Bholu ke dhakke chaalu rahe aur nagma cheenkh kar ek baar aur jhad gayi. Bholu bhi usi ke saath uske upar dher ho gaya.

"aaahhh ab neend aayegi mujhe" nagma ne kaha.

"tu yaha sone aayi hai kya...abhi to teri gaanD bhi maarni hai"

"aisa sochna bhi mat varna dubaara nahi dungi samjhe."

.......................................................

Raj aur padmini ASP shalini ke ghar ke baahar pahunch gaye.

"kya soch rahe ho bell bajaao."

"bahut kadak madam hain dar lagta hai."

"tum hato peeche mujhe bell bajaane do."

padmini ne bell bajaayi. Par kisi ne darvaaja nahi khola.

"lagta hai madam so rahi hain" Raj ne kaha.

Padmini ne phir se bell bajaayi. Kisi ke aane ki aahat shunaayi di.

Raj ka dil baith gaya vo dar raha tha ki na jaane ASP saahiba unki baat ko kis tarah se lengi. Use visvaas to tha ki vo unki baat samjhengi lekin phir bhi unke garam mijaaj se ghabra raha tha.

darvaaja khulta hai.

"ji kahiye kya kaam hai?" shaline ki maid ne pucha.

"kya shalini ji ghar pe hain?" Raj ne kaha.

"haan hain...kya kaam hai?" miad ne kaha.

"Madam ki to maid bhi kadak hai" Raj sochne laga.

"hame unse milna hai" padmini ne kaha.

"ye vakt hai milne ka...subah aana...jaao yaha se" maid ne kaha.

"hame kya bheekaari samajh rakha hai, main sub inspector raajvir singh hun ...hamaara madam se milna bahut jaroori hai...jaao madam ko message de do."

"madam mujhe gussa karengi" maid ne kaha.

"kaun hai mala?" ghar ke ander se awaaj aayi.

"memsaab aapse milna chaahte hain ye log."

"ye milne ka vakt hai kya raat ke saade gyaara ho rahe hain." shalini bolte bolte darvaaje par aa gayi.

"raajveer tum...aur ye ladki kaun hai? Shalini ne kaha.

"madam baat jara complicated hai...agar hum baith kar baat karein to theek hoga" Raj ne kaha.

"haan-haan aao ander aa jao...mala jaao inke liye chaaye paani ka intezaam karo"

maid ne Raj aur padmini ko ghur kar dekha aur apna naak shikod kar vaha se chali gayi.

Raj aur padmini ek hi sofe par baith gaye...shalini dusre sofe par baith gayi.

"inhe kahin dekha hai" shalini ne padmini ki taraf ishaaraa karte hue kaha.

"yahi padmini hai...jinhe pura police department dhundh raha hai" Raj ne kaha.

"kya?" shalini fauran khadi ho gayi. "ye tumhaare saath kya kar rahi hai?"

"madam inhone kisi ka khoon nahi kiya...balki sach to ye hai ki sirf yahi jaanti hain ki killer kaun hai"

Raj detail mein saari kahaani shalini ko shunaata hai. Shalini uski puri baat bade dhyaan se shunti hai.

"hmm agar ye sach hai to bahut bura hua tumhaare saath padmini...par tumhe pahle hi police ko sach bata dena chaahiye tha." shalini ne kaha.

"kuch samajh nahi aa raha tha ki kya karein....tv par apni photo dekh kar dar gayi thi main. Police kaatil samajh kar mujhe dhundh rahi thi aise mein kaise aati police ke paas main" padmini ne kaha.

"aaj jab us ne ye kaagaz pathar mein lapet kar fenka to mujhe idea aaya ki mujhe aapse baat karni chaahiye. Dekhiye sirf ye jaanti hain ki kaun hai...isliye vo inke peeche pada hai...ab aap hi decide kijiye ki kya kiya jaaye."

"tumhaare paas chauhan ka number hai." shalini ne kaha.

"ji madam hai" Raj ne jawaab diya.

"use turant yaha aane ko kaho"

"ji madam"

Raj ne chauhan ko phone milaaya, "ab to mil gaya pahle nahi mil raha tha."

Raj ne chauhan ko vaha aane ko bol diya.

"kya main ab apne ghar ja sakti hun?" padmini ne pucha.

"haan bilkul...par puri suraksha ke saath jaaogi tum apne ghar. 2 police waale to vaha pahle se hain 2 aur lagaane padenge....achcha ek baat bataao." shalini ne kaha.

"ji puchiye"

"kya tum us ka sketch banva sakti ho."

"koshis karungi...par mere liye uske chehre ko describe karna thoda muskil hai" padmini ne kaha.

"chalo baad mein dekhte hain ye sab"

tabhi chauhan bhi vaha aa gaya. Usne Raj aur padmini ko ghur kar dekha.

"mr chauhan kis tarah se handle kar rahe hain aap is case ko"

"kya hua madam?" chauhan gidgidaaya.

"kya koi aur saboot tha tumhaare paas padmini ke khilaaf us witness ke shiva."

"ji nahi madam bas vahi kaafi tha."

"kaise kaafi tha..raajvir jo tumne mujhe bataaya inko bhi bataao"

Raj chauhan ko bhi saari kahaani bata deta hai.

"kuch samajh mein aaya ki kya ho raha hai?"

"haan madam par agar koi police ko aake bataayega hi nahi to hame kaise pata chalega" chauhan ne kaha.

"jo bhi ho tum theek se handle nahi kar rahe ho is case ko."

"mujhe ek aur moka dijiye madam...asli kaatil jald se jald police ki hiraaasat mein hoga."

"theek hai diya ek aur moka...pahle padmini ko inke ghar chhodne ka intezaam karo aur inke ghar par suraksha badha do."

"madam media waalo ko kya kahenge."

"abhi kisi ko kuch nahi kahna...ye baat police department se baahar nahi jaayegi."

"ji madam." chauhan ne kaha.

Padmini aur Raj usi jeep mein baith gaye jis mein aaye the. Saath mein chauhan ki jeep thi. Andheri raat mein dono jeepe padmini ke ghar ki aur badh rahi thi. Padmini ki khusi ka theekaana nahi tha. Use aisa lag raha tha ki vo varso baad ghar ja rahi hai.

Kramashah..............................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 11 Dec 2014 04:11

raj sharma stories

बात एक रात की--36

गतान्क से आगे.................

जब घर पहुँच कर पद्‍मिनी ने घर की बेल बजाई तो उसके पिता जी ने दरवाजा खोला. उन्हे विस्वास ही नही हुआ कि सामने पद्‍मिनी खड़ी है.

"पापा ऐसे क्या देख रहे हैं मैं हू पद्‍मिनी."

"बेटा" बस इतना ही कह पाए पद्‍मिनी के पिता जी और पद्‍मिनी को गले लगा लिया.

"ये सब क्या हो रहा है बेटा"

"पापा सब बताती हूँ...इनसे मिलिए ये है राज...इन्होने मेरी बड़ी मदद की है."

राज ने पद्‍मिनी के पिता जी के पाँव छुए और कहा, "ठीक है पद्‍मिनी जी अब आप अपने घर पहुँच गयी हैं...मुझे बहुत ख़ुसी है."

"आओ बेटा कुछ चाय पानी लो."

"नही अंकल रात बहुत हो चुकी है फिर कभी."

चौहान दूर खड़ा सब सुन रहा था. "ये तो साला हीरो बन गया पोलीस में आते ही अच्छी किस्मत पाई है"

पद्‍मिनी को छ्चोड़ कर राज और चौहान वापिस चल दिए. चौहान ने चार कॉन्स्टेबल पद्‍मिनी की सुरक्षा के लिए वाहा छ्चोड़ दिए.

..............................

..........................

नगमा भोलू के बिस्तर पर सो चुकी थी. भोलू की भी आँख लग गयी थी. भोलू को टाय्लेट का प्रेशर हुआ तो उसकी आँख खुल गयी.

"नींद ही आ गयी थी" भोलू ने आँखे मलते हुए कहा.

भोलू टाय्लेट से वापिस आया तो उसकी नज़र नगमा पर गयी. वो पेट के बल पड़ी थी. उसकी नंगी गान्ड भोलू पर अजीब सा असर कर रही थी.

भोलू के लंड में हरकत होने लगी.

"क्या करूँ...कैसे सेक्सी पोज़ में लेटी हुई है ये...अब कोई गान्ड ना मारे तो क्या करे."

भोलू का लंड पूरा तन गया. भोलू नगमा के उपर लेट गया. उसका लंड नगमा की गान्ड पर लेट गया.

नगमा गहरी नींद में थी और वो यू ही पड़ी रही.

भोलू ने हाथ पे थूक लगाया और नगमा की गान्ड फैला कर उसके होल को चिकना कर दिया. थोड़ा सा थूक उसने अपने लंड पर भी रगड़ लिया. फिर उसने दोनो हाथो से गान्ड को फैलाया और लंड को नगमा की गान्ड के छेद पर टीका दिया. नगमा की गान्ड पीछले 2 दिन की थुकाइ से थोड़ा खुली हुई थी. जैसे ही भोलू ने धक्का मारा आधा लंड नगमा की गान्ड में घुस्स गया.

"उूउऊययययययीीईईईई मा कौन है...कौन है." नगमा की आँख खुल गयी.

"मैं हूँ भोलू...हे..हे..हे"

"आआहह क्या कर रहे हो तुम ऊओ."

"सोती हुई लड़की की गान्ड मार रहा हूँ...आअहह.. ऊऊहह"

"आआहह....ऊऊहह ऐसा क्यों कर रहे हो तुम."

भोलू ने पूरा लंड नगमा की गान्ड में घुस्सा दिया और बोला,"तुम्हारी गान्ड अछी लगती है इसलिए."

"ऊओह मुझे उठा कर नही डाल सकते थे...मुझे डरा दिया."

"तेरी गान्ड देख कर कुछ होश ही नही रहा.... थूक लगा कर घुस्सा दिया"

"तुम हमेशा चालाकी से गान्ड मारते हो आआहह"

भोलू ने लंड बाहर की और खींचा और दुबारा अंदर डाल दिया, "तेरी गान्ड के लिए कुछ भी करूँगा आअहह."

भोलू तेज तेज नगमा की गान्ड ठोकने लगा. कमरे में नगमा की सिसकिया गूंजने लगी.

"कुतिया बन जा और ज़्यादा मज़ा आएगा तुझे क्या बोलती है आअहह"

"किसी कुतिया की ले ले जाके मैं कुतिया नही बनूँगी आअहह"

"कुतिया तो तू है ही बन-ने की क्या ज़रूरत है आअहह" भोलू नगमा की गान्ड में लंड अंदर धकेलते हुए बोला.

"तो तू कौन सा कुत्ते से कम है...आअहह"

भोलू ने अपनी स्पीड बढ़ा दी. हर धक्के के साथ नगमा की गान्ड चालक रही थी. नगमा ने मद-होशी में बिस्तर की चादर को मुथि में कश लिया था.

भोलू नगमा की गान्ड में झाड़ गया. दोनो यू ही पड़े रहे. कब दोनो को नींद आ गयी पता ही नही चला. भोलू का लंड नगमा की गान्ड की गहराई में ही सो गया.

.............................................................................................

इधर पद्‍मिनी अपने पेरेंट्स को पूरी कहानी सुनाती है.

"उस लड़के मोहित को भी कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए...ऐसा तो कोई पागल ही कर सकता है"

"छोड़िए पापा जो हो गया सो हो गया...अब बस यही दुवा कीजिए कि वो कातिल पकड़ा जाए."

पद्‍मिनी अपने पेरेंट्स के साथ काफ़ी देर तक बैठी रही. सभी खुस थे.

"चलो बेटा सो जाओ आँखे लाल लग रही हैं तुम्हारी ठीक से सोई भी नही शायद" पद्‍मिनी की मदर ने कहा.

"ठीक है...मुझे बहुत गहरी नींद आ रही है."

सभी अपने-अपने बेडरूम में चले गये. पद्‍मिनी ने खिड़की से झाँक कर देखा. बाहर रात का सन्नाटा था. 3 पोलीस वाले सो रहे थे और एक अपने मोबाइल पे कुछ देख रहा था.

"ऐसी सुरक्षा से तो सुरक्षा ना होना बेहतर है. कम से कम इंसान अपने भरोसे तो रहे." पद्‍मिनी ने सोचा.

पद्‍मिनी अपने बेडरूम में आ गयी और अपने बिस्तर में घुस गयी. "मुझे अलर्ट रहना होगा" पद्‍मिनी ने कहा.

पद्‍मिनी घर तो पहुँच गयी पर रह रह कर उसका दिल घबरा रहा था. वो डर रही थी कि कही वो कातिल वाहा ना पहुँच जाए.

..............................................................

"यार बस और नही...बहुत पी ली" मोहित ने कहा.

"पी ना यार रोज रोज कहा हम पीते हैं...आज पी रहे हैं तो क्यों ना जी भर के पिए."

"वो तो ठीक है...पर यार बहुत नशा हो रहा है."

"दूसरे नशे की जगह बाकी है कि नही"

"दूसरा नशा...कौन सा दूसरा नशा."

"मेरे पड़ोसी की बीवी बड़ी मस्त है कहे तो बुला लू...बोल क्या कहता है...अभी आ जाएगी वो."

"नया माल फ़साया है क्या...बताया नही तूने कामीने."

"तू मिला ही कहा इतने दिन से बस अभी 2 हफ्ते पहले ही फ़साई है."

"बबलू तू शादी भी करेगा या फिर यू ही काम चलाता रहेगा."

"तुझे शादी करके क्या मिल गया...कहाँ है तेरी बीवी."

"यार तू उसकी बात मत कर वो अलग ही कहानी है."

"बता दे हमे भी...हमे भी तो पता चले."

"छ्चोड़ यार मूड खराब हो जाएगा"

"बता फिर बुलाउ क्या पड़ोसन को...मस्त आइटम है."

"साले रात के दो बज रहे हैं...वो क्यों आएगी इस वक्त."

"आएगी...आएगी क्यों नही उसकी दुखती रग मेरे हाथ में है."

"ब्लॅकमेल कर रहा है क्या बे...मुझे ज़बरदस्ती किसी की लेना अच्छा नही लगता."

"अरे नही...उसका एक लोंडे से चक्कर था. मैने एक दिन उन्हे छत पर पकड़ लिया. बस तभी से मुझे भी मिल रही है उसकी. बस मैं डराता रहता हूँ उसे कि तेरे पति को सब बता दूँगा...डर कर बहुत अच्छे से देती है वो."

"जो भी हो है तो ये एक तरह की ब्लॅकमेलिंग ही."

"वो क्या सती सावित्री है कोई...ऐसा मोका कोई गवाता है क्या."

"देख यार इतनी रात को उसे मत बुला...सहर में वैसे ही का आतंक फैला हुआ है."

"अरे उसे कौन सा सड़क से आना है...छत टाप कर आ जाएगी यहा."

"वैसे सच कहु तो मेरा अभी मन नही है...एक लड़की पे दिल आ गया है यार."

"भाई मुझे तो शराब के साथ शबाब भी चाहिए अभी फोन करता हूँ साली को"

मोहित नशे में टल्ली हो रहा था. उसे सॉफ सॉफ दीखाई भी नही दे रहा था. पर वो बात ठीक से कर रहा था.

बबलू ने फोन किया, "साली उठा नही रही है...कहा मर गयी."

"रहने दे यार क्यों इतनी रात को परेशान करता है. सो रही होगी बेचारी."

"उसे परेशान करना मेरा हक है यार...मेरी बात नही मानेगी तो कल ही फँसा दूँगा साली को."

मोहित खड़ा हुआ और फोन बबलू के हाथ से छीन लिया.

"समझा कर मेरा बिल्कुल मन नही है." मोहित ने कहा.

"अच्छा तू रहने देना...पर मैं तो लूँगा साली की आज फिर...वैसे ये बता कौन है वो लड़की जो तेरा दिल ले उड़ी...और तेरा मन खराब कर दिया."

"है एक लड़की...पहले पटा लू फिर उसके बारे में बताउन्गा."

बबलू ने मोहित से फोन वापिस ले लिया और बोला, " मुझे तो मज़ा करने दे भाई मेरे...मेरा बहुत मन है अभी."

"उसका पति नही है क्या घर में जो वो इस वक्त आएगी."

"पति पोलीस में है और अक्सर अपनी ड्यूटी के कारण बाहर ही रहता है. नाइट ड्यूटी ज़्यादा रहती है उसकी."

"सेयेल तू पोलीस वाले की बीवी ठोक रहा है..किसी दिन पकड़ा गया ना तो वो तुझे ठोक देगा."

"देखा जाएगा यार...ऐसा माल क्या रोज मिलता है...तू देखेगा ना तो तेरा भी मन हो जाएगा हे..हे..हे."

"तू सच में पागल है...तेरा कुछ नही हो सकता." मोहित ने कहा.

बबलू ने फिर से फोन मिलाया, "सरिता जी क्या बात है फोन क्यों नही उठा रही"

"क्या है इतनी रात को क्यों फोन किया." सरिता ने कहा.

"फोन कब करता हूँ मैं तुझे हे..हे..हे."

"देखो मैं इस वक्त नही आ सकती...मुझे रात को घर से निकालने में डर लगता है."

"मैं तुझे रिक्वेस्ट नही कर रहा हूँ... ऑर्डर दे रहा हूँ तुझे समझी जल्दी आजा यहा वरना कल तेरे पति को तेरे कारनामे सुना दूँगा."

"देखो बाहर बहुत हलचल हो रही है आज...मुझे डर लग रहा है...कही वो कातिल यहा आस पास हुई तो."

"तुझे कौन सा सड़क पार करके आना है...छत क्रॉस करके आजा...भाने मत बना वरना मेरा दीमाग घूम जाएगा."

"ठीक है बाबा मैं 10 मिनट में आ रही हूँ."

"ये हुई ना बात...और सुन सारी पहन के आना मुझे तेरी साड़ी उतारनी अछी लगती है...हे..हे..हे."

"आधा घंटा लगेगा सारी पहन-ने में कोई मज़ाक है क्या."

"मुझे कुछ नही पता... सारी पहन कर जल्दी आ जा." बबलू ने फोन काट दिया.

"तू तो बहुत हुकुम चलाता है बेचारी पे." मोहित ने कहा.

"हुकुम चलाना पड़ता है यार वरना वो क्यों देगी मुझे...तेरे जैसा स्मार्ट तो हू नही मैं हे..हे..हे."

...................................................

"उफ्फ क्या करूँ इस कामीने का मैं...किसी भी वक्त बुला लेता है...मैं तो तंग आ गयी हूँ इस से." सरिता ने सोचा.

सरिता अपनी आल्मिरा खोल कर सारी ढूँढने लगी.

"कौन सी पहनु....क्या मुसीबत है." सरिता झल्ला कर बोली और आल्मिरा का दरवाजा पटक दिया.

"ये वक्त है किसी को बुलाने का...कितनी अछी नींद आ रही थी...उफ्फ क्या करूँ"

जैसे तैसे सरिता ने सारी पहनी और अपने बॉल-वाल सेट करके अपने घर की छत पर आ गयी.

"कितना सन्नाटा है बाहर...और ये कुत्ते पता नही क्यों भोंक रहे हैं आज. कुछ ज़्यादा ही शोर मच्चा रहे हैं."

सरिता अपने घर की छत से बबलू के घर की छत पर आ गयी.

"कही ये आ गये तो...नही नही उनकी नाइट ड्यूटी है सुबह से पहले नही आएँगे और आएँगे भी तो भी बबलू के घर से बेल तो सुन ही जाएगी...भाग कर छत के रास्ते वापिस आ जाउन्गि." सरिता चलते चलते सोच रही थी.

सरिता बबलू के घर की सीढ़ियों से नीचे आ गयी और उसने पीछे का दरवाजा खड़काया.

"लो आ गया मेरा माल...देखता जा...उसे देख कर डिसाइड करना की मन है कि नही..हे..हे..हे."

बबलू सरिता के लिए दरवाजा खोलने चल दिया. उसके कदम नशे की वजह से लड़खड़ा रहे थे.

क्रमशः..............................

BAAT EK RAAT KI--36

gataank se aage.................

Jab ghar pahunch kar padmini ne ghar ki bell bajaayi to uske pita ji ne darvaaja khola. Unhe visvaas hi nahi hua ki saamne padmini khadi hai.

"papa aise kya dekh rahe hain main hu padmini."

"beta" bas itna hi kah paaye padmini ke pita ji aur padmini ko gale laga liya.

"ye sab kya ho raha hai beta"

"papa sab bataati hun...inse miliye ye hai Raj...inhone meri badi madad ki hai."

Raj ne padmini ke pita ji ke paanv chue aur kaha, "theek hai padmini ji ab aap apne ghar pahunch gayi hain...mujhe bahut khusi hai."

"aao beta kuch chaaye paani lo."

"nahi uncle raat bahut ho chuki hai phir kabhi."

chauhan dur khada sab shun raha tha. "ye to saala hero ban gaya police mein aate hi achi kismat paayi hai"

padmini ko chhod kar Raj aur chauhan vaapis chal diye. Chauhan ne chaar constable padmini ki suraksha ke liye vaha chhod diye.

........................................................

Nagma bholu ke bistar par so chuki thi. Bholu ki bhi aankh lag gayi thi. Bholu ko toilet ka pressure hua to uski aankh khul gayi.

"neend hi aa gayi thi" bholu ne aankhe malte hue kaha.

Bholu toilet se vaapis aaya to uski nazar nagma par gayi. Vo pet ke bal padi thi. Uski nangi gaanD bholu par ajeeb sa asar kar rahi thi.

Bholu ke lund mein harkat hone lagi.

"kya karun...kaise sexy pose mein leti huyi hai ye...ab koi gaanD na maare to kya kare."

bholu ka lund pura tan gaya. Bholu nagma ke upar let gaya. Uska lund nagma ki gaanD let gaya.

Nagma gahri neend mein thi aur vo yu hi padi rahi.

Bholu ne haath pe thuk lagaaya aur nagma ki gaanD faila kar uske hole ko chikna kar diya. Thoda sa thuk usne apne lund par bhi ragad liya. Phir usne dono haatho se gaanD ko failaaya aur lund ko nagma ki gaanD ke ched par tika diya. Nagma ki gaanD peechle 2 din ki thukaayi se thoda khuli huyi thi. Jaise hi bholu ne dhakka maara aadha lund nagma ki gaanD mein ghuss gaya.

"uuuuyyyyyyiiiiiiii maa kaun hai...kaun hai." nagma ki aankh khul gayi.

"main hun bholu...he..he..he"

"aaaahhhh kya kar rahe ho tum ooohhh."

"soti huyi ladki ki gaanD maar raha hun...aaahhh.. oooohhh"

"aaaahhhh....oooohhhh aisa kyon kar rahe ho tum."

bholu ne pura lund nagma ki gaanD mein ghussa diya aur bola,"tumhaari gaanD achi lagti hai isliye."

"ooohhhh mujhe utha kar nahi daal sakte the...mujhe dara diya."

"teri gaanD dekh kar kuch hosh hi nahi raha.... thuk laga kar ghussa diya"

"tum hamesha chaalaaki se gaanD maarte ho aaaahhhh"

bholu ne lund baahar ki aur kheencha aur dubaara ander daal diya, "teri gaanD ke liye kuch bhi karunga aaahhhh."

bholu tej tej nagma ki gaanD thokne laga. Kamre mein nagma ki siskiya gunjne lagi.

"Kuttiya ban ja aur jyada maja aayega tujhe kya bolti hai aaahh"

"kisi kuttiya ki le le jaake main kuttiya nahi banungi aaahhhh"

"kuttiya to tu hai hi ban-ne ki kya jaroorat hai aaahhhhh" bholu nagma ki gaanD mein lund ander dhakelte hue bola.

"to tu kaun sa kutte se kam hai...aaahhhh"

bholu ne apni speed badha di. Har dhakke ke saath nagma ki gaanD chalak rahi thi. Nagma ne madhosi mein bistar ki chaadar ko muthi mein kash liya tha.

Bholu nagma ki gaanD mein jhad gaya. Dono yu hi pade rahe. Kab dono ko neend aa gayi pata hi nahi chala. Bholu ka lund nagma ki gaanD ki gahraayi mein hi so gaya.

padmini apne parents ko puri kahaani shunaati hai.

"us ladke mohit ko bhi kadi se kadi saja milni chaahiye...aisa to koi paagal hi kar sakta hai"

"chodiye papa jo ho gaya so ho gaya...ab bas yahi duva kijiye ki vo pakda jaaye."

padmini apne parents ke saath kaafi der tak baithi rahi. Sabhi khus the.

"chalo beta so jaao aankhe laal lag rahi hain tumhaari theek se soyi bhi nahi shaayad" padmini ki mother ne kaha.

"theek hai...mujhe bahut gahri neend aa rahi hai."

Sabhi apne-apne bedroom mein chale gaye. Padmini ne khidki se jhaank kar dekha. Baahar raat ka sannaata tha. 3 police waale so rahe the aur ek apne mobile pe kuch dekh raha tha.

"aisi suraksha se to suraksha na hona behtar hai. Kam se kam insaan apne bharose to rahe." padmini ne socha.

Padmini apne bedroom mein aa gayi aur apne bistar mein ghuss gayi. "mujhe alert rahna hoga" padmini ne kaha.

padmini ghar to pahunch gayi par rah rah kar uska dil ghabra raha tha. Vo dar rahi thi ki kahi vo vaha na pahunch jaaye.

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"yaar bas aur nahi...bahut pee li" mohit ne kaha.

"pee na yaar roj roj kaha hum peete hain...aaj pee rahe hain to kyon na jee bhar ke piye."

"vo to theek hai...par yaar bahut nasha ho raha hai."

"dusre nashe ki jagaah baaki hai ki nahi"

"dusra nasha...kaun sa dusra nasha."

"mere padosi ki biwi badi mast hai kahe to bula lu...bol kya kahta hai...abhi aa jaayegi vo."

"naya maal fasaaya hai kya...bataaya nahi tune kamine."

"tu mila hi kaha itne din se bas abhi 2 hafte pahle hi fasaayi hai."

"babloo tu shaadi bhi karega ya phir yu hi kaam chalaata rahega."

"tujhe shaadi karke kya mil gaya...kaha hai teri biwi."

"yaar tu uski baat mat kar vo alag hi kahaani hai."

"bata de hame bhi...hame bhi to pata chale."

"chhod yaar mood khraab ho jaayega"

"bata phir bulaaun kya padosan ko...mast item hai."

"saale raat ke do baj rahe hain...vo kyon aayegi is vakt."

"aayegi...aayegi kyon nahi uski dukhti rag mere haath mein hai."

"blackmail kar raha hai kya be...mujhe jabardasti kisi ki lena achcha nahi lagta."

"arey nahi...uska ek londe se chakkar tha. Maine ek din unhe chatt par pakad liya. Bas tabhi se mujhe bhi mil rahi hai uski. Bas main daraata rahta hun use ki tere pati ko sab bata dunga...darke bahut achche se deti hai vo."

"jo bhi ho hai to ye ek tarah ki blackmailing hi."

"vo kya sati shavitri hai koi...aisa moka koi gavaata hai kya."

"dekh yaar itni raat ko use mat bula...sahar mein vaise hi ka aatank faila hua hai."

"arey usa kaun sa sadak se aana hai...chatt tap kar aa jaayegi yaha."

"vaise sach kahu to mera abhi man nahi hai...ek ladki pe dil aa gaya hai yaar."

"bhai mujhe to sharaab ke saath shabaab bhi chaahiye abhi phone karta hun saali ko"

mohit nashe mein talli ho raha tha. Use saaf saaf deekhaayi bhi nahi de raha tha. Par vo baat theek se kar raha tha.

Babloo ne phone kiya, "saali utha nahi rahi hai...kaha mar gayi."

"rahne de yaar kyon itni raat ko pareshaan karta hai. So rahi hogi bechaari."

"use pareshaan karna mera hak hai yaar...meri baat nahi maanegi to kal hi phansa dunga saali ko."

mohit khada hua aur phone babloo ke haath se chin liya.

"samjha kar mera bilkul man nahi hai." mohit ne kaha.

"achcha tu rahne dena...par main to lunga saali ki aaj phir...vaise ye bata kaun hai vo ladki jo tera dil le udi...aur tera man kharaab kar diya."

"hai ek ladki...pahle pata lu phir uske baare mein bataaunga."

babloo ne mohit se phone vaapis le liya aur bola, " mujhe to maja karne de bhai mere...mera bahut man hai abhi."

"uska pati nahi hai kya ghar mein jo vo is vakt aayegi."

"pati police mein hai aur aksar apni duty ke kaaran baahar hi rahta hai. Night duty jyada rahti hai uski."

"saale tu police waale ki biwi thok raha hai..kisi din pakda gaya na to vo tujhe thok dega."

"dekha jaayega yaar...aisa maal kya roj milta hai...tu dekhega na to tera bhi man ho jaayega he..he..he."

"tu sach mein paagal hai...tera kuch nahi ho sakta." mohit ne kaha.

Babloo ne phir se phone milaaya, "sarita ji kya baat hai phone kyon nahi utha rahi"

"kya hai itni raat ko kyon phone kiya." sarita ne kaha.

"phone kab karta hun main tujhe he..he..he."

"dekho main is vakt nahi aa sakti...mujhe raat ko ghar se nikalne mein dar lagta hai."

"main tujhe request nahi kar raha hun... order de raha hun tujhe samjhi jaldi aaja yaha varna kal tere pati ko tere kaarnaame shuna dunga."

"dekho baahar bahut halchal ho rahi hai aaj...mujhe dar lag raha hai...kahi vo yaha aas paas huyi to."

"tujhe kaun sa sadak paar karke aana hai...chatt cross karke aaja...bhaane mat bana varna mera deemaag ghum jaayega."

"theek hai baba main 10 minat mein aa rahi hun."

"ye huyi na baat...aur shun saari pahan ke aana mujhe teri saadi utaarni achi lagti hai...he..he..he."

"aadha ghanta lagega saari pahan-ne mein koi majaak hai kya."

"mujhe kuch nahi pata... saari pahan kar jaldi aa ja." babloo ne phone kaat diya.

"tu to bahut hukum chalaata hai bechaari pe." mohit ne kaha.

"hukum chalaana padta hai yaar varna vo kyon degi mujhe...tere jaisa smart to hu nahi main he..he..he."

...................................................

"uff kya karun is kamine ka main...kisi bhi vakt bula leta hai...main to tang aa gayi hun is se." sarita ne socha.

Sarita apni almira khol kar saari dhundhne lagi.

"kaun si pahnu....kya musibat hai." sarita jhalla kar boli aur almira ka darvaaja patak diya.

"ye vakt hai kisi ko bulaane ka...kitni achi neend aa rahi thi...uff kya karun"

jaise taise sarita ne saari pahni aur apne baal-vaal set karke apne ghar ki chatt par aa gayi.

"kitna sannaata hai baahar...aur ye kutte pata nahi kyon bhonk rahe hain aaj. Kuch jyada hi sor machcha rahe hain."

sarita apne ghar ki chatt se babloo ke ghar ki chatt par aa gayi.

"kahi ye aa gaye to...nahi nahi unki night duty hai subah se pahle nahi aayenge aur aayenge bhi to bhi babloo ke ghar se bell to shun hi jaayegi...bhaag kar chatt ke raaste vaapis aa jaaungi." sarita chalte chalte soch rahi thi.

Sarita babloo ke ghar ki seedhiyon se neeche aa gayi aur usne peeche ka darvaaja khadkaaya.

"lo aa gaya mera maal...dekhta ja...use dekh kar decide karna ki man hai ki nahi..he..he..he."

babloo sarita ke liye darvaaja kholne chal diya. Uske kadam nashe ki vajah se ladkhada rahe the.

Kramashah..............................