Jaal -जाल compleet

Discover endless Hindi sex story and novels. Browse hindi sex stories, adult stories ,erotic stories. Visit pddspb.ru
raj..
Platinum Member
Posts: 3402
Joined: 10 Oct 2014 01:37

Jaal -जाल compleet

Unread post by raj.. » 13 Dec 2014 02:06

जाल पार्ट--1

दोस्तो आपकी सेवा मे मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और नई कहानी लेकर हाजिर हूँ

"और अब आपके सामने है आज की नीलामी की सबसे आख़िरी मगर सबसे खास पेशकश..",डेवाले के क्लॅसिक ऑक्षन हाउस के मेन हॉल मे स्टेज पे खड़ा इंसान 1 पैंटिंग से परदा हटा रहा था.उसके सामने 20-20 कुर्सियो की 2 कतारो मे 40 आदमी बैठे थे.अभी तक 10 चीज़ो की नीलामी हुई थी मगर सबका ध्यान इसी पैंटिंग पे था.ये पैंटिंग मशहूर पेंटर गोवर्धन दास की थी जोकि अभी कुच्छ ही दिनो पहले 1 आर्ट कॉलेज की लाइब्ररी मे पड़ी मिली थी.सभी जानकरो का मानना था कि ये दास बाबू की है,जिन्हे गुज़रे 70 से भी ज़्यादा साल हो चुके थे,सबसे उम्दा तस्वीरो मे से 1 है.

"..इस तस्वीर की नीलामी की शुरुआती कीमत 10 लाख तय की गयी है.क्या कोई है जो इस रकम से ज़्यादा बोली लगा सकता है?",सामने बाई कतार मे बैठे 1 शख्स ने अपना हाथ उपर उठाया.

"15 लाख..और कोई?",इस बार दाई कतार मे बैठे 1 शख्स ने हाथ उठाया.नीलामी करने वाला आक्षनियर मुस्कुराया.वो जानता था कि दोनो शख्स खुद के लिए नही बल्कि अपने मालिको के लिए बोली लगा रहे हैं.हॉल मे बैठे बाकी लोग भी हल्के-2 मुस्कुरा रहे थे.खेल शुरू जो हो चुका था & उन्हे ये देखना था कि इस बार कौन जीतता है!

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

होटेल वाय्लेट शहर की सबसे ऊँची इमारत थी & उसकी 25वी मंज़िल पे खड़ा विजयंत मेहरा फ्लोर तो सीलिंग ग्लास से डेवाले को देख रहा था.शीशे की उस दीवार से उसे डेवाले शहर का बिल्कुल बीच का हिस्सा दिख रहा था जहा की आसमान छुति इमारतो की क़तारे लगी थी.वो उनमे से ज़्यादातर इमारतो का मालिक था & होटेल वाय्लेट का भी.विजयंत मेहरा ट्रस्ट ग्रूप का मालिक था.इस ग्रूप ने अपने कदम इनफ्रास्ट्रक्चर यानी कि सड़के,इमाराते,एरपोर्ट,बंदरगाह और ऐसी ही बुनियादी चीज़ो को बनाने के कारोबार से जमाए थे मगर आज ट्रस्ट ग्रूप ना केवल ये सब बनाता था बल्कि उसके मुल्क के 15 शहरो मे होटेल्स भी थे & पिच्छले 5 बरसो से वो फिल्म बनाने के भी धंधे मे उतर चुका था.

विजयंत के होंठो पे हल्की मुस्कुराहट खेल रही थी.यहा खड़े होके उसे अपनी ताक़त का एहसास होता था.इस शहर का बड़ा हिस्सा उसका था सिर्फ़ उसका.जहा वो खड़ा था वो वाय्लेट होटेल के उस सूयीट का बेडरूम था जिसे उसने खास खुद के लिए बनवाया था.ट्रस्ट ग्रूप का दफ़्तर होटेल से 300मीटर की दूरी पे 1 12 मंज़िला इमारत मे था.विजयंत वही से अपना कारोबार संभालता था मगर जब भी वो उस इमारत से उकता जाता था तो अपने इस सूयीट मे आ जाता था.सूयीट क्या 1 छ्होटा सा फ्लॅट ही था.1 बेडरूम,1 सा गेस्ट रूम जहा की 6-7 लोगो की मीटिंग करने का भी इंतेज़ाम था,1 अटॅच्ड बाथरूम & उसके साथ 1 किचेन थी.

"सर..",दरवाज़े पे दस्तक दे 1 लड़की अंदर दाखिल हुई.उसने ग्रे कलर की घुटनो तक की कसी फॉर्मल स्कर्ट & सफेद ब्लाउस पहना था.पैरो मे हाइ हील वाले जूते थे & बॉल 1 कसे जुड़े मे बँधे थे.ये लड़की देखने से होटेल की कर्मचारी नही लग रही थी,उनकी पोशाक वैसे भी अलग थी,"..1 घंटे मे वो शुरू होने वाला है.",वो आगे आई & हाथो मे पकड़ा फोन उसने बिस्तर पे रख दिया.विजयंत उसकी ओर पीठ किए खड़ा था.उसने बिना घूमे सर हिलाया अपनी बाहे उपर कर दी.लड़की मुस्कुराते हुए आगे आई.विजयंत ने 1 सफेद कमीज़ पहनी & काली पतलून थी.लड़की ने कमीज़ की बाजुओ के कफलिंक्स खोले & फिर विजयंत की कमीज़ के बटन खोलने लगी.अगले ही पल विजयंत का नंगा सीना उसके सामने था.

विजयंत मेहरा की उम्र 53 बरस थी मगर शायद ही उसे देख कोई उसकी असली उम्र बता सकता था.वो कही से भी 45 से ज़्यादा नही लगता था.उसका रंग इतना गोरा था की केयी लोगो को उसके विदेशी होने की ग़लतफहमी हो जाती थी.उसके बाल भी काले नही बल्कि कुच्छ भूरे रंग के थे जोकि कभी-2 सुनहले भी लगने लगते थे.चेहरे पे हल्की दाढ़ी & मूँछ थी.उसका कद 6'3" था & उसका कसरती जिस्म बहुत मज़बूत दिखता था.चमकते बालो से भरे उसके ग़ज़ब के चौड़े सीने को देख उस लड़की ने हल्के से अपने निचले होंठ को दांतो से दबाया.विजयंत मेहरा मर्दाना खूबसूरती की जीती-जागती मिसाल था.लड़की की धड़कने तेज़ हो गयी थी & उसके गाल भी लाल हो गये थे.उसने काँपते हाथो से विजयंत की पतलून उतारी.उसका बॉस अब केवल 1 अंडरवेर मे उसके सामने खड़ा था.उसने हाथ से उसे रुकने का इशारा किया.

"नीशी..",1 रोबिली & बहुत गहरी भारी,भरकम आवाज़ ने नीशी को जैसे नींद से जगाया.

"ज-जी.."

"क्या हुआ?ये कोई पहली बार तो नही.",विजयंत मुस्कुराया.

अफ!..इतनी दिलकश मुस्कान..& ये आवाज़..वो तो दफ़्तर मे उस से लेटर्स की डिक्टेशन लेते हुए ही अपनी टाँगो के बीच गीलापन महसूस करने लगती थी.

"नही सर.वो बात नही.",उसने अपनी पीठ विजयंत की तरफ की & अपने कपड़े उतारने लगी.लड़की का जिस्म बिल्कुल वैसा था जैसा विजयंत को पसंद था.बड़ी छातियाँ,चौड़ी गंद मगर सब कुच्छ कसा हुआ.2 साल से नीशी उसकी सेक्रेटरी थी & नौकरी जाय्न करने के 4 दिनो के अंदर ही वो अपने बॉस के बिस्तर मे भी ड्यूटी करने लगी थी.

"आहह..!",विजयंत ने उसे पीछे से बाहो मे भर लिया था & उसके पेट को सहलाते हुए उसके दाए कान मे जीभ फिरा दी थी.वो भी पीछे हो उसके जिस्म से लग गयी.उसने महसूस किया कि उसकी निचली पीठ पे उसके बॉस का गर्म लंड दबा हुआ था.उसका दिल और ज़ोर से धड़क उठा.ना जाने कितनी बार वो लंड उसकी चूत मे उतार चुका था मगर हर बार वो उसके एहसास से रोमांचित हुए बिना नही रहती थी.ये विजयंत के लंड का जादू था या उसकी शख्सियत का?..इस सवाल का जवाब ढूँढते हुए उसे 2 बरस हो गये थे मगर वो तय नही कर पाई थी & आज शायद आख़िरी बार वो उसके साथ हमबिस्तर हो रही थी.

"आज तुम्हारा आख़िरी दिन है ट्रस्ट ग्रूप के साथ,नीशी.",विजयंत ने कान के बाद उसके तपते गालो को चूमा था & फिर उसके नर्म लबो को & फिर उसे आगे जाने की ओर इशारा किया.नीशी आगे बढ़ी & बिस्तर पे पेट के बल लेट गयी,"सभी तैय्यारियाँ हो गयी शादी की?"

"जी.",10 दिन बाद नीशी की शादी थी & वो चेन्नई जा रही थी.हर लड़की की तरह वो भी बहुत खुश थी मगर 1 अफ़सोस था कि अब वो कभी उस बांके मर्द की चुदाई का लुफ्त नही उठा पाएगी,"उउन्न्ञन्....!",विजयंत ने उसके पैरो को उपर उठाया & बाए हाथ से थाम उसकी पिंदलियो को चूमने लगा,उसका दया हाथ निश्ी की मोटी गंद को सहला रहा था.निश्ी बिस्तर की चादर को बेचैनी से भींचते हुए हल्की-2 आहे ले रही थी.विजयंत का हाथ उसकी गंद की दरार को सहला रहा था.सहलाते हुए उसने हाथ को दरार मे तोड़ा अंदर घुसाया तो अपना सर उपर झटकते हुए निश्ी ने ज़ोर से आ भारी & उसकी जंघे खुद बा खुद फैल गयी.विजयंत ने उन्हे धीरे से तोड़ा और फैलाया & नीचे झुक गया.

"आन्न्न्नह.....उउन्न्ञणनह.....!",निश्ी की आहो के साथ-2 उसके हाथो तले बिस्तर की चादर की सलवटें बढ़ने लगी.विजयंत अपनी सेक्रेटरी की चिकनी चूत को पीछे से चाट रहा था.उसकी लपलपाति ज़ुबान उस नाज़ुक अंग से बह रहे रस को सुड़कते हुए उसके दाने को छेड़ रही थी.नीशी के जिस्म मे बिजली दौड़ रही थी.रोम-2 मे 1 अजीब सा मज़ा भर गया था.उसकी गंद की फांको को दबा के फैलाता हुआ विजयंत बड़ी गर्मजोशी से उसकी चूत पे अपनी जीभ चला रहा था & जब उसने उसने अपने होंठो को उसकी चूत पे दबा ज़ोर से चूसा तो नीशी चीख मारते हुए झाड़ गयी.तभी बिस्तर पे रखा फोन बज उठा.खुमारी मे झूमती नीशी ने थोड़ी देर बाद उसे उठाया & फिर सुन के रख दिया,"शुरू हो गया.",उसने जिस्म थोड़ा बाई तरफ मोड़ के सर पीछे घुमा के अपने बॉस को नशीली नज़रो से देखा.

उसकी फैली टाँगो के बीच विजयंत घुटनो पे खड़ा था.उसके चौड़े फौलादी सीने के सुनहले बालो & उसके मज़बूत बाजुओ को देख नीशी का जिस्म 1 बार फिर से कसक से भर उठा.बड़े-2 हाथो से विजयंत उसकी गंद को सहला रहा था & उस हल्की सी हरकत से भी उसके बाजुओ की मांसपेशिया फदक रही थी.उसने थोडा नीचे देखा & उसकी निगाह विजयंत के सपाट पेट पे गयी.पेट के बीचोबीच बालो की 1 मोटी लकीर नीचे जा रही थी.जब नीशी की नज़र वाहा पहुँची तो उसकी कसक 1 बार फिर चरम पे पहुँच गयी.टाँगो के बीच बालो से घिरा विजयंत का लंड अपने पूरे शबाब पे था.9.5 इंच लंबा & बहुत ही मोटा लंड 2 बड़े-2 आंडो के उपर सीधा तना खड़ा था.

नीशी अब तक 3-4 मर्दो से चुद चुकी थी जिनमे उसका मंगेतर भी शामिल था मगर उसने विजयंत जैसा लंड किसी के पास नही देखा था.उसने 1 बार फिर निचले होंठ को दाँत से दबाया & अपना सर बिस्तर मे च्छूपाते हुए अपनी कमर उपर कर अपनी गंद को हवा मे उठा दिया.हर बार ऐसा ही होता था.बंद कमरे मे विजयंत के साथ वो सब कुच्छ भूल जाती थी केवल अपने जिस्म की खुशी का ख़याल उसके ज़हन पे हावी रहता था.मुस्कुराते हुए विजयंत ने अपना तगड़ा लंड हाथ मे पकड़ा & उसे नीशी की जानी-पहचानी चूत मे घुसने लगा.

"ऊन्नह.....!",आज तक नीशी को उस लंबे,मोटे लंड की आदत नही पड़ी थी & आज भी शुरू मे उसे हल्का दर्द होता था लेकिन उसकी चूत की आख़िरी गहराइयो मे उतार वो लंड जब अपना कमाल दिखाता तो सारा दर्द हवा हो जाता & रह जाता सिर्फ़ मज़ा,बहुत सारा मज़ा!विजयंत ने अपनी सेक्रेटरी की नाज़ुक कमर थामी & धक्के लगाने शुरू कर दिए.वो बहुत गहरे मगर धीमे धक्के लगा रहा था.लंड बड़े हौले-2 नीशी की चूत को पूरे तरीके से चोद रहा था.वो मस्ती मे पागल हो चुकी थी.पूरे सूयीट मे उसकी आहें गूँज रही थी.बिस्तर की चादर को तो शायद वो अपने बेचैन हाथो से तार-2 कर देना चाहती थी.अपने बॉस के हर धक्के का जवाब वो अपनी कमर हिला अपनी गंद को पीछे धकेल के दे रही थी.

विजयंत को भी बहुत मज़ा आ रहा था.पिच्छले 2 बरसो मे नीशी की चूत ज़रा भी ढीली नही हुई थी.उसके धक्को की रफ़्तार बढ़ी तो नीशी की मस्तानी आहे भी साथ मे बढ़ी.विजयंत ने उसकी कमर को थाम अपनी ओर खींचते हुए ज़ोर से धक्के लगाए तो नीशी 1 बार और झाड़ गयी & बिस्तर पे निढाल हो गिर गयी.विजयंत उसके उपर लेट गया & फिर उसे लिए-दिए उसने दाई करवट ली.लंड अभी भी चूत मे था,विजयंत ने अपनी दाहिनी बाँह नीशी की गर्दन के नीचे लगाई & बाई को उसके पेट पे डाला.नीशी ने गर्दन पीछे घुमाई & अपने बॉस को चूमने लगी.उसका दिल करा रहा था कि वो बस ऐसे ही पड़ी उसे चूमती रही.1 बार फिर विजयंत ने हल्के धक्को के साथ उसकी चुदाई शुरू कर दी.

नीशी को मजबूरन किस तोड़नी पड़ी क्यूकी चुदाई की वजह से उसका जिस्म झटके खा रहा था लेकिन उसके होंठो की प्यास बुझी कहा थी.उसने बिना लंड को निकलने देते हुए अपनी पीठ को बिस्तर पे जमा लिया & अपने हाथो मे विजयंत के चेहरे को भर उसे चूमने लगी.विजयंत भी उसकी मोटी छातियो को दबाते हुए उसकी ज़ुबान से ज़ुबान लड़ा रहा था.विजयंत ने अपने बाए बाज़ू को नीशी की भारी जाँघो के नीचे लगा के उन्हे 1 साथ हवा मे उठा दिया & उसे चोदने लगा.इस पोज़िशन मे उसका लंड जड़ तक तो उसकी चूत मे नही जा रहा था मगर फिर भी दोनो को मज़ा बहुत आ रहा था.तभी 1 बार फिर फोने बजा.नीशी ने बिना अपने बॉस के होंठो को आज़ाद किए अपने दाए हाथ से टटोलते हुए बिस्तर पे फोन को ढूंड लिया & उसे कान से लगाया,"उम्म..हेलो.....ओके."

"आप जीत गये.",उसने विजयंत के चेहरे को थाम चूम लिया.उसकी बात ने विजयंत को जोश को मानो दुगुना कर दिया.उसने अपनी दाई बाँह जोकि नीशी की गर्दन के नीचे पड़ी थी & बाई जो उसकी जाँघो को थामे थी,दोनो को मोड़ लेते हुए उसके जिस्म को अपनी ओर घुमा लिया,जैसे लेते हुए उसे गोद मे ले रहा हो & नीचे से बड़े क़ातिल धक्के लगाने लगा.नीशी की मस्ती का तो कोई हिसाब ही नही रहा,वो अपने बॉस के खूबसूरत चेहरे को चूमते हुए आहे भरते हुए उसकी चुदाई का मज़ा लेने लगी.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

क्रमशः.......

JAAL paart--1

dosto aapki sevaa me main yaani aapka dost raj sharma ek our nai kahaani lekar haajir hun

"Aur ab aapke samne hai aaj ki nilami ki sabse aakhiri magar sabse khas peshkash..",Devalay ke Classic Auction House ke main hall me stage pe khada insan 1 painting se parda hata raha tha.uske samne 20-20 kursiyo ki 2 kataro me 40 aadmi baithe the.abhi tak 10 chizo ki nilami hui thi magar sabka dhyan isi painting pe tha.ye painting mashoor painter Govardhan Das ki thi joki abhi kuchh hi dino pehle 1 art college ki library me padi mili thi.sabhi jankaro ka maanana tha ki ye das babu ki,jinhe guzre 70 se bhi zyada saal ho chuke the,sabse umda tasviro me se 1 hai.

"..is tasvir ki nilami ki shuruati kimat Rs10 lakh tay ki gayi hai.kya koi hai jo is rakam se zyada boli laga sakta hai?",samne bayi katar me baithe 1 shakhs ne apna hath upar uthaya.

"15 lakh..aur koi?",is baar dayi katar me baithe 1 shakhs ne hath uthaya.nilami karne vala auctioneer muskuraya.vo janta tha ki dono shakhs khud ke liye nahi balki apne maliko ke liye boli laga rahe hain.hall me baithe baki log bhi halke-2 muskura rahe the.khel shuru jo ho chuka tha & unhe ye dekhna tha ki is baar kaun jeetata hai!

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

Hotel Violet shehar ki sabse oonchi imarat thi & uski 25vi manzil pe khada Vijayant Mehra floor to ceiling glass se devalay ko dekh raha tha.shishe ki us deewar se use devalay shehar ka bilkul beech ka hissa dikh raha tha jaha ki aasmaan chhuti imarato ki qatare lagi thi.vo unme se zyadatar imarato ka malik tha & hotel violet ka bhi.vijayant mehra Trust group ka malik tha.is group ne apne kadam infrastructure yani ki sadke,imarate,airport,bandargah aur aisi hi buniyadi chizo ko banane ke karobar se jamaye the magar aaj trust group na keval ye sab banata tha balki uske mulk ke 15 sheharo me hotels bhi the & pichhle 5 barso se vo film banane ke bhi dhandhe me utar chuka tha.

vijayant ke hotho pe halki muskuarhat khel rahi thi.yaha khade hoke use apni taqat ka ehsas hota tha.is shehar ka bada hissa uska tha sirf uska.jaha vo khada tha vo violet hotel ke us suite ka bedroom tha jise usne khas khud ke liye banwaya tha.trust group ka daftar hotel se 300m ki duri pe 1 12 manzila imarat me tha.vijayant vahi se apna karobar sambhalta tha magar jab bhi vo us imarat se ukta jata tha to apne is suite me aa jata tha.suite kya 1 chhota sa flat hi tha.1 bedroom,1 sa guest room jaha ki 6-7 logo ki meeting karne ka bhi intezam tha,1 attached bathroom & uske sath 1 kitchenette.

"sir..",darwaze pe dastak de 1 ladki andar dakhil hui.usne grey color ki ghutno tak ki kasi formal skirt & safed blouse pehna tha.pairo me high heel vale jute the & baal 1 kase jude me bandhe the.ye ladki dekhne se hotel ki karmchari nahi lag rahi thi,unki poshak vaise bhi alag thi,"..1 ghante me vo shuru hone wala hai.",vo aage aayi & hatho me pakda fone usne bistar pe rakh diya.vijyant uski or pith kiye khada tha.usne bina ghume sar hilaya apni baahe upar kar di.ladki muskurate hue aage aayi.vijyant ne 1 safed kamiz pehni & kali patlun thi.ladki ne kamiz ki bazuo ke cufflinks khole & fir vijyant ki kamiz ke button kholne lagi.agle hi pal vijyant ka nanga seena uske samne tha.

vijyant mehra ki umra 53 baras thi magar shayad hi use dekh koi uski asli umra bata sakta tha.vo kahi se bhi 45 se zyada nahi lagta tha.uska rang itna gora tha ki kayi logo ko uske videshi hone ki galatfehmi ho jati thi.uske baal bhi kale nahi balki kuchh bhure rang ke the joki kabhi-2 sunahle bhi lagne lagte the.chehre pe halki dadhi & moonchh thi.uska kad 6'3" tha & uska kasrati jism bahut mazbut dikhta tha.chamakte balo se bhare uske gazab ke chaude seene ko dekh us ladki ne halke se apne nichle honth ko danto se dabaya.vijayant mehra mardana khubsurti ki jeeti-jagti misal tha.ladki ki dhadkane tez ho gayi thi & uske gaal bhi laal ho gaye the.usne kaanpte hatho se vijayant ki patlun utari.uska boss ab keval 1 underwear me uske samne khada tha.usne hath se use rukne ka ishara kiya.

"Nishi..",1 robili & bahut gehri bhari,bharkam aavaz ne nishi ko jaise nind se jagaya.

"j-ji.."

"kya hua?ye koi pehli baar to nahi.",vijayant muskuraya.

uff!..itni dilkash muskan..& ye aavaz..vo to daftar me us se letters ki dictation lete hue hi apni tango ke beech gilapan mehsus karne lagti thi.

"nahi sir.vo baat nahi.",usne apni pith vijayant ki taraf ki & apne kapde utarne lagi.ladki ka jism bilkul vaisa tha jaisa vijayant ko pasand tha.badi chhatiyan,chaudi gand magar sab kuchh kasa hua.2 saal se nishi uski secretary thi & naukri join karne ke 4 dino ke andar hi vo apne boss ke bistar me bhi duty karne lagi thi.

"aahhhhh..!",vijayant ne use peechhe se baaho me bhar liya tha & uske pet ko sehlate hue uske daye kaan me jibh fira di thi.vo bhi peechhe ho uske jism se lag gayi.usne mehsus kiya ki uski nichli pith pe uske boss ka garm lund daba hua tha.uska dil aur zor se dhadak utha.na jane kitni baar vo lund uski chut me utar chuka tha magar har baar vo uske ehsas se romanchit hue bina nahi rehti thi.ye vijayant ke lund ka jadu tha ya uski shakhsiyat ka?..is sawal ka jawab dhundte hue use 2 baras ho gaye the magar vo tay nahi kar payi thi & aaj shayad aakhiri baar vo uske sath humbistar ho rahi thi.

"aaj tumhara aakhiri din hai trust group ke sath,nishi.",vijayant ne kaan ke baad uske tapte galo ko chuma tha & fir uske narm labo ko & fir use aage jane ki or ishara kiya.nishi aage badhi & bistar pe pet ke bal let gayi,"sabhi taiyyariyan ho gayi shadi ki?"

"ji.",10 din baad nishi ki shadi thi & vo Chennai ja rahi thi.har ladki ki tarah vo bhi bahut khush thi magar 1 afsos tha ki ab vo kabhi us banke mard ki chudai ka lutf nahi utha payegi,"uunnnn....!",vijayant ne uske pairo ko upar uthaya & baye hath se tham uski pindliyo ko chumne laga,uska daya hath nishi ki moti gand ko sehla raha tha.nishi bistar ki chadar ko bechaini se bhinchte hue halki-2 aahe le rahi thi.vijayant ka hath uski gand ki darar ko sehla raha tha.sehlate hue usne hath ko darar me thoda andar ghusaya to apna sar upar jhatakte hue nishi ne zor se aah bhari & uski janghe khud ba khud fail gayi.vijayant ne unhe dhire se thoda aur failaya & neeche jhuk gaya.

"aannnnhhhhhh.....uunnnnnhhhhhhhhh.....!",nishi ki aaho ke sath-2 uske hatho tale bistar ki chadar ki salwaten badhne lagi.vijayant apni secretary ki chikni chut ko peechhe se chat raha tha.uski laplapati zuban us nazuk ang se beh rahe ras ko sudakte hue uske dane ko chhed rahi thi.nishi ke jism me bijli daud rahi thi.rom-2 me 1 ajib sa maza bhar gaya tha.uski gand ki phaanko ko daba ke failata hua vijayant badi garmjoshi se uski chut pe apni jibh chala raha tha & jab usne usne apne hotho ko uski chut pe daba zor se chusa to nishi chikh marte hue jhad gayi.tabhi bistar pe rakha fone baj utha.khumari me jhumti nishi ne thodi der baad use uthaya & fir sun ke rakh diya,"shuru ho gaya.",usne jism thoda bayi taraf mod ke sar peechhe ghuma ke apne boss ko nashili nazro se dekha.

uski faili tango ke beech vijayant ghutno pe khada tha.uske chaude fauladi seene ke sunahle baalo & uske mazbut bazuo ko dekh nishi ka jism 1 baar fir se kasak se bhar utha.bade-2 hatho se vijayant uski gand ko sehla raha tha & us halki si harkat se bhi uske bazuo ki manspeshiya phadak rahi thi.usne thoda neeche dekha & uski nigah vijayant ke sapat pet pe gayi.pet ke beechobeech baalo ki 1 moti lakir neeche ja rahi thi.jab nishi ki nazar vaha pahunchi to uski kasak 1 baar fir charam pe pahunch gayi.tango ke beech baalo se ghira vijayant ka lund apne pure shabab pe tha.9.5 inch lumba & bahut hi mota lund 2 bade-2 ando ke upar seedha tana khada tha.

nishi ab tak 3-4 mardo se chud chuki thi jinme uska mangetar bhi shamil tha magar usne vijayant jaisa lund kisi ke paas nahi dekha tha.usne 1 baar fir nichle honth ko dant se dabaya & apna sar bistar me chhupate hue apni kamar upar kar apni gand ko hawa me utha diya.har baar aisa hi hota tha.band kamre me vijayant ke sath vo sab kuchh bhul jati thi keval apne jism ki khushi ka khayal uske zehan pe havi rehta tha.muskuarate hue vijayant ne apna tagda lund hath me pakda & use nishi ki jani-pehchani chut me ghusane laga.

"oonnhhhhhh.....!",aaj tak nishi ko us lumbe,mote lund ki aadat nahi padi thi & aaj bhi shuru me use halka dard hota tha lekin uski chut ki aakhiri gehraiyo me utar vo lund jab apna kamal dikhata to sara dard hawa ho jata & reh jata sirf maza,bahut sara maza!vijayant ne apni secretary ki nazuk kamar thami & dhakke lagane shuru kar diye.vo bahut gehre magar dheeme dhakke laga raha tha.lund bade haule-2 nishi ki chut ko pure tarike se chod raha tha.vo masti me pagal ho chuki thi.pure suite me uski aahen goonj rahi thi.bistar ki chadar ko to shayad vo apne bechain hatho se taar-2 kar dena chahti thi.apne boss ke har dhakke ka jawab vo apni kamar hila apni gand ko peechhe dhakel ke de rahi thi.

vijayant ko bhi bahut maza aa raha tha.pichhle 2 barso me nishi ki chut zara bhi dhili nahi hui thi.uske dhakko ki raftar badhi to nishi ki mastani aahe bhi sath me badhi.vijayant ne uski kamar ko tham apni or khinchte hue zor se dhakke lagaye to nishi 1 baar aur jhad gayi & bistar pe nidhal ho gir gayi.vijayant uske upar let gaya & fir use liye-diye usne dayi karwat li.lund abhi bhi chut me tha,vijayant ne apni dahini banh nishi ki gardan ke neeche lagayi & bayi ko uske pet pe dala.nishi ne gardan peechhe ghumayi & apne boss ko chumne lagi.uska dil kara raha tha ki vo bas aise hi padi use chumti rahi.1 baar fir vijayant ne halke dhakko ke sath uski chudai shuru kar di.

nishi ko majburan kiss todni padi kyuki chudai ki vajah se uska jism jhatke kha raha tha lekin uske hotho ki pyas bujhi kaha thi.usne bina lund ko nikalne dete hue apni pith ko bistar pe jama liya & apne hatho me vijayant ke chehre ko bhar use chumne lagi.vijayant bhi uski moti chhatiyo ko dabate hue uski zuban se zuban lada raha tha.vijayant ne apne baye bazu ko nishi ki bhari jangho ke neeche laga ke unhe 1 sath hawa me utha diya & use chodne laga.is position me uska lund jud tak to uski chut me nahi ja raha tha magar fir bhi dono ko maza bahut aa raha tha.tabhi 1 baar fir fone baja.nishi ne bina apne boss ke hotho ko azad kiye apne daye hath se tatolte hue bistar pe fone ko dhoond liya & use kaan se lagaya,"umm..hello.....ok."

"aap jeet gaye.",usne vijayant ke chehre ko tham chum liya.uski baat ne vijayant ko josh ko mano duguna kar diya.usne apni dayi banh joki nishi ki gardan ke neeche padi thi & bayi jo uski jangho ko thame thi,dono ko mod lete hue uske jism ko apni or ghuma liya,jaise lete hue use god me le raha ho & neeche se bade qatil dhakke lagane laga.nishi ki masti ka to koi hisab hi nahi raha,vo apne boss ke khubsuart chehre ko chumte hue aahe bharte hue uski chudai ka maza lene lagi.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

kramashah.......


raj..
Platinum Member
Posts: 3402
Joined: 10 Oct 2014 01:37

Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 13 Dec 2014 02:07

जाल पार्ट--2

गतान्क से आगे.

"75 लाख..और कोई है जो इस से बड़ी बोली लगाना चाहता है?",उसने उमीद से दाई क़तार मे बैठे शख्स को देखा मगर उसने अपना हाथ नही उठाया,"..75 लाख..1....75 लाख..2..75 लाख....3!",उसने हात्ोड़ा अपने सामने रखे डेस्क पे मारा,"..ये बेहतरीन पैंटिंग 75 लाख रुपयो मे यहा सामने बाई क़तार मे बैठे ग्रे सूट वाले साहब की हुई.",वो शख्स विजयंत का ही 1 आदमी था जो उसके लिए यहा बोली लगा रहा था.उसे सख़्त हिदायत थी कि चाहे जो भी हो उसे ये पैटिंग ख़रीदनी ही है.उसे ताक़ीद की गयी थी कि जो शख्स दाई क़तार मे बैठा था उसका मालिक भी उस पैंटिंग को खरीदने की हर मुमकिन कोशिश करेगा मगर उसे किसी भी कीमत पे कामयाब नही होने देना है.विजयंत के आदमी ने खुशी से भी ज़्यादा चैन की सांस ली & अपने मोबाइल से अपने बॉस की सेक्रेटरी का नंबर मिलाया.बोली यहा तक पहुँचेगी ये किसी को उम्मीद नही थी.उसे समझ नही आ रहा था कि उस पैंटिंग मे ऐसा था क्या जो उसका मालिक उसकी इतनी बड़ी कीमत दे रहा था.

दाई क़तार मे बैठा शख्स थोड़ा मायूस दिख रहा था.नीलामी ख़त्म होते ही वो उठा & फ़ौरन कमरे से बाहर चला गया.बाकी लोग आए तो थे नीलामी मे शरीक होने मगर जब इन दो लोगो ने बोलिया लगानी शुरू की तो वो बस दर्शक ही बन गये थे.उन्हे बड़ा मज़ा आया था ये खेल देख के जिसमे 1 बार फिर विजयंत मेहरा जीत गया था.

--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

"आआअन्न्‍न्णनह......!",1 लंबी चीख मार नीशी झाड़ते हुए अपने बॉस के आगोश से छिटक उसके उपर से उतरते हुए करवट बदल लेट गयी & सुबकने लगी.झड़ने की शिद्दत उसका दिल बर्दाश्त नही कर पाया था & जज़्बातो का सैलाब उसकी आँखो से फुट पड़ा था.विजयंत प्यार से उसके बाल सहला रहा था.काफ़ी देर तक वो वैसी ही पड़ी रही.उसकी सिसकियाँ बंद हो गयी थी मगर वो घूम नही रही थी.विजयंत भी उसे घूमने को नही कह रहा था.कुच्छ पल बाद नीशी घूमी & अपने बॉस को देखा.विजयंत को उसकी आँखो मे सुकून & वासना का अजीब संगम दिखा.वो लेटे-2 ही आगे सर्की & अपने बॉस के लंड को थाम लिया.विजयंत अभी दाई करवट से लेटा था.नीशी के लंड पकड़ते ही वो पीठ के बल लेट गया.उसके लंड को हिलाते हुए नीशी उसके सीने को चूमने लगी & चूमते-2 लंड तक पहुँच गयी.उसके बाद कोई 5-7 मिनिट तक विजयंत उसके कोमल मुँह के ज़रिए जन्नत की सैर करता रहा.

नीशी जी भर के लंड से खेलने के बाद 1 बार फिर बिस्तर पे लेट गयी & अपने बॉस को अपने उपर खींचा & उसके बालो मे उंगलिया फिराते हुए सर उठा उसके चेहरे & होंठो को चूमने लगी.कुच्छ देर चूमने के बाद विजयंत ने उसकी टाँगे फैला के लंड को दोबारा उसकी चूत मे घुसाना शुरू किया तो नीशी ने खुद ही अपनी बाई टाँग उठा के उसके दाए कंधे पे रख दी.वो चाहती थी कि लंड जड तक उसकी चूत मे उतरे & जब विजयंत झाडे तो वो उसके गर्म वीर्य को अपनी चूत की आख़िरी गहराई मे अपनी कोख मे महसूस करे.विजयंत ने उसकी दूसरी टांग भी अपने कंधे पे चढ़ाई & उसकी चुदाई शुरू कर दी.

नीशी अब अपने आपे मे नही थी.उसे सिर्फ़ खुद के मज़े की परवाह थी.उसने विजयंत के गले मे बाहे डाल उसे नीचे झुकाया & खुद भी उचक के उसके चेहरे को चूमने लगी.उसकी आहे 1 बार फिर तेज़ हो रही थी.विजयंत अब उसके उपर पूरा झुक गया था & नीशी की चूचियाँ उसकी खुद की जाँघो से दब गयी थी.विजयंत काफ़ी देर तक उसे चूमते हुए चोद्ता रहा.अब उसकी भी मस्ती बहुत बढ़ गयी थी.उसने नीशी की टाँगो को कंधो से सरकाया तो उसने उन्हे उसकी कमर पे बाँध दिया.विजयंत ने अपना मुँह नीशी के भूरे निपल्स से लगाया & उन्हे चूसने लगा.नीशी के बेसबरा हाथ विजयंत की पीठ & गंद पे घूम रहे थे & वो उसकी छातियो को चूस रहा था.उसका हर धक्का नीशी की कोख पे चोट कर रहा था & अब वो मस्ती मे चीखे जा रही थी.विजयंत काफ़ी देर से उसे बिना झाडे चोद रहा था & अब उसका लंड भी झड़ने को बेकरार था.उसने नीशी के सीने से सर उठाया & अपने धक्के & तेज़ कर दिए.उसके नीचे अपने सर को बेचैनी से झटकती उस से चिपटि नीशी भी अपनी मंज़िल के करीब थी.विजयंत ने अपने लंड को उसकी कोख के दरवाज़े पे आख़िरी बार मारा & अपने बदन को उपर की ओर मोडते,चीखती नीशी झाड़ गयी.ठीक उसी वक़्त उसकी हसरत को पूरा करते हुए उसकी कोख को अपने वीर्य से भरता हुआ विजयंत भी झाड़ गया.

"ऊऊवन्न्न्नह......हाआऐययईईईईईईईईईईई..!",वो खूबसूरत लड़की झाड़ रही थी & उसे चोद्ता उसके उपर झुका मर्द भी उसकी चूत मे अपना वीर्या भर रहा था.तभी बिस्तरे के किनारे रखी साइड-टेबल पे रखा 1 मोबाइल बजा.

"हूँ.",उस मर्द ने पहले अपने नीचे पड़ी लड़की को चूमा & फिर वैसे ही उसके उपर पड़े हुए मोबाइल कान से लगाया.

"सर,वो विजयंत मेहरा ने पैंटिंग खरीद ली."

"वेरी गुड.कितने मे?",लड़की के चेहरे पे 1 अजीब भाव था.झड़ने का सुकून & उसके बाद की चमक उसके चेहरे पे सॉफ दिख रही थी मगर साथ ही वो थोड़ी खफा भी लग रही थी & अपना चेहरा बाई तरफ घुमा रखा था & मर्द को नही देख रही थी जो अभी भी उसके गाल को चूम रहा था.

"75 लाख मे,सर."

"अरे यार!कम से कम करोड़ तो खर्च करवाते!खैर,चलो.ये भी ठीक है.",उसने फोन किनारे रखा & उस लड़की का चेहरा अपनी ओर घुमा उसके होंठ चूमने चाहे मगर उस लड़की ने झल्ला के उसे परे धकेला & उसे खुद के उपर से हटाते हुए बिस्तर से उतर बाथरूम मे चली गयी.मर्द हंसा & बिस्तर से उतर कमरे की खिड़की पे आ गया & वाहा का परदा हटा के बाहर देखने लगा.

"तुम समझते हो तुम जीत गये,मेहरा!",वो दूर सामने दिखाई देते होटेल वाय्लेट की इमारत को देख मन ही मन हंसा,"..कितने ग़लत हो तुम!मैने तुम्हे जीतने दिया है,मेहरा.जीता तो मैं ही हू!",ये शख्स था ब्रिज कोठारी,कोठारी ग्रूप का मालिक.मेहरा के ट्रस्ट ग्रूप की तरह ये भी इनफ्रास्ट्रक्चर के धंधे मे था & फिर ट्रस्ट के पीछे-2 ये भी होटेल के बिज़्नेस मे आया था.पिच्छले 10 सालो मे इनके धंधे से जुड़ा जब भी कोई ठेका या टेंडर निकलता तो ज़्यादातर मुक़ाबला इन्ही दोनो के बीच होता.नतीजा ये था कि दोनो मे 1 दुश्मनी पैदा हो गयी थी.दोनो को अपनी तरक्की से ज़्यादा सामने वाले के गिरने की ज़्यादा फ़िक्र रहती थी.

ब्रिज कोठारी & विजयंत मेहरा मे काई चीज़े 1 जैसी थी.जैसे की बिज़्नेस करने का हुनर & हार ना मानने की ख़ासियत.दोनो की उम्र भी बराबर थी & कद भी.दोनो ही अपनी असल उम्र से कम के दिखते थे.ब्रिज भी 1 फौलादी जिस्म वाला शख्स था & मेहरा की तरह ही चुदाई का शौकीन भी मगर जहा विजयंत 1 गोरा & हॅंडसम शख्स था वही ब्रिज 1 साधारण शक्लोसुरत वाला सांवला इंसान था.

दोनो की ये दुश्मनी अब डेवाले मे मशहूर थी & जब भी इन दोनो की टक्कर होती सभी दम साधे ये देखते की कौन जीतता है.ट्रस्ट ग्रूप कोठारी ग्रूप से बड़ा था & लाख कोशिशो के बावजूद ब्रिज विजयंत को उतनी बार नही हरा पाया था जितना की वो चाहता था लेकिन अब शायद ये बदलने वाला था.

ब्रिज खिड़की पे खड़ा इसी बारे मे सोच रहा था..उसका प्लान कामयाब होगा या नही?..तभी दरवाज़ा खुला & वो लड़की बाहर आई.उसके चेहरे की नाराज़गी बरकरार थी.वो सीधा बिस्तर के पास फर्श पे पड़े अपने कपड़ो को उठाने लगी.

"अरे सोनम,इतनी जल्दी क्या है?",ब्रिज भले ही 53 साल का था मगर अभी भी किस जवान की तरफ फुर्तीला था.वो पलक झपकते ही लड़की के करीब पहुँचा & उसे बाहो मे भर लिया,"मेहरा ने पैंटिंग खरीद ली,मैने उसके 75 लाख पानी मे डूबा दिए!",वो हंसा,"..वो सोच रहा था कि मुझे भी वो पैंटिंग चाहिए.बस,लगवाता रहा बोलियाँ & मेरा आदमी तो बस यू ही बोलिया लगा रहा था.उसका तो मक़सद ही यही था कि मेहरा का आदमी बड़ी से बड़ी बोली लगाए & उसके पैसे बर्बाद हों!",लड़की ने उसकी बात पे कोई ध्यान नही दिया & उसकी बाहो से निकलने की कोशिश करने लगी.

"आख़िर बात क्या है,सोनम?",ब्रिज ने उस लड़की का चेहरा अपनी ओर घुमाया.लड़की की उम्र 26 बरस की थी,रंग सांवला था & जिस्म बिल्कुल कसा हुआ था.लड़की ने कुच्छ जवाब नही दिया मगर काफ़ी देर से रोकी रुलाई अब वो और ना रोक सकी.

"अरे..रो क्यू रही हो?..क्या बात है?"

"कुच्छ नही!",उसने उसे परे धकेला.

"अरे बताओ तो..ऐसा क्या हो गया?"

"आप बस मुझे इस्तेमाल कर रहे हैं..",वो अब फूट-2 के रो रही थी,"..मैं बस 1` खिलोना हू आपके लिए..रखैल बनाके रखा है आपने मुझे!",ब्रिज शांत खड़ा सुन रहा था.लड़की कुच्छ देर तक अपनी भादास निकालती रही.

"हो गया?",ब्रिज ने उसके चुप होने पे उसके कंधो पे हाथ रखा & उसे बिस्तर पे बिठा दिया,"..तुम्हे याद है आज से 3 महीने पहले जब मैने तुम्हारा इंटरव्यू लिया था तब मैने तुमसे क्या कहा था?"

"हां,यही की मुझे आप 1 बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपना चाहते हैं..मुझे क्या पता था कि वो ज़िम्मेदारी ये है!"

"नही..",ब्रिज हंसा,"..सोनम,तुम मुझे बहुत हसीन लगी & मैने तय कर लिया था कि मुझे तुम्हारे हुस्न को करीब से देखना ही है लेकिन इसका ये मतलब नही कि मुझे तुम्हारी बाकी खूबिया नही दिखी.",वो उसके बाई तरफ बैठा था,उसने अपनी दाई बाँह उसकी पीठ पे डाली थी & बाए मे उसका दाया हाथ थामे था.

"मैं हर रोज़ तुमसे मिलता हू,बातें करता हू..& तुम्हे कुच्छ बातें बताता भी हू."

"हां..",सोनम अब ये समझने की कोशिश कर रही थी कि ब्रिज कहना क्या चाह रहा था,"..आप विजयंत मेहरा के बारे मे बातें करते रहते हैं लेकिन वो तो कोई ऐसी बात नही."

"क्यू?..क्यूकी वो मेरा दुश्मन है & मैं दीवाना हू इस दुश्मनी को लेके?..सोनम,सारा शहर यही समझता है कि हम दोनो दुश्मनी मे पागल हैं लेकिन उन बेवकूफो को ये नही पता कि हम दोनो उन सब से ज़्यादा समझदार हैं.हम लड़ते हैं मगर दिमाग़ से & चाहे कुच्छ हो जाए इस दुश्मनी की आग मे खुद को आग नही लगाएँगे..हां दूसरे को जलाने की पूरी कोशिश करेंगे..आगे उपरवाले की मर्ज़ी!"

"..तुम जब मेरे दफ़्तर मे आई थी तो मैने समझ लिया था कि तुम बहुत होशियार हो & मेरा 1 खास काम कर सकती हो."

"कैसा काम?"

"तुम विजयंत की सेक्रेटरी बनोगी."

"क्या?!",सोनम की आँखे हैरत से फॅट गयी,"..आपका मतलब है कि मैं उसके यहा नौकरी करूँगी & वाहा की सारी बातें आपको बताउन्गि?"

"हां & बदले मे तुम्हे मैं अपने यहा वो पोज़िशन & पैसे दूँगा जिसकी तुम हक़दार हो.",ब्रिज ने उसका हाथ अपने लंड पे रखा & उसके कान मे जो रकम बोली वो सुन सोनम की आँखे अब तो बिल्कुल फॅट गयी.

"मगर ये बहुत मुश्किल है..कही पकड़ी गयी तो?",ब्रिज ने उसे अपने करीब खींचा तो बाहो से भिंचे जाने की वजह से उसकी छातियाँ & उभर गयी.सोनम ने उसके लंड को हिलाना शुरू किया.पिच्छले 3 महीनो मे उसे ये ज़रूर लगा था कि ब्रिज उसके जिस्म से खेल रहा था लेकिन उसे भी कम मज़ा नही आया था.वो उस जैसे मर्द से पहले कभी नही मिली थी.शुरू मे उसे लगा था की कोठारी की उम्र चुदाई मे रुकावट बनेगी मगर कितना ग़लत थी वो.ब्रिज मे किसी नौजवान से ज़्यादा जोश & माद्दा था.हर बार वो उसे पूरी तरह थका देता था & भरपूर मज़ा देता था....& उसका लंड..ओफफफफ्फ़..उसके लंड ने तो उसे पागल ही कर दिया था!..उसके हाथ मे 1 बार फिर वो अपनी 9 इंच की पूरी लंबाई तक पहुँच गया था.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

क्रमशः.......

JAAL paart--2

gataank se aage.

"75 lakh..aur koi hai jo is se badi boli lagana chahta hai?",usne umeed se dayi qatar me baithe shakhs ko dekha magar usne apna hath nahi uthaya,"..75 lakh..1....75 lakh..2..75 lakh....3!",usne hathoda apne samne rakhe desk pe mara,"..ye behtarin painting 75 lakh rupayo me yaha samne bayi qatar me baithe grey suit vale sahab ki hui.",vo shakhs vijayant ka hi 1 aadmi tha jo uske liye yaha boli laga raha tha.use sakht hidayat thi ki chahe jo bhi ho use ye paitnitng kharidni hi hai.use taqid ki gayi thi ki jo shakhs dayi qatar me baitha tha uska malik bhi us painting ko kharidne ki har mumkin koshish karega magar use kisi bhi keemat pe kamyab nahi hone dena hai.vijayant ke aadmi ne khushi se bhi zyada chain ki sans li & apne mobile se apne boss ki secretary ka number milaya.boli yaha tak pahunchegi ye kisi ko umeed nahi thi.use samajh nahi aa raha tha ki us painting me aisa tha kya jo uska malik uski itni badi keemat de raha tha.

dayi qatar me baitha shakhs thoda mayus dikh raha tha.nilami khatm hote hi vo utha & fauran kamre se bahar chala gaya.baki log aaye to the nilami me sharik hone magar jab in do logo ne boliya lagani shuru ki to vo bas darshak hi ban gaye the.unhe bada maza aaya tha ye khel dekh ke jisme 1 baar fir vijayant mehra jeet gaya tha.

--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

"aaaaannnnnhhhhhhhhh......!",1 lambhi chikh maar nishi jhadte hue apne boss ke agosh se chhitak uske upar se utarte hue karwat badal let gayi & subakne lagi.jhadne ki shiddat uska dil bardasht nahi kar paya tha & jazbato ka sailab uski aankho se phut pada tha.vijayant pyar se uske baal sehla raha tha.kafi der tak vo vaisi hi padi rahi.uski siskiyan band ho gayi thi magar vo ghum nahi rahi thi.vijayant bhi use ghumne ko nahi keh raha tha.kuchh pal baad nishi ghumi & apne boss ko dekha.vijayant ko uski aankho me sukun & vasna ka ajib sangam dikha.vo lete-2 hi aage sarki & apne boss ke lund ko tham liya.vijayant abhi dayi karwat se leta tha.nishi ke lund pakadte hi vo pith ke bal let gaya.uske lund ko hilate hue nishi uske seene ko chumne lagi & chumte-2 lund tak pahunch gayi.uske baad koi 5-7 minute tak vijayant uske komal munh ke zariye jannat ki sair karta raha.

nishi ji bhar ke lund se khelne ke baad 1 baar fir bistar pe let gayi & apne boss ko apne upar khincha & uske baalo me ungliya firate hue sar utha uske chehre & hontho ko chumne lagi.kuchh der chumne ke baad vijayant ne uski tange faila ke lund ko dobara uski chuit me ghusana shuru kiya to nishi ne khud hi apni bayi tnag utha ke uske daye kandhe pe rakh di.vo chahti thi ki lund jud tak uski chut me utre & jab vijayant jhade to vo uske garm virya ko apni chut ki aakhirir gehrayi me apni kokh me mehsus kare.vijayant ne uski dusri tang bhi apne kandhe pe chadhayi & uski chudai shuru kar di.

nishi ab apne aape me nahi thi.use sirf khud ke maze ki parwah thi.usne vijayant ke gale me baahe dal use neeche jhukaya & khud bhi uchak ke uske chehre ko chumne lagi.uski aahe 1 baar fir tez ho rahi thi.vijayant ab uske uapr pura jhuk gaya tha & nishi ki choochiyan uski khud ki jangho se dab gayi thi.vijayant kafid er tak use chumte hue chodta raha.ab uski bhi masti bahut badh gayi thi.usne nishi ki tango ko kandho se sarkaya to usne unhe uski kamar pe bandh diya.vijayant ne apna munh nishi ke bhure nipples se lagaya & unhe chusne laga.nishi ke besabra hath vijayant ki pith & gand pe ghum rahe the & vo uski chhatiyo ko chus raha tha.usk har dhakka nishi ki kokh pe chot kar raha tha & ab vo masti me chikhe ja rahi thi.vijayant kafi der se use bina jhade chod raha tha & ab uska lund bhi jhadne ko bekarar tha.usne nishi ke seene se sar uthaya & apne dhakke & tez kar diye.uske neeche apne sar ko bechaini se jhatakti us se chipti nishi bhi apni manzil ke karib thi.vijayant ne apne lund ko uski kokh ke darwaze pe aakhiri baar mara & apne badan ko upar ki mor modte,chikhti nishi jhad gayi.thik usi waqt uski hasrat ko pura karte hue uski kokh ko apne virya se bharta hua vijayant bhi jhad gaya.

"Ooooonnnnhhhhhh......haaaaaiiiiiiiiiiiiii..!",vo khubsurat ladki jhad rahi thi & use chodta uske upar jhuka mard bhi uski chut me apna virya bhar raha tha.tabhi bistare ke kinare rakhi side-table pe rakha 1 mobile baja.

"hun.",us mard ne pehle apne neeche padi ladki ko chuma & fir vaise hi uske upar pade hue mobile kaan se lagaya.

"sir,vo Vijayant Mehra ne painting kharid li."

"very good.kitne me?",ladki ke chehre pe 1 ajib bhav tha.jhadne ka sukun & uske baaad ki chamak uske chehre pe saaf dikh rahi thi magar sath hi vo thodi khafa bhi lag rahi thi & apna chehra bayi taraf ghuma rakha tha & mard ko nahi dekh rahi thi jo abhi bhi uske gaal ko chum raha tha.

"75 lakh me,sir."

"are yaar!kam se kam karod to kharch karwate!khair,chalo.ye bhi thik hai.",usne fone kinare rakha & us aldki ka chehra apni or ghuma uske honth chumne chahe magar us ladki ne jhalla ke use pare dhakela & use khud ke upar se hatate hue bistar se utar bathroom me chali gayi.mard hansa & bistar se utar kamre ki khidki pe aa gaya & vaha ka parda hata ke bahar dekhne laga.

"tum samajhte ho tum jeet gaye,mehra!",vo door samne dikhayi dete Hotel Violet ki imarat ko dekh man hi man hansa,"..kitne galat ho tum!maine tumhe jitne diya hai,mehra.jeeta to main hi hu!",ye shakhs tha Brij Kothari,Kothari group ka malik.mehra ke Trust group ki tarah ye bhi infrastructure ke dhandhe me tha & fir trust ke peechhe-2 ye bhi hotel ke business me aaya tha.pichhle 10 salo me inke dhandhe se juda jab bhi koi theka ya tender nikalta to zyadatar muqabla inhi dono ke beech hota.natija ye tha ki dono me 1 dushmani paida ho gay thi.dono ko apni tarakki se zyada samne vale ke girne ki zyada fikr rehti thi.

brij kothari & vijayant mehra me kayi chize 1 jaisi thi.jaise ki business karne ka hunar & haar na maanane ki khasiyat.dono ki umra bhi barabar thi & kad bhi.dono hi apni asal umra se kam ke dikhte the.brij bhi 1 fauladi jism vala shakhs tha & mehra ki tarah hi chudai ka shaukeen bhi magar jaha vijayant 1 gora & handsome shakhs tha vahi brij 1 sadharan shaklosurat vala sanwla insan tha.

dono ki ye dushmani ab Devalay me mashoor thi & jab bhi in dono ki takkar hoti sabhi dum sadhe ye dekhte ki kaun jeetata hai.trust group kothari group se bada tha & lakh koshisho ke bavjood brij vijayant ko utni baar nahi hara paya tha jitna ki vo chahta tha lekin ab shayad ye badalne vala tha.

brij khidki pe khada isi bare me soch raha tha..uska plan kamyab hoga ya nahi?..tabhi darwaza khula & vo ladki bahar aayi.uske chehre ki narazgi barkarar thi.vo seedha bistar ke paas farsh pe pade apne kapdo ko uthane lagi.

"are Sonam,itni jaldi kya hai?",brij bhale hi 53 saal ka tha magar abhi bhi kis jawan ki taraf furtila tha.vo palak jhapakte hi ladki ke karib pahuncha & use baaho me bhar liya,"mehra ne painting kharid li,maine uske 75 lakh pani me duba diye!",vo hansa,"..vo soch raha tha ki mujhe bhi vo painting chahiye.bas,lagwata raha boliyan & mera aadmi to bas yu hi boliya laga raha tha.uska to maqsad hi yehi tha ki mehra ka aadmi badi se badi boli lagaye & uske paise barbad hon!",ladki ne uski baat pe koi dhyan nahi diya & uski baaho se nikalne ki koshish karne lagi.

"aakhir baat kya hai,sonam?",brij ne us ladki ka chehra apni or ghumaya.ladki ki umra 26 baras ki thi,rang sanwla tha & jism bilkul kasa hua tha.ladki ne kuchh jawab nahi diya magar kafi ser se roki rulayi ab vo aur na ro saki.

"are..ro kyu rahi ho?..kya baat hai?"

"kuchh nahi!",usne use pare dhakela.

"are batao to..aisa kya ho gaya?"

"aap bas mujhe istemal kar rahe hain..",vo ab phut-2 ke ro rahi thi,"..main bas 1` khilona hu aapke liye..rakhail banake rakha hai aapne mujhe!",brij shant khada sun raha tha.ladki kuchh der tak apni bhadas nikalti rahi.

"ho gaya?",brij ne uske chup hone pe uske kandho pe hath rakha & use bistar pe bitha diya,"..tumhe yaad hai aaj se 3 mahine pehle jab maine tumhara interview liya tha tab maine tumse kya kaha tha?"

"haan,yehi ki mujhe aap 1 bahut badi zimmedari saunpna chahte hain..mujhe kya pata tha ki vo zimmedari ye hai!"

"nahi..",brij hansa,"..sonam,tum mujhe bahut haseen lagi & maine tay kar liya tha ki mujhe tumhare husn ko karib se dekhna hi hai lekin iska ye matlab nahi ki mujhe tumhare baki khubiya nahi dikhi.",vo uske bayi taraf baitha tha,usne apni dayi banh uski pith pe dali thi & baye me uska daya hath thame tha.

"main har roz tumse milta hu,baaten karta hu..& tumhe kuchh baaten batata bhi hu."

"haan..",sonam ab ye samajhne ki koshish kar rahi thi ki brij kehna kya chah raha tha,"..aap vijayant mehra ke bare me baaten karte rehte hain lekin vo to koi aisi baat nahi."

"kyu?..kyuki vo mera dushman hai & main deewana hu is dushmani ko leke?..sonam,sara shehar yehi samajhta hai ki hum dono dushmani me pagal hain lekin un bevkufo ko ye nahi pata ki hum dono un sab se zyada samajhdar hain.hum ladte hain magar dimagh se & chahe kuchh ho jaye is dushmani ki aag me khud ko aag nahi lagayenge..haan dusre ko jalane ki puri koshish karenge..aage uparwale ki marzi!"

"..tum jab mere daftar me aayi thi to maine samajh liya tha ki tum bahut hoshiyar ho & mera 1 khas kaam kar sakti ho."

"kaisa kaam?"

"tum vijayant ki secretary banogi."

"kya?!",sonam ki aankhe hairat se phat gayi,"..aapka matlab hai ki main uske yaha naukri karungi & vaha ki sari baaten aapko bataungi?"

"haan & badle me tumhe main apne yaha vo position & paise dunga jiski tum haqdar ho.",brij ne uska hath apne lund pe rakha & uske kaan me jo rakam boli vo sun sonam ki aankhe ab to bilkul phat gayi.

"magar ye bahut mushkil hai..kahi pakdi gayi to?",brij ne use apne karib khincha to baaho se bhinche jane ki vajah se uski chhatiya & ubhar gayi.sonam ne uske lund ko hilana shuru kiya.pichhle 3 mahino me use ye zarur laga tha ki brij uske jism se khel raha tha lekin use bhi kam maza nahi aaya tha.vo us jaise mard se pehle kabhi nahi mili thi.shuru me use laga tha ki kothari ki umra chudai me rukawat banegi magar kitna galat thi vo.brij me kisi naujawan se zyada josh & madda tha.har baar vo use puri tarah thaka deta tha & bharpur maza deta tha....& uska lund..offfff..uske lund ne to use pagal hi kar diya tha!..uske hath me 1 baar fir vo apni 9 inch ki puri lambai tak pahunch gaya tha.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

kramashah.......


raj..
Platinum Member
Posts: 3402
Joined: 10 Oct 2014 01:37

Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 13 Dec 2014 02:09

जाल पार्ट--3

गतान्क से आगे.

"पकड़ी तो तुम जाओगी नही.इतना यकीन तो है मुझे तुम्हारे दिमाग़ पे.",कोठारी ने उसके होंठ चूम लिए.

"मगर मैं वाहा घुसू कैसे?वो मुझे क्यू रखेगा?",ब्रिज के इशारे पे वो उठ के उसकी गोद मे बैठ गयी.उसका गुस्सा काफूर हो चुका था & अब वो उसके लंड को छोड़ उसके सीने पे बड़े प्यार से हाथ फिरा रही थी.

"देखो,हमारे जैसी बड़ी कंपनीज को जब सेक्रेटरीस की ज़रूरत होती है तो हम अख़बारो मे इश्तेहार तो निकलते नही हैं.हम उसी एजेन्सी को बुलाते हैं जो हमारे लिए खास यही काम करती है.डेवाले मे ऐसी नामचीन 1 ही एजेन्सी है.."

"..जहा से मैं यहा आई थी.",गोद से थोड़ा उठा सोनम ने अपनी बाई चूची ब्रिज के मुँह मे दे दी.

"बिल्कुल सही..",थोड़ी देर तक चूची को चूसने के बाद ब्रिज ने उसे मुँह से निकाला & उसकी कमर पकड़ उसे उठाया तो उसका इशारा समझते हुए सोनम ने अपने घुटने उसके दोनो तरह बिस्तर पे जमाए & अपनी चूत को उसके लंड पे झुकाने लगी,"..मुझे पता चल गया है कि मेहरा की सेक्रेटरी जा रही है,उसकी शादी तय हो गयी है & अब उस एजेन्सी को ही मेहरा की नयी सेक्रेटरी के पोस्ट के लिए लड़कियो को भेजने को कहा गया है.

"उउम्म्म्मम..मगर क्या गॅरेंटी है कि वो मुझे रख लेगा?..आईय्य्यीईए..!",लंड को उसने पूरा अपने अंदर ले लिया था.

"तुम्हारा बायोदेटा मैने ऐसा कमाल बनवाया है कि कोई भी तुम्हे रख ले फिर मैने अपने आदमी के ज़रिए तुम्हारे नाम को सबसे उपर रखवाया है.बस तुम मेहरा को इंप्रेस कर दो तो हमारा काम हो जाए."

"बहुत मुश्किल है ये काम....आआहह..!",ब्रिज उसकी गंद को मसल्ते हुए उसी चूचिया चूस रहा था & वो उसके लंड पे कूद रही थी.

"कोई मुश्किल नही है.मेहरा जब तुम्हारे हुस्न को तुम्हारे बाइयडेटा के साथ देखेगा & जब तुम उसके हर सवाल का सही जवाब दोगि तो कोई मुश्किल नही होगी.तुम फ़िक्र मत करो,मैं इंटरव्यू के लिए तुम्हारी तैयारी खुद कर्वाऊंगा मगर पहले मुझे तुम्हारे हुस्न मे डूबना है.1 बार तुमने ट्रस्ट जाय्न कर लिया फिर तुम्हारे साथ ये मस्त चुदाई ना जाने मुझे कब नसीब हो.",वो सोनम की गंद थामे खड़ा हो गया & उसकी छातियो मे अपना मुँह रगड़ने लगा तो वो भी मस्ती मे बहाल हो गयी & उसकी शरारती हरकत से हंसते हुए उसके सर को चूमने लगी.

"नीशी.",विजयंत मेहरा अपने कपड़े पहन चुका था & नीशी अपनी स्कर्ट का हुक लगा रही थी.

"ये क्या है,सर?",नीशी ने मेहरा का बढ़ाया हुआ लिफ़ाफ़ा लिया.

"तुम्हारी शादी का तोहफा,नीशी.",नीशी ने लिफ़ाफ़ा खोला तो अंदर 10 लाख का स्चेक था.

"सर.."

"नीशी,इन पैसो से तुम अपना आने वाला कल महफूज़ कर सकती हो.",नीशी का गला भर आया था.उसका दिल इस बात से दुखी था कि अब कभी वो ऐसी जिस्मानी खुशी शायद ही महसूस कर सके.

"थॅंक्स,सर.अगर कभी मैं इस शहर मे आऊँ तो आपसे मिल सकती हू?"

"ज़रूर,नीशी.इसमे पुच्छने की क्या बात है.",मेहरा ने कमरे का दरवाज़ा खोला तो वो बाहर निकल गयी.

"गुडबाइ,सर."

"गुडबाइ,नीशी.",उसने दरवाज़ा बंद किया & हल्के से हंसा.ये लड़किया ऐसी बेवकूफ़ क्यू होती हैं!क्या करेगी दोबारा मुझसे मिलके..मुझसे चुदेगि..& अपनी शादीशुदा ज़िंदगी बर्बाद कर देगी!

लड़कियो का जिस्म विजयंत का खास शौक था मगर कमज़ोरी नही.उसकी नज़रो मे कोई लड़की 1 बार चढ़ जाती तो वो उसे अपने बिस्तर तक लाके ही छ्चोड़ता था मगर इसका ये मतलब नही था कि वो किसी लड़की के लिए खुद को बर्बाद कर लेता.उसने आजतक उनके जिस्मो से प्यार किया था उनके दिलो से नही.

नीशी के जाने के बाद उसने अपना ब्लॅकबेरी खोल के अपायंट्मेंट्स चेक किए.दफ़्तर के कामो & मीटिंग्स के अलावा जो सबसे खास बात थी वो ये की इस हफ्ते के आख़िर मे उसका बेटा,उसका वारिस समीर घर आ रहा था.बेटे की तस्वीर देख उसके होंठो पे खुशी & गर्व की मुस्कान फैल गयी.

समीर 1 साल पहले ही विदेश से एमबीए करके डेवाले आया था.समीर कॉलेज के दीनो से ही ट्रस्ट ग्रूप के अलग-2 कंपनीज़ के दफ़्तरो मे बतौर ट्रेनी कुच्छ ना कुच्छ काम करता रहा था लेकिन इस बार जब पढ़ाई पूरी करके वो वापस आया तो उसके पिता ने उसे 1 बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपी.गुजरात के सामुद्री किनारे पे 1 बंदरगाह बनाने का बहुत बड़ा कांट्रॅक्ट उन्हे मिला था & विजयंत ने उसे पूरे प्रॉजेक्ट की ज़िम्मेदारी समीर के कंधो पे डाल दी.

ग्रूप के सभी आला अफसरो को लगा कि ये समीर के साथ ज़्यादती थी,उसे तजुर्बा ही क्या था!..& प्रॉजेक्ट भी खटाई मे पड़ सकता था मगर विजयंत मेहरा बहुत दूर की सोचता था.वो जानता था कि अगर नुकसान हुआ तो भी उसे 1 बड़ी अनमोल बात पता चलेगी-वो ये कि उसका बेटा उसके बाद ग्रूप की बागडोर संभालने के काबिल है या नही.समीर ने उसे निराश नही किया था.प्रॉजेक्ट डेडलाइन से पहले ही पूरा हो गया था & अब 10 दिन बाद खुद PM उसका इनेरेशन करने वाले थे.

विजयंत ने आगे देखा तो पाया कि सोमवार की सुबह को 10 बजे उसे अपनी नयी सेक्रेटरी की पोस्ट के लिए आई लड़कियो का इंटरव्यू लेना था.ये काम कोई भी कर सकता था लेकिन वो ऐसा नही चाहता था.उसके दफ़्तर से होके कयि ज़रूरी & अहम काग़ज़ात & बातें निकलते थे & वाहा वो कोई ऐसा इंसान नही आने देना चाहता था जोकि भरोसेमंद ना हो.उसने फोन जेब मे डाला & अपना कोट पहन सूयीट से बाहर निकल गया.

----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

खिड़की के पर्दो के बीच से आती रोशनी चेहरे पे पड़ने से उसकी नींद टूटी & वो बिस्तर मे उठ बैठी.उसका गोलाकार चेहरा बड़ा मासूम & ग़ज़ब का खूबसूरत था.झील सी गहरी काली आँखे अभी नज़र नही आ रही थी क्यूकी अभी भी नींद की वजह से उसकी पलके बंद थी.खड़ी नाक & रसीले,गुलाबी होंठ देखते ही उन्हे चूम लेने का दिल करता था.उसने आँखे खोली & दीवार घड़ी की ओर देखा,शाम के 4 बज रहे थे.उसने बिखरे बालो को झटका तो वो कमर से थोड़ा उपर तक लहरा उठे.वो बिस्तर से उतरी & खड़ी होके उसने अपनी नर्म,गुदाज़ बाहें हवा मे उपर उठाके अंगड़ाई ली तो उसकी 38डी साइज़ की मस्त छातियाँ थोड़ी और उभर गयी.हल्के गुलाबी निपल्स से सजी उसकी बड़ी छातियाँ इतनी बड़ी होने के बावजूद ज़रा भी नही झूली थी.वो इस वक़्त बिल्कुल नंगी खड़ी थी & तब भी बिना ब्रा के भी उसकी चूचिया बिल्कुल सीधी तनी थी.

अंगड़ाई लेने की वजह से उसका सपाट पेट थोड़ा & खींचा & उसकी गहरी नाभि थोडी और लंबी दिखने लगी.खिड़की से आती रोशनी की लकीर अब सीधा उसके पेट & उसकी बिना बालो की नर्म,गुलाबी नाज़ुक सी दिख रही चूत पे पड़ रही थी.रोशनी मे उसका शफ्फाक़ गोरा जिस्म और चमकने लगा था.अंगड़ाई लेके उसने बाथरूम की ओर कदम बढ़ाए & तो 26 इंच की उसकी पतली कमर के नीचे 38 साइज़ की चौड़ी गंद बड़े ही दिलकश अंदाज़ मे लचकी.लड़की का कद 5'8" था जिस्म बिल्कुल भरा हुआ था लेकिन कही से भी माँस का 1 टुकड़ा भी झूल नही रहा था.पूरा जिस्म बिल्कुल कसा हुआ था.उस लड़की की मा ने उसका नाम बिल्कुल ठीक ही रखा था-रंभा.भगवान इंद्रा के दरबार की खास अप्सरा रंभा भी शायद उस हुस्न की मालिका के सामने पानी ही भरती नज़र आती.

लड़की ने बाथरूम मे जाके अपना चेहरा धोया & बॉल संवार के अपने कपड़े पहन लिए.बाथरूम से बाहर आ उसने अपने बिस्तर पे नज़र डाली जहा उसका बाय्फ्रेंड अभी तक सो रहा था.उसने घड़ी देखी,अभी थोड़ा वक़्त था.वो खिड़की से बाहर देखने लगी.वो आज अपने इस छ्होटे से शहर को छ्चोड़ रही थी-हमेशा के लिए.उसने पीछे घूम के रंभा अपने बाय्फ्रेंड की ओर देखा.वो समझता था कि वो लनोव जा रही है किसी नौकरी के चक्कर मे.

"तुझे वो नौकरी नही मिलेगी,रंभा.",थोड़ी देर पहले उसकी मस्त चूचियाँ चूस्ते हुए उसने कहा था.

"तुझे इतना यकीन कैसे है?",उसके बाल पकड़ के उसका मुँह अपने सीने से उठाया.

"अरे यार!तू बस यहा रह.मैं मम्मी-पापा को मना लूँगा,फिर मुझसे शादी कर & आराम से घर मे बैठ.",उसने फिर से अपना मुँह उसकी छाती से लगा दिया & दाए हाथ से उसकी बाई जाँघ को पकड़ के सहलाने लगा.उसके बाद रंभा ने और बहस नही की थी बस मन ही मन मुस्कुराती रही & उसकी गर्म हरकतों से मस्त हो उसके साथ चुदाई के खेल मे मगन हो गयी.

सच तो ये था कि रंभा लनोव से डेवाले जा रही थी यहा कभी ना वापस लौटने के लिए.उसने नज़र घुमा के नीचे देखा,इस शहर मे उसे हमेशा ही घुटन हुई थी & यहा उसे वो भी नही मिलने वाला था जिसकी उसे तमन्ना थी.अपने सारे सपने वो डेवाले मे पूरे करके ही दम लेगी,उसने तय कर लिया था.

रंभा का जनम आज से 24 बरस पहले इसी शहर मे हुआ था.उसकी मा ने उसे पाला था,उसका बाप कौन था ये उसे आज तक पता नही.उसकी मा ने दुनिया वालो को & उसे यही बताया था कि वो उसके जन्म से पहले ही मर गये लेकिन बड़ी होते-2 रंभा को ये सच्चाई पता चल ही गयी थी कि उसकी मा को किसी मर्द ने धोखा दिया था.वो उसके जिस्म से तब तक खेलता रहा जब तक रंभा उसके पेट मे ना आ गयी & फिर उसे बीच मझदार मे छ्चोड़ के गायब हो गया.उसकी मा बदनामी के डर से अपना शहर छ्चोड़ यहा आ गयी & यही 1 नक़ली विधवा की ज़िंदगी बिताने लगी.रंभा अपनी मा की बहुत इज़्ज़त करती थी.उस अकेली औरत ने उसे कभी कोई तकलीफ़ नही महसूस होने दी & हर मा-बाप की तरह यही कोशिश करती रही की उसकी औलाद इस ज़माने की सभी परेशानियो & गलीज बातो से दूर ही रहे.

मगर रंभा जितनी ही खूबसूरत थी उतना ही तेज़ दिमाग़ पाया था उसने.पढ़ाई मे वो हमेशा ही अच्छी रही थी मगर बड़ी कम उम्र मे ही वो दुनियादारी भी समझने लगी थी.अपनी इस छ्होटी सी ज़िंदगी मे उसने कुच्छ बहुत अहम बातें समझ ली थी.सब्से पहली ये कि पैसा बहुत ज़रूरी चीज़ थी.अगर आप अमीर हैं तो आपके लिए कयि बंद दरवाज़े आसानी से खुल जाते हैं & ज़िंदगी भी आसान हो जाती है.दूसरी ये कि 1 लड़की का जिस्म उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी भी है & सबसे बड़ी ताक़त भी,ये उस लड़की पे है कि वो अपने बदन का कैसा इस्तेमाल करती है.

2 बरस पहले रंभा की मा का इंतकाल हो गया.रंभा उस वक़्त 1 पॉलिटेक्निक से सेक्रेटरी की ट्रैनिंग का कोर्स कर रही थी.कुच्छ दिन तो मा के बचाए पैसे काम आए मगर उसके बाद उसे नौकरी की ज़रूरत महसूस हुई. नौकरी खोजने मे उसे बड़ी परेशानी हुई उपर से लगभग सभी जगह मर्दो की भूखी निगाहो का सामना उसे करना पड़ा.उसे उन्हे अपना जिस्म परोसने मे कोई परहेज़ नही था मगर वो इस मामले 1 पक्के कारोबारी की तरह सोच रही थी.अब तक उसे 1 भी मर्द ऐसा नही लगा जिसे जिस्म सौंपने के बदले मे उसे बहुत बड़ा फ़ायदा हासिल होता.उसी दौरान उसकी मुलाकात रवि से हुई.रवि के पिता की शहर मे कपड़े की 4 दुकाने थी & उसे पैसे की कमी नही थी.रंभा के हुस्न का तो वो दीवाना था ही.रंभा ने भी उसके सामने मुसीबत की मारी दुखिया होने का पूरा नाटक किया.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

क्रमशः.......

JAAL paart--3

gataank se aage.

"pakdi to tum jaogi nahi.itna yakin to hai mujhe tumhare dimagh pe.",kothari ne uske honth chum liye.

"magar main vaha ghusu kaise?vo mujhe kyu rakhega?",brij ke ishare pe vo uth ke uski god me baith gayi.uska gussa kafoor ho chuka tha & ab vo uske lund ko chhod uske seene pe bade puar se hath fira rahi thi.

"dekho,humare jaisi badi comapnies ko jab secretaries ki zarurat hoti hai to hum akhbaro me ishtehar to nikalte nahi hain.hum usi agency ko bulate hain jo humare liye khas yehi kaam karti hai.devalay me aisi namchin 1 hi agency hai.."

"..jaha se main yaha aayi thi.",god se thoda utha sonam ne apni bayi chhati brij ke munh me de di.

"bilkul sahi..",thodi der tak chhati ko chusne ke baad brij ne use munh se nikala & uski kamar pakad use uthaya to uska ishara samajhte hue sonam ne apne ghutne uske dono tarah bistar pe jamaye & apni chut ko uske lund pe jhukane lagi,"..mujhe pata chal gaya hai ki mehra ki secretary ja rahi hai,uski shadi tay ho gayi hai & ab us agency ko hi mehra ki nayi secretary ke post ke liye ladkiyo ko bhejne ko kaha gaya hai.

"uummmmm..magar kya guarantee hai ki vo mujhe rakh lega?..aaiiyyyeeeee..!",lund ko usne pura apne andar le liye tha.

"tumhara biodata maine aisa kamal banwaya hai ki koi bhi tumhe rakh le fir maine apne aadmi ke zariye tumhare naam ko sabse upar rakhwaya hai.bas tum mehra ko impress kar do to humara kaam ho jaye."

"bahut mushkil hai ye kaam....aaaahhhhhhhh..!",brij uski gand ko masalte hue usi choochiya chus raha tha & vo uske lund pe kud rahi thi.

"koi mushkil nahi hai.mehra jab tumhare husn ko tumhare biodata ke sath dekhega & jab tum uske har sawal ka sahi jawab dogi to koi mushkil nahi hogi.tum fikr mat karo,main interview ke liye tumhari taiyyari khud karwaoonga magar pehle mujhe tumhare husn me doobna hai.1 baar tumne trust join kar liya fir tumhare sath ye mast chudai na jane mujhe kab nasib ho.",vo sonam ki gand thame khada ho gaya & uski chhatiyo me apna munh ragadne laga to vo bhi masti me behal ho gayi & uski shararati harkat se hanste hue uske sar ko chumne lagi.

"Nishi.",Vijayant Mehra apne kapde pehan chuka tha & nishi apni skirt ka hook laga rahi thi.

"ye kya hai,sir?",nishi ne mehra ka badhaya hua lifafa liya.

"tumhari shadi ka tohfa,nishi.",nishi ne lifafa khola to andar 10 lakh ka cheque tha.

"sir.."

"nishi,in paiso se tum apna aane vala kal mehfuz kar sakti ho.",nishi ka gala bhar aaya tha.uska dil is baat se dukhi tha ki ab kabhi vo aisi jismani khushi shayad hi mehsus kar sake.

"thanx,sir.agar kabhi main is shehar me aaoon to aapse mil sakti hu?"

"zarur,nishi.isme puchhne ki kya baat hai.",mehra ne kamre ka darwaza khola to vo bahar nikal gayi.

"goodbye,sir."

"goodbye,nishi.",usne darwaza band kiya & halke se hansa.ye ladkiya aisi bevkuf kyu hoti hain!kya karegi dobara mujhse milke..mujhse chudegi..& apni shadishuda zindagi barbad kar degi!

ladkiyo ka jism vijayant ka khas shauk tha magar kamzori nahi.uski nazro me koi ladki 1 baar chadh jati to vo use apne bistar tak lake hi chhodta tha magar iska ye matlab nahi tha ki vo kisi ladki ke liye khud ko barbad kar leta.usne aajtak unke jismo se pyar kiya tha unke dilo se nahi.

nishi ke jane ke baad usne apna Blackberry khol ke appointments check kiye.daftar ke kaamo & meetings ke alawa jo sabse khas baat thi vo ye ki is hafte ke aakhir me uska beta,uska varis Sameer ghar aa raha tha.bete ki tasvir dekh uske hotho pe khushi & garv ki muskan fail gayi.

Sameer 1 saal pehle hi videsh se MBA karke Devalay aaya tha.sameer college ke dino se hi Trust group ke alag-2 companies ke daftaro me bataur trainee kuchh na kuchh kaam karta raha tha lekin is baar jab padhai puri karke vo vapas aaya to uske pita ne use 1 bahut badi zimmedari saunpi.Gujrat ke samudri kinare pe 1 bandargah banae ka bahut bada contract unhe mila tha & vijayant ne use pure project ki zimmedari sameer ke kandho pe daal di.

group ke sabhi ala afsaro ko laga ki ye sameer ke sath zyadti thi,use tajurba hi kya tha!..& project bhi khatai me pad sakta tha magar vijayant mehra bahut door ki sochta tha.vo janta tha ki agar nuksan hua to bhi use 1 badi anmol baat pata chalegi-vo ye ki uska beta uske baad group ki bagdor sambhalne ke kabil hai ya nahi.sameer ne use nirash nahi kiya tha.project deadline se pehle hi pura ho gaya tha & ab 10 din baad khud PM uska inaugaration karne vale the.

vijayant ne aage dekha to paya ki somvar ki subah ko 10 baje use apni nayi secretary ki post ke liye aayi ladkiyo ka interview lena tha.ye kaam koi bhi kar sakta tha lekin vo aisa nahi chahta tha.uske daftar se hoke kayi zaruri & aham kagzat & baaten nikalte the & vaha vo koi aisa insan nahi aane dena chahta tha joki bharosemand na ho.usne fone jeb me dala & apna coat pehan suite se bahar nikal gaya.

----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

khidki ke pardo ke beech se aati roshni chehre pe padne se uski nind tuti & vo bistar me uth baithi.uska golakar chehra bada masoom & gazab ka khubsurat tha.jhil si gehri kali aankhe abhi nazar nahi aa rahi thi kyuki abhi bhi nind ki vajah se uski palke band thi.khadi naak & rasile,gulabi honth dekhte hi unhe chum lene ka dil karta tha.usne aankhe kholi & deewar ghadi ki or dekha,sham ke 4 baj rahe the.usne bikhre baalo ko jhatka to vo kamar se thoda upar tak lehra uthe.vo bistar se utri & khadi hoke usne apni narm,gudaz baahen hawa me upar uthake angdayi li to uski 38D size ki mast chhatiya thodi aur ubhar gayi.halke gulabi nipples se saji uski badi chhatiyaan itni bhaari hone ke bavjood zara bhi nahi jhooli thi.vo is waqt bilkul nangi khadi thi & tab bhi bina bra ke bhi uski choochiya bilkul seedhi tani thi.

angadayi lene ki vajah se uska sapat pet thoda & khincha & uski gehri nabhi thdoi aur lambi dikhne lagi.khidki se aati roshni ki lakir ab seedha uske pet & uski bina balo ki narm,gulabi nazuk si dikh rahi chut pe pad rahi thi.roshni me uska shaffaq gora jism aur chamakne laga tha.angadayi leke usne bathroom ki or kadam badhaye & to 26 inch ki uski patli kamar ke neeche 38 size ki chaudi gand bade hi dilkash andaz me lachki.ladki ka kad 5'8" tha jism bilkul bhara hua tha lekin kahi se bhi mans ka 1 tukda bhi jhul nahi raha tha.pura jism bilkul kasa hua tha.us ladki ki maa ne uska naam bilkul thik hi rakha tha-Rambha.bhagwan Indra ke darbar ki khas apsara rambha bhi shayad us husn ki malika ke samne pani hi bharti nazar aati.

ladki ne bathroom me jake apna chehra dhoya & baal sanvar ke apne kapde pahan liye.bathroom se bahar aa usne apne bistar pe nazar dali jaha uska boyfriend abhi tak so raha tha.usne ghadi dekhi,abhi thoda waqt tha.vo khidki se bahar dekhne lagi.vo aaj apne is chhote se shehar ko chhod rahi thi-humesha ke liye.usne peechhe ghum ke ravi apne boyfriend ki or dekha.vo samajhta tha ki vo Lucknow ja rahi hai kisi naukri ke chakkar me.

"tujhe vo naukri nahi milegi,rambha.",thodi der pehle uski mast chhatiya chuste hue usne kaha tha.

"tujhe itna yakin kaise hai?",uske baal pakad ke uska munh apne seene se uthaya.

"are yaar!tu bas yaha reh.main mummy-papa ko mana lunga,fir mujhse shadi kar & aaram se ghar me baith.",usne fir se apna munh uski chhati se laga diya & daye hath se uski bayi jangh ko pakad ke sehlane laga.uske baad rambha ne aur bahas nahi ki thi bas man hi man muskurati rahi & uski garm harkaton se mast ho uske sath chudai ke khel me magan ho gayi.

sach to ye tha ki rambha lucknow se devalay ja rahi thi yaha kabhi na vapas lautne ke liye.usne nazar ghuma ke neeche dekha,is shehar me use humesha hi ghutan hui thi & yaha use vo bhi nahi milne vala tha jiski use tamanna thi.apne sare sapne vo devalay me pure karke hi dum legi,usne tay kar liya tha.

rambha ka janam aaj se 24 baras pehle isi shehar me hua tha.uski maa ne use pala tha,uska baap kaun tha ye use aaj tak pata nahi.uski maa ne duniya valo ko & use yehi bataya tha ki vo uske janm se pehle hi mar gaye lekin badi hote-2 rambha ko ye sachai pata chal hi gayi thi ki uski maa ko kisi mard ne dhokha diya tha.vo uske jism se tab tak khelta raha jab tak rambha uske pet me na aa gayi & fir use beech majhdar me chhod ke gayab ho gaya.uski maa badnami ke darr se apna shehar chhod yaha aa gayi & yehi 1 naqli vidhva ki zindagi bitane lagi.rambha apni maa ki bahut izzat karti thi.us akeli aurat ne use kabhi koi taklif nahi mehsus hone di & har maa-baap ki tarah yehi koshish karti rahi ki uski aulad is zamane ki sabhi pareshaniyo & galiz baato se door hi rahe.

magar rambha jitni hi khubsurat thi utna hi tez dimagh paya tha usne.padhai me vo humesha hi achhi rahi thi magar badi kam umra me hi vo duniyadari bhi samajhne lagi thi.apni is chhoti si zindagi me usne kuchh bahut aham baaten samajh li thi.sbse pehli ye ki paisa bahut zaruri chiz thi.agar aap amir hain to aapke liye kayi band darwaze aasani se khul jate hain & zindagi bhi aasan ho jati hai.dusri ye ki 1 ladki ka jism uski sabse badi kamzori bhi hai & sabse badi taqat bhi,ye us ladki pe hai ki vo apne badan ka kaisa istemal karti hai.

2 baras pehle rambha ki maa ka inteqal ho gaya.rambha us waqt 1 polytechnic se secretary ki training ka course kar rahi thi.kuchh din to maa ke bachaye paise kaam ayae magar uske abad use naukri kiz arurat mehsus hui.maukri khojne me use badi pareshani hui upar se lagbhag ahr jagah mardo ki bhookhi nigahio ka samna use karna pada.use unhe apna jism parosne me koi parhez nahi tha magar vo is mamle 1 pakke karobari ki tarah soch rahi thi.ab tak use 1 bhi mard aisa nahi laga jise jism saunpne ke badle me use bahut bada fayda hasil hota.usi dauran uski mulakat ravi se hui.ravi ke pita ki shehar me kapde ki 4 dukane thi & use paise ki kami nahi thi.rambha ke husn ka to vo deewana tha hi.rambha ne bhi uske samne musibat ki mari dukhiya hone ka pura natak kiya.

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

kramashah.......