पंडित & शीला compleet

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The Romantic
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Re: पंडित & शीला

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 08:15

पंडित & शीला पार्ट--37

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गतांक से आगे ......................

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उसके मुंह से गालियाँ भी सुलेमान को फूलों जैसी लग रही थी ..वो भी गली के कुत्ते की तरह से अपनी लम्बी जीभ निकाल कर उसकी चूत का नाप लेने में लगा हुआ था ..

नूरी का मुंह गोल सा होकर खुला हुआ था ..और सुलेमान उसके सामने लेट कर उसकी चूत को ऐसे चूस रहा था जैसे उसमे से ही उसे ऑक्सीजन मिल रही हो जीने के लिए ..




वो फिर उठा और उसने नूरी की चूत में लंड डालकर उसकी चुदाई करनी शुरू कर दी ..


वो मचलती हुई उसके नाम की माला जपने लगी ...


''ओह्ह सुलेमान…. अह्ह्ह्ह .....चोद ....साले ......और जोर से ......भेन चोद .....अह्ह्ह सुले ......मा न्न… ... ''




उसकी गीली चूत की गलियों से रस की बहार निकल कर फिर से उसके अन्दर एक और ओर्गास्म पैदा करने लगी ..पर तभी सुलेमान ने अपना लंड बाहर खींचा और उसे दिवार की तरफ मुंह करके खड़ा कर दिया और पीछे से उसकी गांड के छेद पर टिका कर एक जोरदार धक्का दिया और अपने रोकेट को उसकी गेलेक्सी के अन्दर पहुंचा दिया ...




नूरी की आँखे बोजिल सी हो गयी, इतना मजा तो उसे आज तक नहीं आया था ...पहले सुलेमान की जीभ उसकी चूत पर, फिर उसका लंड ...और अब उसका लंड उसकी गांड के अन्दर ...सब कुछ इतना अच्छा लग रहा था की उसका मन कर रहा था की ये सब कभी ख़त्म ही न हो ...


वो चुदती रहे ...
चुदती रहे ..................
बस चुदती रहे .................


और नीचे बैठे हुए इरफ़ान का ध्यान ऊपर ही था, जब बाप को पता हो की इस वक़्त उसकी बेटी की चुदाई हो रही है तो उसे चैन कैसे आ सकता है ..वो बेचैन सा होकर उठा और फिर से ऊपर की तरफ चल दिया ..नूरी के चीखने की आवाजें बाहर तक आ रही थी ..जिसे सुनकर उसे पता चल रहा था की उसे कितना मजा आ रहा है ..


अब तक दोनों के अन्दर का तूफ़ान अपने उफान पर पहुँच चुका था ..सुलेमान ने उसके मोटे मुम्मे मलते हुए उसकी गांड का बेन्ड और तेजी से बजाना शुरू कर दिया ..और उसकी थिरकन से नूरी ने भी और तेजी से नाचना शुरू कर दिया ..


और जैसे ही सुलेमान को एहसास हुआ की उसके लंड का पानी निकलने वाला है , उसने फिर से नूरी को सोफे पर लिटाया और उसके सेक्सी चेहरे की तरफ देखते हुए अपने लंड को मसलने लगा ...और देखते ही देखते, उसके लंड की पिचकारियाँ नूरी की छाती और चेहरे पर पड़ने लगी ...




''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ......नूरी ......मेरी जान .......अह्ह्ह्ह्ह्ह ....साली ........ले .....मेरा सार…ऱस .....निगल जा .....अह्ह्ह्ह्ह ...''


और नूरी भी अपनी चूत के ऊपर अपनी उँगलियों को रगड़ते हुए कब झड़ने लगी उसे भी पता नहीं चला , उसे तो तब एहसास हुआ जब उसकी उँगलियों पर उसके गर्म पानी की जलन अपना एहसास करवा रही थी ..


नूरी ने सुलेमान को अपनी तरफ खींच कर अपने ऊपर लिटा लिया ...और तभी उसकी नजरें दरवाजे के पीछे छुप कर सारा खेल देख रहे इरफ़ान पर पड़ी ..जिन्हें देखकर उसके एहसास का मजा दुगना हो गया .


थोड़ी देर तक पड़े रहने के बाद सुलेमान ने अपने कपडे पहने और दोबारा आने का वादा करके जल्दी से बाहर निकल गया ..उसके जाते ही दरवाजे के पीछे छुपा हुआ इरफ़ान नूरी के पास आकर बैठ गया ..


इरफ़ान : "बेटी ...ये सब मेरी वजह से ही हुआ है ..आज वो कुत्ता जो भी करके गया है वो मेरी नादानी की वजह से ही हुआ है ..''


नूरी ने अपने अब्बू को अपने ऊपर खींच लिया और बोली : "अरे नहीं अब्बू, आप ऐसा मत सोचो , अगर कोई भी बेटी होती तो अपने पिता की इज्जत के लिए यही करती ...हाँ , ये सच है की ये सब गलत था, पर मजा मुझे भी आ रहा था ...''


इरफ़ान (झल्लाते हुए) : "हाँ , वो तो मैं देख ही रहा था … ..''


नूरी (लाड प्यार से उनके सीने पर अपने मुम्मे रगड़ते हुए ) : "ओह्हो अब्बू ...आप भी न, अब मैं छोटी बच्ची नहीं रही, शादी हो चुकी है मेरी ..और ये चुदाई क्या होती है , मुझे भी पता है ..जैसे आपको मजा आता है न बाहर जाकर चोदने में, मुझे भी आता है, ऐसे अलग - 2 तरह के लंड लेने में ...पर आपकी बात अलग है ...आप जैसा स्टेमिना किसी में नहीं है ..''


इतना कहकर उसने अपने अब्बू के लंड के ऊपर फिर से हाथ फेरना शुरू कर दिया ...


थोड़ी देर लगेगी पर जल्दी तैयार हो जाएगा अब्बू का लंड , अगली चुदाई के लिए ..


और ये सोचते हुए उसने फिर से उनके कपडे उतारकर उनके लंड को मुंह में ले लिया ..और चूसना शुरू कर दिया ..

इरफ़ान ने पूरी रात अच्छी तरह से अपनी बेटी को चोदा ...


और अगले दिन हमारे पंडित जी जब रोज की तरह मंदिर में पूजा अर्चना कर रहे थे तो लाल रंग के सूट में सर पर चुन्नी डाले एक लड़की उनके पास आई और बोली : "पंडित जी ...''


पंडित ने उसकी तरफ देखा , वो तकरीबन 20-22 साल की जवान लड़की थी ..गोरी-चिट्टी, सुन्दर ..



पंडित जी ने अच्छी तरह से ताड़ने के बाद कहा : "जी कहिये ...''


लड़की उनके और करीब आई और धीरे से बोली : "पंडित जी ...आपने मुझे पहचाना नहीं ..''


पंडित जी को उसकी बात सुनकर ताज्जुब हुआ ..वो उसके चेहरे को और गोर से देखने लगे ..उसका चेहरा उन्हें जाना पहचाना सा लगा ..पर ठीक से याद नहीं आ पा रहा था की कौन है वो लड़की ..


पंडित : "माफ़ कीजिये ..मैंने नहीं पहचाना आपको ..''


लड़की रेहेस्यमयी हंसी हँसते हुए बोली : "क्या पंडित जी ...आपकी यादाश्त इतनी कमजोर कैसे हो सकती है ..जबकि आपका लंड इतना ताकतवर है ..''


उसकी बात सुनते ही पंडित जी के पैरों तले से जमीन निकल गयी ...उनके हाथ में पूजा की थाली गिरते -२ बची ..पंडित जी अपने दिम्माग पर जोर डालने लगे ..आखिर कौन है ये लड़की जो उनके बारे में इस तरह की बातें कर रही है ..


पंडित जी के चेहरे पर आ रहे भाव देखकर आखिर लड़की ने ही बोलना शुरू किया : "ओहो पंडित जी ...घबराइए नहीं ..हम वैसे तो एक दुसरे को नहीं जानते पर एक दुसरे को चुदाई करते हुए देखा जरुर है ..याद है वो पार्क में उस दिन ..मैं अपने बॉयफ्रेंड के साथ थी और आप के साथ भी एक लड़की थी ...और ...''


'ओ तेरी माँ की चूत ....तो ये वो लड़की है ...' पंडित ने मन ही मन सोचा ...
(आप सभी को याद नहीं आ रहा है तो आप अपडेट नंबर 87-91 तक दोबारा पड़ ले )



उस वक़्त मंदिर में काफी भीड़ थी, इसलिए पंडित जी उसकी बात का कोई जवाब नहीं दे पाए ...और वो जाकर फिर से जाकर दुसरे भक्तों के लाये प्रसाद का भोग चडाने लगे .. पर उनका सारा ध्यान उस लड़की की तरफ ही था ..वो एक कोने में जाकर चोंकड़ी मार कर बैठ गयी ..


आधे घंटे में सारे भक्त चले गए ..और पंडित जी भी फ्री हो गये. .उन्होंने देखा की वो लड़की अभी तक वहीँ बैठी है ..पंडित जी ने जैसे ही उसकी तरफ देखा वो उनके पास आ गयी ..

पंडित जी ने अपनी नजरें चुरा ली और अपने कमरे की तरफ चलने लगे ..और वो लड़की बिना कुछ कहे उनके पीछे -२ चलती हुई उनके कमरे तक आ गयी ..और सीधा जाकर उनके बेड पर बैठ गयी ..


और उनके कहे बिना उसने बोलना शुरू कर दिया : "पता है , आपको ढूँढने के लिए पिछले दस दिनों से मैंने कितने मंदिर छान मारे ..पुरे इलाके में जितने भी बड़े और छोटे मंदिर है , उसमे जाकर मैंने आपको ढूंढा ..और आखिर में जाकर आप आज मिले हैं मुझे, यहाँ ...''


पंडित जी उसकी तरफ टकटकी लगाये हुए देखते रहे ...जैसे पूछना चाह रहे हो 'आखिर क्यों ढून्ढ रही थी मुझे '..


वो आगे बोली : "देखिये पंडित जी ...मैं आपसे सीधी बात करती हु ..मेरा नाम प्रियंका है ..और मैं संगम विहार में रहती हु ..''


उसका नाम सुनते ही पंडित जी को भी उसका नाम याद आ गया यही नाम बोलकर उसका बॉयफ्रेंड उसे चोद रहा था ..


प्रियंका : "पंडित जी ..उस दिन जो लड़का मेरे साथ था पार्क में ..वो मेरा बॉयफ्रेंड बद्री है ..और वो एक ऊँचे घराने का लड़का है ..उसने मेरे साथ एक मंदिर में शादी का नाटक किया था और भगवान् के सामने मेरी मांग में सिंदूर भरकर मुझे अपनी पत्नी का दर्जा दिया था, पर पिछले दो महीने में उसने मेरे शरीर से खेलने के अलावा और कुछ नहीं किया , अपने फार्म हाउस , दोस्तों के फ्लेट्स , और एक दो बार तो मेरे घर आकर भी मेरे साथ उसने वो सब किया जो आपने उस दिन पार्क में देखा था, वहां भी उसने तीन - चार बार मेरे साथ सेक्स किया है ..''


इतना कहकर वो रोने जैसी हालत में आ गयी ..


प्रियंका : "और अब वो कमीना मेरे साथ शादी करने से इनकार कर रहा है ..मेरे पास कोई सबूत भी नहीं है की उसने मंदिर में मेरे साथ शादी की थी ..मेरी एक वकील दोस्त ने कहा की अगर मंदिर का पुजारी गवाही दे तो बात बन सकती है और उसके खिलाफ मुकदमा चलकर हम उसे मजबूर कर सकते हैं , पर उस दिन तो वो वाले मंदिर में कोई नहीं था, इसलिए मैं आपको ढून्ढ रही थी, अगर आप ये गवाही दे दो की आपके सामने हमारी शादी हुई थी तो मेरी लाईफ बच सकती है ..वरना मुझमे और बाजारू औरत में कोई फर्क नहीं रह जाएगा ...''


पंडित : "तुमने ऐसा सोच भी कैसे लिया की तुम्हारे लिए मैं झूटी गवाही दे सकता हु ..और मैं क्यों पडू तुम्हारे इन झंझटो में ...''


पंडित का इतना कहना था की प्रियंका उठी और पंडित जी के पैरों में आकर लिपट गयी : "पंडित जी ...प्लीस ...आप समझने की कोशिश करो ..मेरी लाईफ का सवाल है ..उस दिन जब वो लड़की चुदते हुए आपको पंडित जी कह रही थी, वही बात मेरे जहन में अटक गयी थी ..आपकी वेश भूषा भी मंदिर के पंडितों जैसी थी ..इसलिए मैं आपको इतने दिनों से ढूंढ रही थी ..आप अगर मेरी मदद नहीं करेंगे तो कौन करेगा ...''


और इतना कहकर वो रोने लगी ...पंडित जी को तो आप जानते ही हैं, वो किसी लड़की का रोना नहीं देख सकते ..


उन्होंने उसके कन्धों से पकड़कर उसे ऊपर उठा लिया ..उसके कंधे से शर्ट खिसक जाने से उसकी ब्रा के प्लास्टिक स्ट्रेप नजर आ रहे थे ..उन्होंने आज तक काफी महिलाओ और लड़कियों को ऐसी स्ट्रेप वाली ब्रा पहने हुए देखा था मंदिर में , पर कभी भी ऐसी ब्रा को उतारने का मौका नहीं मिला था उन्हें ..

उन्होंने अपने हाथ की उँगलियों से उसकी ब्रा के प्लास्टिक स्ट्रेप को छु लिया ...जिसे प्रियंका ने भी साफ़ महसूस किया ..


प्रियंका : "आप चिंता मत करिए पंडित जी ...आपको ज्यादा कुछ नहीं करना है ..मैं अपनी वकील दोस्त के जरिये उसपर ऍफ़ आई आर दायर कर रही हु और गवाही के रूप में आपका नाम , एड्रेस और नंबर दे रही हु ..अगर कभी पुलिस स्टेशन में जाना पड़े तो प्लीस मेरी खातिर चले जाना ..''


पंडित : "पर, मुझे उस लड़के के खिलाफ झूठी गवाही देने पर क्यों अमादा हो ..''


प्रियंका : "क्योंकि ऐसे लडको को सबक जरूर मिलना चाहिए .उसने जो कुछ भी मेरे साथ किया, वो किसी और के साथ भी कर सकता है ..इसलिए ऐसे लड़के के खिलाफ झूठी गवाही देना कोई गुनाह नहीं है ..और वैसे भी, आपने तो देखा ही है न उसे मेरे साथ सेक्स करते हुए ..वो जब आपको देखेगा तो उसे भी याद आ जाएगा की उसने आपके सामने कैसे मुझे पार्क में चोदा था ..''


चोदम चुदाई की बातें ये लड़की कितनी आसानी से कर रही थी ..आजकल की लड़कियां काफी आगे निकल चुकी है . .


पंडित जी को उसकी उस दिन की चुदाई याद आ गयी ..कैसे वो उन्हें देखकर मुस्कुरा रही थी ..अपनी चूत में लंड डलवाकर वो अपनी हिलती हुई ब्रेस्ट पंडित जी को कैसे दिखा रही थी ...और ये सोचते हुए पंडित जी की आँखे अपने आप उसकी ब्रेस्ट पर जा चिपकी ..


पंडित जी की निगाह्हों की भाषा प्रियंका ने भली भाँती समझ ली ..उसे भी आज तक पंडित जी का वो लम्बा लंड याद था जिससे चुदकर वो लड़की मजे से चुदवा रही थी ..


प्रियंका : "अच्छा पंडित जी ...एक बात तो बताइए ...वो लड़की कौन थी ..जिसे उस दिन आप ...पार्क में ..अपने लम्बे लंड के स्पेशल दर्शन दे रहे थे ..''


इतना कहकर वो जोर -२ से हंसने लगी ..


पंडित जी का चेहरा शर्म से लाल हो उठा ..उनसे कुछ बोला ही नहीं गया ..


प्रियंका : "आप तो शरमा रहे हो पंडित जी ..मैंने लड़की होते हुए भी अपनी साड़ी बातें आपको आसानी से बता दी और आप मुझे बताने में ऐसे बिहेव कर रहे हैं जैसे मैं ये सब किसी को बताने जा रही हु ...''


पंडित : "थी कोई ...मेरी चाहने वाली ..''


उनकी बात सुनकर प्रियंका बिलकुल उनके चेहरे के पास आकर बोली : "आपके हथियार को देखकर तो कोई भी आपका चाहने वाला बन जाएगा ...पंडित जी ..''


पंडित जी को उसका इस तरह से बोलना थोडा अजीब सा लगा ..वो सोचने लगे की ये लड़की अपनी लाईफ को सुधारने आई है या उनसे चुदवाने ...


पर जो भी था, पंडित जी को इन सबमे प्रियंका एक नए चुदाई के माल के रूप में ही नजर आ रही थी ..


उन्होंने भी सोच लिया की वो प्रियंका की हेल्प जरुर करेंगे और ''मजदूरी'' के रूप में उसकी चूत भी लेकर रहेंगे ..


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Re: पंडित & शीला

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 08:16

पंडित & शीला पार्ट--38

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गतांक से आगे ......................

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पंडित जी को गहन चिंता में डूबा हुआ देखकर प्रियंका ने उनसे पूछा : "अच्छा पंडित जी ...ये तो बताइए आपको शादी हो गयी है क्या ..?"


पंडित जी ने ना में सर हिला दिया


प्रियंका : "ह्म्म्म्म ...तब तो मैं समझ ही सकती हु ....आप जैसा जवान और सुन्दर शरीर का मालिक किसलिए पार्कों में जाकर चुदाई करता है ...''


उसकी बात का पंडित जी के पास को जवाब नहीं था ..


प्रियंका (बेड के गद्दे को दबाकर देखते हुए ) : "वैसे ....ये जगह भी बुरी नहीं है पंडित जी ...आप इतना रिस्क लेकर पार्क में जाकर क्यों कर रहे थे ..''


अब पंडित जी उसको क्या बताते ..इस बेड पर उन्होंने कितनी चूतों को मसला है, उन्हें भी याद नहीं है ..बस वो प्रियंका के सामने शेखी मारकर ज्यादा चोदु प्रसाद नहीं बनना चाहते थे ..वो चाहते थे की प्रियंका उन्हें बस एक आम इंसान जैसा ही समझे ..ना की तरकीबे लड़ाकर चुदाई करने वाला ..


और प्रियंका के मन में पंडित जी की छवि बन भी ऐसी रही थी ..वो सोच रही थी की ये पंडित कितना डरपोक किस्म का है ..अपने पास कमरा होते हुए भी ये दूर जाकर पार्क में चुदाई कर रहा था ..जैसे इसको दर हो की उसके कमरे में चुदाई करते हुए कोई देख ना ले ..


पर वो बेचारी कितनी गलत थी ..


वो कुछ और कहना चाह रही थी की तभी बाहर मंदिर से किसी ने पंडित जी को पुकारा ..और पंडित जी बाहर आ गए ..उनके पीछे -२ प्रियंका भी बाहर निकल कर अपने घर चली गयी ..


रास्ते में जाते हुए वो बहुत खुश थी ..उसने जैसा सोचा था ठीक वैसा ही हुआ था .गली के कोने में खड़ी हुई कार में बैठते ही उसने फ़ोन उठाया और कॉल लगाया


प्रियंका : "हाय शिप्रा ...काम हो गया ...येस्स ....अभी आकर पूरी बात बताती हु ..''


इतना कहकर उसने कार स्टार्ट की चल दी ..


और एक बड़े से घर के सामने आकर उसने कार रोकी और भागती हुई अन्दर पहुंची ..


बेडरूम में एक 25 साल की खूबसूरत लड़की बेचैनी से टहल कर प्रियंका का वेट कर रही थी ..और जैसे ही वो अन्दर आई उसने उसे गले से लगा लिया और अपने बेड पर बिठा कर सवालों की झड़ी लगा दी ..


''बता न ...क्या कहा ..क्या बात हुई ..कहाँ मिला आखिर वो ...''


प्रियंका : "अरे रुक जा मेरी जान ...धीरे - 2 सब बताती हु ..''


दरअसल ये थी प्रियंका की वकील दोस्त शिप्रा, जो अभी ताजा - २ वकील बनी थी ..और किसी फर्म में प्रेक्टिस कर रही थी ..


और ये दोनों बचपन की दोस्त है और एक दुसरे से कोई भी बात नहीं छुपाती...और अपने यार से चुदते हुए जब उसने पंडित जी की चुदाई देखि थी वो भी इसने शिप्रा को बता दिया था ..और तब से दोनों यही सपना देख रही थी की पंडित जी का लंड कैसे लिया जाए ..और इसके लिए शिप्रा के कहने पर प्रियंका ने वो कहानी बनायीं ..और पंडित जी को ढूँढने निकल पड़ी ..वैसे वो कहानी में सच्चाई भी पूरी थी ..


प्रियंका के बॉयफ्रेंड ने उसके साथ मंदिर में शादी भी की थी और उसे जी भर कर चोदा भी था, पर शादी के लिए हमेशा टाल - मटोल करता रहता था ..


और दूसरी तरफ लंड की प्यासी प्रियंका को चुदाई के साथ -2 बद्री का पैसा भी काफी प्यारा था ..वो हमेशा उसके लिए महंगे तोहफे और अंगूठियाँ लाता था ..और कई बार तो प्रियंका ने उससे पैसे भी लिए थे, जिनका कोई हिसाब नहीं था ..


और ये सब बातें शिप्रा अच्छी तरह जानती थी ..क्योंकि उसकी चुदाई की बातें सुनकर वो भी बुरी तरह से गर्म होकर एक दुसरे को पूरा मजा देती थी ..दोनों लेस्बियन सेक्स पार्टनर थे ..


उन्होंने एक प्लान बनाया ..बद्री को फंसाकर उससे मोटा पैसा एंठने का ..और इसके लिए शिप्रा के कहने पर ही प्रियंका ने पंडित जी को मनाया था ..ताकि बद्री पर केस चलाकर उसे फंसाया जा सके और उससे मोटी रकम ऐंठी जा सके ..


और दस दिनों की मेहनत बाद आखिरकार प्रियंका को पंडित जी मिल ही गए ..और उसने उन्हें इमोशनल करके अपने साथ कर लिया ..


उसका कोई इरादा नहीं था बद्री से शादी करने का ..उसके साथ वो चुदाई के पुरे मजे तो ले चुकी थी ..बस आखिरी बार उसे केस में फंसा कर उससे पैसे लेने थे उसे, अपनी वकील दोस्त शिप्रा की मदद से ..


पर वो दोनों ये नहीं जानती थी की वो जिसे भोला भला पंडित समझ रही हैं वो असल में उनका बाप है इन सब मामलो में ..


खेर ...जैसे ही प्रियंका ने पंडित जी से मुलाकात से लेकर बाद तक का सार वाक्य बताया शिप्रा की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा ..उसने ख़ुशी के मारे प्रियंका को फिर से अपने सीने से लगा लिया ..और उसके होंठों को चूम लिया ..

शिप्रा : "वाव ...अब मजा आयेगा ...इसे कहते हैं , एक तीर से दो शिकार ..अब वो बद्री भी फंसेगा ..और साथ में पंडित जी से अपनी सेवा पानी भी करवा लेंगे ...''


इतना कहकर वो दोनों जोर से हंसने लगी ..


शिप्रा : "अच्छा ...बता ना ...देखने में कैसा है ये पोंगा पंडित ...''


प्रियंका : "उम्म्म ....देखने में तो काफी सही है यार ...उसे देखकर लगता ही नहीं की वो पंडित है ..बस उसके कपडे ही बताते हैं की उसका काम क्या है ..वर्ना वो तो किसी हीरो जैसा लगता है ..''


शिप्रा : "पोर्न मोवी के हीरो जैसा लगता है क्या ...''


इतना कहकर दोनों ने फिर से हँसना शुरू कर दिया ..


प्रियंका : "पर यार, सच में ..उस दिन जब वो उस लड़की को पार्क में चोद रहे थे न तो उनके लंड का साईज देखकर तो मेरे होश ही उढ़ गए थे ..इतना लम्बा और मोटा था न ..सच में ..अगर बद्री न होता वहां पर तो मैं जाकर उनके लंड को अपने अन्दर ले लेती ..''


उसकी बातें सुनकर हमेशा की तरह शिप्रा ने अपनी चूत के ऊपर अपनी उँगलियों को मसलना शुरू कर दिया ..उसने एक पतली सी टी शर्ट और लोअर पहना हुआ था ..अन्दर कुछ भी नहीं था ..उसकी उँगलियाँ लोअर के गीले कपडे पर फिसल रही थी ..


प्रियंका : "वो पीछे से उसकी चूत मार रहे थे ..और उनके हर झटके से वो लड़की ऊपर तक उछल रही थी ..''


शिप्रा ने अपनी आँखे बंद कर ली ...जैसे वो सब मूवी की तरह दिख रहा हो उसे ..


प्रियंका और पास आई और अपने हाथ को सीधा शिप्रा की चूत के ऊपर रख दिया ..और उसके हाथ को वहां से हटा कर अपनी चूत पर ले आई ..और दोनों एक दुसरे की चूतों को रगड़ने लगे ..और शिप्रा ने प्रियंका के होंठों को चूसना शुरू कर दिया



प्रियंका : "मुझे तो महसूस हो रहा था की वो मुझे चोद रहे हैं ...पार्क में ..और कोई नहीं है वहां ..मैं पड़ी हुई हूँ ...नंगी ...घांस पर ..और वो मुझे घोड़ी बना कर बुरी तरह से चोद रहे हैं ...अह्ह्ह्ह्ह्ह ''


बस इतना बहुत था शिप्रा के अन्दर के जानवर को जगाने के लिए ..


प्रियंका जानती थी की अपनी सहेली को कैसे उत्तेजित करना है ..और उसने वो कर दिया था

अगले ही पल शिप्रा ने पागलों की तरह से अपने सारे कपडे उतार फेंके ..और आनन् फानन में प्रियंका को भी नंगा कर दिया

शिप्रा ने प्रियंका के अपने सामने बिठाया और उसकी आँखों में देखते हुए अपनी पेनी जीभ निकाल कर उसकी उफान खा रही चूत के ऊपर लगाकर उसे चखने लगी ..

अपनी छूट पर जीभ लगते ही प्रियंका के पुरे शरीर में उत्तेजना की एक लहर उठती चली गयी ..


प्रियंका ने शिप्रा के बालों को पकड़कर अपनी चूत के ऊपर रगड़ना शुरू कर दिया ..उसके दिमाग में तो बस पंडित जी ही घूम रहे थे जो उसके साथ वो सब कर रहे थे जो उस दिन उसने पार्क में देखा था ...

...और उसे बेड पर फेंक कर सीधा उसकी टांगो को दोनों तरफ फेलाया और अपना मुंह उसकी रसीली चूत के अन्दर दे दिया ..




''अह्ह्ह्ह्ह्ह .....ओह पंडित जी .....धीरे करो ...''


प्रियंका ने एक जोरदार सिसकारी मारी ...


और ''पंडित'' बनी हुई शिप्रा को देखकर अपनी उँगलियाँ खुद चूसने लगी ..


पंडित के रोल में शिप्रा ने उसकी चूत को चूसते हुए पूरी तरह से सुखा दिया ...प्रियंका मचलती रह गयी ..और वो ''पंडित'' सारी मलाई खा गया ..


और उसने प्रियंका की दोनों टांगो को खोलकर ऊपर लहराया ..और खुद उसके बीच आ गयी ..जैसे उसकी चूत में ''लंड'' डालने की तेयारी हो ..और उसने किया भी ऐसा ही ..नीचे झुक कर अपनी चूत के होंठ जैसे ही शिप्रा ने प्रियंका की चूत के होंठों से लगाए ..दोनों एक जोरदार सीत्कार मारकर चिल्लाने लगी ...


''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह .......उम्म्म्म्म .......चोदो .....मुझे ...पंडित जी .....अह्ह्ह्ह .....येस्स .....डालो ....अन्दर ...तक ....मेरी चूत के .....अह्ह्ह्ह्ह ...''


पंडित बनी हुई शिप्रा भी फुफकारने लगी : "ले साली ......ले मेरा लंड ....अह्ह्ह्ह्ह ......आज तेरी चूत को फाड़ डालूँगा ...अह्ह्ह्ह ...ये ले ...''


अब तक दोनों की गीली चूत एक दुसरे से लिपटकर बुरी तरह से गीली हो चुकी थी ...और वो सारी चिकनाहट उनके धक्कों को और ज्यादा एनेर्जी दे रही थी ..शिप्रा ने अपनी चूत के दाने को प्रियंका के पुसी लिप्स से रगड़ना शुरू कर दिया ..उसकी क्लिट अब किसी छोटे लंड जैसी हो चुकी थी ..और वो उससे प्रियंका की चूत को रगड़ कर चोद रही थी ..


पुरे बेडरूम में दोनों की सिसकियाँ फेली हुई थी ...


और पांच मिनट तक रगड़ने के बाद अचानक शिप्रा ने प्रियंका को 69 के एंगल में लिया और दोनों एक दुसरे की कटोरियों से आइसक्रीम खाने लगे ..


शिप्रा की लम्बी क्लिट को प्रियंका ने लंड की तरह से चूसना और चबाना शुरू किया तो प्रियंका की चूत के अन्दर शिप्रा की लम्बी जीभ किसी लंड की तरह जाने लगी ..


दोनों ने एक जोरदार गर्जन के साथ अपनी -२ मलाई एक दुसरे के मुंह में निकाल दी ..


और गहरी साँसे लेते हुए दोनों बेड पर लेटे रहे ..


ये थी इन दोनों की कहानी, और अक्सर ये दोनों ऐसा करती थी ..ऐसा नहीं था की शिप्रा ने पहले चुदाई नहीं करवाई थी ..पर उसका कोई बॉयफ्रेंड नहीं था जो रोज उसकी चूत की सेवा कर सके ..इसलिए वो अक्सर रोल प्ले करते हुए कभी प्रियंका का बॉयफ्रेंड, कभी उसका भाई और कभी बाप बनकर उसकी इसी तरह से चुदाई करती थी ..और आज तो पंडित जी बनकर उसने प्रियंका को चोदा था ..


थोड़ी देर लेटने के बाद वो अपनी अगली योजना के बारे में बातें करने लगे ..


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Re: पंडित & शीला

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 08:17

पंडित & शीला पार्ट--39

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गतांक से आगे ......................

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अगले दिन प्रियंका और शिप्रा ने अपनी योजना के अनुसार पुलिस स्टेशन जाकर शादी का झांसा देकर शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए बद्री के खिलाफ IPC-375/376 के अंडर FIR करवा दी ..जिसे कानून आजकल ''रेप'' का दर्जा देता है ..इस धारा का उचित और अनुचित प्रयोग आजकल बहुत ज्यादा हो रहा है ..


खेर , पुलिस ने बद्री को स्टेशन में बुलाया पूछताछ के लिए, वो पहले तो प्रियंका के इस कदम से घबरा गया क्योंकि उसे इसकी बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी, पर अपने दोस्तों से सलाह मशवरा करने के बाद अपने एक वकील को लेकर वो पुलिस स्टेशन गया , वहां प्रियंका और शिप्रा को भी बुलाया गया, दोनों पक्षों में काफी कहा सुनी हुई ..बद्री पहले तो साफ़ मुकरता रहा शादी की बात से, और जब प्रियंका ने कहा की उसके पास गवाह भी है और वो भी मंदिर के पंडित जी ..तो वो थोडा चोंक सा गया ..क्योंकि वो भी जानता था की वहां उस वक़्त कोई भी पंडित नहीं था ..उसने गवाह को सामने लाने को कहा , इंस्पेक्टर ने पंडित जी को पुलिस स्टेशन में बुलाया , जिन्हें देखकर बद्री को भी याद आ गया की ये तो वही पंडित है जो उस दिन खुद भी चुदाई कर रहा था और उन्हें भी चुदाई करते हुए देख रहा था, वो समझ गया की प्रियंका ने उन्हें झूटी गवाही देने के लिए राजी कर लिया है ..अब वो भी क्या कहता , अगर वो बोलता की इसने शादी तो नहीं करायी पर चुदाई करते हुए जरुर देखा है, तब भी वो ही फंसता ..काफी बहस बाजी हुई दोनों तरफ से ..


इंस्पेक्टर भी समझ चूका था की ये मामला बिना वजह खींचा जा रहा है, इसलिए दोनों को आपस में ही सलाह करके सेटलमेंट करने का सुझाव दिया गया ..


बद्री अपने वकील के साथ शिप्रा और प्रियंका को लेकर एक कमरे में गया ..और अन्दर जाते ही शिप्रा ने मुंह फाड़ कर एक ही बार में पचास लाख रूपए मांग लिए ..जिसे सुनकर बद्री और उसके वकील की गांड फट गयी ..काफी देर के नेगोसिएशन के बाद आखिर मामला 25 लाख पर आकर रुका ..और एक हफ्ते में पेमेंट करने की बात की गयी और उसके बाद FIR वापिस लेने की भी ..


प्रियंका और शिप्रा ने जितना सोचा था उससे ज्यादा ही मिला था उन्हें ..और इसलिए वो दोनों काफी खुश थी .


बाहर आकर उन्होंने पंडित जी को अपने साथ लिया और अपनी गाडी में बिठा कर अपने घर की तरफ चल दी ..


प्रियंका : "थेंक्स पंडित जी ..आपकी वजह से आज सब कुछ हो सका ...आपका बहुत -२ धन्यवाद ...''


पंडित जी को वैसे तो उनकी योजना का सार पता चल ही चूका था , क्योंकि जब आखिर में दोनों पक्ष अन्दर बाते कर रहे थे तो बाहर इंस्पेक्टर उनसे कह रहा था की 'पंडित जी ..देखना पैसे लेकर ये मामला यहीं रफा दफा हो जाएगा ...लड़की देखने में ही इतनी चालू लग रही है ..'


और अब उनकी ख़ुशी देखकर उन्हें यकीन हो चला था की इंस्पेक्टर की बात सही थी .


पंडित ने उनके मन की बात निकलवाने के लिए कहा : "यानी ..वो तुमसे शादी करने के लिए मान गया ..''


उनकी बात सुनकर प्रियंका और शिप्रा एक दुसरे की तरफ देखकर हंसने लगी ..


शिप्रा : "पंडित जी ..आप बहुत भोले हैं ..आपको क्या लगता है, ये सब इसने शादी के लिए किया था ..हम तो ये पहले से जानते थे की वो बड़े घर की औलाद इस जैसी छोटे घराने की लड़की से कभी शादी नहीं करेगा वो सिर्फ इसका यूज़ कर रहा था, इसके जिस्म से खेल रहा था ..इसलिए हमने उसे ऐसे केस में फंसा कर पैसे निकलवाने की योजना बनायीं थी ..और वो मान भी गया है .''


पंडित ने उनको ज्ञान देना चाहा : "पर ये बात अगर प्रियंका जानती थी तो इसने अपनी तरफ से पहल क्यों की ..क्यों उसे अपने शरीर से खेलने दिया ..औरत का असली गहना उसकी इज्जत होती है, और वो इसने उसके सामने उतार दिया, और अब शादी के बदले उसके पैसों से उस इज्जत को ढकने की कोशिश कर रही हो ..ये तो गलत है ..''


पंडित की बात सुनकर वो दोनों चुप रहे , क्योंकि वो दोनों भी जानटी थी की पंडित जी की बात सही है ..पंडित ने आगे कहा : "तुम दोनों ने अपनी सहमति से एक दुसरे के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाये, तो इसमें रेप कहाँ से आ गया, जिस तरह से उसने तुम्हारे शरीर का इस्तेमाल किया है अपनी मस्ती के लिए, तुमने भी तो वही सब कुछ किया है ..फिर रेप सिर्फ उसने कहाँ किया, वो तो तुमने भी किया न उसके साथ ..''

शिप्रा ने उन्हें समझाया : "पंडित जी , आपकी बात सही है , पर कानून के सामने ये सब दलील बेकार है ..और क़ानून लड़की की बात सुनता है, लड़के की नहीं ..हमारे देश के कानून का सही के साथ-२ गलत लोग भी इस्तेमाल करते हैं ..जो अभी हम कर रहे हैं ..हमें पता था की वो इसके साथ शादी कभी नहीं कर सकता इसलिए हमने ये सब नाटक किया, पर जो भी है, आपका फायेदा भी तो पक्का है इन सबमे ...''


पंडित : "मेरा फायेदा ...कैसे ...?"


वो दोनों एक दुसरे की तरफ देखकर मुस्कुराये और बोले : "वो हम घर चलकर बताएँगे ...''


और थोड़ी देर में ही शिप्रा की शानदार कोठी के आगे कार रुकी और तीनो बाहर निकल कर उसके कमरे की तरफ चल दिए, शिप्रा के पापा एक बहुत बड़े वकील थे और ज्यादातर घर रात लेट ही आते थे , उसकी माँ का निधन हो चूका था, एक भाई था जो लन्दन में पढाई कर रहा था ..इसलिए घर पर अभी कोई नहीं था .


अपने बेडरूम में पहुँचते ही शिप्रा ने दोनों को सोफे पर बिठाया और बोली : "देखिये पंडित जी , ये सब आपकी हेल्प के बिना होना मुश्किल था, इसलिए हम आपको भी बीच में से हिस्सा देंगे ..पुरे 5 लाख रूपए ..और बाकी हम दोनों आपस में रखेंगे ..''


पंडित जी ने इतने पैसे एक साथ आज तक नहीं देखे थे ..वो जानते थे की ये गलत है, पर वो भी कौन सा दूध के धुले थे, उन्होंने भी अपनी लाईफ में काफी बुरे काम किये थे, और अभी भी उनकी झूठी गवाही के बल पर ही वो पैसे उन दोनों को मिल रहे थे, वो अगर इनकार करते तो उनका ही घाटा था, इसलिए उन्होंने उनकी बात मान ली, बिन बुलाये घर पर आती माया को इनकार करना हर किसी के बस की बात नहीं होती ..

शिप्रा अपने कपडे बदलने के लिए बाथरूम में चली गयी ..


उसके जाते ही प्रियंका खिसक कर पंडित जी के पास पहुँच गयी और बोली : "पंडित जी ..आपके लिए ये सब जो हम कर रहे हैं ये तो बस असल है ...असली बोनस तो और कुछ है ..''


उसका एक हाथ अपनी शर्ट के अन्दर जाकर अपने गले की स्किन को मसलने लगा ..पंडित को उसका इशारा समझ में आ गया, पर वो कुछ न बोला ..

सफ़ेद रंग की शर्ट के अन्दर उसकी पिंक कलर की ब्रा की झलक पंडित जी को साफ़ दिखाई दे रही थी ..और उसके निप्पल भी चमकने लगे थे अन्दर से ..

प्रियंका ने अपना एक हाथ उनकी जांघ पर रखा और बोली : "एक बात सच -२ कहना चाहूंगी पंडित जी ..आपको ढूँढने का मकसद सिर्फ आपसे गवाही दिलाना नहीं था ....जिस दिन से आपको उस लड़की के साथ पार्क में देखा है, मुझे तो उसके बाद की हर चुदाई में आपका ही लंड याद आता रहा ..आप जिस तरह से अपने लम्बे लंड से उसकी चुदाई कर रहे थे, बस वही सोचकर मैं कितनी बार झड चुकी हु ...और अब मुझसे नहीं रहा जाएगा ...''

कहते हुए उसने पंडित जी का घंटा पकड़ लिया , उनकी धोती के ऊपर से ही ..

पंडित जी को प्रियंका से इतनी जल्दी ऐसी उम्मीद नहीं थी ...वो तो सोच रहे थे की इसे चोदने में अभी कुछ टाइम लगेगा, पर वो ये नहीं जानते थे की आग उसकी तरफ से ज्यादा लगी हुई है ..

वो थोडा भाव खाना चाहते थे ...इसलिए उन्होंने उसका हाथ पीछे कर दिया. और बोले : "वो मेरा अपना निजी मामला है ..मैं उसके साथ चुदाई कर रहा था, इसका मतलब ये नहीं की मैं हर किसी के साथ शुरू हो जाऊंगा ..''

पंडित जी हर बार की तरह अपने शिकार को तडपाना चाहते थे ..

तभी पीछे से शिप्रा की आवाज आई : "अरे प्रियंका ...रहने दे न ..अगर इनका मन नहीं है तो क्यों जबरदस्ती कर रही है ..''

उन्होंने पलट कर देखा, वो एक साटन की बाथ रॉब पहन कर बाहर निकल रही थी , उसके शरीर पर उसके अलावा कुछ भी नहीं था, लम्बी और नंगी टाँगे साफ़ चमक रही थी ..

शिप्रा : "तुम मेरे पास आओ प्रियंका ...और हमेशा की तरह वही करो ..जो करती हो ..''

दोनों ने आँखों ही आँखों में इशारा किया और प्रियंका भी मस्ती भरी चाल के साथ उसकी तरफ चल दी ..

पंडित जी बेचारे हक्के - बक्के से होकर वहीँ खड़े रहे, जैसे कहना चाहते हो 'अरे ...मेरा ये मतलब नहीं था ...'

पर अब जैसे देर हो चुकी थी ..

प्रियंका और शिप्रा एक दुसरे के गले लगकर जोर से स्मूच कर रहे थे ..जिसे देखकर पंडित जी का लंड उनकी धोती में तम्बू बना रहा था ..उनकी उपस्थिति से उन दोनों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था ..वैसे भी वो ये सब उन्हें दिखाने के लिए ही तो कर रही थी ..

पंडित जी चाहते तो वहां से जा सकते थे ..पर वो नहीं गए , क्योंकि वो जानते थे की इस पुरे खेल का अंत चुदाई के साथ ही होगा .


प्रियंका ने अपनी शर्ट के बटन खोलकर उसे उतार दिया ,पिंक ब्रा और ब्लू जींस में वो किसी मॉडल की तरह लग रही थी , उसने धीरे से शिप्रा की बाथ रॉब की गाँठ भी खोल दी ..पर उसे उतारा नहीं ..शिप्रा के मोटे मुम्मों की झलक अब पंडित जी को साफ़ दिखाई दे रही थी ..पंडित जी किसी बुत्त की तरह, बिना पलकें झपकाए हुए उसके पुरे दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे ..


इसी बीच प्रियंका ने अपनी ब्रा को खुद ही खोल कर पंडित जी की तरफ उछाल दिया , जिसका स्ट्रेप सीधा पंडित जी के कान में जाकर फंस गया और वो वहीँ लटक कर रह गयी ..पंडित जी ने लटकी हुई ब्रा को पकड़ा तो उन्हें उसकी गर्मी का एहसास हुआ , अन्दर की तरफ हाथ लगाते ही उनके हाथ पर गुदाज मुम्मो की गर्माहट महसूस हुई ..जिसे पाकर उनका रोम - २ खड़ा हो गया .


प्रियंका का गोरा जिस्म और मोटे मुम्मे देखकर पंडित जी के मुंह में पानी आ गया, और उसके ऊपर लगे हुए दोनों निप्पल मोटे किशमिश के दानो जैसे लग रहे थे, जिनके चारों तरफ के एरोहोल में बने छोटे -२ दाने उत्तेजना की वजह से उभर कर बड़े निप्पलों का साथ दे रहे थे ..


पंडित जी को अपनी तरफ देखता पाकर प्रियंका ने अपना सर शर्म से झुक लिया ..




प्रियंका शरारत भरी आँखों से पंडित जी को परख रही थी, और शिप्रा को अपनी ब्रेस्ट पर झुकाकर जैसे ही उसने अपना निप्पल उसके मुंह में ठुंसा , वो किसी घोड़ी की तरह हिनहिनाते हुए बेड पर जा गिरी ..


''आअग्ग्ग्घ्ह्ह्ह्ह्ह्ह .......अह्ह्ह्ह्ह्ह .......शिप्पी ........अह्ह्ह्ह्ह्ह ..........उम्म्म्म्म ....सक बेबी ....सक मी हार्ड .....''


शिप्रा भी उसके ऊपर झुक कर उसकी ब्रेस्ट चूस रही थी, जिसकी वजह से उसकी गांड पंडित जी की तरफ थी, जो बाथ रॉब ऊपर खिसकने की वजह से बिलकुल नंगी हो चुकी थी ..


उसकी दिल की आकृति वाली गांड का दीदार पाकर पंडित जी तो जैसे बावले हो गए, इतनी मोटी और सेक्सी गांड तो उन्होंने आज तक नहीं मारी थी, नीचे उसकी चूत भी साफ़ चमक रही थी, जिसमे से रसीली चाशनी बहकर बाहर निकल रही थी .


शिप्रा के प्रियंका की जींस के बटन खोले और उसे नीचे खींच कर उतार दिया ..साथ ही उसकी पेंटी भी फंस कर उतर गयी .


अब वो बड़े से बेड पर पूरी नंगी थी,