नौकरी हो तो ऐसी

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The Romantic
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Re: नौकरी हो तो ऐसी

Unread post by The Romantic » 26 Dec 2014 09:28



सेठानी का हाथ पकड़ के मैने सेठानी को ज़मीन पे लिटाया और उनकी टांगे नीचे उपर करते हुए उनके हाथो के पास दबा दी…. और अपना सूपड़ा उस खुली मदमस्त बुर मे चढ़ा दिया …. सेठानी मदमस्त हो रही थी और इतने बड़े लंड से मिलने वाले महान सच का अनुभव कर रही थी…. बहू ने बीच बीच मे मेरा लंड निकाल के अपने मुँह मे भर के चिकना करने की ठान रखी थी…. अब मेरे नियंत्रण के बाहर बात जाते दिखी मैने बहू को लंड निकाल ने से मना कर दिया और ज़ोर्से धक्का मार कर पूरा का पूरा वीर्य सेठानी की बुर मे उतार दिया…. धीरे से मैने अपना लंड बाहर निकाला उसे छोटी बहू ने मुँह मे लेके उसे मस्त सॉफ किया और मैं फटाफट कपड़े पहेन के सेठ जी के पास वापस आ गया….

सेठ जी दीवानखने मे ही बैठे थे…लगभग 9.30 बज रहे थे … मुझे देखकर बोले – अरे तुम इतने वक़्त वही थे क्या…

मैं- हां सेठ जी… ज़रा मालकीन ने काम बोला था


सेठ जी – ठीक है पर ये तुम्हारे बाल और कपड़े इतने खराब कैसे हो गये…

मैं – वो कुछ सामान उपर के कपाट से निकालना था उसमे मे थोड़ी धूल थी इसलिए…..

सेठ जी – ठीक है ठीक है...


सेठ जी को मेरी हर एक बात पर बहुत जल्दी भरोसा हो जाता था.... उतने मे ही मालंबंती अपने संतरो को हिलाते हिलाते आ गयी. उसके निपल्स कमीज़ के उपर से तने हुए दिख रहे थे और मैं अभी कामवासना शांत करने पर भी गरम होने लगा था , वो मेरे पास आके बोली- हो गया ना काम तो चलो अभी हमे कहानी सुनाने……

मैं – पर वक़्त बहुत हो गया है


सेठ जी – जाने दो जिद्द कर रही है तो सुना दो इसे और नसरीन को एक कहानी…

पर एक ही सुनना …सबेरे इन्हे जल्दी उठना है ….

मालंबंती खुश हो गयी और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे लेके अपने कमरे मे आई… मैने देखा दीवान पे कुछ किताबे पड़ी थी और नसरीन वही पढ़ रही थी… वो कुछ लिख रही थी गद्दे पे किताब रख कर इसलिए पूरी झुकी हुई थी इस वजह से उसके बूब कमीज़ से बाहर झाँक रहे थे… गोरे गोरे कोमल बूब्स मस्त महॉल बना रहे थे…. पता नही मैं तो बस कहानी सुनाने आया था पर……

मैं दीवान पे बैठ गया… नसरीन मुझे देख कर खुश हो गयी…


मालंबंती भी बैठ गयी वो दोनो मेरे सामने बैठी थी और मैं देवान को पीठ लगाए सामने अपने पैर लंबे करके आराम से बैठा था…


मालंबंती – तो सूनाओ कहानी


मैं – कौनसी कहानी सुनोगी


नसरीन – कोई भी पर एक दम मस्त होनी चाहिए

मैं – मस्त कहानी ठीक है


मैने अपनी पदवी शिक्षण(डिग्री एजुकेशन) के 3 साल के दरम्यान बहुत सारी किताबे पढ़ी थी, जिनमे एक से एक कहानिया थी… और मैं पहलेसे ही कहानियो मे बहुत ही ज़्यादा शौक रखता था…. इसलिए मुझे बहुत सारी कहानिया पता थी….

मैने एक कहानी चुनी जिसमे बहुत सारे उतार चढ़ाव थे.. और बीच मे रहस्यमय और दिल की धड़कने तेज़ करनेवाले प्रसन्ग थे…

क्रमशः...................


The Romantic
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Re: नौकरी हो तो ऐसी

Unread post by The Romantic » 27 Dec 2014 16:09

नौकरी हो तो ऐसी--20

गतान्क से आगे…………………………………….

मैने कहानी शुरू की तो दोनो भी मस्त ध्यान लगाके कहानी सुनने लगी… जैसे ही कहानी आगे बढ़ने लगी वैसे वो लोग और मशगूल हो गये…. अभी कहानी मे नाटकीय पड़ाव आया जिसमे लड़का लड़की को ढूँढ रहा है बीच घने जंगल मे और वो उसे मिल नही रही है… थोड़ा सा डरावना प्रसंग था...

इतने मे मालंबंती और नसरीन मेरे बाजू आई मैने कहा – क्या हुआ


दोनो – डर लग रहा है


मैं – अरे येतो सिर्फ़ कहानी है


नसरीन- नही पर ये डरावनी है


मालंबंती - हम दोनो आपके पास बैठे?

मैं – क्यू


नसरीन – आप के पास आपका हाथ पकड़ कर बैठेंगे तो हमे डर नही लगेगा… दादी जब हमे कहानी सुनाती है और हम डर जाते है तो हम उनका हाथ थाम के बैठ जाते है


मैं – ठीक है ….आओ बैठो मेरे पास

दोनो एक एक बाजू से मुझसे चिपक गयी… वैसे ही मेरे शरीर मे लहर दौड़ गयी… उन हसीन जवान स्पर्शा ने मेरे अन्ग अन्ग मे ज्वाला लगा डाली… मैं सोचने लगा इस अवस्था मे हवेली मे मुझे किसीने देख लिया तो मेरे तो लग जाएँगे.. मैं बोला – एक काम करो ये दरवाजा बंद कर लो


नसरीन – हाँ मुझे भी ऐसे ही लग रहा है क्यू कि ऐसा लगता है कि दरवाजे के बाहर से कुछ तो आवाज़े आ रही है


मालंबंती उठी और गांद हिलाते हुए जाके दरवाजा बंद कर दिया अब मैं निश्चिंत हो गया. अभी ये दोनो मुझसे कितनी भी चिपके मुझे कोई फ़र्क नही पड़नेवाला था.. मेरा लंड नीचे अभी सलामी देने लगा था…

हम तीनो साथ मे बैठ गये वैसे मैने आगे कहानी बताना शुरू किया, जैसे ही कहानी आगे बढ़ी मैने कहानी मे और थोड़े डरावने किस्से डाल दिए इस वजह से वो दोनो मुझसे और चिपक गयी…

नसरीन ने अपना सर मेरे बाए कंधे से पूरी तरह चिपका लिया मानो जैसे कंधे पे रख दिया हो… उसकी वो गरम साँसे मुझे उत्तेजित करने लगी. मेरी छाती पे उसकी हर एक गरम साँस मेरी शर्ट को भेदकर हलचल मचाने लगी…. उसके वो मुलायम गाल मुझसे कुछ इंच की दूरी पे थे… पर मैने अपने पे काबू रखा हुआ था….

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Re: नौकरी हो तो ऐसी

Unread post by The Romantic » 27 Dec 2014 16:11


उधर मालंबति बोली – मुझे आपकी गोद मे बैठना है


मैं – अरे क्या हुआ............अब?????????

मालंबति - दादीजी हमे जब भी कहानी सुनाती है तो और हमे बहुत ज़्यादा डर लगने लगता है तो अपने गोद मे बिठा के कहानी सुनाती है


मैं – क्या …. गोद मे


नसरीन – हां… और वो हमे कभी ना नही बोलती

मैं – पर मैं तुम्हे गोद मे नही बिठा सकता

मालंबंती – अरे आप हमे गोद मे नही बिठाएँगे तो मैं दादाजी को बोल दूँगी

मैं – ठीक है आओ बैठो

मैने अपनी टाँगे मोड़ ली… और पालती डालकर उसको अपने गोद मे बिठा दिया… बाजू मे नसरीन अपना सर पूरा मेरे कंधे पे टिकाए आँखे लगाकर मस्त हो रही थी… उसके शरीर मे मेरे स्पर्श से ज़रूर कुछ तो हलचल हो रही थी इसलिए उसने आँखे बंद कर रखी थी…. मालंबंती जैसे ही मेरी गोद मे बैठ गयी मेरी जाँघो मे एक दम से उर्जा दौड़ गयी…. उनमे अचानक से ताक़त आ गयी मानो…. मेरी जंघे उसकी वो मस्त गांद से मदमस्त होके चिपक रही थी…


मेरे लंड महाराजा का हाल बहुत ही ज़्यादा बुरा हो चुका था…. वो चुदाई से पहले वाला रस उगल रहा था और मेरी पॅंट मे तंबू बनाके बैठा था
मैं बहुत ही बड़ी कशमकश मे था कुछ करू तो दुविधा नही करू तो लंड दुविधा… कहानी से ध्यान काफ़ी भटक रहा था तब भी मैं सुना रहा था… तभी मैने देखा नसरीन का हाथ मेरी पॅंट पे है और वो मेरी पॅंट के उपर से हल्के हल्के हाथ घुमा रही है… मेरी उत्तेजना की सीमाए बढ़ रही थी उधर मैं कहानी बताए जा रहा था


तभी मैने पाया मालंबंती का हाथ भी मेरी पॅंट पे घूम रहा है वो मूड के थोड़ा चेहरा मेरी तरफ करके फिरसे मेरी एक टाँग पे गांद रख के बैठ गयी और दोनो मिलके मेरी पॅंट को सहलाने लगे…

मैं मदहोश हुए जा रहा था मैं तो यही चाहता था…. पर थोड़ा विरोध दर्शाना मैने ठीक समझा


मैने कहा –अरे कककक .. क्या ………????

नसरीन – कुछ नही आप बस कहानी सुनाइए….



मैं अपनी कहानी बड़बड़ाने लगा. दोनो ने नीचे मेरी पॅंट की चैन खोल दी… और मेरे लंड को बाहर निकाल के उससे खेलने लगी दोनो के निपल्स एक दम टाइट हो गये थे.. और चेहरे पूरे लाल… मैने भी थोडिसी हरकत करना ठीक समझा और मालंबंती की पीठ को पीछे से सहलाने लगा…. वो और गरम हो रही थी…. दोनो मिलके मेरे सूपदे की चमड़ी उपर नीचे खिच रही थी….

तभी मालंबंती उठी और उसने दीवान पर खड़े होके अपनी सलवार निकाल दी और बाद मे पॅंटी भी मैं देखते रह गया वो गोरी गोरी मांसल जंघे ओए वो कमसिन जवानी …वाह क्या माल थी वो सलवार निकाल के वो मेरे पास आई और मेरी पॅंट का हुक खोल दिया नसरीन थोड़ा बाजू सरक गयी और मालंबंती ने मेरी पॅंट के साथ मेरी अंडरवेर भी पाव से बाहर खिच ली मैं नीचे पूरा नंगा हो गया….