Jaal -जाल compleet

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raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 02:03

जाल पार्ट--57

गतान्क से आगे......

अपने नये प्रेमी के प्यार करने के बिल्कुल ही निराले अंदाज़ ने उसे बहुत मदहोश कर दिया था.उसके मुँह से हल्की सी आह निकली,देवेन उसके पाँव की उंगलियो मे अपने हाथ की उंगलिया घुसा के साबुन लगा रहा था.देवेन ने उसकी टांग नीचे कर दाई टांग को बाए कंधे पे चढ़ाया & वाहा भी वही हरकत दोहराई,फिर उसके हाथ थाम उसे वापस उपर खींचा.इस सब के दौरान लंड चूत मे वैसे का वैसा धंसा हुआ था.रंभा ने उसकी गर्दन मे बाहे डाल उसे शिद्दत से चूमा & अपने हाथ मे साबुन ले उसके सीने पे घिसने लगी.थोड़ी देर बाद साबुन उसके हाथो से फिसल फर्श पे था लेकिन उसके हाथ वैसे ही देवेन के सीने पे घूम रहे थे.उसने उसके सीने से लेके उसके पेट तक साबुन लगाया & फिर दोनो हाथ पीछे ले जाके फिर से उसकी पीठ रगडी तो देवेन ने भी उसे बाहो मे भर लिया & अपने सीने से उसकी छातियो को पीसते हुए उसे चूमने लगा.

देवेन ने कुच्छ देर बाद किस तोड़ी & रंभा के सीने के उभारो को साबुन के खुश्बुदार झाग से ढँकने लगा.रंभा ने मस्ती मे आँखे बंद कर ली & अपने हाथ पीछे फर्श पे टीका दिए & आहें भरने लगी.देवेन उसकी छातियो को मसल रहा था & वो अपनी कमर हिलाने लगी थी.देवेन ने साबुन को उसके पेट पे मला & रंभा की कमर के हिलने की रफ़्तार & तेज़ हो गयी.देवेन उसकी नाभि मे उंगली घुसा-2 के साबुन मल रहा था.रंभा अब मस्ती मे आहें भरती हुई बहुत तेज़ी से कमर हिला रही थी.देवेन का हाथ नीचे गया & रंभा के दाने पे साबुन लगाने लगा.रंभा ने सर पीछे झटका & ज़ोर से चीख मारी.उसका जिस्म काँपने लगा-वो झाड़ गयी थी.

वो निढाल हो पीछे फर्श पे गिरने ही वाली थी की देवेन ने उसकी बाहे थाम उसे उपर अपनी तरफ खींचा & अपनी बाहो मे भर लिया & उसके गंद की फांको पे साबुन लगाने लगा.रंभा अभी मस्ती के तूफान से उबरी भी नही थी कि देवेन ने उसकी गंद मे उंगली घुसा उसे फिर से उस दूसरे तूफान की ओर धकेलना शुरू कर दिया था.

रंभा ने उसकी गर्देन के गिर्द दाए बाज़ू को बँधे हुए बाए हाथ मे लोटा ले उपर उठा पानी गिराया & दोनो जुड़े जिस्मो से साबुन धुलने लगा.देवेन ने उसके हाथो से लोटा लिया & उसकी टाँगो पे पानी डालने लगा.रंभा ने दूसरा लोटा उठा लिया & अपने आशिक़ को नहलाने लगी.कुच्छ ही पलो मे दोनो जिस्मो से साबुन धूल चुका था.दोनो ने लोटो को किनारे किया & 1 दूसरे को बाहो मे भर चूमने लगे.देवेन ने उसे फिर से गोद मे उठा लिया & गुसलखाने से निकल गया.

“नही,कमरे मे नही.”,रंभा उसे चूम रही थी.

“तो कहा?”,देवेन उसकी गंद की पुष्ट फांको को थामे था.

“बाहर.”,रंभा शरारत से मुस्कुराइ & उसके बाए कान पे काट लिया.

“पागल हो गयी हो क्या?कोई देख लेगा तो?”

“उसी मे तो मज़ा है..अभी तो पौ भी नही फटी है फिर भी पकड़े जाने का डर तो है ही,वही रोमांच को बढ़ाता है.चलिए ना प्लीज़!”,किसी बच्ची की तरह ज़िद की उसने तो देवेन मुस्कुरा दिया.दोनो दरवाज़े तक आए तो रंभा ने हाथ पीछे ले जा सांकॅल खोली.देवेन ने उसे गोद मे उठाए हुए बाहर की ठंडी हवा मे कदम रखा.गाँव मे सन्नाटा पसरा था.दरवाज़े के बाहर के छप्पर से ढँके हिस्से के फर्श पे वो घुटनो के बल बैठ गया & आगे झुक रंभा की छातियो से मुँह लगा दिया.

रंभा थोड़ा पीछे झुकी & उसके होंठो से आहत होती,उसके सर को जकड़े आह भरने लगी.देवेन ने धक्के लगाना शुरू कर दिया था.रंभा को बहुत मज़ा आ रहा था.ठंडी हवा दोनो को सिहरा रही थी.देवेन उसकी गांद को भींच बहुत गहरे धक्के लगा रहा था.रंभा ज़ोर-2 से आहे भर रही थी.देवेन ने उसकी चूचियो को चूसने के बाद सर उठा के आस-पास देखा,कही कोई नज़र नही आ रहा था लेकिन ज़्यादा देर यहा ऐसे बैठ के चुदाई करना ख़तरे से खाली नही था.पता नही था की गाँव वाले उस बात को कैसे लेते & वो मुसीबत मे भी पद सकते थे लेकिन रंभा ने सही कहा था,बहुत रोमांच था यू चुदाई करने मे.

रंभा उसके सर को थामे उसे पागलो की तरह चूमती बहुत तेज़ी से अपनी कमर हिला रही थी.देवेन की साँसे भी तेज़ हो गयी थी & उसके हाथो की पकड़ भी रंभा की गंद पे बहुत कस गयी थी.दोनो 1 दूसरे की आँखो मे देखते ज़ोर-2 से आहे भरते हुए अपनी-2 कमर हिला रहे थे.अचानक रंभा ने ज़ोर से आह भरी & सिसकते हुए देवेन का सर पकड़ अपनी चूचियो मे धंसा दिया & बहुत ज़ोर से कमर हिलाने लगी.उसकी चूत ने देवेन के लंड को कसा & देवेन ने भी उसकी छातियो पे होंठ दबाते हुए उसकी गंद को बहुत ज़ोर से भींचा.उसका जिस्म झटके खाने लगा & उसने भी अपना गढ़ा,गर्म वीर्य रंभा की चूत मे छ्चोड़ दिया.

थोड़ी देर तक दोनो 1 दूसरे से चिपके हुए लंबी-2 साँसे लेते हुए बैठे रहे,फिर देवेन ने उसकी गंद को थाम उसे वैसे ही अपनी गोद मे उठाया & घर के अंदर आया.रंभा ने सांकॅल वापस लगाई & दोनो वैसे ही कमरे मे चले गये.

“हाई!समीर,कैसे हो?”,रंभा & देवेन सनार पहुँच चुके थे.सनार था तो 1 गाँव मगर वाहा विदेशी सब्ज़ियो & फलो की खेती होती थी & इस वजह से बाहरी लोगो का आना-जाना लगा रहता था.इस वजह से वाहा 2-3 छ्होटे होटेल भी खुल गये थे.देवेन उन्ही मे से 1 मे कमरे के बारे मे पता कर रहा था & रंभा बाहर कार मे ही बैठी थी.

“ठीक हू.तुम कहा घूम रही हो,यार?वापस क्यू नही आ रही?”

“बहुत याद आ रही है मेरी?”,रंभा ने सवाल तो ऐसे किया कि समीर को लगे कि वो उसे छेड़ रही है मगर उसके चेहरे पे गुस्सा था.

“अब ये भी कोई पुच्छने की बात है!कर क्या रही हो यार तुम वाहा?बाकी लोग तो आ गये वापस.”

“काम ही कर रही हू बाबा!यहा तक आई तो सोचा आस-पास की और जगहें भी देख लू.उनकी तस्वीरें खींच लूँगी & उनके डीटेल्स अपनी कंपनी के डेटबेस मे डाल दूँगी तो आगे ज़रूरत पड़े तो डाइरेक्टर फोटोस देख के अंदाज़ा लगा सकता है कि जगह उसके काम की है या नही.”

“तो अकेले जाने की क्या ज़रूरत थी?किसी को साथ तो रखना था.वैसे बड़े दूर की सोचने लगी हो!”

“क्या करें!नुकसान से बचने के लिए दूर की तो सोचनी ही पड़ती है & किसी को साथ लाती तो कंपनी के काम पे असर पड़ता ना.”,रंभा ने देखा देवेन होटेल से बाहर आ रहा था.उसने समीर से थोड़ी देर & बात की & फोन काट दिया.

“देखो,होटेल मे कमरा तो मिल गया है मगर तुम ज़रा सबके सामने आने से थोड़ा बचना.”

“क्यू?”,रंभा शोखी से मुस्कुराइ.उसे लगा कि देवेन को बाकी मर्दों का उसे घूर्ना पसंद नही.

“क्यूकी तुम मेहरा खानदान की बहू हो & समीर वाले मामले के बाद लोग तुम्हारी शक्ल पहचानने भी लगे हैं..”,रंभा कार से उतर गयी थी & धूप का चश्मा आँखो पे रहने दिया था,”..कोई पहचान लेगा तो बेकार मे तुम्हारे बारे मे बातें उछ्लेन्गि.”,रंभा ने 1 स्कार्फ अपने सर पे लपेटा & देवेन ने होटेल के वेटर को आते देख डिकी खोल दी,”..& फिर मुझे अच्छा नही लगता जब लोग तुम्हे ललचाई निगाहो से देखते हैं.”,वो तेज़ी से वेटर के पीछे-2 आगे बढ़ गया.रंभा मुस्कुराती उसके पीछे चलने लगी.

“बस देख ही सकते है ना!”,कमरे मे घुसते ही रंभा ने अपने आशिक़ के गले मे बाहे डाल दी & उसके गाल चूमने लगी,”..कर तो नही सकते उसने उसके चेहरे पे प्यार से हाथ फिराए,”..वो हक़ तो किसी-2 को ही है.”,देवेन मुस्कुराया & उसकी कमर को बाहो मे कस चूम लिया.

“अच्छा चलो.कुच्छ खा के देखने चलते हैं बालम सिंग का देवी फार्म.”,देवेन ने उसके गाल थपथपाए & बाथरूम मे चला गया.रंभा का फोन बजा तो उसने देखा की प्रणव का फोन था.

“हेलो.”,मुस्कुराते हुए उसने फोन उठाया.

“कहा गायब हो गयी हो जानेमन?..अपने दीवाने का ज़रा भी ख़याल नही तुम्हे?”

“इश्क़ मे थोड़ा तड़पना भी ज़रूरी होता है हुज़ूर!अभी तदपिये थोड़ा.”

“अरे,ठीक से बोलो ना!हो कहा तुम?”

“बस 1-2 दिन मे वापस आ जाऊंगी.अकेले घूम के देख रही थी कि कैसा लगता है.”,देवेन बाथरूम से बाहर आ उसे देख रहा था.रंभा उसके करीब गयी & उसे चूमा & आँखो से शांत रहने का इशारा किया.

“तो कैसा लगा?”

“बहुत अच्छा.कोई दीवाना नही परेशान करने वाला.बहुत सुकून से हूँ!”

“तड़पाव मत यार!जल्दी वापस आओ.कुच्छ बहुत ज़रूरी काम है तुमसे.”,प्रणव की आवाज़ संजीदा हो गयी थी.”

“कैसा काम?”

“आओ तो बताउन्गा.”

“ठीक है.चलो,मैं फिर फोन करूँगी.ओके?”

“ओके,बेबी.बाइ!”

“बाइ!”,रंभा ने देखा देवेन उसे सवालिया निगाहो से देखा रहा था.

“मेहरा खानदान मे अपनी जगह बनाए रखने के लिए मुझे खेल खेलने पड़ते हैं.उसी खेल का 1 मोहरा था ये.”,रंभा ने अपने मोबाइल की ओर इशारा किया.उसके चेहरे पे उदासी की छाया देखा देवेन उसके करीब आया & उसे बाहो मे भर उसके चेहरे को प्यार से सहलाया.

“मुझे नही पता की कौन-2 है तुम्हारी ज़िंदगी मे लेकिन जो भी हैं उनसे रिश्ता रखने का फ़ैसला केवल तुम्हारा होगा.मैं तुमसे कभी भी ये नही कहूँगा की मेरी वजह से तुम किसी से अपना कोई नाता तोडो.मैं तुम्हे चाहता हम अगर ये ज़रूरी नही कि तुम भी मुझे चाहो.”

“ऐसे क्यू बोल रहे हैं?”,रंभा के आँखो मे चिंता झलकने लगी थी.

“अरे तुम समझी नही मेरी बात.”,वो मुस्कुराया,”..मेरा ये कहना है कि मैं तुम्हे चाहता हू & चाहता रहूँगा लेकिन इसका मतलब ये नही कि मैं तुम्हे बाँधना चाहता हू.तुम आज़ाद ख़याल लड़की हो & मुझे ऐसे ही पसंद हो.”

“ओह..देवेन.”,रंभा उसके सीने से लिपट गयी,”..बस कुच्छ दिन और.1 बार मैं अपने पति को बेवफ़ाई करने का सबक सीखा दू फिर मैं आपसे दूर नही जाऊंगी.”,रंभा की आँखे छल्छला आई थी.

“मुझे पूरा भरोसा है तुमपे रंभा.”,दोनो 1 दूसरे को चूमने लगे कि दरवाज़े पे दस्तक हुई,वेटर उनका नाश्ता लेके आ गया था.

सनार के बाहरी इलाक़े मे कोई 10-12 छ्होटे-2 फार्म्स थे जिनमे देवी फार्म सबसे बड़ा था.बाकी फार्म्स तो बस कांटो की तरोसे घिरे थे लेकिन देवी फार्म के चारो तरफ कोई 10 फ्ट ऊँची दीवार थी & उसके उपर भी कांटो की तार लगी थी.

“सब्ज़ियो के लिए ऐसी सेक्यूरिटी!”,देवेन कार मे बैठा सोच मे पड़ गया था.रास्ते के दूसरी तरफ फार्म का मैं गेट था जो बंद था & उसके पार भी कुच्छ नही दिख रहा था,”..1 काम करो उस फार्म पे चलो.”,उसने रंभा को रोड पे पीछे छ्चोड़ आए 1 फार्म की ओर इशारा किया.रंभा ने कार घुमा दी.

“अरे,साहिब.ऐसे मशरूम आपको कही नही मिलेंगे.मेहरा फार्म्स के मशरूम का भी कोई मुक़ाबला नही हमारे मशरूम से.”,रंभा मुस्कुराइ उस किसान ने उसे पहचाना नही था.

“अच्छा.पर हमने तो सुना था कि सनार मे देवी फार्म के मशरूम माशूर हैं.”,किसान के चेहरे का रंग बदल गया.

“अच्छा!कौन बोला आपको ये बात?”

“क्यू?”

“जो भी बोला साहिब आपको झूठ बोला क्यूकी देवी फार्म मे तो मशरूम उगाया ही नही जाता.”,वो हंसा.

“क्या?!”

“जी,वाहा तो विदेशी सलाद के पत्ते उगाए जाते हैं.”,देवेन ने रंभा की ओर देखा.

“लेटास.”,उसने उसे समझाया.

“खैर,आप हमे सॅंपल दीजिए फिर हम आपके पास आएँगे?”

“ज़रूर साहिब ये लीजिए.”,उसने उसे कुच्छ पॅकेट्स पकड़ाए.

“1 बात पुच्छनी थी.”

‘हां पुछिये.”

“आप सभी के फार्म तो बॅसकॅंटो की तार से घिरे हैं ये देवी फार्म की सब्ज़ियाँ क्या आवारा जानवरो को कुच्छ ज़्यादा पसनद है जो इतनी लंबी-चौड़ी दीवार खड़ी कर रखी है!”

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क्रमशः.......

JAAL paart--57

gataank se aage......

Apne naye premi ke pyar karne ke bilkul hi nirale andaz ne use bahut madhosh kar diya tha.uske munh se halki si aah nili,deven uske panv ki ungliyo me apne hath ki ungliya ghusa ke sabun laga raha tha.deven ne uski tang neeche kar dayi tang ko baye kandhe pe chadhaya & vaha bhi vahi harkat dohrayi,fir uske hath tham use vapas upar khincha.is sab ke dauran lund chut me vaise ka vaisa dhansa hua tha.rambha ne uski gardan me baahe daal use shiddat se chuma & apne hath me sabun le uske seene pe ghisne lagi.thodi der baad sabun uske hatho se phisal farsh pe tha lekin uske hath vaise hi deven ke seene pe ghum rahe the.usne uske seene se leke uske pet tak sabun lagaya & fir dono hath peechhe le jake fir se uski pith ragdi to deven ne bhi use baaho me bhar liya & apne seene se uski chhatiyo ko peeste hue use chumne laga.

Deven ne kuchh der baad kiss todi & rambha ke seene ke ubharo ko sabun ke khushbudar jhag se dhankne laga.rambha ne masti me aankhe band kar li & apne hath peechhe farsh pe tika diye & aahen bharne lagi.deven uski chhatiyo ko masal raha tha & vo apni kamar hilane lagi thi.deven ne sabun ko uske pet pe mala & rambha ki kamar ke hilne ki raftar & tez ho gayi.deven uski nabhi me ungli ghusa-2 ke sabun mal raha tha.rambha ab masti me aahen bharti hui bahujt tezi se kamar hila rahi thi.deven ka hath neeche gaya & rambha ke dane pe sabun lagane laga.rambha ne sar peechhe jhatka & zor se chikh mari.uska jism kanpne laga-vo jhad gayi thi.

Vo nidhal ho peechhe farsh pe girne hi vali thi ki deven ne uski baahe tham use uapr apni atarfa khincha & apni baaho me bhar liya & uske gand ki fanko pe sabun lagane laga.rambha abhi masti ke toofan se ubri bhi nahi thi ki deven ne uski gand me ungli ghusa use fir se us dusre toofan ki or dhakelna shuru kar diya tha.

Rambha ne uski garden ke gird daye bazu ko bandhe hue baye hath me lota le upar utha pani giraya & dono jude jismo se sabun dhulne laga.deven ne uske hatho se lota liya & uski tango pe pani dalne laga.rambha ne dusra lota utha liya & apne aashiq ko nahlane lagi.kuchh hi palo me dono jismo se sabun dhul chuka tha.dono ne loto ko kinare kiya & 1 dusre ko baaho me bhar chumne lage.deven ne use fir se god me utha liya & gusalkhane se nikal gaya.

“nahi,kamre me nahi.”,rambha use chum rahi thi.

“to kaha?”,deven uski gand ki pusht fanko ko thame tha.

“bahar.”,rambha shararat se muskurayi & uske baye kaan pe kaat liya.

“pagal ho gayi ho kya?koi dekh lega to?”

“usi me to maza hai..abhi to pau bhi nahi phati hai fir bhi pakde jane ka darr to hai hi,vahi romanch ko badhata hai.chaliye na please!”,kisi bachchi ki tarah zid ki usne to deven muskura diya.dono darwaze taka aye to rambha ne hath peechhe le ja sankal kholi.deven ne use god me uthaye hue bahar ki thandi hawa me kadam rakha.ganv me sannata pasra tha.darwaze ke bahar ke chhappar se dhanke hisse ke farsh pe vo ghutno ke bal baith gaya & aage jhuk rambha ki chhatiyo se munh laga diya.

Rambha thoda peechhe jhuki & uske hotho se aahat hoti,uske sar ko jakde aah bharne lagi.deven ne dhakke lagana shuru kar diya tha.rambha ko bahut maza aa raha tha.thandi hawa dono ko sihra rahi thi.deven uski gtand ko bhinch bahut gehre dhakke laga raha tha.rambha zor-2 se aahe bhar rahi thi.deven ne uski choochiyo ko chusne ke baad sar utha ke aas-pass dekha,kahi koi nazar nahi aa raha tha lekin zyada der yaha aise baith ke chudai karna khatre se khali nahi tha.pata nahi tha ki ganv vale us baat ko kaise lete & vo musibat me bhi pad sakte the lekin rambha ne sahi kaha tha,bahut romanch tha yu chudai karne me.

Rambha uske sar ko thame use paglo ki tarah chumti bahut tezi se apni kamar hila rahi thi.deven ki sanse bhi tez ho gayi thi & uske hatho ki pakad bhio rambha ki gand pe bahut kas gayi thi.dono 1 dusre ki aankho me dekhte zor-2 se aahe bharte hue apni-2 kamar hila rahe the.achanak rambha ne zor se aah bhari & sisakte hue deven ka sar pakad apni choochiyo me dhansa diya & bahut zor se kamar hilane lagi.uski chut ne deven ke lund ko kasa & deven ne bhi uski chhatiyo pe honth dabate hue uski gand ko bahut zor se bhincha.uska jism jhatke khane laga & usne bhi apna gadha,garm virya rambha ki chut me chhod diya.

Thodi der tak dono 1 dusre se chipke hue lambi-2 sanse lete hue baithe rahe,fir deven ne uski gand ko tham use vaise hi pani god me uthaya & ghar ke andar aaya.rambha ne sankal vaps lagayi & dono vaise hi kamre me chale gaye.

“Hi!Sameer,kaise ho?”,Rambha & Deven Sanaar pahunch chuke the.sanar tha to 1 ganv magar vaha videshi sabziyo & phalo ki kheti hoti thi & is vajah se bahri logo ka aana-jana laga rehta tha.is wajah se vaha 2-3 chhote hotel bhio khul gaye the.deven unhi me se 1 me kamre ke bare me pata kar raha tha & rambha bahar car me hi baithi thi.

“thik hu.tum kaha ghum rahi ho,yaar?vapas kyu nahi aa rahi?”

“bahut yaad aa rahi hai meri?”,rambha ne sawal to aise kiya ki sameer ko lage ki vo use chhed rahi hai magar uska chehre pe gussa tha.

“ab ye bhi koi puchhne ki baat hai!kar kya rahi ho yaar tum vaha?baki log to aa gaye vapas.”

“kaam hi kar rahi hu baba!yaha tak aayi to socha aas-paas ki & jagahen bhi dekh lu.unki tasveeren khinch lungi & unke details apni company ke database me daal dungi to aage zarurat pade to director photos dekh ke andaza laga sakta hai ki jagah uske kaam ki hai ya nahi.”

“to akele jane ki kya zarurat thi?kisi ko sath to rakhna tha.vaise bade door ki sochne lagi ho!”

“kya karen!nuksan se bachne ke liye door ki to sochni hi padti hai & kisi ko sath lati to company ke kaam pe asar padta na.”,rambha ne dekha deven hotel se bahar aa raha tha.usne sameer se thodi der & baat ki & phone kaat diya.

“dekho,hotel me kamra to mil gaya hai magar tum zara sabke samne aane se thoda bachan.”

“kyu?”,rambha shokhi se muskurayi.use laga ki deven ko baki mardon ka use ghurna pasand nahi.

“kyuki tum Mehra khandan ki bahu ho & sameer vale mamle ke baad log tumhari shakl pehchanane bhi lage hain..”,rambha car se utar gayi thi & dhoop ka chashma aankho pe rehne diya tha,”..koi pehchan lega to bekar me tumhare bare me baaten uchhlengi.”,rambha ne 1 scarf apne sar pe lapeta & deven ne hotel ke waiter ko aate dekh dicky khol di,”..& fir mujhe achha nahi lagta jab log tumhe lalchayi nigaho se dekhte hain.”,vo tezi se waiter ke peechhe-2 aage badh gaya.rambha muskurati uske peechhe chalne lagi.

“bas dekh hi sakte hai na!”,kamre me ghuste hi rambha ne apne aashiq ke gale me baahe daal di & uske gaal chumne lagi,”..kar to nahi sakte kkaha gayab ho gayi hi janemanuchh.”,usne uske chehre pe pyar se hath firaye,”..vo haq to kisi-2 ko hi hai.”,deven muskuraya & uski kamar ko baaho me kas chum liya.

“achha chalo.kuchh kha ke dekhne chalte hain Baalam Singh ka Devi Farm.”,deven ne uske gaal thapthapaye & bathroom me chala gaya.rambha ka fone baja to usne dekha ki Pranav ka fone tha.

“hello.”,muskurate hue usne fone uthaya.

“kaha gayab ho gayi ho janeman?..apne deewane ka zara bhi khayal nahi tumhe?”

“ishq me thoda tadapna bhi zaruri hota hai huzur!abhi tadapiye thoda.”

“are,thik se bolo na!ho kaha tum?”

“bas 1-2 din me vapas aa jaoongi.akele ghum ke dekh rahi thi ki kaisa lagta hai.”,deven bathroom se bahar aa use dekh raha tha.rambha uske kareeb gayi & use chuma & aankho se shant rehne ka ishara kiya.

“to kaisa laga?”

“bahut achha.koi deewana nahi pareshan karne wala.bahut sukun se hun!”

“tadpao mat yaar!jaldi vapas aao.kuchh bahut zaruri kaam hai tumse.”,pranav ki aavaz sanjida ho gayi thi.”

“kaisa kaam?”

“aao to bataunga.”

“thik hai.chalo,main fir fone karungi.ok?”

“ok,baby.bye!”

“bye!”,rambha ne dekha deven use sawaliya nigaho se dekha raha tha.

“mehra khandan me apni jagah banaye rakhne ke liye mujhe khel khelne padte hain.usi khel ka 1 mohra tha ye.”,rambha ne apne mobile ki or ishara kiya.uske chehre pe udasi ki chhaya dekha deven uske karib aaya & use baaho me bhar uske chehre ko payr se sehlaya.

“mujhe nahi pata ki kaun-2 hai tumhari zindagi me lekin job hi hain unse rishta rakhne ka faisla kewal tumhara hoga.main tumse kabhi bhi ye nahi kahunga ki meri vajah se tum kisi se apna koi nata todo.main tumhe chahta hum agar ye zaruri nahi ki tum bhi mujhe chaho.”

“aise kyu bol rahe hain?”,rambha ke aankho me chinta jhalaken lagi thi.

“are tum samjhi nahi meri baat.”,vo muskuraya,”..mera ye kehna hai ki main tumhe chahta hu & chhata rahunga lekin iska matlab ye nahi ki main tumhe baandhana chahta hu.tum azad khayal ladki ho & mujhe aise hi pasand ho.”

“oh..deven.”,rambha uske seene se lipat gayi,”..bas kuchh din &..1 baar main apne pati ko bewafai karne ka sabak sikha du fir main aapse door nahi jaoongi.”,rambha ki aankhe chhalchhala aayi thi.

“mujhe pura bharosa hai tumpe rambha.”,dono 1 dusre ko chumne lage ki darwaze pe dastak hui,waiter unka nashta leke aa gaya tha.

Sanaar ke bahri ilake me koi 10-12 chhote-2 farms the jinme Devi Farm sabse bada tha.baki farms to bas kanto ki tarose ghire the lekin devi farm ke charo taraf koi 10 ft oonchi deewar thi & uske upar bhi kanto ki taar lagi thi.

“sabziyo ke liye aisi security!”,deven car me baitha soch me pad gaya tha.raste ke dusri taraf farm ka main gate tha jo band tha & uske paar bhi kuchh nahi dikh raha tha,”..1 kaam karo us farm pe chalo.”,usne rambha ko road pe peechhe chhod aaye 1 farm ki or ishara kiya.rambha ne car ghuma di.

“are,sahib.aise mushroom aapko kahi nahi milenge.Mehra Farms ke mushroom ka bhi koi muqabla nahi humare mushroom se.”,rambha muskurayi us kisan ne use pehchana nahi tha.

“achha.par humne to suna tha ki sanaar me devi farm ke mushroom mashoor hain.”,kisan ke chehre ka rang badal gaya.

“achha!kaun bola aapko ye baat?”

“kyu?”

“jo bhi bola sahib aapko jhuth bola kyuki devi farm me to mushroom ugaya hi nahi jata.”,vo hansa.

“kya?!”

“ji,vaha to videshi salad ke patte ugaye jate hain.”,deven ne rambha ki or dekha.

“lettuce.”,usne use samjhaya.

“khair,aap hume sample dijiye fir hum aapke paas aayenge?”

“zaroor sahib ye lijiye.”,usne use kuchh packets pakdaye.

“1 baat puchhni thi.”

‘haan puchhiye.”

“aap sabhi ke farm to baskanto ki taar se ghire hain ye devi farm ki sabziyan kya awara janwaro ko kuchh zyada pasnad hai jo itni lambi-chaudi deewar khadi kar rakhi hai!”

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 02:03

जाल पार्ट--58

गतान्क से आगे......

“मज़ाक करते हैं साहिब आप तो!”,किसान ने ठहाका लगाया,”..अरे बड़े आदमी की ज़मीन है साहब,उसका अपना तरीका.”

“अच्छा किसका फार्म है?”

“कोई बालम सिंग है साहिब.”

“मिले हैं आप उस से?”

“नही साहब.1-2 बार देखा है.ज़्यादा मिलता-जुलता नही हम सब से जबकि रहता यही है फार्म पे ही.”

“अच्छा.”,दोनो वाहा से निकल गये & वापस होटेल पहुचे.

“रंभा,तुम वापस चली जाओ.”,बिस्तर पे नंगी लेटी रंभा के दाए तरफ लेटा देवेन उसकी दाई चूची को चूस्ते हुए दाए हाथ की उंगलो उसकी चूत मे घुसा रहा था.

“क्यू?!”,रंभा ने हैरत से उसे देखा,”..आआअन्न्‍ननणणनह..!”,देवेन ने उसके जी-स्पॉट को दोबारा ढूंड लिया था.रंभा फिर से बेहोश जैसी हो गयी & बिस्तर पे निढाल पड़ गयी.उसका जिस्म थरथरा रहा था.देवेन ने उसकी चूत से उंगली निकाली & उसे निहारने लगा.कुच्छ पॅलो बाद रंभा जब खुमारी से बाहर आई तो उसने देवेन को बाहो मे जाकड़ लिया & उसके चेहरे & होंठो पे किसिज की झड़ी लगा दी,”..क्यू अलग कर रहे हैं मुझे खुद से?..”,उसने उसे पलट दिया & उसके उपर सवार हो गयी & उसके सीने को चूमने लगी,”.वैसे भी 2 दिनो मे तो जुदा होना ही है.”,रंभा की आँखो मे पानी था.देवेन ने उसे बाहो मे कस के चूम लिया & उसकी गंद दबाई.

“दिल तो करता है की तुम्हे अभी भगा के गोआ ले चलु.”,रंभा उसकी प्यार भरी बात सुन मुस्कुरा दी & उसके निपल्स को नखुनो से खरोंचा,”..लेकिन दयाल को ऐसे कैसे छ्चोड़ दू बिना सज़ा दिए?”,रंभा उसकी बात से संजीदा हो गयी.

“हां तो फिर मैं भी तो इसीलिए आई हू ना आपके साथ यहा तक..तो अब जाने को क्यू कह रहे हैं?”,उसने अपनी चूत को उसके लंड पे दबाया तो देवेन ने उसकी कमर पकड़ी & उसके जिस्म को उपर उठाया.रंभा उसका इशारा समझते हुए हाथ नीचे ले गयी & लंड को अपनी चूत का रास्ता दिखाया,”..ऊऊहह….!”

“क्यूकी यहा बहुत ख़तरा है.”,देवेन उसकी गंद को दबाते हुए नीचे से कमर उचका रहा था & रंभा उसके सीने पे अपनी भारी-भरकम चूचियाँ दबाए उसे चूमते हुए चुद रही थी,”..देखा नही कितनी ऊँची दीवार थी.उसका मतलब था कि वो कुच्छ च्छुपाना चाहता है दुनिया की नज़रो से.कोई ग़लत काम होता है वाहा & ये यहा की पोलीस या बाकी सरकारी लोगो की मिली-भगत के बिना मुमकिन नही..उउम्म्म्ममम..!”,उसने अपना सर उठाके रंभा की चूचियो को बारी-2 से मुँह मे भरना शुरू कर दिया.

“तो आप क्यू जा रहे हैं वाहा अकेले?..ओईईईईईईईई..!”,देवेन उसकी गंद मे उंगली घुसा रहा था & उसकी कमर अब तेज़ी से हिलने लगी थी.

“क्यूकी & कोई रास्ता नही,मेरी जान.”,रंभा ने मस्ती मे सर उपर कर लिया था & देवेन अब उसकी गर्देन चूम रहा था,”..मैं किसी तरह उस से मुलाकात कर ही लूँगा लेकिन अगर कुच्छ गड़बड़ हुई तो वो तुम्हारे पीछे आ सकते हैं.ये उसका इलाक़ा है & कोई ना कोई उसे बता ही देगा की तुम मेरे साथ देखी गयी थी..”,रंभा के होंठ खुले हुए थे मगर वो आह नही भर रही थी.उसने आँखे बिल्कुल कस के मीची हुई थी & उसकी कमर को जकड़े देवेन बहुत ज़ोर के धक्के लगा रहा था,”..इसीलिए हम यहा से अभी चेक आउट करेंगे & कह देंगे की वापस जा रहे हैं.तुम मुझे रास्ते मे उतार देना & खुद वापस क्लेवर्त चली जाना.”

“आन्न्‍ननणणनह..मुझे पास ही रखिए ना…..ऊऊहह..!”,वो उसकी जाकड़ मे कसमसाने लगी थी.देवेन ने उसके चेहरे के भाव देखे & उसकी चूत की हरकत महसूस की & समझ गया कि वो झाड़ गयी है.उसने फ़ौरन उसे पलट के अपने नीचे किया & चूमने लगा.

“प्लीज़ रंभा.मेरी बात मानो मेरी जान.”,वो उसे चूमते हुए चोद रहा था.रंभा मस्ती की इस लहर से नीचे उतरी नही थी की उसके प्रेमी ने उसे दूसरी लहर पे सवार करा दिया था,”..तुम वापस जाओ,मैं कल शाम 5 बजे तक अगर फोन ना करू तो समझलेना कि..-“,रंभा ने उसे 1 थप्पड़ लगाया & उचक के उसके होंठ अपने होंठो से सील दिए.उसकी आँखो के कोनो से 2 मोती की बूंदे उसके मस्ती मे & सुर्ख हो गये गालो पे ढालाक पड़ी.उसके जिस्म मे फुलझड़ियाँ छूट रही थी लेकिन दिल दिलबर की बात से उदास हो गया था.उसकी चूत सिकुड़ने लगी थी & उसकी तमन्ना की वो अपने महबूब के जिस्म के साथ 1 हो उस से हुमेशा-2 के लिए जुड़ी रहे,ना केवल उसके दिल बल्कि उसकी रूह मे भी पैबस्त हो गयी थी.देवेन का भी कुच्छ ऐसा ही हाल था & उसे यकीन नही हो रहा था की चंद घंटो मे ही वो लड़की उसकी ज़िंदगी बन गयी थी.रंभा झाड़ रही थी & जज़्बातो के तूफान से आहत हो ज़ोर-2 से सिसक रही थी.देवेन ने बाई बाँह उसकी गर्देन के नीचे लगा दाए हाथ मे उसके चेहरे को थाम उसे चूमते हुए अपनी मोहब्बत से उसे समझाने की कोशिश करने लगा & उसका लंड उसकी कोख को अपने वीर्य से भरने लगा.

शाम का ढुंदालका गहरा रहा था & देवेन झाड़ियो मे छुपा ये सोच रहा था कि देवी फार्म के अंदर घुसा कैसे जाए.उसने छुप-2 के फार्म की चारदीवारी के जायज़ा ले लिया था & उसे कही भी ऐसी कोई जगह नही दिखी जहा से अंदर जया जा सके.अब 1 ही रास्ता था की मेन गेट से घुसा जाए लेकिन गेट पे 2 हत्यारबंद गरॅड्स थे.उनके हथियार सामने तो नही थे मगर उनके कपड़ो के उभारो को देख समझ गया था कि उनकी बंदूके वही छिपि हैं.

तभी 1 काली टाटा सफ़ारी आती दिखी.वो कार गेट के सामने रुकी & उसका पीछे का 1 शीशा नीचे हुआ & अंडरबैठे आदमी ने बाहर पान की पीक फेंकी.देवेन की आँखे चमक उठी..यही था बालम सिंग.उसे बताया था उस आदमी ने की वो पान बहुत ख़ाता था फिर यहा का मालिक भी वही था.उसे गेट खोल सलाम ठोनकटे गुरदस से कार मे बैठा शख्स भी मालिक ही लग रहा था.

देवेन अब बेचैन हो उठा था.बालम सिंग को देख उसका दिल किया था कि उसी वक़्त दौड़ के कार से उसे उतार उस से दयाल के बारे मे पुच्छ ले लेकिन ऐसा करना बहुत बड़ी बेवकूफी होती.मगर उसकी तक़दीर शायद उसपे मेहेरबान थी.अंधेरा होते ही उसे 1 ट्रक आता दिखा.ट्रक गेट पे रुका & हॉर्न बजाया फिर ड्राइवर उतरा & गेट से बाहर आए 1 गार्ड से कुच्छ बात की.तब तक देवेन दबे पाँव च्छूपने की जगह से निकल ट्रक के पीछे आ गया था.देवेन ने देखा ड्राइवर & गार्ड ट्रक के बॉनेट के आगे बात कर रहे थे.उसने ट्रक के पीछे लगा कॅन्वस थोड़ा सा उठाके अंदर झाँका तो वो उसे खाली नज़र आया.वो फ़ौरन बिना आहट किए अंदर घुस गया.

"जल्दी चेक कर यार!",ड्राइवर गार्ड से बोल रहा था..देवेन घबरा गया..वो इधर आ रहे थे..उसने ट्रक मे इधर-उधर देखा & उसे 1 बड़ी सी प्लास्टिक शीट दिखी.वो फ़ौरन उसके नीचे घुस के लेट गया & अपनी साँसे रोक ली.

गार्ड आया & कॅन्वस उठाके टॉर्च की तेज़ रोशनी अंदर डाली,"ये क्या है भाई?"

"अरे प्लास्टिक शीट है,यार.",ड्राइवर ने जवाब दिया,"..माल को ढँकने के लिए.",उसने दबी आवाज़ मे कहा.

"हूँ.",गार्ड ने टॉर्च चारो तरफ घुमाई & फिर उतर गया.कुच्छ देर बाद ट्रक स्टार्ट हुआ & गेट खुलने की आवाज़ आई.ट्रक कोई 2 मिनिट तक चलने के बाद रुका.

"चढ़ाओ भाई समान.",ड्राइवर ट्रक से उतरा.

"अभी काफ़ी टाइम है भाई.जा खाना-वाना खा ले.",1 दूसरी आवाज़ आई,"..अभी 2 घंटे हैं."

"अच्छा.चलो तब तो खा के 1 नींद भी मार लेता हू!",ड्राइवर की आवाज़ दूर जा रही थी.देवेन शीट के नीचे से निकला & कॅन्वस हटा के बाहर देखने लगा.

“फ़र्ज़ करो की समीर नही है..”,महादेव शाह प्रणव के साथ अपने बुंगले के लॉन मे बैठा था.दोनो की सारी मुलाक़ातें यही होती थी केवल इसीलिए नही की बाहर उनके 1 साथ देखे जाने का उन्हे डर था पर इसीलिए भी की शाह बहुत ज़्यादा बाहर नही निकलता था.वो अपना सारा काम अपने बंगल से ही देखता था,”..तो उसके शेर्स रंभा को मिल जाएँगे.”

“हां.”

“तो ग्रूप की मालिको मे से सबसे मज़बूत पोज़िशन उसी की होगी है ना?”

“हां.”

“लेकिन ग्रूप को चलाने के लिए,रोज़ के फ़ैसले लेने के लिए 1 Cएओ की दरकार होगी.”

हां,वो ज़रूरत मैं पूरी करूँगा.”

“ऐसा तुम सोचते हो.”,शाह मुस्कुराया.

“मैं आपकी बात नही समझा.”

“तुम्हारा मानना है कि वो लड़की तुम्हारे कहे मे है & तुम्हे Cएओ की कुर्सी पे बिठाने मे वो ज़रा भी देर नही लगाएगी.”

“बिल्कुल.”

“प्रणव साहिब,दौलत के नशे से बड़ा नशा ताक़त का होता है.उस लड़की ने इनकार कर दिया तो?”

“मेरी सास रीता मेहरा & बीवी शिप्रा के पास भी शेर्स हैं.मैं बाकी शेर्होल्डर्स के साथ मिलके बोर्ड मीटिंग मे वोटिंग की बात कर सकता हू.”

“बिल्कुल कर सकते हो लेकिन वो लड़की भी ऐसा कर सकती है.”

“मगर कोई उसकी क्यू सुनेगा?!”,प्रणव झल्ला उठा था.

“क्यू नही सुनेगा!..प्रणव उसे कम मत आंको.समीर लापता हुआ था तब विजयंत मेहरा उसे दूध मे पड़ी मक्खी की तरह बाहर फेंक सकता था पर नही वो तो उसे अपने साथ ले गया अपने लड़के की तलाश मे.अगर विजयंत जैसा दिमाग़ दार शख्स ऐसा कर सकता है,इसका मतलब है वो लड़की मूर्ख तो नही है!”

“हां,ये तो है.”

“इसीलिए बहुत ज़रूरी है की उसे अपने काबू मे रखा जाए.”

“ब्लॅकमेल?”

“नाह..!”.शाह जैसे उसकी बात से झल्ला सा गया,”..ये बचकाने खेल हैं.मैं किसी तरह उस से मेलजोल बढ़ाता हू.मैं उस से तुम्हारी पैरवी नही करूँगा बल्कि उल्टे उसे ये एहसास कारवंगा की तुम मुझे पसंद नही करते & हम दोनो 1 दूसरे को देखना पसंद नही करते मगर जब वक़्त आएगा तो मैं भी उस से यही कहूँगा कि कंपनी की बागडोर संभालने के लिए तुमसे बेहतर शख्स कोई नही हो सकता.”

“& वो आपकी बात क्यू मानेगी?”

“दुश्मन की तारीफ से बड़ी तारीफ क्या हो सकती है!”,शाह मुस्कुरा रहा था,”..प्रणव,ट्रस्ट बहुत बड़ा जहाज़ है,बड़े से बड़ा तूफान झेलने का माद्दा है उसमे लेकिन अक्सर बड़े जहाज़ो को डूबने के लिए 1 छ्होटा सा सुराख ही काफ़ी होता है.हमे इस जहाज़ को समंदर का बादशाह बनके उसपे राज करना है,इसीलिए बहुत ज़रूरी है कि हम हर कदम फूँक-2 के उठाएँ.मुझे पता है कि मेरा प्लान ग़लत भी साबित हो सकता है लेकिन रंभा पे हर वक़्त नज़र रखने का & उसकी सोच को अपने हिसाब से मोड़ने का इस से बेहतर रास्ता मुझे नही दिख रहा.”

“हूँ.. ठीक है.जब वो डेवाले वापस लौटती है तो मैं आपको बताता हू फिर जो करना हो कीजिएगा.”,प्रणव खड़ा हो गया,”अब चलता हू.”,उसने शाह से हाथ मिलाया & वाहा से निकल गया.

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देवेन ट्रक से उतरा & चारो तरफ देखा.उसने देखा सामने 1 गोदाम जैसी इमारत थी.वो दबे पाँव उसके करीब गया & उसकी 1 खिड़की से अंदर झाँका.5 आदमी थे अंदर उस ड्राइवर समेट.1 किनारे 1 टेबल पे कुच्छ बर्तन रखे थे जिनमे से लेके वो पाँचो खाना खा रहे थे,”आराम से खाना.आज काफ़ी वक़्त है ,आराम से समान चढ़ाएँगे.”,बोलते हुए उस शख्स ने 1 कोने मे देखा तो देवेन की नज़र भी उधर गयी.वाहा फलों के गत्ते वाले कारटन रखे थे..यहा तो लेटास..सलाद के पत्ते उगाए जाते थे फिर ये सेब की तस्वीर वाले कारटन..वो सोच मे पड़ गया लेकिन उसे इस सब से क्या लेना-देना था.उसका मक़सद तो बालम सिंग से दयाल के बारे मे पुच्छना था.

वो वाहा से दबे पाँव दूसरी दिशा मे गया.सामने 1 बुंगला दिख रहा था मगर उसके आस-पास उसे बंदूक थामे लोग घूमते दिख रहे थे..उन कारटन्स मे कुच्छ तो ग़ैरक़ानूनी था.वो सोच मे पड़ गया की बालम सिंग तक पहुचे कैसे & उस से भी ज़रूरी बात की उस से मिलने के बाद यहा से निकले कैसे.कुच्छ ऐसा करना था कि फार्म के गेट उसके लिए खुद बा खुद खुलें & वो बाहर निकल जाए.क्या किया जा सकता था ऐसा..वो सोच रहा था कि उसकी निगाह 1 कोने मे पड़ी.

वो 1 गॅरेज था जहा अभी कोई नही था.वो उसके अंदर गया & उसे वाहा 1 फोन भी रखा दिखा..बस उसका काम हो गया.उसने फोन उठाया 101 नंबर घुमाया,”हेलो,फिरे ब्रिगेड..मैं देवी फार्म से बोल रहा हू..यहा आग लग गयी है..जल्दी आएँ वरना पूरा फार्म खाक हो जाएगा!”,घबराई आवाज़ मे बोल उसने फोन काट दिया.सनार था तो 1 गाँव मगर अपने फार्म्स की वजह से यहा की आमदनी से सरकार को भी काफ़ी मुनाफ़ा हो रहा था & अब ज़रूरत की बुनियादी चीज़ें यहा दिखने लगी थी.देवेन ने दिन मे ही बस ताज़ा खुले फिरे स्टेशन को देखा था.बस 1 दमकल की गाड़ी थी मगर थी तो!

उसके बाद उसने डीजल के कॅन खोल कर गॅरेज मे बहाना शुरू किया.सारे डीजल से गॅरेज को अच्छे से भिगोने के बाद उसने सिगरेट सुलगाई & 1 काश ले उसे ज़मीन पे फेंका & भागा वाहा से.चंद पॅलो मे ही गॅरेज धू-2 करके जल रहा था.आग की लपटें उसके साथ लगी उस गोदाम जैसी इमारत को भी च्छुने लगी थी.देवेन जिस ट्रक से आया था उस से थोड़ा हटके 1 दूसरा ट्रक भी लगा था.देवेन उसी मे च्छूपा था.उसने देखा कि फार्म मे कोहराम मच गया.सभी पानी लेके आग बुझाने की कोशिश मे लग गये.

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क्रमशः.......

JAAL paart--58

gataank se aage......

“mazak karte hain sahib aap to!”,kisan ne thahaka lagaya,”..are bade aadmi ki zameen hai sahab,uska apna tarika.”

“achha kiska farm hai?”

“koi Baalam Singh hai sahib.”

“mile hain aap us se?”

“nahi sahab.1-2 baar dekha hai.zyada milta-julta nahi hum sab se jabki rehta yehi hai farm pe hi.”

“achha.”,dono vaha se nikal gaye & vapas hotel pahuche.

“rambha,tum vapas chali jao.”,bistar pe nangi leti rambha ke daye taraf leta deven uski dayi chhati ko chuste hue daye hath ki unglo uski chut me ghusa raha tha.

“kyu?!”,rambha ne hairat se use dekha,”..AAAAANNNNNNNHHHHHHH..!”,deven ne uske g-spot ko dobara dhoond liya tha.rambha fir se behosh jaisi ho gayi & bistar pe nidhal pad gayi.uska jism tharthara raha tha.deven ne uski chut se ungli nikali & use niharne laga.kuchh palo baad rambha jab khumari se bahar aayi to usne deven ko baaho me jakad liya & uske chehre & hotho pe kisse ki jhadi laga di,”..kyu alag kar rahe hain mujhe khud se?..”,usne use palat diya & uske uapr savar ho gayi & uske seene ko chumne lagi,”.vaise bhi 2 dino me to juda hona hi hai.”,rambha ki aankho me pani tha.deven ne use baaho me kas ke chum liya & uski gand dabayi.

“dil to karta hai ki tumhe abhi bhaga ke Goa le chalu.”,rambha uski pyar bhari baat sun muskura di & uske nipples ko nakhuno se kharoncha,”..lekin Dayal ko aise kaise chhod du bina saza diye?”,rambha uski baat se sanjida ho gayi.

“haan to fir main bhi to isiliye aayi hu na aapke sath yaha tak..to ab jane ko kyu keh rahe hain?”,usne apni chut ko uske lund pe dabaya to deven ne uski kamar pakdi & uske jism ko upar uthaya.rambha uska ishar samajhte hue hath neeche le gayi & lund ko apni chut ka rasta dikhaya,”..oooohhhhhhh….!”

“kyuki yaha bahut khatra hai.”,deven uski gand ko dabate hue neeche se kamar uchak raha tha & rambha uske seene pe apni bhari-bharkam chhatiya dabaye use chumte hue chud rahi thi,”..dekha nahi kitni oonchi deewar thi.uska matlab tha ki vo kuchh chhupana chahata hai duniya ki nazro se.koi galat kaam hota hai vaha & ye yaha ki police ya baki sarkari logo ki mili-bhagat ke bina mumkin nahi..uummmmmm..!”,usne apna sar uthake rambha ki chhatiyo ko bari-2 se munh me bharna shuru kar diya.

“to aap kyu ja rahe hain vaha akele?..ouiiiiiiiiiii..!”,deven uski gand me ungli ghusa raha tha & uski kamar ab tezi se hilne lagi thi.

“kyuki & koi rasta nahi,meri jaan.”,rambha ne masti me sar upar kar liya tha & deven ab uski garden chum raha tha,”..main kisi tarah us se mulakat kar hi lunga lekin agar kuchh gadbad hui to vo tumhare peechhe aa sakte hain.ye uska ilaka hai & koi na koi use bata hi dega kit um mere sath dekhi gayi thi..”,rambha ke honth khule hue the magar vo aah nahi bhar rahi thi.usne aankhe bilkul kas ke meechi hui thi & uski kamar ko jakde deven bahut zor ke dhakke laga raha tha,”..isiliye hum yahase abhi check out karenge & kah denge ki vapas ja rahe hain.tum mujhe raste me utar dena & khud vapas clayworth chali jana.”

“aannnnnnnhhhhhhh..mujhe paas hi rakhiye na…..oooohhhhhhhhhhh..!”,vo uski jakad me kasmasane lagi thi.deven ne uske chehre ke bhav dekhe & uski chut ki harkat mehsus ki & samajh gaya ki vo jhad gayi hai.usne fauran use palat ke apne neeche kiya & chumne laga.

“please rambha.meri baat mano meri jaan.”,vo use chumte hue chod raha tha.rambha masti ki is lehar se neeche utri nahi thi ki uske premi ne use dusri lehar pe sawar kara diya tha,”..tum vapas jao,main kal sham 5 baje tak agar fone na karu to samajhlen aki..-“,rambha ne use 1 thappad lagaya & uchak ke uske honth apne hotho se sil diye.uski aankho ke kono se 2 moti ki boonde uske masti me & surkh ho gaye galo pe dhalak padi.uske jism me phuljhadiyan chhut rahi thi lekin dil dilbar ki baat se udas ho gaya tha.uski chut sikudne lagi thi & uski tamanna ki vo apne mehboob ke jism ke sath 1 ho us se humesha-2 ke liye judi rahe,na keval uske dil balki uski rooh me bhi paibast ho gayi thi.deven ka bhi kuchh aisa hi haal tha & use yakin nahi ho raha tha ki chand ghanto me hi vo ladki uski zindagi ban gayi thi.rambha jahd rahi thi & jazbato ke toofan se aahat ho zor-2 se sisak rahi thi.deven ne bayi banh uski garden ke neeche laga daye hath me uske chehre ko tham use chumte hue apni mohabbat se use samjhane ki koshish karne laga & uska lund uski kokh ko apne virya se bharne laga.

Sham ka dhundalka gehra raha tha & Deven jhadiyo me chhupa ye soch raha tha ki Devi Farm ke andar ghusa kaise jaye.usne chhup-2 ke farm ki chardeewari ke jayza le liya tha & use kahi bhi aisi koi jagah nahi dikhi jaha se andar jaya ja sake.ab 1 hi rasta tha ki main gate se ghusa jaye lekin gate pe 2 hathyarband gurads the.unke hathyar samne to nahi the magar unke kapdo ke ubharo ko dekh samajh gaya tha ki unki bandooke vahi chhipi hain.

tabhi 1 kali Tata Safari aati dikhi.vo car gate ke samne ruki & uska peechhe ka 1 shisha neeche hua & andarbaithe admi ne bahar paan ki peek fenki.deven ki aankhe chamak uthi..yehi tha Baalam Singh.use batay tha us admi ne ki vo paan bahut khata tha fir yaha ka malik bhi vahi tha.use gate khol salam thonkte gurads se car me baitha shakhs bhi malik hi lag raha tha.

deven ab bechain ho utha tha.baalam singh ko dekh uska dil kiya tha ki usi waqt daud ke car se use utar us se Dayal ke bare me puchh le lekin aisa karna bahut badi bevkufi hoti.magar uski taqdeer shayad uspe meherban thi.andhera hote hi use 1 truck aata dikha.truck gate pe ruka & horn bajaya fir driver utra & gate se bahar aaye 1 guard se kuchh baat ki.tab tak deven dabe panv chhupne ki jagah se nikal truck ke peechhe aa gaya tha.deven ne dekha driver & guard truck ke bonnet ke aage baat kar rahe the.usne truck ke peechhe laga canvas thoda sa uthake andar jhanka to vo use khali nazar aaya.vo fauran bina aahat kiye andar ghus gaya.

"jaldi check kar yaar!",driver guard se bol raha tha..deven ghabra gaya..vo idhar aa rahe the..usne truck me idhar-udhar dekha & use 1 badi si plastic sheet dikhi.vo fauran uske neeche ghus ke let gaya & apni sanse rok li.

gurad aaya & canvas uthake torch ki tez roshni andar dali,"ye kya hai bhai?"

"are plastic sheet hai,yaar.",driver ne jawab diya,"..maal ko dhankne ke liye.",usne dabi aavaz me kaha.

"hun.",guard ne torch charo taraf ghumayi & fir utar gaya.kuchh der baad truck start hua & gate khulne ki aavaz aayi.truck koi 2 minute tak chalne ke baad ruka.

"chadhao bhai saman.",driver truck se utra.

"abhi kafi time hai bhai.ja khana-vana kha le.",1 dusri aavaz aayi,"..abhi 2 ghante hain."

"achha.chalo tab to kha ke 1 nind bhi maar leta hu!",driver ki aavaz door ja rahi thi.deven sheet ke neeche se nikla & canvas hata ke bahar dekhne laga.

“Farz karo ki Sameer nahi hai..”,Mahadev Shah Pranav ke sath apne bungle ke lawn me baitha tha.dono ki sari mulakaten yahi hoti thi keval isiliye nahi ki bahar unke 1 sath dekhe jane ka unhe darr tha par isiliye bhi ki shah bahut zyada bahar nahi nikalta tha.vo apna sara kaam apne bungle se hi dekhta tha,”..to uske shares Rambha ko mil jayenge.”

“haan.”

“to group ki maliko me se sabse mazbut position usi ki hogi hai na?”

“haan.”

“lekin group ko chalane ke liye,roz ke faisle lene ke liye 1 CEO ki darker hogi.”

Haan,vo zarurat main puri karunga.”

“aisa tum sochte ho.”,shah muskuraya.

“main aapki baat nahi samjha.”

“tumhara maanana hai ki vo ladki tumhare kahe me hai & tumhe CEO ki kursi pe bithane me vo zara bhi der nahi lagayegi.”

“bilkul.”

“pranav sahib,daulat ke nashe se bada nasha taqat ka hota hai.us ladki ne inkar kar diya to?”

“meri saas Rita Mehra & biwi Shipra ke paas bhi shares hain.main baki shareholders ke sath milke board meeting me voting ki baat kar sakta hu.”

“bilkul kar sakte ho lekin vo ladki bhi aisa kar sakti hai.”

“magar koi uski kyu sunega?!”,pranav jhalla utha tha.

“kyu nahi sunega!..pranav use kam mat aanko.sameer lapata hua tha tab Vijayant Mehra use doodh me padi makkhi ki tarah bahar fenk sakta tha par nahi vo to use apne sath le gaya apne ladke ki talash me.agar vijayant jaisa dimaghdar shakhs aisa kar sakta hai,iska matlab hai vo ladki moorkh to nahi hai!”

“haan,ye to hai.”

“isiliye bahut zaruri hai ki use apne kabu me rakha jaye.”

“blackmail?”

“naah..!”.shah jaise uski baat se jhalla sa gaya,”..ye bachkane khel hain.main kisi tarah us se meljol badhata hu.main us se tumhari pairwi nahi karunga balki ulte use ye ehsas karaunga ki tum mujhe pasand nahi karte & hum dono 1 dusre ko dekhna pasand nahi karte magar jab waqt aayega to main bhi us se yehi kahunga ki company ki bagdor sambhalne ke liye tumse behtar shakhs koi nahi ho sakta.”

“& vo aapki baat kyu manegi?”

“dushman ki tarif se badi tarif kya ho sakti hai!”,shah muskura raha tha,”..pranav,Trust bahut bada jahaz hai,bade se bada toofan jhelne ka madda hai usme lekin aksar bade jahazo ko dubane ke liye 1 chhota sa surakh hi kafi hota hai.hume is jahaz ko samandar ka badhshah banake uspe raaj karna hai,isiliye bahut zaruri hai ki hum har kadam phoonk-2 ke uthayen.mujhe pata hai ki mera plan galat bhi sabit ho sakta hai lekin rambha pe har waqt nazar rakhne ka & uski soch ko apne hisab se modne ka is se behtar rasta mujhe nahi dikh raha.”

“hun.. thik hai.jab vo Devalay vapas lautati hai to main aapko batata hu fir jo karna ho kijiyega.”,pranav khada ho gaya,”ab chalta hu.”,usne shah se hath milaya & vaha se nikal gaya.

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Deven truck se utra & charo taraf dekha.usne dekha samne 1 godam jaisi imarat thi.vo dabe panv uske karib gaya & uski 1 khidki se andar jhanka.5 aadmi the andar us driver smet.1 kinare 1 table pe kuchh bartan rakhe the jinme se leke vo pancho khana kha rahe the,”aaram se khana.aaj kafi waqt hai ,aaram se saman chadhayenge.”,bolte hue us shakhs ne 1 kone me dekha to deven ki nazar bhi udhar gayi.vaha phalon ke gatte vale carton rakhe the..yaha to lettuce..salad ke patte ugaye jate the fir ye seb ki tasvir vale carton..vo soch me pad gaya lekin use is sab se kya lena-dena tha.uska maqsad to Baalam Singh se Dayal ke bare me puchhna tha.

Vo vaha se dabe panv dusri disha me gaya.samne 1 bungla dikh raha tha magar uske aas-paas use bandook thame log ghumte dikh rahe the..un cartons me kuchh to gairkanooni tha.vo soch me pad gaya ki baalam singh tak phunche kaise & us se bhi zaruri baat ki us se milne ke baad yaha se nikle kaise.kuchh aisa karna tha ki farm ke gate uske liye khud ba khud khulen & vo bahar nikal jaye.kya kiya ja sakta tha aisa..vo soch raha tha ki uski nigah 1 kone me padi.

Vo 1 garage tha jaha abhi koi nahi tha.vo uske andar gaya & use vaha 1 fone bhi rakha dikha..bas uska kaam ho gaya.usne fone uthaya 101 number ghumaya,”hello,fire brigade..main Devi Farm se bol raha hu..yaha aag lag gayi hai..jaldi aayen varna pura farm khak ho jayega!”,ghabrayi aavaz me bol usne fone kaat diya.sanaar tha to 1 ganv magar apne farms ki vajah se yaha ki aamdani se sarkar ko bhi kafi munafa ho raha tha & ab zarurat ki buniyadi chizen yaha dikhne lagi thi.deven ne din me hi bas taza khule fire station ko dekha tha.bas 1 damkal ki gadi thi magar thi to!

Uske baad usne diesel ke can khol kar garage me bahana shuru kiya.sare diesel se garage ko achhe se bhigone ke baad usne cigarette sulgayi & 1 kash le use zamin pe fenka & bhaga vaha se.chand palo me hi garage dhoo-2 karke jal raha tha.aag ki lapten uske sath lagi us godam jaisi imarat ko bhi chhune lagi thi.deven jis truck se aaya tha us se thoda hatke 1 dusra truck bhi laga tha.deven usi me chhupa tha.usne dekha ki farm me kohram mach gaya.sabhi pani leke aag bujhane ki koshish me lag gaye.

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kramashah.......

raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 02:04

जाल पार्ट--59

गतान्क से आगे......

अफ़रा-तफ़री का फ़ायदा उठाते हुए देवेन अपनी च्छूपने की जगह से निकला ,गॅरेज से उसने 1 रस्सी उठा ली थी जो कि अब उसके कंधे पे तंगी थी.वो बंगल की तरफ भागा,”आग लग गयी आग!”,वो बेतहाशा चीख रहा था.उसे पता था कि वो बहुत बड़ा ख़तरा उठा रहा है.अगर किसी को ज़रा भी अंदेशा हुआ कि वो घुसपैठिया है तो उसे गोली मारने मे वो ज़रा भी नही हिचकिचाएंगे लेकिन ये ख़तरा तो उसे उठाना ही था,”अरे खड़े-2 देख क्या रहे हो.आग बुझाने मे मदद करो!मैं बॉस को बुलाता हू!”,वो बंगल के दरवाज़े की ओर भाग रहा था.बंगल की रखवाली करते गार्ड्स थोड़े हिचकिचाते दिखे मगर देवेन ने जिस भरोसे के साथ उनसे बात की थी उन्हे उसपे शक़ नही हुआ था & वो आग बुझाने भागे,”कमाल हो यार तुम सब भी!हथियार लेके आग बुझा रहे हो.रखो यहा सब!”,उसे खुद पे हैरत हो रही थी.वो उन सबको ऐसे डाँट रहा था जैसे वो ही उनका बॉस हो!

उसने 1 गुंडे की छ्चोड़ी मशीन गन उठाई & अंदर भागा & उसकी किस्मेत की वो भागते आते बालम सिंग से टकराया,”क्या हुआ?..तुम कौन हो?”

“चुप!”,देवेन ने उसपे बंदूक तानि.बंगल के अहाते मे वो वही काली गाड़ी खड़ी थी जिसमे बालम सिंग वाहा आया था,”चुप चाप गाड़ी मे बैठ.चल!चिल्लाना मत वरना बस 1 बार ट्रिग्गर दबाउन्गा,उसके बाद मैं मर भी जाऊं तो मुझे परवाह नही.तू तो उपर पहुँच चुक्का होगा साले!”,

“द-देखो,तुम बच के नही जा सकते..”

“तो क्या हुआ कामीने..तू भी तो नही बचेगा..अगर जान प्यारी है तो बैठ गाड़ी मे ड्राइविंग सीट पे.”बालम सिंग आगे बैठा & पीछे देवेन,”..अब गाड़ी बुंगले से बाहर ले चल.”,उसने वैसा ही किया,”..गार्ड को कोई इशारा तक किया तो ट्रिग्गर दब जाएगा.”,पिच्छली सीट पे बैठे उसकी कमर के ठीक उपर बाई तरफ बंदूक की नाल सटी हुई थी.बालम सिंग जानता था कि पीछे बैठा आदमी जुनूनी है & वो कुच्छ भी कर सकता है.वो गाड़ी गेट तक ले गया & गार्ड से गेट खोलने को कहा.गाड़ी गेट से बाहर निकली & देवेन ने उसे हराड की ओर चलने को कहा.रास्ते मे बालम सिंग ने दमकल की गाड़ी को उसके फार्म की ओर जाते देखा.कुच्छ देर पहले वो कितना निश्चिंत बैठा टीवी देख रहा था & अब उसे ये भी पता नही था कि वो ज़िंदा बचेगा या नही & अगर बच भी गया तो उसका धंधा सलामत रहेगा या नही,”..उधर मोड़ झाड़ियो में..हां ..रोक!”

“आईईयईीई..क्या कर रहे हो?..मैं मर जाऊँगा..आहह..!”,देवेन ने पीछे से रस्सी उसके गले मे बाँध दी थी & फिर उसे लपेटते हुए बालम सिंग को गाड़ी की सीट से ही बाँध दिया था,”..तुम्हे चाहिए क्या?..पैसा..मैं मालामाल कर दूँगा तुम्हे..जो बोलो सो दूँगा..!”,घबराया बालम सिंग बके जा रहा था.

“दयाल.”

“हैं?”

“दयाल कहा है?”

“अरे कौन दयाल..मैं किसी दयाल को नही जानता..तुम्हे ग़लतफहमी..-“

‘-..चुप!याद कर जब तू गोपालपुर के साथ वाले कस्बे की जैल मे था.तू किसके साथ मिलके क़ैदियो को ग़ैरक़ानूनी चीज़ें मुहैय्या करता था..याद कर..!”

“वो..दयाल..”

“हां..याद आया.”

“कहा है वो कमीना?”

“मुझे क्या पता भाई!..वो तो भाग गया था वाहा से.”

“क्या?क्यू भागा था & कहाँ?”

“हां..अब मुझे क्या पता कहा गया वो..आहह..”

“झूठ मत बोल!”,गले मे बँधी रस्सी को देवेन ने ज़ोर से खींचा था & बालम सिंग की सांस रुकने लगी थी,”..तू उसके बारे मे जो भी जानता है मुझे बता वरना ये रस्सी अभी & कसेगी.”,देवेन ने रस्सी को & खींचा.

“आरर्ग्घह..आहह..बताता हू..ढीला करो इसे.”,देवेन ने रस्सी ढीली की,”..दयाल ..”,वो खांसने लगा,”..वाहा ड्रग्स का धंधा करता था.मैं उस से चर्स,गार्ड लेके अंदर क़ैदियो को बेचा करता था.वो बाकी चीज़ें भी सप्लाइ करता था मगर उसका असली धंधा ड्रग्स का ही था.”

“उसका धंधा तो चोरी के जवाहरात बेचना था?”

“नही.वो तो उसकी 1 चाल भर थी खुद को बचाने के लिए.नारकॉटैक्स ब्यूरो को इस बात की खबर लग गयी थी कि वो ड्रग्स का कारोबार करता है लेकिन उन्हे पता नही था कि वो कैसा दिखता है फिर दयाल उसका असली नाम था भी नही.”

“तो क्या था उसका असली नाम?”

“ये तो शायद केवल उसकी मा को पता होगा.साला,कपड़ो की तरह नाम बदलता था.उस वक़्त वो दयाल नाम इस्तेमाल कर रहा था.उसने 1 चाल चली जिसमे मैं भी शामिल था.उसने 1 दूसरे शख्स को अपनी जगह नारकॉटैक्स ब्यूरो के जाल मे फसाने की सोची.ब्यूरो का 1 एजेंट दयाल के पीछे-2 गोपालपुर तक आ पहुँचा था.

“मैने उसे उस शख्स के बारे मे बता दिया जिसे दयाल अपनी जगह गिरफ्तार करवाना चाहता था.”

“अच्छा,कौन था वो?”,देवेन की आवाज़ का गुस्सा अब बहुत ख़तरनाक लग रहा था लेकिन बेचारे बालम सिंग को इसका एहसास नही था.

“पता नही.मैं उसका नाम नही जानता था..हां,उसकी कोई प्रेमिका थी..मैने दयाल केकेहने पे उसे ये बताया कि उसका प्रेमी ग़लत काम कर रहा है & अगर वो 1 बार पोलीस की मदद कर दे तो वो उसे पकड़ के उस से चोरी का माल बरामद कर उसे छ्चोड़ देंगे फिर वो उसे समझा-बुझा के अपने साथ ले जा सकती है.”..तो ये बात थी!इन कामीनो ने उसकी सुमित्रा का इस्तेमाल किया था उसके खिलाफ.

“फिर क्या हुआ?”

“वो बड़ी भोली थी.मान गयी हमारी बात & सीधा उस नारकॉटैक्स एजेंट को बता दिया अपने आशिक़ के बारे मे & फिर वो पकड़ा गया.दयाल का काम हो गया.”

“लेकिन 1 बार वो कोलकाता गया था उस लड़की के साथ?”

“हां,साला जितना शातिर था उतना हिम्मती भी.उस लड़की को ले गया कोलकाता ये भरोसा दिलाके की अब वो उसके प्रेमी को छुड़ा के ले आएगा.उसे इस बात का डर भी नही था कि वो पकड़ा जाएगा.उसका कहना था कि जब ‘दयाल’पोलीस की गिरफ़्त मे है तो कोई उसपे हाथ क्यू डालेगा!..हुंग!..जब वो लड़की वाहा पहुँची & ये सुना कि उसका प्रेमी 1 ड्रग स्मग्लर था तो उसका दिल टूट गया & वो वापस आ गयी & दयाल उसे दिलासा देने के बाद मुल्क से रफूचक्कर हो गया.”..दोस्ती का नाम लेके कितना बड़ा खेल खेला था उस कामीने ने & अपने जाल मे फँसा 2 प्यार भरे दिलो को हमेशा-2 के लिए जुदा कर दिया था उसने..& वो अपनी सुमित्रा को धोखेबाज़ समझता रहा & सुमित्रा उसे 1 गलिज़ मुजरिम!

“दयाल गया कहा आख़िर?”

“मुझे नही मालूम.”

“बोल?”,रस्सी कस गयी.”

“उउन्नगगगगगघह..सच..के..हता..हू..!”,वो सच कह रहा था.देवेन ने रस्सी ढीली की & अपनी जेब से रुमाल निकाला & उस बंदूक को पोंच्छा.उसके बाद कार की पिच्छली सीट से उतरा & आगे का दरवाज़ा खोल उस गन के पिच्छले हिस्से को बालम सिंग के माथे पे दे मारा.चीख मार वो बेहोश हो गया.20 मिनिट बाद उस जगह से 1किमी दूर पहाड़ी रास्ते के किनारे क्की खाई मे कुच्छ गिरने की बहुत ज़ोर की आवाज़ आई.1 शख्स ने बहुत दूर से देखा था & उसने पोलीस को यही बताया था की कोई जलती सी चीज़ खाई मे गिरी थी.अगले रोज़ बालम सिंग की राख हो चुकी लाश बंदूक के साथ खाई मे गाड़ी की अगली सीट पे पड़ी मिली थी.

देवेन आँसू बहाता रास्ते पे पैदल चला जा रहा था.उसे बालम सिंग के बेहोश जिस्म को उसी की कार के पेट्रोल से नहला के आग लगाके कार समेत खाई मे धकेलने का गम नही था,उसे गम था कि वो अपनी सुमित्रा को सच्चाई नही बता सका की वो मुजरिम नही था.उसके साथ 1 बेहतर ज़िंदगी गुज़ारने के लालच का फयडा उठाया था उस कामीने ने..& वो कमीना भी गायब था अब..पता नही कहा..कैसे सज़ा देगा उसे वो..आख़िर कैसे?

वो 1 ढाबे पे पहुँचा & हाथ-मुँह धोया.वो जानता था कि पोलीस अब 1 काली कमीज़ & काली जेनस वाले शख्स की तलाश मे होगी.गाल का निशान किसी ने देखा या नही ये उसे पता नही था मगर ये बहुत मुमकिन था कि उन्हे ये पता चल जाए कि 2 लोग वाहा मशरूम की पैदावार के बारे मे पता करने आए थे.उसने पहले ही अपना & रंभा का झूठा नाम लिखवाया था.भला हो गोआ के उसके दोस्तो का जो उन्होने बिल्कुल असली दिखने वाली फ़र्ज़ी ईद उसे मुहैय्या कराई हुई थी.अब उसे रंभा को खबर करनी थी लेकिन हो सकता है कि बाद मे पोलीस सारे इलाक़े मे इस वक़्त की गयी फोन कॉल्स को खंगले.उसे कोई बहुत महफूज़ लाइन खोजनी थी फोन करने के लिए..हां!

उसने 1 ट्रक मे लिफ्ट ली & हराड की ओर बढ़ा.हराड से थोड़ा पहले 1 गाँव था जहा उसने 1 डाक खाना देखा था.वो उस गाँव से थोड़ा आगे उतरा..वो कोई चान्स नही ले रहा था..अगर ट्रक ड्राइवर को वो याद भी रहा तो वो यही कहेगा की वो गाँव से आगे उतरा था.डाक खाने के अंदर घुसना उतना आसान नही था जितना उसने सोचा था.पुराने अंदाज़ की लोहे की च्छड़ो वाली खिड़कियाँ थी & दरवाज़े पे बड़ा सा ताला.वो मायूस हो वाहा से जा ही रहा था कि उसकी निगाह फूस के छप्पर पे पड़ी & अगले ही पल इक्का-दुक्का घूमते लोगो की नज़र बचा वो छप्पर पे चढ़ गया था & फिर पेट के बल लेट के फूस हटा थोड़ी देर बाद अंदर उतर चुका था.

“हेलो,रंभा.कहा हो तुम?”

“आप कहा हैं?ठीक है ना आप?..जल्दी आइए ना!मुझे कुच्छ बहुत ज़रूरी बताना है आपको..प्लीज़ आप फ़ौरन यहा आइए.”

“क्या बताना है & आऊँ कहा?..सब ठीक तो है ना?”

“हां,सब ठीक है.पर..पर..ओफ्फो..आप आइए ना यहा?!”

“अरे मगर बताओ तो कहा?”,उस तनाव भरे माहौल मे भी देवेन को हँसी आ गयी.

हराड & उस डाक खाने वाले गाँव के बीच 1 रास्ता मैं रोड से उतर के अंदर जाता था.उसी पे 1 गाँव था भूमल.1 बरसाती नदी बहती थी उस तरफ से जिसमे अभी उतना पानी नही था.बरसात के आसपास वो जगह बड़ी खूबसूरत हो जाती थी & नदी मच्चलियो से भर जाती थी.मच्चली मारने वालो का मजमा लगा रहता था उसके किनारे.अब रंभा के हाथ वाहा कौन सी मच्चली लग गयी थी यही देखने देवेन वाहा जा रहा था.1 लेट नाइट बस सर्विस की बस को हाथ देके उसने रोका & उसमे सवार हो गया.जब वो बस मे चढ़ा तो उसमे बैठी सवारीयो को कोई काली कमीज़ & पतलून पहना शख्स नही बल्कि पीली चेक की कमीज़ & काली पतलून पहना चेहरे पे गम्छा ओढ़े देहाती सा शख्स दिखा.ये कमीज़ उसने गाँव के 1 घर के बाहर सुख़्ते कपड़ो मे से उठा ली थी & गंच्छा उसे पोस्ट ऑफीस मे ही पड़ा मिल गया था.उसकी कमीज़ अभी उसके कंधे पे लटके 1 झोले मे थी जोकि किसी डाकिये ने पोस्टॉफ़्फिसे मे रख छ्चोड़ा था.

1 घंटे बाद वो बस से उतरा & भूमल की ओर जा रहे रास्ते पे पैदल चलने लगा कि तभी सामने से उसे किसी गाड़ी की हेडलाइट्स दिखी.वो मुस्कुराता खड़ा हो गया.गाड़ी उसके करीब आई & उसकी खिड़की का शीशा नीचे हुआ,”हा..हा..ये क्या हुलिया बना रखा है!”,रंभा हँसने लगी.1 पल को सुमित्रा की शक्ल नाच उठी देवेन की आँखो के सामने..हंसते वक़्त वो बिल्कुल सुमित्रा जैसी लग रही थी,”..क्या हुआ?”,रंभा ने हँसना बंद किया & खुद को 1 तक देखते देवेन से पुचछा.

“बाद मे बताउन्गा.”,देवेन खिड़की के पास आया & उसका माथा चूमा,”..अब बताओ क्या दिखाना चाहती थी मुझे?”,रंभा अचानक संजीदा हो गयी.सच तो ये था की जबसे वो भूमल आई थी उसके होश-हवस उड़ गये थे.वो खुश तो बहुत हुई थी लेकिन साथ ही 1 अंजाना डर भी उसके दिल मे पैदा हो गया था.वो तो देवेन का हुलिया देख उसे हँसी आ गयी &1 पल को वो सब भूल गयी थी.

“चलिए.”,देवेन बैठा तो रंभा ने कार घुमाई.

“तुम यहा कैसे आ गयी?”

“मेरा मन नही माना की आपको अकेला छ्चोड़ू लेकिन आपकी बात मना करना भी ठीक नही लग रहा था.इसी उधेड़बुन मे मुझे बोर्ड दिखा & मुझे यहा की बरसाती नदी की याद आ गयी.उसके बारे मे बहुत सुना था.तो सोचा कि उसे भी देख लू लेकिन दरअसल मैं आगे बढ़ना टाल रही थी.”,देवेन उसकी बात सुन मुस्कुराया.

“पर तुम्हे मिला क्या है?”

“वही चल के देख लीजिएगा.”,कोई 40 मिनिट & ड्राइव करने के बाद वो दोनो भूमल पहुँच गये थे.यहा बिजली नही थी & घरो मे लालटेने जल रही थी.नदी की कल-2 की आवाज़ भी आ रही थी.रंभा गाड़ी से उतरी & टॉर्च से रास्ता दिखाते उसे ले जाने लगी.1 घर की आगे पहुँच वो रुक गयी.उस घर की चौखट के 1 किनारे उसके बरामदे मे कोई बैठा था.अंधेरे मे देवेन को उसकी शक्ल नही दिख रही थी बस इतना पता चल रहा था कि वो शख्स ज़मीन पे चादर या दुशाला ओढ़े बैठा है.

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क्रमशः.......

JAAL paart--59

gataank se aage......

Afra-tafri ka fayda uthate hue Deven apni chhupne ki jagah se nikla ,garage se usne 1 rassi utha lit hi jo ki ab uske kandhe pe tangi thi.vo bungle ki taraf bhaga,”aag lag gayi aag!”,vo betahasha chikh raha tha.use pata tha ki vo bahut bada khatra utha raha hai.agar kisi ko zara bhi andesha hua ki vo ghuspaithiya hai to use goli marne me vo zara bhi nahi hichkichayenge lekin ye khatra to use uthaan hi tha,”are khade-2 dekh kya rahe ho.aag bujhane me madad karo!main boss ko bulata hu!”,vo bungle ke darwaze ki or bhag raha tha.bungle ki rakhwali karte guards thode hichkichate dikhe magar deven ne jis bharose ke sath unse baat kit hi unhe uspe shaq nahi hua tha & vo aag bujhane bhage,”kamal ho yaar tum sab bhi!hathyar leke aag bujha rahe ho.rakho yaha sab!”,use khud pe hairat ho rahi thi.vo un sabko aise dant raha tha jaise vo hi unka boss ho!

Usne 1 gunde ki chhodi machine gun uthayi & andar bhaga & uski kismet ki vo bhagte aate Baalam Singh se takraya,”kya hua?..tum kaun ho?”

“chup!”,deven ne uspe bandook tani.bungle ke ahate me vo vahi kali gadi khadi thi jisme baalam singh vaha aaya tha,”chup chap gadi me baith.chal!chillana mat varna bas 1 baar trigger dabaunga,uske baad main mar bhi jaoon to mujhe parwah nahi.tu to upar pahunch chukka hoga sale!”,

“d-dekho,tum bach ke nahi ja sakte..”

“to kya hua kamine..tu bhi to nahi bachega..agar jaan pyari hai to baith gadi me driving seat pe.”baalam singh aage baitha & peechhe deven,”..ab gadi bungle se bahar le chal.”,usne vaisa hi kiya,”..guard ko koi ishara tak kiya to trigger dab jayega.”,pichhli seat pe baithe uski kamar ke thik upar bayi taraf bandook ki naal sati hui thi.baalam singh janta tha ki peechhe baitha aadmi junooni hai & vo kuchh bhi kar sakta hai.vo gadi gate tak le gaya & guard se gate kholne ko kaha.gadi gate se bahar nikli & deven ne use haraad ki or chalne ko kaha.raste me baalam singh ne damkal ki gadi ko uske farm ki or jate dekha.kuchh der pehle vo kitna nishchint baitha tv dekh raha tha & ab use ye bhi pata nahi tha ki vo zinda bachega ya nahi & agar bach bhi gaya to uska dhandha salamat rahega ya nahi,”..udhar mod jhadiyo men..haan ..rok!”

“aaiiyyeeee..kya kar rahe ho?..main mar jaoonga..aahhhhhhh..!”,deven ne peechhe se rassi uske gale me bandh di thi & fir use lapetate hue baalam singh ko gadi ki seat se hi bandh diya tha,”..tumhe chahiye kya?..paisa..main malamal kar dunga tumhe..jo bolo so dunga..!”,ghabaraya baalam singh bake ja raha tha.

“Dayal.”

“hain?”

“dayal kaha hai?”

“are kaun dayal..main kisi dayal ko nahi janta..tumhe galatfehmi..-“

‘-..chup!yaad kar jab tu Gopalpur ke sath vale kasbe ki jail me tha.tu kiske sath milke qaidiyo ko gairkanooni chizen muhaiyya karata tha..yaad kar..!”

“vo..dayal..”

“haan..yaad aaya.”

“kaha hai vo kamina?”

“mujhe kya pata bhai!..vo to bhag gaya tha vaha se.”

“kya?kyu bhaga tha & kahan?”

“haan..ab mujhe kya pata kaha gaya vo..aahhhhh..”

“jhuth mat bol!”,gale me bandhi rassi ko deven ne zor se khincha tha & baalam singh ki sans rukne lagi thi,”..tu uske bare me jo bhi janta hai mujhe bata varna ye rassi abhi & kasegi.”,deven ne rassi ko & khincha.

“aarrgghhhhh..aahhhhhh..batata hu..dhila karo ise.”,deven ne rassi dhili ki,”..dayal ..”,vo khansne laga,”..vaha drugs ka dhandha karta tha.main us se chars,gard leke andar qaidiyo ko becha karta tha.vo baki chizen bhi supply karta tha magar uska asli dhandha drugs ka hi tha.”

“uska dhandha to chori ke jawaharat bechna tha?”

“nahi.vo to uski 1 chaal bhar thi khud ko bachane ke liye.narcotics bureau ko is baat ki khabar lag gayithi ki vo drugs ka karobar karta hai lekin unhe pata nahi tha ki vo kaisa dikhta hai fir dayal uska asli naam tha bhi nahi.”

“to kya tha uska asli naam?”

“ye to shayad keval uski maa ko pata hoga.sala,kapdo ki tarah naam badalta tha.us waqt vo dayal naam istemal kar raha tha.usne 1 chal chali jisme main bhi shamil tha.usne 1 dusre shakhs ko apni jagah narcotics bureau ke jaal me phasane ki sochi.bureau ka 1 agent dayal ke peechhe-2 gopalpur tak aa pahuncha tha.

“maine use us shakhs ke bare me bata diya jise dayal apni jagah giraftar karwana chahta tha.”

“achha,kaun tha vo?”,deven ki aavaz ka gussa ab bahut khatarnak lag raha tha lekin bechare baalam singh ko iska ehsas nahi tha.

“pata nahi.main uska naam nahi janta tha..haan,uski koi premika thi..maine dayal kekehne pe use ye bataya ki uska premi galat kaam kar raha hai & agar vo 1 baar police ki madad kar de to vo use pakad ke us se chori ka maal baramad kar use chhod denge fir vo use samjha-bujha ke apne sath le ja sakti hai.”..to ye baat thi!in kamino ne uski Sumitra ka istemal kiya tha uske khilaf.

“fir kya hua?”

“vo badi bholi thi.maan gayi humari baat & seedha us narcotics agent ko bata diya apne aashiq ke bare me & fir vo pakda gaya.dayal ka kaam ho gaya.”

“lekin 1 baar vo Kolkata gaya tha us ladki ke sath?”

“haan,sala jitna shatir tha utna himmati bhi.us ladki ko le gaya Kolkata ye bharosa dilake ki ab vo uske premi ko chhuda ke le ayega.use is baat ka darr bhi nahi tha ki vo pakda jayega.uska kehna tha ki jab ‘dayal’police ki giraft me hai to koi uspe hath kyu dalega!..hunh!..jab vo ladki vaha pahunchi & ye suna ki uska premi 1 drug smuggler tha to uska dil toot gaya & vo vapas aa gayi & dayal use dilasa dene ke baad mulk se rafuchakkar ho gaya.”..dosti ka naam leke kitna bada khel khela tha us kamine ne & apne jaal me phansa 2 pyar bhare dilo ko humesha-2 ke liye juda kar diya tha usne..& vo apni sumitra ko dhokhebaz samajhta raha & sumitra use 1 galiz mujrim!

“dayal gaya kaha aakhir?”

“mujhe nahi maloom.”

“bol?”,rassi kas gayi.”

“uunngggggghhhhhhh..sach..ke..hta..hu..!”,vo sach keh raha tha.deven ne rassi dhili ki & apni jeb se rumal nikala & us bandook ko ponchha.uske baad car ki pichhli seat se utra & aage ka darwaza khol us gun ke pichhle hisse ko baalam singh ke mathe pe de mara.chikh maar vo behosh ho gaya.20 minute baad us jagah se 1km door pahadi raste ke kinare kki khayi me kuchh girne ki bahut zor ki aavaz aayi.1 shakhs ne bahut door se dekha tha & usne police ko yehi bataya tha ki koi jalti si chiz khayi me giri thi.agle roz baalam singh ki rakh ho chuki lash bandook ke sath khayi me gadi ki agli seat pe padi mili thi.

Deven aansu bahata raste pe paidal chala ja raha tha.use baalam singh ke behosh jism ko usi ki car ke petrol se nehla ke aag lagake car samet khayi me dhakelne ka ghum nahi tha,use ghum tha ki vo apni sumitra ko sachchai nahi bata saka ki vo mujrim nahi tha.uske sath 1 behtar zindagi guzarne ke lalach ka fayda uthaya tha us kamine ne..& vo kamina bhi gayab tha ab..pata nahi kaha..kaise saza dega use vo..aakhir kaise?

Vo 1 dhabe pe pahuncha & hath-munh dhoya.vo janta tha ki police ab 1 kali kamiz & kali jenas vale shakhs ki talash me hogi.gaal ka nishan kisi ne dekha ya nahi ye use pata nahi tha magar ye bahut mumkin tha ki unhe ye pata chal jaye ki 2 log vaha mushroom ki paidavar ke bare me paat karne aaye the.usne pehle hi apna & Rambha ka jhutha naam likhwaya tha.bhala ho Goa ke uske dosto ka jo unhone bilkul asli dikhne vali farzi ID use muhaiyya karayi hui thi.ab use rambha ko khabar karni thi lekin ho sakta hai ki baad me police sare ilake me is waqt ki gayi phone calls ko khangale.use koi bahut mehfuz line khojni thi fone karne ke liye..haan!

Usne 1 truck me lift li & haraad ki or badha.haraad se thoda pehle 1 ganv tha jaha usne 1 daak khana dekha tha.vo us ganv se thoda aage utra..vo koi chance nahi le raha tha..agar truck driver ko vo yaad bhi raha to vo yehi kahega ki vo ganv se aage utra tha.daak khane ke andar ghusna utna aasan nahi tha jitna usne socha tha.purane andaz ki lohe ki chhado vali khidkiyan thi & darwaze pe bada sa tala.vo mayus ho vaha se ja hi raha tha ki uski nigah phus ke chhappar pe padi & agle hi pal ikka-dukka ghumte logo ki nazar bacha vo chhappar pe chadh gaya tha & fir pet ke bal let ke phus hata thodi der baad andar utar chuka tha.

“hello,rambha.kaha ho tum?”

“aap kaha hain?thik hai na aap?..jaldi aaiye na!mujhe kuchh bahut zaruri batana hai aapko..please aap fauran yaha aaiye.”

“kya batana hai & aaoon kaha?..sab thik to hai na?”

“haan,sab thik hai.par..par..offoh..aap aaiye na yaha?!”

“are magar batao to kaha?”,us tanav bhare mahaul me bhi deven ko hansi aa gayi.

Haraad & us daak khane vale ganv ke beech 1 rasta main road se utar ke andar jata tha.usi pe 1 ganv tha Bhumal.1 barsati nadi behti thi us taraf se jisme abhi utna pani nahi tha.barsaat ke aaspaas vo jagah badi khubsurat ho jati thi & nadi machhliyo se bhar jati thi.machhli marne valo ka majma laga rehta tha uske kinare.ab rambha ke hath vaha kaun si machhli lag gayi thi yehi dekhne deven vaha ja raha tha.1 late night bus service ki bus ko hath deke usne roka & usme savar ho gaya.jab vo bus me chadha to usme baithi savariyo ko koi kali kamiz & patloon pehna shakhs nahi balki pili check ki kamiz & kali patlun pehna chehre pe gamchha odhe dehati sa shakhs dikha.ye kamiz usne ganv ke 1 ghar ke bahar sukhte kapdo me se utha lit hi & gamchha use post office me hi pada mil gaya tha.uski kamiz abhi uske kandhe pe latke 1 jhole me thi joki kisi dakiye ne postoffice me rakh chhoda tha.

1 ghante baad vo bus se utra & bhumal ki or ja rahe raste pe paidal chalne laga ki tabhi samne se use kisi gadi ki headlights dikhi.vo muskurata khada ho gaya.gadi uske karib aayi & uski khidki ka shisha neeche hua,”haa..haa..ye kya huliya bana rakha hai!”,rambha hansne lagi.1 pal ko sumitra kio shakl nach uthi deven ki aankho ke samne..hanste waqt vo bilkul sumitra jaisi lag rahi thi,”..kya hua?”,rambha ne hansna band kiya & khud ko 1 tak dekhte deven se puchha.

“baad me bataunga.”,deven khidki ke paas aaya & uska matha chuma,”..ab batao kya dikhana chhati thi mujhe?”,rambha achanak sanjida ho gayi.sach to ye tha ki jabse vo bhumal aayi thi uske hosh-hawas ud gaye the.vo khush to baht hui thi lekin sath hi 1 anjana darr bhi uske dil me paida ho gaya tha.vo to deven ka huliya dekh use hansi aa gayi &1 pal ko vo sab bhul gayi thi.

“chaliye.”,deven baitha to rambha ne car ghumayi.

“tum yaha kaise aa gayi?”

“mera man nahi mana ki aapko akela chhodu lekin aapki baat mana karna bhi thik nahi lag raha tha.isi udhedbun me mujhe board dikha & mujhe yaha ki barsati nadi ki yaad aa gayi.uske bare me bahut suna tha.to socha ki use bhi dekh lu lekin darasal main aage badhna taal rahi thi.”,deven uski baat sun muskuraya.

“par tumhe mila kya hai?”

“vahi chal ke dekh lijiyega.”,koi 40 minute & drive karne ke baad vo dono bhumal pahunch gaye the.yaha bijli nahi thi & gharo me laltene jal rahi thi.nadi ki kal-2 ki aavaz bhi aa rahi thi.rambha gadi se utri & torch se rasta dikhate use le jane lagi.1 ghar kea age pahunch vo ruk gayi.us ghar ki chaukhat ke 1 kinare uske baramde me koi baitha tha.andhere me deven ko uski shakl nahi dikh rahi thi bas itna pata chal raha tha ki vo shakhs zamin pe chadar ya dushala odhe baitha hai.

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kramashah.......