पागल वैज्ञानिक

Horror stories collection. All kind of thriller stories in English and hindi.
Jemsbond
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Re: पागल वैज्ञानिक

Unread post by Jemsbond » 25 Dec 2014 12:58


वो बात करते हुए बड़ रहे थे मोन्टी मजे से सिगरेट के कस लेते हुये अपने दोनों तरफ देखते हुये चल रहा था। वो अभी कपड़े की दुकान में कदम ही रखने वाले थे कि एक कुत्तों के भोंकने की आवाज आई, कर्नल और सार्जेंट दोनों पलटे, अगले ही पल वे फिर दुकान में प्रवेष कर रहे थे। लेकिन कुत्तों के भोंकने की आवाज धीरे-धीरे बड़ती जा रही थी , दो मिनिट में ही ऐंसा लगने लगा मानों वहाँ कुत्तों का ही साम्राज्य हो, मुख्य चैराहे पर सेकड़ों कुत्ते जमा हो चुके थे, वे एक दूसरे पर चढ़ दौड़ रहे थे , सेंकड़ों व्यक्ति कुत्तों की खुली जंग का षिकार हो चुके थे ऐंसा लग रहा था मानों कुत्तों के मध्य गेंगवार षुरू हो गया हो। ट्रेफिक जाम हो चुका था ,दुकान दार तेजी से अपनी दुकानो के सटर गिरा रहे थे, राहगीर दुकानों के किनारे दुपक कर अनोखी गेंगवार देख रहे थे ऐंसा दृष्य ना उन्होंने पहले कभी देखा था ना ही सुना था। कर्नल ध्यान से कुत्तों के गेन्ग वार को देख रहा था वो सोच रहा था अच्छा हुआ जो वह अपने ‘षेरा’ को साथ नहीं लाया वरना वो कल्पना से ही कांप रहा था क्योंकि कुत्तों के गेनगवार में हर नष्ल के कुत्ते दिखाई दे रहे थे उनमें पुलिष के प्रषिक्षिण प्राप्त एनसीषियन और बुल्डाग से लेकर साधारण नष्ल के कुत्ते भी षामिल थे, खेर साधारण कुत्तों को छोड भी दिया जाये तो प्रषिक्षित एलसीषियन ,ब्लडहांड, बुल्डाग नष्ल के कुत्तों से इस प्रकार की आषा करना कोई सोच भी नहीं सकता था। कर्नल देख रहा था 26 जनवरी की परेड में षामिल लाल पट्टे वाले दो एलसीसियन एक दूसरे पर घातक आक्रमण कर रहे थे....धारे-धीरे दोनों की हालात खस्ता होती चली गयी, पांच ही मिनिट बाद दोनों जीवन की अंतिम सांस ले रहे थे।
षहर के इस व्यस्त इलाके में मोत का षन्न्ााटा व्याप्त था कुत्तों के भोंकने की आवाज षांत पड़ चुकी थी, अब आ रही थी उनके कराहने की आवाज।
कुत्तों के मरने से एक अजीब प्रकार की बदबू वातावरण में व्याप्त हो गयी थी। सेंकड़ों की तादाद में कुत्ते ा तो मरे पड़े थे या अपने जीवन की अंतिम सांसे गिन रहे थे।
कर्नल ने अपने सारे जीवन में ऐंसा दृश्य कभी नहीं देखा था उसने रूमाल अपनी नाक पर रख रखा था वो इस कुत्तों की गेंगवार की तह में जाने की अथक कोषिष कर रहा था....लेकिन परिणाम षुन्य।
तभी पुलिस जीपों के सायरन की आवाज सुनाई देने लगी, जीपें तो वहाँ ट्रेफिक के चालु होने तक पहुँच नहीं सकती थी बहरहाल पुलिस दनदनाती घटनास्थल पर पहुँच गयी थी।
इंस्पेक्टर गिरीष, राजधानी का एक षक्त और गरममिजाज इन्स्पेक्टर बड़े ही आष्चर्य से मरे हुये कुत्तों को देख रहा था। तभी उसके कन्धे पर किसी ने हाँथ रखा..वो पलटा ....हेलो कर्नल।
- हेलो मिस्टर गिरीष, क्या हाल चाल है।
- हाल चाल तो देख ही रहे हो कर्नल यहाँ तो इन्सानों के गेंगवार से फुरसत नहीं ओर कुत्तों ने गेंगवार षुरू कर दिया।
ये क्या अबू सलेम, छोटाराजन, वो क्या कहते हैं मेनन मुझे तो नाम याद नहीं आ रहा उससे क्या कम हैं, कर्नल ने हँसते हुए कहा।
- इन्स्पेक्टर गिरीष को बन्दे का सलाम।
अरे सार्जेंट साहब आप भी मौजूद हैं, कहा गिरीष ने।
- जी हाँ हमारे साथ में इन्स्पेक्टर मोन्टी भी हैं।
गिरीष ने बन्दर की तरफ देखा, मोन्अी ने बड़े ही स्टाईल से नयी सिगरेट जलायी, इस गमगीन मोके पर भी इन्स्पेक्टर के ओंठों पर मुस्कान ख्लि आयी।
- कर्नल आपने यह गेंगवार देखा।
- जी हाँ जनाब बहुत अच्छे से संक्षेप में कर्नल ने वो सभी घटनायें दोहरा दीं जो उसके सामने घटी थीं।
- कर्नल मेरे तो समझ में नहीं आ रहा क्या किया जाये।
- करोगे क्या लाषों का पंचनामा करो, और पोस्टमार्टम के बाद इनके मालिकों के सुपुर्त कर दो।
- आप तो हँसी कर रहे हैं...................
नहीं मिस्टर गिरीष मैं हकीकत बयान कर रहा हूँ, ध्यान से देखे उन कुत्तों को ये वही कुत्ते हैं जिनने 26 जनवरी की परेड में भाग लिया था, अब तक ये सेंकड़ों
अपराधी पकड़ चुके हैं....इनमें से प्रत्येक के ऊपर प्रतिदिन सरकार 500 पये से ऊपर खर्च करती है। कहा कर्नल ने।
ओह माई गाड कर्नल वाकई ये तो वही हैं, और वो देखो अपनी गीता जिसकी मदद से हमने अभी हाल में एक मर्डर कैस साल्व किया था।
ओ.के. मिस्टर गिरीष तुम अपनी ड्यूटी निभाव हम तो चले ,आये थे कपड़े खरीदने लेकिन अब मूड़ नहीं रहा, देखना पड़ेगा अपने षेरा का क्या हाल चाल है।
ओ.के.कर्नल मैं आषा करूंगा इस विचित्र कैस में आप मरी सहायता करेंगे।
- वाॅई नाट मिस्टर गिरीष..
कर्नल ,सार्जेंट और मोन्टी कारों के बीच से रास्ता बनाते हुये अपनी कार की तरफ बड़ गये।
---000---
कर्नल नागपाल, सार्जेंट दिलीप और मोन्टी ने जैसे ही सिविल लाईन स्थित अपनी कोठी में प्रवेष किया, गोरखा चैकीदार तेनसिंग उन्हैं परेषान हालत में मिला।
- साहब गजब हो गयां
- क्या हुआ सिंग कर्नल ने कहा
साहब आज षेरा पागल हो गया, जन्जीर तोड़कर भाग रहा था... उसने जन्जीर कर्नल को दिखाई और बोला..साहब मेने रस्सी का फन्दा फेंक फेंकर उसे बांध दिया, फिर उसे खाने में बेहोसी की दवा मिलाकर बेहोस कर दिया।
बहुत अच्छा किया तुमने तेनसिंग, सार्जेंट चट से बोला।
तुम चुप रहो कर्नल बोला और कुछ कुछ सिंग,।
- बस साहब तब से आप के आने का ही इन्तजार कर रहा हूँ।
- रामू और रामवती आये।
- साहब उनने आज छुट्टी ली है।
- क्यों?
- रामू की माँ मर गई...
- और रामबती
- रामू की माँ के मरने पर आँसू बहाने सिनीमा दैयीखन गयी है साहब।
- खेर तुमने आज बहुत अच्छा काम किया सिंग, षैरा कहाँ है।
तेनसिंग कर्नल को षेरा के पास ले गया, षेरा बेहोष पड़ा था ,अभी उसको होष नहीं आया था।
- पानी लाओ, मेरा फस्र्टएड बाक्स भी ले आना।
कर्नल ने षेरा के षरी पर पानी के छींटे डाले , और कुछ सुंघाया, पांच मिनिट बाद षेरा को होष आने लगा। अगले ही कुछ क्षंणों में वो पूरी तरह स्वस्थ लगने लगा। उस पर परगल पन के कोई लक्षण नहीं दिखाई दे रहे थे। तेनसिंग पीछे खड़े होकर उसे घूर रहा था, उसे माजरा कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
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Jemsbond
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Re: पागल वैज्ञानिक

Unread post by Jemsbond » 25 Dec 2014 12:59

सुबह सार्जेंट को झंझोड़ कर उठाया गया।
- कोन है सोने भी नहीं देता।
- साहब आठ बज गये।
अबे साहब के बच्चे, तू कब आया तेरी तो माँ मर गयी थी...सार्जेंट ने कम्मल ओड़े-ओड़ ही कहा।
- वो साहब......
अबे उल्लू की दुम, गधे के सींग, पिछले महिने तेरा बाप मरा था, उसके पहले दादी, उसके पहले काका, साले अब कोन मरने वाला है पहले से बता....सार्जेंट ने कम्मल एक तरफ फेंकते हुए कहा।
- वो साहब बड़े साहब आप का चाय पर इन्तजार कर रहे हैं।
- ठी क है जाकर कहो छोटे साहब आ रहे हैं।
सार्जेंट ने अगले पन्द्रह मिनिट में ब्रस किया, हाथ मुंह धोकर फुरती से कपड़े बदल लिये।
- अबे दषरथ की ओलाद मेरे जूते ले आना।
- जी साहब।
- गुड माॅर्निंग फादर....
- माॅर्निंग ,बैठो
- जल्दी से चाय पियो आज बहुत काम है।
सार्जेंट चाय पीने लगा, कर्नल डेली न्यूज पेपर में उलझा था वो जानता था कर्नल चाय पी चुका है और चाय पीने के बाद आधा घण्टे पेपर जरूर पढ़ता है। पेपर में न्यूज छपी थी नगर के व्यस्ततम् इलाके मैं कुत्तों की गेंगवार। कल संध्या साड़े छह बजे नगर के मूनलाईट एरिये में कुत्तों के मध्य भीशण गेंगवार हुयी जिसमें 150 कुत्ते मारे गये। इनमें 75 प्रषिक्षण प्राप्त एलसीषियन ,ब्लडहाॅंड, एवं बुल्डाग थे।
राजधानी की पुलिस इस संदर्भ में कुछ भी कहने में असमर्थ है। एक प्रवक्ता के अनुषार मोेकाये वार्दात पर प्रसिद्ध जासूस कर्नल नागपाल और उनके सहायक सार्जेंट दिलीप मौजूद थे। उन्होंने भी अभी तक अपनी प्रतिक्रया व्यक्त नहीं की है। कर्नल न्यूज पढ़ता जा रहा था षायद कोई नई जानकारी मिले लेकिन कुछ विषेश न्यूज में नहीं था इसके अलावे कि पुलिस की बड़ी आलोचना की गयी थी यहाँ तक की विपक्षी पार्टी के नेता ने तो लोक सभा भंग कर राश्ट्रती षासन की मांग करते हुए कहा था कि इनके राज मेेेें तों इन्सानों के साथ कुत्ते भी गेंगवार कर रहे हैं, बहरहाल ऐंसा प्रतीत हो रहा था कि षहर का माहोल गर्म एवं रहस्यमयी हो गया था। कुछ लोग तो इसे देवीय विपदा मान कर अपने धरो में पूजा अर्चना तक करवा रहे थे। वहीं तांत्रिक भी इस घटना का भरपूर फायदा उठाते हुये मोटी कमाई में लग गये थे। कर्नल ने पेपर मेज पर रख दिया, सार्जेंट चाय पी चुका था।
- नींद कैंसी आयी, सपने तो सुहाने देख्ेा होंगे।
- क्या खाक सुहान , चार बार नींद खुली जानते हैं फादर क्यों ?
- तुम्ही बता दो।
- मुझे एँसा लग रहा था चारों तरफ से हजारों कुत्ते मेरे पर आक्रमण कर रहे हैं।
- खेर जाको राखे सांइया मार सके ना कोये, तुम्हैं कुछ होने वाला नहीं ,तुमने फाईल पढ़ ली।
- पढ़ली
- कुछ समझ में आया।
- थेड़ा बहुत फादर ......मेरी समझ में नहीं आ रहा वो भारत में घुस कैंसे आयी।
- ये बात तो जुदा है कि वह घुसी कैंसे, लेकिन घुसी है इतना तो जरूर है।
- क्यों
- ये सूचना हमें रूस की इन्टलीजेन्सी ब्यूरों के विस्वस्त षूत्रों से प्राप्त हुयी है और ग्रह मंत्रालय सेे ये कैस मुझे सोंपा गया दिया गया है,,,और हमारी सहायता के लिये पूरे इंडियाके गुप्तचर विभाग हैं। अच्छा ये सिल्वर नाईट क्लब के मेनेजर का क्या नाम है....
- डेविड
- वो तो तुम्हारा दोस्त हुआ करता था..
- मेरा लंगोटिया यार है।
- तुम वहाँ क्लब की डान्सर को चेक करो, उसीका जिसका परसों कार्यक्रम था.....हो जायेगा।
- ये तो मेरे बायें हाँथ का खेल है।
- ध्यान से खेलना नहीं तो बाँयां हाथ खे बैठे तो भी दिक्कतें बहुत आती हैं......तो कब जा रहे हो।
- अभी, और बस निकला..
- ठीक है अपनी रिवाल्वर भी रख लेना हो सकता है जरूरत पड़ जाये।
- फादर कुत्ते वाले केस का क्या होगा ?
- वो इन्स्पेक्टर गिरीष का सिरदर्द है। हमें तो अपने ही काम से फुरसत नही...ठीक है अब तुम जाओ।
सार्जेंट अपनी आइन्सटीन की तरफ बड़ गया।
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सार्जेंट दिलीप बड़ी सावधानी से लाल रंग की मर्सडीज का पीछा कर रहा थां हुआ कुछ इस प्रकार कि जब उसने अपनी आइंस्टीन गांधी चैक से मोड़ी तो एक लाल मर्सडीज उसकी आइन्स्टीन की बगल से गोली की तरह निकल गयी। कार इतनी तेज थी कि सार्जेट को केवल इतना अहसास हुआ कि कार कोई लड़की चला रही है जिसके बाल कंधों तक कटे हैं, उसे वह स्वेत वर्ण की लगी.....सार्जेंट के सिर में घण्टियां बजने लगी, कहीं वही तो नहीं, फिर पीछा करने में घाटा ही क्या है। दोनों कारो के मध्य सौ गज का फाँसला था ट्रेफिक अधिक तो नहीं पर इतनी जरूर थी कि लाल कार वाली लड़की पीछा किये जाने का अहसास नहीं कर सकती थी।
दोनो कारें अब कम आबादी वाले इलाके से गुजर रही थी। ट्रेफिक नहीं के बराबर था कभी-कभी कोई ट्रक या बस बगल से गुजर जाते थे।
लाल रंग की कार एक छोटी सी बिल्डिंग के सामने रूक गयी ,लड़की उतर कर बिल्डिंग के ीाीतर चली गयी, सार्जेंट अपनी कार को आगे बढ़ाता ले गया, उसने एक वृक्ष की छांव में कार को खड़ा कर वह उसी बिल्डिंग तक वापिस पैदल चलकर आया। सामने खाड़ी देषों में जाकर बसने वालों के लिये बनी एक प्राइवेट ट्रेवलिंग एजेन्सी का बोर्ड लगा था। सार्जेंट जानता था राजधानी में ऐंसी सेंकड़ों ट्रेवल ऐजेंसियाँ हैं जो सरकार की आँखें में धूल झोंक कर जनता को लूट रही हैं।
सार्जेंट अन्दर घुसा, लेकिन लड़की उसे कहीं नहीं दिखाई दी। एक मेज के पीछे फिल्मी स्टाईल का एक गुन्डा बैठा हुआ था। उसके बाल सफाचट थे मूंछें चीनी सटाईल की दिख रही थी।
- जनाब मैं कुवेत जाना चाहता हूँ।
- बाॅस नहीं हैं, पन्द्रह मिनिट बाद आना।
- साहब वो सामने जो कार खड़ी है उसमें से एक मेम साहिबा यहाँ आयी हैं वो मेरी परिचित हैं, कृपया उनसे मेरी मुलाकात करवा दीजिये।
उसने एक केबिन की तरफ इसारा करते हुये कहा..उस केबिन में चले जाओ वो भी बाॅस का इन्तजार कर रही हैं।
सार्जेंट भारी परदा उठाकर केबिन में घुसा, कोई भरी चीज उसके सिर पर टकराई उसकी आखों के सामने रंग बिरंगे तारे दिखाई देने लगे, उसने अपने को होष में रखने की बहुत कोषिष की लेकिन कामयाब नहीं हो सका। एक झटके से वह फर्स पर गिर पड़ा।
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सार्जेंट की जब बेहोषी टूटी तो उसने अपने आपको एक पलंग पर लेटा पाया।
- बैठे रहो बरखुदार।
- फादर आप, लेकिन मैं यहाँ......अरे ये तो अपनी काठी है ?
- और तुम्हारा बैड रूम ...
- मैं यहाँ कैंसे पहुँचा ?
- मैं लाया हूँ बरखुदार
- लेकिन मैं तो ट्रेवलिंग ऐजेन्सी के आफिस में बेहोस हो गया था।
- बेहोस हो गया नहीं बेहोस कर दिये गये थै।
- मेरा मतलब वही था किसी ने मेरे सिर पर किसी भारी जीच से वार किया था।
उसका हाथ षिर पर गया, सिर पर पट्टी बन्धी थी। वो हलका सा कराहा, फिर उठने की चेश्ठा की...
- लेअे रहो....हुआ क्या था षुरू ये बताओ।
सार्जेंट ने पीछा किये जाने से लेकर बेहोष होने तक की सारी घटना सुना डाली।
- बरखुरदार
- यस फादर
- लड़की को पहचानते हो
- फादर लड़की तो नहीं पर उसकी आंखे जरूर पहचानी लगी। जब मैं परदा उठाकर केबिन में घुसा तो वह लड़की वाकई एक कुर्सी पर बैठी थी।
- अच्छा अब उस डांसर को याद करो जिसकी जानकारी हाँासिल करने तुम सिल्वर नाइट क्लब जा रहे थे।
- कह नहीं सकता लेकिन उसकी आँखे और उस डांसर की आँखों में समानता थी।
- ठीक है अब तुम आराम करो, मैं कुछ पता करता हूँ।
- फादर जो ट्रेवलिंग ऐजेनसी के आफिस पर रेड करवा दो।
- बरखुरदार वहाँ अब कुछ नहीं है ,अपराधी चालाक है।
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इन्स्पेक्अ गिरीष थाने में स्थत अपने रूम में बैचेनी से टहल रहा था, कल की कुत्तों वाली घटना ने उसे बैचेन कर दिया था, आखिर कुत्ते इस प्रकार से बेकाबू हो आपस में लड़ने क्यों लगे। इससे ीाी अहम प्रष्न था सभी कुत्ते मूनलाईट एरिये में आये तो आये कैसें। षायद कर्नल ने कुछ हल निकाला हो ,उसने कर्नल नागपाल को तीन बार फोन किया लेकिन वो तीनों बार नहीं मिला...उसके मोबाईल नम्बर तक आसानी से किसी की पहुँच हो नहीं सकती थी वह जानता था....इन्स्पेकटर ने एक बार फिर लेण्ड लाईन फोन पर रिंग की....
- हैलो....में इन्स्पेकट गिरीष बोल रहा हूँ।
- राम-राम साहेब ,बड़े साहब आ गये हैं
ं- हैलो इन्स्पेक्टर कैंसे याद किया
- कर्नल परेषान बहुत हूँ, समझ में नहीं आ रहा क्या करू..............ये कुत्ते नहीं हो गये मेरे सिर का दर्द..
- पोस्टर्माटम रिपोर्ट आ गयी
- नहीं कर्नल लेकिन बस आने ही वाली है......एक हवलदार भेजा है।
- पोस्टमार्टम सीरियस ली किया जा रहा है कि फार्मेल्टी ?
- सीरियस कर्नल आई इन्फार्म पर्सनली दी बोथ ह्यूमेन एण्ड वेटेनरी डाॅक्टर..
- देखो इन्स्पेक्टर जैंसे ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ जाये उसे तुम मेरे पास आ जाना..ओ.के।
- एक मिनिट कर्नल,षायद रिपोर्ट आ गयी
एक मिनिट के लिये फोन पर सन्न्ााटर छाया रहा।
- कर्नल रिपोर्ट आ गयी है, मैं लेकर आ रहा हूँ। बंगले से कहीं जाने का मूड़ तो नहीं है।
- नहीं लेकिन जल्दी आ जाओ।
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Re: पागल वैज्ञानिक

Unread post by Jemsbond » 25 Dec 2014 13:01


इन्सपेक्टर गिरीष ने अपने विभाग की जीप को जिससे वह आया था बंगले के पोर्च में खड़ी कर दी। बंगले के बरांडे में ही कर्नल चेयर पर बैठे उसका इन्तजार कर रहे थे।
- हेलो कर्नल
- हेलो इन्सपेक्टर
- सार्जेंट दिखाई नहीं दे रहे
- उसके सिर में चोट आ गई है.....आराम कर रहा है।
- क्यों क्या हुआ
- कुछ नहीं यार, आज कल के लड़के आंधी तूफान की तरह कार चलाते हैं। फिर अचानक कहीं ब्रेक लगाना पड़ जाये तो फिर.....
- यानी सिर विन्डिंग स्क्रीन से टकरा गया।
- करेक्ट
- कर्नल ये रही पोस्अमार्टम की रिपोर्ट।
कर्नल ने रिपोर्ट लेकर पढ़ना षुरू किया ओर पढ़कर इन्सपेक्अर को वापस कर दिया।
- क्या रहा !
- जो सोचा था रिपोर्ट में उससे अधिक नहीं है।
- यानी आपको मालुम था कुत्ते पागल नहीं हुये।
- सही जा रहे हो इन्सपेक्टर।
- रिपोर्ट के अनुसार तो कुत्तों की मोत घातक और अत्यधिक रक्त स्त्राव के कारण लिखी अई है।
कर्नल मेरे मत के अनुसार तो कोई एंसी षक्ति थी जो कुत्तों को मून लाईट एरिये में खींच लाई और फिर वही कहावत चरितार्थ हो गई........कर्नल बीच में बोला.......जहाँ चार बर्तन होंगे वहाँ आवाज जरूर आयेगी।
- आपकी क्या राय है
- सच पूंछो तो मेने अपनी कोई राय अभी तक कायम नहीं की है। सवाल उठता है तुम्हारे अनुसार अदृष्य षकित का जिससे आषक्त होकर कुत्ते इक्ट्ठे हो जाते है। ठीक है ना ?
- जी हाँ।
- अब तुम्ही बताओ इन्सपेक्टर केवल कुत्ते ही क्यों आते हैं, गधे,क्यों नहीं आये, घोड़े क्यो नहीं आये, फिर बिल्लियाँ तो घर-घर में रहती हैं......यहाँ तक की मोकाय वार्दात पर हमारा मोन्टी भी मौजूद था उसको कुछ नहीं हुआ जबकी.......
- जबकी क्या...
- कुछ नहीं बस मेरे मुँह से यों ही निकल गया , हाँलांकी वह अपने कुत्ते षेरू के बारे में बताना चाहता था, फिर कुछ सोचकर चुप हो गया।खेर अब आपका क्या प्रोग्राम है।
- कर्नल सोचा था मोकाय वार्दात पर उपस्थित लोगों से जानकारी इक्ट्ठा करूंगा, लेकिन अब विचार बदल गया। क्योंकि मैं समझता हूँ आपसे अधिक जानकारी षायद ही किसी को हो।
तभी सार्जेंट ने बरांडे में प्रवेष किया, गुड माॅर्रिंग इन्सपेक्टर।
- माॅर्निंग, कैसा दर्द है सिर का।
- अरे तुम उठ कर क्यों आ गये तुम्हें तो कम्पलीट बैड रेसट लेना चाहिये....कर्नल ने कहा।
- अरे सार्जेंट चोट तो तुम्हारे सिर के पिछले भाग में लगी है। लगता है तुम कार चला नहीं रहे थे ....पिछली सीट पर बैठे थे...इन्सपेक्टर ने संदिग्ध ष्वर में कहा।
- जीहाँ....जीहाँ इन्सपेक्टर।
- अच्छा में चलूं कर्नल, ओ.के. सार्जेंट और तुम्हारा मोन्टी किधर गया।
- पीछे जाय फल खा रहा है....हहो तो बुला दूँ ?
- नहीं रहने दो, अपनी बला तुम ख्ुाद ही संभालो।
इन्सपेक्टर गिरीष ने जीप स्टार्ट की ,बैक मिरर मैं देखते हुए बेक कर फाटक के बाहर तक ले गया।
कर्नल ने सार्जेंट की तरफ खा जाने वाली निगाहों से देखा।
- क्या हुआ फादर...
- क्या नहीं हुआ, उस इन्सपेक्अर ने मेरा झूट ताड़ लिया।
- झूट........कोनसा झूट लेकिन आपने झूट बोला क्यों!
- अच्छा अब फुटो और आराम करो मेरे को बहुत काम है।
- अजीब लोग है सार्जेंट बड़बड़ाता हुआ पुनः अपने बेड रूम में घुस गया।
---000----
- कुछ पता चला।
- नहीं
- तुम सब इन्डिया आकर निकम्बे हो गये हो।
सर हम कोषिष कर रहे हैं, हमारा अगला प्लान सषक्त है, मुझे पूरा विष्वास है। हमें यहाँ से महत्वपूर्ण जानकारी हाँसिल होगी, उसने अपना पूरा प्लान उसे समझा दिया।
- ठीक है, लेकिन काम नहीं हुआ तो उसके जिम्मेदार तुम लोग खुद रहोगे।
- यस सर......यस सर.....
- यस सर.....यस सर....मत लगाओ काम करो वो भी एक दिन के भीतर, मुझे षाल भर में काम करने वाले व्यक्ति जिन्दा अच्छे नहीं लगते। अब दफा हो जाओ, और मेरे केबिन मैं जों मेडम बैठी हैं उन्हें भेजो।
थोड़ी देर बाद।
- हैलो राबर्ट।
- हैलो, बैठो तुमहारा क्या ख्याल है वो किसका आदमी हो सकता है।
- कह नहीं सकती।
- मुझे कोई जासूस लगा, लेकिन मेरे यहाँ आने की सूचना तो किसी को नहीं।
- ये तुमने कैंसे सोच लिया, इन्डिया की ‘रा’ हमारे से कम नहीं है।
- यानी उन्हें मेरे यहाँ पहुँचने की खबर है।
- यकीनन नहीं तो वो नोजवान कोन हो सकता है। तुम्हारा प्रेमी तो यहाँ कोई बना नहीं होगा अभी तक...उसने व्यंग्य भरे लहजे मैं कहा।
- देखो राबर्ट मुझे बदत्मीजी पसन्द नहीं, हो सकता है वो मेरा चाहने वाला हो आखिर मैं भी मषहूर डान्सर हूँ।