खानदानी चुदाई का सिलसिला

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rajaarkey
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Re: खानदानी चुदाई का सिलसिला

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 02:50



इतने में बाबूजी की कड़क आवाज़ बाहर से फिर सुनाई पड़ी. कम्मो ने आनन फानन में सूट पहेन लिया. बाबूजी की आवाज़ में कदकपन और एक जल्दी का भाव था. कम्मो इतना तो समझ गई थी कि जिस तरीके से सूट फिटिंग है वो ख़ास उसके बदन के लिए बनाए गए हैं पर कैसे ये उससे समझ नही आ रहा था. इससे पहेल कि बाबूजी की आवाज़ दोबारा सुनाई दे कम्मो ने दरवाजे की चितखनी खोली और बाहर निकल आई. अब की बार उसके दोनो हाथ उसके कंधों पे थे और वो उन्हे हटा नही पा रही थी. चूत की महक उसके बदन से खुश्बू बन के कमरे में फैलने लगी थी. चूचे एक दम कड़क थे और निपल्स की शेप पूरी तरीके से अब नज़र आ रही थी.

बाबूजी ने शीशे में देखते हुए एक बार फिर कम्मो को निहारा. इस बार उनकी उत्तेजना बढ़ गई. लंड पूरा खड़ा था पर कुर्ते की वजह से धोती में बना तंबू दिख नही रहा था. बाबूजी कम्मो की साधारण खूबसूरती से मन्त्र मुग्ध हो गए थे. सूट की पतली पतली डोरिओं के बगल में उसकी ब्रा के चौड़े स्ट्रॅप नज़र आ रहे थे. सूट ने उसके कंधों को पूरा उघाड़ के रखा था. दोनो तरफ से उसके मांसल कंधे दिख रहे थे. मम्मो की गहराई के ठीक बीच में एक दिल बना हुआ था जिसे वो च्छुपाने की कोशिश कर रही थी. सूट का टॉप एक कुरती की तरह था. सिर्फ़ कम्मो की जांघों तक. सूट कसा हुआ था और उसके चूतरो के आस पास चिपके हुआ था. जल्दी जल्दी में कम्मो ने जब सूट कहना तो बाल आधे खुल गए थे. कम्मो के बाल भी लंबे थे करीब उसकी कमर तक. उसका रिब्बन उसके कंधों के नीचे की तरफ आधे खुले बालों में झूल रहा था.

बाबूजी से रहा नही गया और वो मूड गए. कम्मो का चेहरा झुका हुआ था. एक पतली सी चूरिदार सलवार उसके बदन से चिपकी हुई थी. बाबूजी उसके करीब पहुँचे. उसके कंधों पे नज़र डाली. उसके आधे नंगे कंधे आधे हाथों से छुपे हुए. बाबूजी अब कम्मो के ठीक पिछे खड़े थे. अचानक कम्मो को अपनी कमर पे बाबूजी के हाथों का स्पर्श महसूस हुआ और अनायास ही उसके हाथ उनके हाथों के उपर चले गए. अब उसकी नंगी पीठ और कंधे उनके सामने थे. बाबूजी ने उसकी कमर को अपने हाथों से भींचा और धीरे धीरे अपने हाथों को खिसकाते हुए उसके पेट पे ले गए. कम्मो अब एक मोम की गुड़िया थी. उसको अपने उपर काबू नही था. उसके हाथ बाबूजी के हाथों से सटे हुए अपने ही पेट की तरफ चले गए. और फिर 2 सेकेंड वहाँ रुक के उसके दोनो हाथ अपनी चूत की तरफ बढ़ चले. अनायास ही उसके मूह से एक सिसकारी निकली और उसके हाथों ने चूत के उपर के हिस्से को जाकड़ लिया.

बाबूजी ने आगे झुक के उसके कंधे पे किस किया. कम्मो का रोम रोम कांम्प उठा. जैसे उसे 220वॉल्ट का झटका लगा हो. रोंगटें खड़े हो गए और चूत लिसलिसा गई. उसकी छाती ऑटोमॅटिकली बाहर निकल आई जैसे के कह रही हो कि आओ मुझे चूसो. बाबूजी ने भी देर नही की और अपने हाथों को पेट से बढ़ाते हुए कम्मो के मम्मो के ठीक नीच कर दिया. उसके बाद उनके हाथों ने कम्मो के मम्मो को नीचे की तरफ से दबाया और उसके निपल घोंठ दिए. कम्मो अब तरफारा रही थी. उसने अपनी चूत को छोड़ के बाबूजी हाथों पे अपने हाथ रखे और उन्हे ज़ोर से दबाया. उसके मम्मे भिन्च गए और वो सिहर गई.

''ऊऊऊऊऊहह बबुउउुजिइीइ...ये क्या कर दियाअ आअप्ने....मेरी मुनिया तो गीली हो गई....'''

'''ह्म्‍म्म्मममम तो गीएली मुनिया को क्यों तंग कर रही है...उसे भी सूख जाने दे ..अपनी मुनिया को कह कि उसका रस मेरे लंड पे निकाल दे और उसको भिगो के फ्री हो जाए....उउम्म्म्ममगदर जवानी है तेरी बन्नो..ज़रा नंगी हो जा..''

बाबूजी का ये कहना था कि उन्होने कम्मो के जवाब का इंतेज़ार नही किया. उन्होने सूट के पतले पतले स्ट्रॅप कम्मो के कंधों से उतार दिए और साथ ही उसके ब्रा के स्ट्रॅप भी. ब्रा के स्ट्रॅप कंधों से हटते ही कम्मो के मोटे मोटे मम्मे थोड़ा झूल गए.


''तुझे पता है कम्मो ये सूट तुझपे कितने अच्छे दिख रहे हैं..कातिल लग रही है तू इसमे. मुझे तो रिझा लिया है तूने. उफ़फ्फ़ सच बोलूं आज ये पहेन के पहली बार मुझे लगा कि तू मेरे इस बिस्तर की शोभा बढ़ा देगी...बोल आएगी मेरे बिस्तर पे ?? '' बाबूजी कम्मो की पीठ गर्दन और गालों को चूमते हुए पूच्छ रहे थे.

'' हान्न्न बाबूजी आउन्गि आपके बिस्तर पे...इतना गरम कर दूँगी इस बिस्तर को कि आप कभी इस्पे सो नही पाएँगे...आग लगा दूँगी आपके बिस्तर को अपनी जवानी से .. जैसे अभी आपने लगा दी है मुझमे...पर एक बात बताओ बाबूजी... और उस बात का सच जवाब देना तो अभी के अभी बिच्छ जाउन्गि यहाँ...ये सूट मेरे हिसाब के किसने बनाए और कैसे....उउम्म्म्म इनमे तो मेरी जवानी पूरी फिट हो गई..ऊओह ...उम्म्म्म क्या करते हो बाबूजीइइईईई....ऐसे ना मस्लो इनको ...मेरी प्यारी घुंडीयाँ हैं, मसल दोगे तो खाओगे क्या...?? '' कम्मो बाबूजी के हाथों में अपनी निपल्स दबवाते हुए कसमसा रही थी. उसका मन कर रहा था कि अपने बदन से सूट उतार दे और टांगे फैला के नंगी लेट जाए.

'' सच कहूँगा रानी तेरी इस भीगी हुई मुनिया की कसम..मैने ये सूट खुद बनवाए हैं ख़ास तेरे नाप के. और मुझे खुशी है कि मेरी तेज़ नज़रों ने तेरे जिस्म को सही से नापा...तुझे इतने दिन से घूरते हुए मुझे तेरी फिगर का पूरा अंदाज़ा हो गया था..तू 38सी की ब्रा पहनती है..तेरी कमर 32 की है और तेरी ये गदराई गांद पूरी 41 की.. है ना मेरी जान...उम्म्म्ममम और तेरी इस गांद में इस समय फँसा मेरा लंड कह रहा है कि तुझे घोड़ी बना लूँ और चढ़ जाउ...आज के लिए मैं बनूँ दूल्हा और तू बने मेरी घोड़ी....क्याअ बात है जान..बनेगी अपने बाबूजी की घोड़ी...?? '' बाबूजी की उंगलिओ की रफ़्तार अब तेज़ हो गई थी. निपल बार बार उंगलिओ में पकड़ के खींच रहे थे. बाबूजी के हिसाब से कम्मो अब तैयार थी. बस अब उन्हे एक और चीज़ देखनी थी.

'' उउउहह मेरे जालिम सैयाँ..बना ले अपनी घोड़ी मुझे और चढ़ जा....मैं तो धन्य हो गई तेरी नज़रों की ...क्या नज़रें है तेरी जो मेरी जवानी का रोम रोम नाप लिया...आजा मेरे रजाअ बना मुझे अपनी रांड़....ऊहह अब रुका नही जाता...कर दे नंगी मुझे और पेल...हाऐईयईई....उम्म्म्ममम...ऊहह बबुउुुुउउ.....आज से जब चाहे जहाँ चाहे बुला लेना ...सब करूँगी...तेरी छिनाल हुई मैं आज से...दे दे नाअ अब ..और मत तरसा....''' कम्मो ने अब अपने सूट को कमर तक खींच लिया था और साथ ही ब्रा को भी. उसके दोनो मम्मे अब बाबूजी के हाथ में थे. बाबूजी कभी नरम हाथों से और कभी दबा के उसके चूचे सहला और निचोड़ रहे थे. बाबूजी का चूत वंचित लोडा तैयार था पर अभी भी बाबूजी को संयम रखना था.

'' डालूँगा पेलुँगा तेरी पग्लाई हुई बुर को ठोकुंगा और चाटूंगा भी..पर पहले तू मुझे अपनी जवानी दिखा ..अपने आप खोल इस सूट को और साथ ही अपने राजा को भी नंगा कर...घोड़ी बनेगी तो सब मेहनत मैं ही करूँगा ना..तू तो बस मज़े लेगी..और अब इस बुढ़ापे में इतनी मेहनत से पहले कुछ आराम कर लूँ...चल आजा दिखा अपना जलवा ....'' बाबूजी ने कम्मो को अपनी तरफ मोड़ लिया. दोनो बिस्तर के किनारे पे एक दूसरे को देख रहे थे. बाबूजी के सामने कम्मो बहुत छ्होटी थी और उनको देखने के लिए उसने सिर उठाया और ऐसे में उसकी चूचियाँ और भी बाहर को निकल आई.
क्रमशः............................

rajaarkey
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Re: खानदानी चुदाई का सिलसिला

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 02:50



Uske baad hum chaaron ke beech jo ghamaasaan chala woh yaad rakhne wala tha. Sakhi ki maa ne meri aur tumhare Phoopha ki izaat loot li uss raat..saali ne kam se kam bhi 3 - 3 baar hamen choda. Ek samay to main aur tumhare Phoopha dono iski Maa ki choot aur gaand men ghuse pade the aur tumhari Kanchan bua apni choot satae hue thi uske muh se. Sach men bada mushkil test tha hamare lie. par bada mazaa bhi aaya. Subah poore bed pe jagah jagah muthh hi mutth tha. In dono randion ki chooten sooji hui thi aur hamare lode chhile pade the. Par jo important cheez thi woh tha is exam ka result. Jab hum log subah 6 baje uthe aur taiyaar hue to uss samay Sakhi soi padi thi. Hamaari chudaai raat 3 baje tak chali thi. Sakhi ki Maa ko hamne raat men hi Sakhi ke rishte ke lie mana lia tha. Use ye kaha ki agar ye rishta ho jaata hai to bina jhijhak ke uske aur hum teeno ke sex sambandh bane reh sakte hain. Isi baat pe woh chhinaal khushi khushi taiyaar bhi ho gai. Tab hamne usse agle hi din sagai ki taiyaari ke lie kaha aur subah jaldi utha ke ghar jaane ko kaha.

Jaan bhooj ke Kanchan ne Sakhi ke kamre ka darwaza khatkhataya. Jab woh nahi uthi to Kanchan ne usko uthaane ke bahane se khidki se jaake usko awaaz lagai. Wahan se kamre ka nazaara dekh ke Kanchan ko idea ho gaya ki raat men kheere se Sakhi ne apni pyaas bhujaai thi. Nangi haalt men ye kheere ko choot ke nazdeek rakh ke soi padi thi. Jab finally ye kamre se bahar nikli to 7 baj chuke the aur main, tumhare Phoophaa aur Sakhi ki Maa sagai ki taiyaari ke lie nikal gae the. Kanchan ne baad men hamen bataya ki Sakhi ki aankhen surkh laal thi jaise woh raat ko bahut late soi. Isne bahana banaya ki raat ko ye late tak movie dekh rahi thi. Tab Kanchan ne isse puchha ki aisi kaun si movie dekhi jo kheere ki zaroorat padi. Tab ye jhemp gai. Uss samay Kanchan ko yakeen ho gaya ki isne raat bhar hamari chudaai dekhi hai. Tb Kanchan ne isse bataya ki ab tere kheere waale din gae aur asli dande ki pitaai ke lie taiyaar ho ja.

Uss shaam ko iski aur Sanjay ki mangni hui aur phir 4 mahine baad shaadi. Mujhe tabhi se pata tha ki isse hamari yogya bahu banne men koi waqt nahi lagega aur hua bhi waisa hi.''

Ye kehte hue Babuji ne apni kahaani khatam ki aur Sakhi ko gode se utha ke saamne khada kar dia. 2 min men nangi Sakhi unke lund ke choope le rahi thi aur kamre men ek taraf kapdo ka dher lagna shuru ho gaya.

Babuji ke kahe anusaar teeno bhaiyon ne mil ke teeno auraton ko regularly chodna shuru kar dia. Har roz shaam ko Babuji ki supervision men 2 bhai teeno ka chodan karte. Teesra bhai lund hilata aur auraton ki chooten chaat ke ya unke mummen daba ke unhe taiyaar rakhta. Babuji apna moosal kabhi kisi ki gaand men dete to kabhi chuswa lete. Choot se door rehte the hamesha. par ye bhi bada kathin samay tha Babuji ke lie. Unke jaisa tharki chodu aakhir kitne din tak choot se wanchit rehta. Babuji din men Kammo pe kadi nazar rakhte the. Unhone Kammo ke hav bhav padne shuru kar die. Kammo kis samay kya karti hai aur kya nahi, kaise matakati hai, ghar ke sadasyon se kaise baat karti hai ye sab Babuji ne notice karna shuru kar dia. Aise hi din hafton aur hafte mahino men badal gae. Babuji samajh chuke the ki Kammo bhi kamuk hai aur lund ki bhookhi hai.

Udhar Kammo ko jab bhi mauka milta woh Ramesh ko bulwa leti. Ramesh bhi dhire dhire manjha khilaadi ban raha tha. Use Kammo se achhi seekh mil rahi thi aur free ki choot ko kaun mana karega. Woh mauka dhoondhta rehta tha ki kab Kammo ka pati bahar jae. Mauke bhi bad rahe the kyonki Ramesh ka baap Kammo ke pati ko shaadi ke kaamon men uljhae rakhta tha. Dikkat bas bachhon ki thi. Ramesh ki chudai ka asar Kammo pe dikhne laga tha. Ab woh khili khili rehti thi aur Babuji ke ghar ke sadasyon se chutki karti rehti thi. Kabhi kabhi woh Babuji ko bhi chher deti thi. Babuji ne bhi mann banana shuru kar dia ki woh Kammo ki choot ko apne veerye se bhav vibhor zaroor karenge. Par aisa kab aur kaise karna hai ye unhone decide nahi kia tha.

3 mahine ke antral men Minni, Rakhi aur Sakhi teeno pet se ho gai. Ghar men koi badi aurat nahi thi so islie Babuji ne Sakhi ki Maa ke lie bulawa bheja ki kuchh mahino ke lie woh unke sath aake ruk jaen. Rakhi aur minni ne apne apne maike jaane se mana kar dia. Babuji ne decide kia ki 3no bahuon ke bachhe sasural men hi honge. Sakhi ki Maa ke ghar men aate hi mahaul ek baar phir badal gaya. Sakhi ki Maa ko ghar ke raaz ke baare men kuchh nahi pata tha. So islie sabko apni apni patnion ke sath sona padta tha. Sakhi ki Maa ne sab mardon ko nirdesh dia ki pehle 3 mahine woh log apni biwion ke sath kuchh na karen. Uske hisaab se pehle 3 mahine men kisi excitement ki wajah se bachha girne ka dar ho sakta tha. Saath hi sath Sakhi ki Maa ne apne dore phir se Babuji pe daalne shuru kar die. Sakhi ki shaadi aur ab tak woh Babuji se sirf 3 baar aur chudi thi. Pehli raat ke baad shaadi se kuchh din pehle woh aur Babuji uske ghar pe din men akele rahe the. Uske baad jab Sakhi ko milne 2 din aake ruki thi to usne Babuji ka bistar shaam ki taraf garam kia tha. In dino men usne Kanchan ke pati ke sath khoob maze lie the. Kancha ka pati use regularly apne ya uske ghar men pelta tha.

Par jab se woh Sakhi ke sasural men aai thi tab se usko Kanchan ke ghar jaane ka mauka nahi mila tha. Idhar 3no ladke bhi apni apni biwion ki chooton se wanchit the. Bas lund chuswa ke guzara kar rahe the. Ghar ke ye haalat dekhte hue Babuji ne ek plan banaya aur ek din unhone announce kia ki teeno jode ek Saturday ko ek picnic spot pe raat rukne ke lie jaenge. Isse sabhi logon ka manoranjan ho jaega aur hawa paani badal jaega. Sakhi ki Maa ne kaha ki woh bhi sath jaegi. Babuji ko is baat ki umeed thi ki woh aisi baat keh sakti hai. So unhone Sakhi ki Maa ko bhi sath jaane ki anumati de di.

Babuji ke plan ke hisaab se Saturday ko 3no jode aur Sakhi ki Maa ek sath picnic spot pe chale gae. Sahniwaar ki dopahar ko jab Kammo ghar men kaam khatam kar chuki to Babuji ne use apne kamre men bulwaya.

'' Babuji aapne bulaya. Koi kaam tha kya..'' Kammo ne apne suit ki chunni se hath ponchhte hue puchha.

'' Haan mujhe tujhko kuchh dena hai. Darasal tujhe pata hai ki bahuen pet se hain aur tujh pe aajkal sara kaam ka bhoj aa gaya hai. Main jaanta hoon ki tu kitni mehnati hai. Islie main tujhe kuchh inaam dena chahta hoon. '' Ye kehte hue babuji ne almirah se 3 badiya quality ke suit nikaale. Teeno suit kaafi mehnge the aur sile silae the.

Suit dekh ke Kammo ki baanchhen khil gai. Use yakeen nahi ho raha tha ki Babuji usko itne mehnge suit de sakte hain. babuji ne use kaha ki woh koi 2 suit le le. Ye baat sunte hi Kammo thori confuse ho gai par kuchh boli nahi. usne ek gulaabi aur ek hara suit choose kia. Babuji ne dono suit khol die aur kammo se kaha ki woh unko try kare aur dikhae. Ye baat sunte hi Kammo thora sharma gai aur sakpaka gai.

'' Babuji hum ye suit kaise try karen aapke saamne. Ye lagte to hamare size ke hain par aapko kaise dikhaen pehen ke. Hum ghar jaake pehen lenge. Agar kuchh unch nich hogi to darzi se theek karwa lenge.'' Kammo sharam se nazre jhukae boli.

'' Arri pagli tu bina jhujhak ke pehen ke dikha mujhe aur phir main batata hoon ki maine tujhe try karne ko kyon kaha hai. Chal ja mere bathroom men jaake badal le aur dikha. Agar nahi dikhaegi to inhe yahin chhor de. Main kisi aur ko de doonga. '' Babuji ne thori kadak awaaz men kaha.

Ab Kammo unka virodh nahi kar sakti thi. Uska mann lalchaya hua tha. Usne gulaabi suit uthaya aur bathroom men chali gai. Suit kaafi heavy tha aur uspe achhi kaari gari hui padi thi. Par suit ka front aur back dono kaafi low the. Suit pehen ke usne apne aap ko aine men dekha aur thora ghabra gai. Uski chochion ki daraar ka kareeb 2 inch ka hissa saaf dikh raha tha. Suit ko agar woh aage se upar karti to pichhe se bra ka strap dikhne lagta. Jisne bhi suit banaya tha badi soch se banaya tha ki har haal men maximum hissa expose hoga hi hoga. Uske mummen bilkul sahi tarike se suit men satte hue the. Kamar pe suit chipka hua tha aur uske chootron pe aas paas perfect fall aa rahi thi. Usse aisa laga jaise kisi ne uska naap leke suit banaya ho.

Isi peshopash men use babuji ki awaz sunai di. Ghabraate aur sharmaate hue bina chunni ke woh bathroom se bahar nikli. Babuji dressing table men dekh ke apni moochhon ko taav de rahe the. Unki peeth Kammo ki taraf thi. Kammo ki reflection dressing table ke sheeshe men nazar aa rahi thi. Kammo ne apne dono hath apne kandhon pe rakhe hue the. Woh apne mummon ki daraar ko chhup rahi thi.

'' Lijie Babuji dekhie..humne suit pehen lia.'' Sehmi hui awaaz men Kammo boli.

'' Ye kya Kammo aise kaise pata chalega ki suit tujh pe achha lagta hai ya nahi.. hath to niche kar..hmmmmm ghabra nahi sirf yahin se dekhunga.'' Babuji abhi bhi Kammo ko sheeshe men hi dekh rahe the aur moochhon pe taav de rahe the.

rajaarkey
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Re: खानदानी चुदाई का सिलसिला

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 02:51

Kammo ne sir jhukaate hue apne hath side men kie. Babuji ki dhoti men unka lund ab kada hone laga tha. Kachha to unhone pehna hi nahi tha. Babuji paini nazron se Kammo ke ek ek ang ko ghoor rahe the. 2 bachhon ki maa lagti bhi aur nahi bhi. Uska jhuka hua chehra ek middle age aurat ki maturity bayaan karta tha. Badan ka gatheelapan ek jawaan aurat jaisa tha par badan ki banawat ek bhari kheli khilaai aurat ki. Kammo ke jism men extra maans tha par sahi jaghon pe. Par woh extra maans ek tarike se muscles ke roop men tha. Babuji uski choochion ko dekhne lage. Suit men uski choochian achhi kasi hui thi. Kareeb 15 second tak Babuji use nihaarte rahe. Gulaabi rang uske gehuen rang ko suit kar raha tha.

'' Achha zara pichhe mud ke dikha.'' Babuji ne hukum sunaya.

Sharmaate hue Kammo mud gai aur use apni takreeban 25% nangi peeth ka ehsaas hua. Kammo ke dimaag men bhi ab halchal thi. Woh halchal ab uski choot men uttejna paida kar rahi thi. Chooche bhi kade hue pade the par poore nahi. Kammo ke nipple bahut bade the. Use dar tha ki kahin woh tharak gai to nipple saaf saaf dikhne lagenge.
Use apni peeth pe Babuji ki nazren gadi hui mehsoos ho rahi thi. Babuji uski peeth, uski kamar aur uske chootron ka zaiza le rahe the. Phir se kareeb 15 second tak usse nihaar lene ke baad Babuji ne Kammo ko doosra suit pehen ke aane ko kaha.

Kammo ne mud ke bed se doosra hara suit uthaya. Uski chhattion ki daraar jo kareeb 2 inch dikh rahi thi jhukne se aur bhi dikhne lagi. Suit men kasaav tha nahi to shayad uske mummen uchhal ke bahar aa jaate. Ek baar phir Kammo bathroom men chali gai. Jaise hi usne suit ko pehnane ke lie khola to woh hairaan reh gai. Hara suit bahut hi mehnga tha. Kammo ke andaaz se kam se kam 5000 ka hoga. Doosri baar woh tab chaunki jab usne us suit ki banawat dekhi. Kammo ke pair kaampne lage aur uski dhadhkane tez ho gai. Apne aap ko Babuji ke saamne us suit men soch ke woh ghabra gai. Par tabhi uski choot ne jawaab de dia. Uski choot buri tarah paniya gai. Kammo ka dimaag theek se kaam nahi kar raha tha par uski jawaani angraian le rahi thi.

Itne men Babuji ki kadak awaaz bahar se phir sunai padi. Kammo ne aanan faanan men suit pehen lia. Babuji ki awaaz men kadakpan aur ek jaldi ka bhaav tha. Kammo itna to samjh gai thi ki jis tarike se suit fitting hai woh khaas uske badan ke lie banae gae hain par kaise ye usse samjh nahi aa raha tha. Isse pehel ki Babuji ki awaaz dobara sunai de Kammo ne darwaaaze ki chitkhani kholi aur bahar nikal aai. Ab ki baar uske dono hath uske kandhon pe the aur woh unhe hata nahi paa rahi thi. Choot ki mehak uske badan se khushboo ban ke kamre men failne lagi thi. Chooche ek dam kadak the aur nipples ki shape poori tarike se ab nazar aa rahi thi.

Babuji ne sheeshe men dekhte hue ek baar phir Kammo ko nihara. Is baar unki uttejna bad gai. Lund poora khada tha par kurte ki wajah se dhoti men bana tamboo dikh nahi raha tha. Babuji Kammo ki sadharan khoobsoorati se mantra mughdh ho gae the. Suit ki patli patli dorion ke bagal men uski bra ke chaude strap nazar aa rahe the. Suit ne uske kandhon ko poora ughaad ke rakha tha. Dono taraf se uske maansal kandhe dikh rahe the. Mummon ki gehraai ke theek beech men ek dil bana hua tha jise woh chhupaane ki koshish kar rahi thi. Suit ka top ek kurti ki tarah tha. Sirf Kammo ki jaanghon tak. Suit kasa hua tha aur uske chootron ke aas paas chipke hua tha. jaldi jaldi men Kammo ne jab suit kehna to baal aadhe khul gae the. kammo ke baal bhi lambe the kareeb uski kamar tak. uska ribbon uske kandhon ke niche ki taraf aadhe khule baalon men jhool raha tha.

Babuji se raha nahi gaya aur woh mud gae. Kammo ka chehra jhuka hua tha. Ek patli si chooridaar salwaar uske badan se chipki hui thi. Babuji uske kareeb pahunche. Uske kandhon pe nazar daali. Uske aadhe nange kandhe aadhe hathon se chhupe hue. Babuji ab Kammo ke theek pichhe khade the. Achanak Kammo ko apni kamar pe Babuji ke hathon ka sparsh mehsoos hua aur anayaas hi uske haath unke hathon ke upar chale gae. Ab uski nangi peeth aur kandhe unke saamne the. Babuji ne uski kamar ko apne hathon se bheencha aur dhire dhire apne hathon ko khiskaate hue uske pet pe le gae. kammo ab ek mom ki gudia thi. usko apne upar kaaboo nahi tha. Uske hath Babuji ke hathon se satte hue apne hi pet ki taraf chale gae. aur phir 2 second wahan ruk ke uske dono hath apni choot ki taraf bad chale. Anaayaas hi uske muh se ek siskaari nikli aur uske hathon ne choot ke upar ke hisse ko jakad lia.

Babuji ne aage jhuk ke uske kandhe pe kiss kia. Kammo ka rom rom kaanmp uthaa. Jasie use 220v ka jhatka laga ho. Rongten khade ho gae aur choot lislisa gai. Uski chhatti automatically bahar nikal aai jaise ke keh rahi ho ki aao mujhe choosoo. babuji ne bhi der nahi ki aur apne hathon ko pet se badaate hue Kammo ke mummon ke theek nich kar dia. Uske baad unke hathon ne Kammo ke mummon ko niche ki taraf se dabaya aur uske nipple ghonth die. Kammo ab tarfara rahi thi. Usne apni choot ko chhor ke babuji hathon pe apne haath arkhe aur unhe jor se dabaya. uske mummen bhinch gae aur woh sihar gai.

''oooooooooohhhh Babuuuujiiii...ye kya kar diaaa aaapne....meri munia to geeli ho gai....'''

'''hmmmmmmm to geeeli muni ko kyon tang karrr rahi hai...useee bhi sookh jaane de ..apni muni ko keh ki uska ras mere lund pe nikaal de aur usko bhigo ke free ho jaae....uummmmmgadar jawaani hai teri banno..zara nangi ho jaa..''

Babuji ka ye kehna tha ki unhone Kammo ke jawaab ka intezaar nahi kia. Unhone suit ke patle patle strap Kammo ke kandhon se utaar die aur sath hi uske bra ke strap bhi. Bra ke strap kandhon se hatte hi Kamoo ke mote mote mummen thora jhool gae.

''Tujhe pata hai Kammo ye suit tujhpe kitne achhe dikh rahe hain..kaatil lag rahi hai tu isme. Mujhe to rijha lia hai tune. Ufff sach bolun aaj ye pehen ke pehli baar mujhe laga ki tu mere is bistar ki shobha bada degi...bol aaegi mere bistar pe ?? '' Babuji Kammo ki peeth gardan aur gaalon ko choomte hue poochh rahe the.

'' Haannn Babuji aaungi aapke bistar pe...itna garam kar doongi is bistar ko ki aap kabhi ispe so nahi paenge...aag laga doongi aapke bistar ko apni jawaani se .. jaise abhi aapne laga di hai mujhme...par ek baat batao Babuji... aur us baat ka sach jawab dena to abhi ke abhi bichh jaungi yahan...ye suit mere hisaab ke kisne banae aur kaise....uummmm inme to meri jawaani poori fit ho gai..ooohhhhh ...ummmm kya karte ho Babujiiiiiii....aise na maslo inko ...meri pyaari ghundiyaan hain, masal doge to khaoge kyaa...?? '' Kammo Babuji ke hathon men apni nipples dabwate hue kasmasa rahi thi. Uska man kar raha tha ki apne badan se suit utaar de aur taange faila ke nangi let jae.

'' Sach kahunga raani teri is bheegi hui muniya ki kasam..maine ye suit khud banwae hain khaas tere naap ke. Aur mujhe khushi hai ki meri tez nazron ne tere jism ko sahi se naapa...tujhe itne din se ghoorte hue mujhe teri figure ka poora andaaza ho gaya tha..tu 38c ki bra pehanti hai..teri kamar 32 ki hai aur teri ye gadraai gaand poori 41 ki.. hai na meri jaan...ummmmmm aur teri is gaand men is samay fansa mera lund keh raha hai ki tujhe ghodi bana loon aur chad jaun...aaj ke lie main banun dulha aur tu bane meri ghodi....kyaaa baaat hai jaaan..banegi apne Babuji ki ghodi...?? '' Babuji ki unglion ki raftaar ab tez ho gai thi. Nipple baar baar unglion men pakar ke kheench rahe the. Babuji ke hisaab se Kammo ab taiyaar thi. Bas ab unhe ek aur cheez dekhni thi.

'' uuuhhhhh mere jaalim saiyaan..bana le apni ghodi mujhe aur chad jaa....main to dhanya ho gai teri nazron ki ...kya nazren hai teri jo meri jawaani ka rom rom naap lia...aajaa mere rajaaa bana mujhe apni raand....oohhhhh ab ruka nahi jaata...kar de nangi mujhe aur pel...haaaiiiii....ummmmmm...oohhhh Babuuuuuuu.....aaj se jab chahe jahan chahe bula lena ...sab karungi...teri chhinaal hui main aaj se...de de naaa ab ..aur mat tarsaa....''' Kammo ne ab apne suit ko kamar tak kheench lia tha aur sath hi bra ko bhi. Uske dono mummen ab Babuji ke hath men the. Babuji kabhi naram hathon se aur kabhi dabv de ke uske chooche sehla aur nichod rahe the. Babuji ka choot vanchit loda taiyaar tha par abhi bhi Babuji ko sanyam rakhna tha.

'' Daalunga pelunga teri paglaai hui bur ko thokunga aur chaatunga bhi..par pehle tu mujhe apni jawaani dikha ..apne aap khol is suit ko aur sath hi apne raajaa ko bhi nanga kar...ghodi banegi to sab mehnat main hi karunga na..tu to bas maze legi..aur ab is budhaape men itni mehnat se pehle kuchhh araam kar loon...chal aaja dikha apna jalwa ....'' Babuji ne Kammo ko apni taraf mod lia. Dono bistar ke kinaare pe ek doosre ko dekh rahe the. Babuji ke saamne Kammo bahut chhoti thi ao unko dekhne ke lie usne sir uthaya aur aise men uski chhattian aur bhi bahar ko nikal aai.