दो भाई दो बहन compleet

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raj..
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Re: दो भाई दो बहन

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 03:22

9

गतान्क से आगे.......

जैसे ही जय का लंड उसकी चूत की दीवारों को चीरता हुआ अंदर

घुसा रिया सिसक पड़ी..

." ओह जय ओह." रिया ने अपनी टांगे उसकी कमर इर्द गिर्द लपेट

उसे और अपने करीब करते हुए कहा. " ऑश जय चोदो मुझे अपने इस

घोड़े जैसे लंड से ऑश हां ज़ोर ज़ोर से चोदो."

जय अपने लंड को उसकी चूत की और गहराइयों तक पेलने लगा.

रिया शायद उसके प्यार को समझ नही पाएगी. आज जो कुछ उसने राज

के साथ किया वो गुस्सा तो काफूर हो चुका था, उसे पता था कि रिया

कभी उसकी नही हो सकेगी हमेशा और कई होंगे उसके लिए.

यही सब सोचते हुए वो अपने लंड को और ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत के

अंदर बाहर करने लगा. जय उछल उछल कर धक्के मार रहा था.

उसने उसकी जाँघो को पकड़ा और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा.

"हाआँ जय..... ऑश ऑश हाां ऐसे हिी चूओड़ो ऑश हाआँ बहोट

अच्छा लग रहा हाऐी."

शायद जय के दिल मे अभी भी थोड़ा गुस्सा बाकी था, वो ज़ोर ज़ोर से

रिया की चूत मे लंड पेलने लगा. हर धक्के पर रिया का शरीर कांप

उठता. रिया की चुचियाँ उसके टॉप के अंदर काफ़ी फूल गयी थी और

उसके तने निपल जैसे बाहर को निकल रहे थे.

रिया ने अपनी टाँगे उसकी कमर मे लपेट ली और अपने होंठ उसके होंठो

पर रख बोली, "ऑश जय कितना आअच लग रहा हाआँ ऐसे ही अपने

लंड को मेरी चूओत मे अंदर तक घुसा डोओओओओओ ऑश हाआँ ज़ोर से."

"तुम मुझे छोड़ कर तो नही चली जाओगी ना? जय ने रिया से पूछा.

"अगर मुझे इसी तरह हमेशा चोदते रहे तो नही जाउन्गी," रिया ने

अपनी टाँगो को उसकी कमर से निकाल उसके कंधों पर रखते हुए कहा.

"अपने टॉप को उपर खिँचो में तुम्हारी ये मदमस्त चुचियों देखना

चाहता हूँ." जे ने कहा.

एक शैतानी मुस्कुराहट आ गयी रिया के चेहरे पर. उसने अपने टॉप को

उपर खींच अपनी चुचियाँ नंगी कर दी.

जय उसकी भरी हुई चुचियों को देखने लगा. उसके निपल तन कर

खड़े थे. जब भी वो ज़ोर का धक्का मारता तो उसकी चुचियाँ उछल

पड़ती. कितना सुन्दर बदन था उसकी बेहन का. उसकी चूत जब उसके

लंड को अपनी माँस पेशियाओं मे जकड़ती तो वो पागलों की तरह और ज़ोर

के धक्के लगाने लगता.

रिया ने अपनी दो उंगलियाँ अपने मुँह मे ली चूसने लगी, जब उसकी

उंगलियाँ उसके थूक से पूरी तरह गीली हो गयी तो उसने वो थूक अपने

निपल के चारों और मल दिया, इससे उसके निपल और तन कर चाँद की

रोशनी मे चमकने लगे. रिया किसी छीनाल की तरह अपने भाई को

रिझाने मे लगी थी.

'हाआँ इसीसी तरह करो ऑश." जय और ज़ोर के धक्के मारते हुए

बोला, "तब तक करती रहो जब तक कि तुम्हारा छूट नही जाता."

रिया ने देखा कि उसकी ये अदा उसके भाई को पसंद आ रही थी, अब जय

और जोरों से उसकी चूत मे लंड डाल रहा था. किसी घोड़े की तरह

उछल उछल कर वो धक्के मार रहा था.

रिया को लगने लगा कि उसकी चूत मे जैसे भूचाल आ गया हो और वो

उबल पड़ने को तैयार है. वो अपनी कमर और आगे को कर जय के लंड

को अंदर तक ले रही थी.

जय की साँसे तेज हो गयी थी. वो ज़ोर लगाकर अपनी बेहन को प्यार से

चोद रहा था. आज के पहले कभी उसने उसकी चूत को इतना गरम नही

पाया था. जैसे ही वो अपना लंड रिया की चूत मे घुसाता उसके

ख़यालों मे रोमा आ जाती. जितना वो रिया को चोद्ता उतनी ही चाह रोमा

को चोदने की बढ़ती जा रही थी.

रिया अपने भाई से अलग नही थी. जय के हर धक्के पर उसे राज की

याद आ रही थी. ओह्ह्ह क्या चुदाई की थी उसने आज उसकी. राज के

ख़यालों मे खो वो और ज़ोर से कमर आगे कर जय के लंड को अपनी

चूत मे ले लेती.

अचानक रिया का शरीर कंपा और उसकी चूत किसी लावे की तरह फट

पड़ी. जैसे कोई नदी का बाँध खोल किया जाता है उसी तरह उसकी

चूत पानी छोड़ने लगी.

थोड़ी देर बाद जब उसका शरीर थोड़ा शांत हुआ तो जय ने उसे पेट के

बल गाड़ी के बोनेट पर सुला दिया. उसे लगा कि जय अब पीछे से उसकी

चूत मे लंड डाल अपना पानी छोड़ देगा. लेकिन जय था कि उसके मन मे

तो कुछ और ही था, वो अपने गीले और तने लंड को रिया की गंद के

छेद पर घिसने लगा.

"ये तुम क्या कर रहे हो जय?" रिया ने चौंकते हुए पूछा.

"मुझे पता है में क्या कर रहा हूँ." जय ने अपने लंड को और

घिसते हुए कहा.

"लेकिन जय मेने पहले ऐसा कभी नही किया है." रिया ने कहा.

"टेन्षन मत लो सब अच्छा होगा." जे ने गंद के छेद को फैलाते हुए

कहा.

रिया के मुँह से कराह निकल पड़ी जब जय का लंड उसकी गंद के छेद

के अंदर घुसा. जैसे जैसे लंड गंद के छेद मे घुसता गया उसकी

कराहतें सूबकियों मे बदल गयी.

"ओह मर गयी......" रिया कराह रही थी.

जय अपने लंड को और अंदर तक घुसाते हुए धक्का मारने लगा.

थोड़ी ही देर मे उसके लंड ने रिया की गंद को अपने वीर्य से भर

दिया. जब उसके लंड से वीर्य का एक एक कतरा भी निकल गया तो उसने

अपने लंड को बाहर निकाल लिया.

"ये सब क्या था?" रिया ने गुस्से मे जय से पूछा.

"ओह्ह... रिया अब ये मत कहना कि तुम्हे मज़ा नही आया." जय ने कहा.

"अगर मुझे पहले से मालूम होता कि तुम मेरी गंद मरोगे तो शायद

बात अलग होती." रिया ने कहा. "अगली बार करने से पहले मुझसे पूछ

लेना ये नही कि जो तुम्हारे मन मे आए तुम करोगे. पूरी रात खराब

कर के रख दी."

"मुझे माफ़ करदो रिया...." जय ने माफी माँगी, "चलो घर चलते

हैं."

"हां यही ठीक रहेगा." रिया अपने कपड़े दुरुस्त करते हुए बोली.

रोमा अपनी सहेली गीता के साथ बस के पीछे की सीट पर बैठी थी.

बस करीब करीब खाली थी. आज गुरुवार था हफ्ते की छुट्टियाँ आने

वाली थी. दोनो ये सोच रही थी कि इस शनिवार और रविवार को क्या

किया जाए.

"अगर तुम कहो तो शनिवार को में थोड़ी देर के लिए आ सकती हूँ."

गीता ने रोमा से कहा.

गीता की बात सुनकर रोमा को अस्चर्य हुआ. उसने तो यही समझ लिया

था कि पीछले दिनो गीता के साथ जो कुछ हुआ था उससे गीता उसके

भाई मे दिलचस्पी छोड़ लेगी. और अब तो वो राज को बिल्कुल भी गीता

मे इंटेरेस्ट नही लेने दे सकती थी. जो कुछ भी उन दोनो के बीच हुआ

था उसके बाद राज सिर्फ़ उसका था सिर्फ़ उसका.

"हाँ देखते है," रोमा ने उसे टालते हुए कहा, "लेकिन राज कह रहा

था कि शायद उस दिन हम जय और रिया के घर जाएँ."

जब घर नज़दीक आ गया तो रोमा की आँखें राज को ढूँढने लगी. राज

को कहीं भी ना पाकर उसका दिल डूबने लगा. उसके दिल चाह रहा था

कि राज उसके पास होता तो वो उसका हाथ पकड़ तालाब किनारे टहलने

जाती. कितना अच्छा लगता है राज का हाथ पकड़ने मे. कितने दिन बीत

गये थे उसे और राज को साथ साथ मे.

"में तुम्हे बाद मे फोन करती हूँ गीता." रोमा ने कहा.

"ठीक है रोमा, राज को मेरा प्यार देना," गीता ने कहा और दोनो

सहेलियाँ हँसने लगी.

अपने कॉलेज की बॅग को बगल दबाए रोमा घर मे घुसी और सीधे

अपने कमरे की ओर बढ़ गयी. अपनी बॅग को टेबल पर रख कर जैसे ही

वो बिस्तर की तरफ मूडी उसने देखा कि एक बुक पड़ी थी. जिस पर कुछ

लीखा हुआ था.

"ओह्ह्ह राज..... तुम मेरे लिए लिख रहे थे. " रोमा ने उस किताब को

उठाया और सीने से लगा झूम गयी. रोम ने मन ही मन राज को माफ़

कर दिया की उसने तीन दिन से उसकी तरफ देखा भी नही था.

रोमा कमरे का दरवाज़ा बंद कर घूमते हुए बिस्तर के नज़दीक आई

और पेट के बल लेट गयी. पीछे से उसने अपनी संडाल उतार कर फैंक

दी. फिर उसने अपनी जीन्स के बटन खोल ढीला कर दिया शायद कोई

ज़रूरत पड़ जाए. उसने काँपते हाथों से उस किताब को खोला.... राज

ने कहानी को कोई नाम नही दिया था.

.......... में कितना अकेला हूँ इसलिए तुम्हे ढूंड रहा हूँ.

तुम्हारे बेडरूम मे देखा तो तुम वहाँ भी नही थी. तभी मुझे

बाहर से म्यूज़िक की आवाज़ सुनाई देती है, में तुम्हारे बेडरूम की

खिड़की पर आता हूँ और देखता हूँ कि तुम एक चादर पर अपनी रेड

बिकनी पहने तालाब के किनारे लेटी हो. तुमने अपने कानो पर इयरफोन

लगा अपने पोर्टबल सीडी प्लेयर जो मेने तुम्हे दिया था शायद कोई

गाना सुन रही थी........

raj..
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Re: दो भाई दो बहन

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 03:22

........ में चुप चाप वहाँ खड़ा तुम्हे निहारता रहा, तुम दीख ही

इतनी सुंदर रही थी. उस लाल बिकनी मे जकड़ी तुम्हारी अमरूद सी

चुचियों को देख मेरे मुँह मे पानी आ गया. तुम्हारे तने निपल

मुझे दिखाई दे रहे थे और मेरा लंड तनता जा रहा था. बिना

कुछ सोचे में अपने लंड को पॅंट के उपर से मसल्ने लगा........

..........तुम्हारा सपाट पेट मुझे बहोत ही अच्छा लग रहा था. उस

बिकनी मे सिमटी तुम्हारी चूत का तो जवाब ही नही था. में तुम्हारी

चुचियों को घूर रहा था. शायद तुमने मुझे देख लिया था क्योंकि

तभी तुम्हारी निगाह खिड़की की ओर पड़ी थी. धूप तेज थी इसलिए तुम

अपनी आँखों पर हाथ रख मुझे देखती हो. में तुम्हे देखते हुए

अपना लंड मसल रहा था. ........

....... तुमने हाथ मे एक तेल की बॉटल पकड़ रखी थी और मुझे

मदद के लिए हाथ के इशारे से बुलाती हो. में तुम्हारी तरफ आने

के लिए दौड़ पड़ता हूँ. मुझे आता देख तुम तुम पेट के बल लेट जाती

हो और अपनी बिकनी के बटन खोल देती हो. में तुम्हारे बगल मे

बैठ जाता हूँ और तेल को अपने पंजों मे लेता हूँ. मेरे हाथ

तुम्हारे शरीर पर तेल मलने लगते हैं. पहले में तुम्हारे कंधों

पर तेल लगता हूँ फिर नीचे होते हुए तुम्हाई बिकिनी के किनारे तक

पहुँचता हूँ........

इतना सब पढ़ कर रोमा के दिल की धड़कने तेज हो गयी थी, वो कीताब

को नीचे रख देती है. उन शब्दों ने एक मीठा मीठा प्यार सा

भर दिया था उसके शरीर मे, उत्तेजना मे शरीर काँपने लगा था.

उसने अपने ब्लाउस को जीन्स से बाहर निकाल उसके बटन ढीले कर

दिए. फिर एक हाथ से अपनी ब्रा को अपनी चुचियों पर से अलग कर वो

अपनी चुचि को हौले हौले मसल्ने लगती है. उसके निपल तुरंत ही

तन कर खड़े हो जाते हैं.

वो अपनी आँखे बंद कर उन शब्दों को हक़ीकत मे बदलते देखने

लगती है. उत्तेजना और गरमाहट से उसका बदन भर रहा था. उसका

मन तो कर रहा था कि वो अपना हाथ अपनी चूत पर रख उसे रगडे

और मसले पर वो कीताब को और आगे पढ़ना चाहती थी. अपने दिल के

जज्बातों को रोक उसने अपना हाथ ब्लाउस से बाहर निकाला और कीताब को

एक बार फिर उठा लिया.

........में तुम्हे घूमा कर पीठ के बल लीटा देता हूँ, तुम अपने

बिकिनी को अपनी चुचियों के और उपर कर लेती हो. फिर में तुम्हारे

नाज़ुक पावं पर मालिश करने लगता हूँ. ओह्ह्ह मुझे तुम्हारे ये छोटे

और नाज़ुक पंजे कितने आचे लगते है. फिर मेरे हाथ तुम्हारे

घूटने से होते हुए तुम्हारी जाँघो पर पहुँचते है. जैसे ही मेरी

उंगलियाँ तुम्हारी चूत के नज़दीक पहुँचती है तुम्हारा पूरा शरीर

काँपने लगता है. जब तुम्हे लग रहा होगा कि अब में तुम्हे वहाँ

चूऊँगा तभी में फिर तुम्हारे पैरों और पंजो की मालिश करने

लगता हूँ..........

........ में देखता हूँ कि तुम्हारी जांघों के बीच बिकिनी के उपर

से एक धब्बा सा दिखाई दे रहा है और वो बढ़ता ही जा रहा है.

में तुम्हारे पंजों मे गुदगुदी करता हूँ तो तुम खिलखिला उठती हो

और अपने पावं थोड़ा फैला देती हो. फिर में तुम्हारी जांघों के

अन्द्रुनि हिस्से पर तेल लगाने लगता हूँ. जब मेरी उंगली तुम्हारी चूत

पर पहुँचती है तो तुम्हारा शरीर मे एक अकड़न सी पैदा होती है

और में अपनी एक उंगली तुम्हारी चूत मे घुसा देता हूँ..........

......... तुम मुझसे गिड़गिडती हो की में तुम्हारी बिकिनी उतार दूं

लेकिन में तुम्हारी जांघों पर बैठ जाता हूँ और बहोत सारा तेल

तुम्हारी चुचियों पर उंड़ेल देता हूँ. फिर मेरे हाथ तुम्हारी

चुचियों और निपल को मलने लगते है.........

रोमा को अपने दरवाज़े पर थोड़ी आहट सुनाई देती है और देखती है

कि दरवाज़ा धीरे धीरे खुल रहा है, वो चोंक उठती है और

अपने कपड़े दुरुस्त करने की सोचती ही है कि उसे राज का चेहरा नज़र

आता है. वो राहत की साँस लेने लगती है.

वो देखती है की राज कमर पर सिर्फ़ एक सफेद टवल लपेटे मुस्कुराते

हुए कमरे मे दाखिल हो रहा है. उसकी इस तरह से कमरे मे दाखिल

होने पर वो हैरान थी

"ये क्या कर रहे हो? कहीं तुम पागल तो नही हो गये हो?" वो धीरे

से फुसफुसाते हुए कहती है. उसे डर था कि कहीं उनकी मम्मी को

उनके इस रिश्ते के बारे मे पता ना चल जाए.

"इतना घबरा क्यों रही हो? क्या तुम्हे डर लग रहा है?" उसने उसे

चिढ़ाते हुए कहा और लापरवाही से अपना टवल खोल ज़मीन पर फैंक

दिया.

"क्या तुम्हे डर नही लगता?" रोमा ने पलट कर पूछा.

रोमा से रहा नही गया, वो उसके सुन्दर लंड को देखने लगी, जो इस

समय छोटा और मुरझाया हुआ था, लेकिन उसे पता था कि जब वो

टंकार खड़ा और मोटा होगा तो किसी घोड़े के लंड से कम नही लगेगा.

उसके लंड की गोलियाँ एक घने जंगल की तरह झांतों से घिरी हुई

थी. उसकी टाँगे पतली थी लेकिन किसी खिलाड़ी की टाँगों की तरह

मजबूत थी.

वो घूम कर पीठ के बल लेट जाती है, जिससे उसके खुले बटन से

ब्लाउस खुल जाता है और उसकी सफेद ब्रा दिखाई देने लगती है. ब्रा

से चलकती एक चुचि और तना हुआ निपल राज को और आकर्षित करता

है. फिर उसकी नज़र अपनी कीताब पर पड़ती है जो उसने उसी के लिए

छोड़ी थी.

"तो तुमने कहानी पढ़ ही ली....."

"हां में इसे ही पढ़ रही थी...." रोमा ने जवाब दिया.

"तुम्हारे आधे कपड़े खुले हुए है," उसके बदन को निहारते हुए राज

उसके करीब आकर उसके बगल मे लेट जाता है, "क्या तुम अपने आप से

खेल रही थी?"

राज की बात सुन कर उसे शरम आ जाती है लेकिन अब अपने भाई के

साथ गंदी गंदी बातें करने मे उसे भी मज़ा आता था.

"हां खेल तो रही थी... लेकिन में पहले इसे पढ़ना चाहती थी....

मुझे विश्वास नही हो रहा है कि तुमने ये सब मेरे लिए लिखा

है... अपनी इस बेहन के लिए जो तन मन से तुम्हे प्यार करती है...

तुम्हारी पूजा करती है."

राज उसके गोरे चिकने बदन को निहारने लगता है.." मुझे हमेशा से

यही डर लगा रहता था कि अगर तुम्हे ये पता चलेगा कि में तुम्हे

कितना प्यार करता हूँ तो तुम क्या सोचोगी. अगर में तुम्हे खो देता

तो शायद में मर ही जाता."

"और ये बात हमेशा याद रखना राज...." रोमा उसकी छाती पर हाथ

फैर्ते हुए बोली.

"तुम कहना क्या चाहती हो?" राज ने पूछा.

रोमा के मन मे तुरंत गीता का ख़याल आया जो उसके भाई के पीछे

पड़ी थी, फिर वहाँ रिया भी तो थी. रोमा जानती थी कि उसे अपने

भाई पर विश्वास करना होगा, फिर उनके बढ़ते प्यार और रिश्ते ने

उसके मन से डर को निकाल फैंका.

"कुछ नही ये लड़कियों की बातें है जो तुम नही समझोगे." रोमा ने

कहा.

राज की नज़र एक बार फिर कीताब पर पड़ी, "कहाँ तक पढ़ चुकी हो

अब तक?"

"बहुत ज़्यादा और अछी तरह जान गयी हूँ कि में तुम्हे बहोत प्यार

करती हूँ," कहकर वो उसके आँखों मे झाँकने लगी.

राज झुककर उसकी खुली चुचियों को चूमने लगा. पहले उसने चुचि

को नीचे से चूमते हुए अपनी जीब चुचि की पूरी गोलाईयों पर

घूमाते हुए उसके निपल को मुँह मे ले चूसने लगा.

क्रमशः..................


raj..
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Re: दो भाई दो बहन

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 03:23

10

गतान्क से आगे.......

राज के जीब के स्पर्श ने रोमा के शरीर मे फिर हलचल पैदा कर दी

थी. उसे लगा कि जैसे उत्तेजना की ज्वाला उसकी चुचियों से होती हुई

उसकी चूत तक पहुँच चुकी है. उसे लगा की जैसे चूत मे जोरों

की खुजली मच रही है.

"तुम्हारी चूत रिस रही है जान..." राज ने कहा.

"हां शायद...."

"एक शैतानी मुस्कुराहट के साथ राज ने अपना मुँह उसकी चुचियों पर

से हटा लिया, "नही में ऐसी किसी चीज़ पर विश्वास नही करता जो

में खुद ना देख लूँ."

"ये कोई अच्छी बात नही राज!"

"नहीं में खुद देखूँगा," राज ने कहा, "लेकिन इसके बाद."

इतना कहकर राज ने फिर एक बार रोमा के निपल अपने मुँह मे ले लिए.

वो उन्हे चूमने लगा, चूसने लगा, कभी अपने दाँतों के बीच लेता

और हल्के से काट लेता.

"ओह राज क्या कर रहे हूऊओ....." रोमा मस्ती मे सिसक पड़ी.

राज का एक हाथ उसके सपाट पेट पर से होता हुआ उसकी खुली जीन्स पर

पहुँचा और उसकी उंगलियाँ उसकी पॅंटी की एलास्टिक को पकड़ ली. रोमा

ने अपने चूतड़ थोड़ा सा उँचा किए और राज ने उसकी जीन्स और पॅंटी

को नीचे खिसका दिया.

फिर उसकी उंगलियाँ चूत को सहलाते हुए उसकी फांको को अलग कर अंदर

घुसने लगी. उसने देखा कि रोमा की चूत किसी भट्टी की तरह सुलग

रही थी और पूरी तरह गीली हो चुकी थी.

"ओह राज्ज्जज्ज्ज्ज........." रोमा सिसक पड़ी, "जानते हो कितना मिस

किया मेने तुम्हे पूरे हफ्ते भर."

राज ने अपने मुँह को उसकी चुचियों से उपर कर उसके होंठ पर रख

दिए, "में तुमसे प्यार करता हूँ," और वो उसके होठों को चूसने

लगता है, "बहोत प्यार करता हूँ तुमसे...."

रोमा ने प्यार से अपनी बाहें उसके गले मे डाल दी और अपना मुँह खोल

उसकी जीब को मुँह मे ले चूसने लगी. उसने उसे ऐसे गले लगा लिए

जैसे दो प्रेमी कई महीनो बाद एक दूसरे से मिल रहे थे.

रोमा ने अपना हाथ उसकी गर्दन से निकाला और नीचे की ओर करते हुए

उसके खड़े लंड को पकड़ लिया. लंड किसी लोहे की सलाख की तरह तन

चुका था. उसे ऐसा लगा की जैसे उसने किसी जलती हुई सलाख हाथ मे

पकड़ ली हो.

राज ने अपने आपको थोड़ा हिलाया और अपनी जंघे रोमा के चेहरे पर

कर लेट गया. फिर उसकी जांघों को फैला उसकी चूत से उठती महक

को सूंघने लगा.

"तुम्हारा लंड बहोत प्यारा है...." रोमा उसके लंड को सहलाते और

उसके अंडकोषों को मसल्ते हुए बोली.

"मुझे तो बहोत भूक लग रही है," उसकी चूत को फैलाते हुए

बोला, "क्या तुम्हे नही लग रही?"

"एम्म.....बहोत ज़्यादा" कहकर उसने पहले तो उसके सूपदे पर अपनी जीब

फिराई फिर उसके लंड को अपने मुँह मे ले चूसने लगी.

अगले आधे घंटे तक दोनो एक दूसरे को तृप्त करने मे लगे रहे.

रोमा उसके लंड को अपने गले तक लेकर चूस्ति तो राज अपनी जीब को

उसकी चूत की और गहराइयों तक डाल देता. राज अपने लंड को उपर से

उसके मुँह मे डालता तो रोमा नीचे से अपने चूतड़ उठा अपनी चूत

को और उसके मुँह पर दबा देती.

रोमा की चूत ने सबसे पहले पानी छोड़ दिया, राज उसकी चूत मे अपनी

जीब के साथ साथ अपनी दो उंगलियाँ भी अंदर बाहर कर रहा था.

उसका शरीर आकड़ा और उसने अपने चूतड़ उपर को जोरों से उठा सिसक

पड़ी.......

राज उसके उपर से उठता है और रोमा को पलट कर घोड़ी बना देता

है. रोमा भी अपनी कोहनी पर झुक अपने चूतड़ उपर को उठा देती

है. राज उसके पीछे आ अपने लंड को पहले तो उसकी गीली चूत पर

घिसता है फिर धीरे से अपना लंड अंदर घुसा देता है.

"ओह राआाज तुम्हारा लंड मेरी चूत मे कितना अच्छा लग रहा

है.......ओह"

"क्या तुम्हे अब भी डर लग रहा है?" राज ने पूछा.

"नही अब इतना नही लग रहा...." कहकर रोमा कमरे के बंद दरवाज़े

की ओर देखने लगती है.

राज अब धीमे और लंबे धक्के लगा उसे चोदने लगता है. उसका लोहे

जैसा लंड उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था. उनके शरीर हर

धक्के पर ऐसे मिल रहे थे जैसे सुर और ताल का संगम होता है.

थोड़ी ही देर मे राज का लंड भी उबाल खाने लगता है.

"ओह हाआआं" सिसकते हुए राज अपने लंड को उसकी चूत के अंदर

तक पेल अपना वीर्य उसकी चूत मे छोड़ देता है.

रोमा भी अपनी चूत को सिकोड उसके लंड की हर बूँद को निचोड़ने

लगती है. थोड़ी ही देर मे दोनो थके हुए एक दूसरे का हाथ पकड़े

निढाल हो लेट जाते हैं.

"अगर अचानक मम्मी कमरे मे आ जाती तो तुम क्या करती?" राज अपनी

बेहन को चिढ़ाते हुए पूछता है.

"में तो डर के मारे मार ही जाती," रोमा ने जवाब दिया, "अब इसके

पहले की हमारी सोच हक़ीकत मे बदले हमे कपड़े पहन लेने चाहिए."

पर राज था कि उसके मुलायम और नाज़ुक बदन को अपनी बाहों से छोड़ना

ही नही चाहता था, "रोमा पता है तुम्हारी इन बाहों मे कितना सकून

मिलता है मुझे, मन करता है की इसी तरह हमेशा पड़ा रहूं."

रोमा शरमा गयी, "अब उठो भी......." वो उसकी बाहों से निकलने की

कोशिश करने लगी.

लेकिन राज की बाहें ज़्यादा मजबूत थी. उसने उसे खींच कर अपने उपर

लीटा लिया, "सच सच बताओ क्या तुम्हे अच्छा नही लग रहा?"

उसके नंगे बदन से लिपट कर लेटना उसे भी अच्छा लग रहा था, मन

कर रहा था कि वो ऐसे ही लेटी रहे अपने प्यार की बाहों मे लेकिन

मम्मी के आने का डर अभी मन मे समाया हुआ था.

"नही मुझे अच्छा नही लग रहा."

"अगर मम्मी आ गयी तो क्या कहोगी?" राज ने पूछा.

"मुझे नही पता और में जानना भी नही चाहती, प्लीज़ राज मुझे

जाने दो."

आख़िर राज ने उसे छोड़ दिया. वो तुरंत अपने कपड़े पहनने लगी. राज

अपनी बेहन को कपड़े पहनते देखता रहा. रोमा ने अपने कपड़े पहने

और उसका टवल उसकी तरफ उछाल दिया. राज को लगा कि रोमा गुस्से मे

है, इसलिए उसने उसे अपनी बाहों मे भरा और चूम लिया.

"में तुमसे बाद मे मिलता हूँ," कहकर राज ने अपना टवल लपेटा और

उसके कमरे से बाहर चला गया.

"तुम पागल हो!" वो ज़ोर से पीछे से चिल्लाई.

राज एक बार तो थीट्का फिर मुस्कुराते हुए अपने कमरे के ओर बढ़ गया.

* * * * *

रात के वक़्त जब राज और जय तालाब के किनारे बढ़ रहे थे उस

समय काफ़ी कोहरा छाया हुआ था और ठंड भी बढ़ गयी थी. अलाव के

नज़दीक जाकर दोनो ने मिलकर उसमे कुछ लकड़ियाँ डाली और आग

सुलगा दी.

दोनो अलाव के सामने बैठ गये. जय ने अपनी जेब से वही नशे वाली

सिग्रेट निकाली और सुलगा ली. सिग्रेट का ज़ोर का कश लेकर उसने

अपनी छाती धुएँ से भर ली फिर धुएँ को धीरे धीरे छोड़ने

लगा.

"राज मुझे रोमा बहोत पसंद है," उसने अपने फेफड़ों मे इकट्ठा

किए हुए धुएँ को छोड़ते हुए कहा, "बहोत सुन्‍दर लगती है वो."

"इतनी भी सुन्दर नही है वो," राज ने उसकी सुंदरता को कम आँकते

हुए कहा. जय की बात सुनकर उसके मन मे जलन की भावना उमड़ पड़ी

थी, "पर मुझे नही लगता कि वो तुम्हे पसंद करती हो, अगर करती

तो मुझे ज़रूर बताती."

"पर ये उसका फ़ैसला होगा... क्यों सही है ना?" जय फिर से धुएँ को

छोड़ता हुआ बोला, "जैसे कि रिया का फ़ैसला था तुम्हे पसंद करने का

और तुम्हारे साथ चली गयी थी मुझे यहीं छोड़ कर पीछले

हफ्ते.... याद है ना तुम्हे?"

"हां वो उसका फ़ैसला था," राज ने अपने कंधे उचकाते हुए

कहा. "वैसे भी तुम जो करना चाहे करो मुझे क्या, में तो सिर्फ़ ये

कह रहा था कि अगर ऐसा कुछ होता तो वो मुझसे ज़रूर कहती."

"यार इतना क्यों नाराज़ हो रहे हो, जब रिया ने फ़ैसला किया तो में

तो नाराज़ नही हुआ था." जय ने कहा.

राज जय के कहने का मतलब समझ रहा था. जय की नज़र रोमा पर

थी ये राज समझ रहा था और ये भी जानता था कि रिया से उसके

संबंध को लेकर वो नाराज़ है.

"देखो में किसे लेकर आ रही हूँ."

दोनो लड़कों ने रोमा की आवाज़ को तुरंत पहचान लिया. दोनो ने अपनी

नज़रें घर की तरफ घूमा दी जहाँ से दो परछाईयाँ उन्ही की तरफ

चली आ रही थी. थोड़ी ही देर मे उन्हे रोमा के साथ रिया नज़र आने

लगी. पर दोनो को उमीद नही थी कि इतनी जल्दी रिया से मुलाकात

होगी.

"तुम इतनी जल्दी कैसे वापस आ गयी," जय ने चौंकते हुए पूछा.

रिया जय से नही कहना चाहती थी कि उसने कुछ ऐसा नही किया था कि

वो इतनी जल्दी वापस आ जाती लेकिन वो झगड़े के मूड मे नही थी

इसलिए बनावटी हँसी के साथ बोली, "क्या एक लड़की अपने भाई और

पुराने दोस्तों से मिलने नही आ सकती?"

"हां हां.. क्यों नही में तो बस चौंक पड़ा था तुम्हे देखकर."

जय ने कहा. पर मन ही मन उसे गुस्सा आ रहा था. वो कुछ देर के

लिए रोमा के साथ अकेले रहना चाहता था जो रिया के आने से अब

मुमकिन नही था. उसे शक था कि रिया भी रोमा के लिए ही वापस

आई है.

बुझती आग का बहाना कर जय वहाँ से उठा और अलाव मे लकड़ियाँ

डालने लगा. उसने देखा कि रोमा और रिया राज के बगल मे बैठ गये

थे. अल्लव से पड़ती रोशनी मे वो रोमा के शरीर को निहारने लगा.

शॉर्ट्स के नीचे उसकी नंगी टाँगे और जंघे हल्की रोशनी मे बहोत

ही आकर्षित लग रही थी. और उसका छोटा सा टॉप उसकी सेव जैसे

चुचियों को काफ़ी लुभावना बना रहा था.

रोमा को पाने की इच्छा और ज़ोर पकड़ने लगी. उसका असहाय लंड उसकी

पॅंट के अंदर फुदकने लगा. जितना वो उसकी पतली जाँघो को देखता

उतने ही ख़याल उसके मन मे आने लगे. अपनी कल्पना मे वो रोमा को

अपनी बाहों मे भर लेता है और उसकी शॉर्ट्स और पॅंटी को खींच

नीचे कर देता है. फिर अपने फूले हुए लंड को उसकी चूत के अंदर

घुसा देता है.

लंड मे उठते तनाव ने उसे उसके ख़यालों से बाहर निकाला. उसने

देखा कि तीनो मशगूल हो कर बातें कर रहे थे. गुस्से मे उसने

ज़ोर से लकड़ियाँ अलाव मे पटक दी.

"क्यों ना एक सिग्रेट हो जाए?" जय ने रोमा को एक सिग्रेट पकड़ाते

हुए कहा.

लेकिन रोमा ने उसे ना कर दिया तो रिया बीच मे बोल पड़ी, "क्या में

ले सकती हूँ?"

रिया ने जय के हाथों से सिग्रेट ले ली और उसके कश लेने लगी,

उसने इशारे से रोमा को उसका साथ देने के लिए कहा. दोनो लड़कियाँ

एक दूसरे के सामने मुँह कर बैठ गयी और फिर पहले तो एक दूसरे

ने कश लिया फिर होंठ से होंठ सताते हुए एक दूसरे के मुँह मे

धुआँ छोड़ने लगी फिर दोनो की जीब आपस मे मिल गयी.

जय को ये देख गुस्सा आ रहा था कि उसकी बेहन किस तरह रोमा को

बहका रही थी. और वहाँ राज था कि जो सब कुछ देखते हुए भी

अंजान बना हुआ था, "ओह आज कितनी ठंड है, मज़ा आ रहा है,"

उसने अपने आप से कहा.

रोमा और रिया के चुंबन और गहराने लगे. इतने मे रिया को अपनी

बाहों मे ले ज़मीन पर लुढ़कते हुए उन्दोनो से थोड़ी दूर चली गयी

जिससे उन्हे एकांत मिल सके. रात के अंधेरे मे जय उन दोनो को

लुढ़कते देखता रहा, वो समझ रहा था कि रिया अब रोमा के साथ क्या

करने वाली है. गुस्से मे जय ने एक और सिग्रेट सुलगा ली और गहरे

गहरे कश लेने लगा. पर हर कश के साथ उसके अंदर का गुस्सा और

रोमा को पाने की लालसा और बढ़ने लगी.

"मुझे लगता है कि तुम्हारे भाई को काफ़ी गुस्सा आ रहा है," रोमा

रिया के होठों को चूस्ते हुए बोली.

रोमा ने अपनी गर्दन हन मे हिलाई, "मरने दो उसे, अभी नासमझ

है, में हमेशा उससे अच्छीतारह बर्ताव करती हूँ और वो है की

मुझे अपनी ज़ागिर समझता है."

"रिया तुम नही जानती जब से तुम मिली हो में कब से इस दिन का

इंतेज़ार कर रही थी," रोमा ने कहा.

"उस रात पहली बार जब मेने तुम्हे देखा था तो मुझे भी यही लगा

कि तुम्हे भी किसी दूसरी लड़की के साथ सेक्स करने मे कोई ऐतराज़ नही

होगा, इसीलिए आज समय मिलते ही में तुम्हारे पास चली आई"

"ओह रिया तुम कितनी अच्छी हो?" कहकर रोमा उसे और जोरों से

चूमने लगी.

"हां, पर अभी तुमने मेरे अच्छे पन का स्वाद ही कहाँ लिया है,"

रिया मुस्कुराते हुए बोली.

रोमा एक बार तो उसकी बात को सुन चौंक पड़ी, फिर उसके गाल पर हल्का

सा थप्पड़ मारते हुए बोली, "तुम बड़ी शैतान हो?"

काफ़ी देर एक दूसरे को चूमने के बाद रिया ने अपने होंठ उसके

होंठो से नीचे करते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगे. फिर उसके

टॉप को उपर कर उसने उसकी चुचियों को नंगा कर दिया. फिर अपनी

हथेली से उसकी चुचि को सहलाते हुए वो उसके निपल को मुँह मे ले

चूसने लगी. एक अजीब से लहर रोमा के शरीर मे दौड़ गयी.

उन दोनो के सिसकने और करहों की आवाज़ अंधेरे मे गूँज सी रही

थी. जय गुस्से मे खड़ा हो अलाव के चारो और चक्कर लगाते हुए

अपने पाँव ज़मीन पर पटक रहा था, राज ये सब क्या है? वो दोनो अपनी

मन मानी कर रहे है, और हम दोनो है जो बेवकूफो की तरह उनका

इंतेज़ार कर रहे है? क्या तुम्हे अजीब सा नही लग रहा?"

"हां लग तो रहा है, पर इसमे बुरा भी क्या है, में यहाँ पर हूँ

क्यों कि मुझे इस तरह ठंड मे तालाब के किनारे बैठना अच्छा लगता

है. अगर रिया और रोमा साथ साथ मज़े ले रहे है तो क्या हुआ तुम्हे

क्यों गुस्सा आ रहा है? आख़िर वो तुम्हारी बेहन है." राज ने कहा.

राज जय के चेहरे को देखने लगा, उसे पता था कि जिस तरह रोमा

उसकी बेहन थी रिया भी जय की बेहन थी लेकिन जय के चेहरे पर

उभरते गुस्से ने थोड़ा उसे सहमा सा दिया था.

वहीं उन दोनो से थोड़ी दूर रिया रोमा की चुचियों को चूसने के

बाद थोड़ा नीचे खिसकी और उसकी शॉर्ट्स को खोल नीचे खिसकने

लगी. साथ ही उसने उसकी गीली हुई पॅंटी भी खिसका दी. रोमा का किसी

लड़की के साथ ये पहला अवसर था इसलिए वो थोड़ा सा नर्वस थी. जब

से वो रिया से मिली थी राज के साथ साथ रिया भी उसके ख़यालों मे

थी, वो इसी दिन का इंतेज़ार कर रही थी.

क्रमशः..................