चुदसी आंटी और गान्डू दोस्त sex hindi long story

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sexy
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Re: चुदसी आंटी और गान्डू दोस्त sex hindi long story

Unread post by sexy » 19 Aug 2015 07:29

“मिलेगा तब सोचूँगी.” माने शराराती हँसी के साथ कहा. माकी इस बात पर मेने उसकी ठुड्डी उपर उठाई और उसकी आँखों में झाँकते कहा,

“जी तो कराता है की तेरी इस बात पर एक प्यारी सी पप्पी ले लूँ.”

“तू मुझे इतना प्यार कराता है और इतनी छ्होटी सी बात पुच्छ रहा है. लेनी है तो लेले पूच्छ क्या रहा है.” यह कह आंटी मेरी आँखों में देखते हुए हँसने लगी. मेने आंटी का फूला फूला गाल गप्प से आपने मुख में भर लिया और कस के एक प्यारी सी पप्पी लेली.

आंटी: “चलो तुझे आपनी माकी पप्पी मिल गई ना, अब खुश हो ना.”

में: “आंटी सबके मन की बात बिना कहे ही जान लेती है और माँगते ही मुराद पूरी कर दी. जो मज़ा माकी गोद में है वा भला दूसरी की गोद में कहाँ. आंटी तेरी हर बात पे, तेरी हर अदा पे में हमैइषा खुश हूँ.”

आंटी: “मेरा आजकल पुर आशिक़ों जैसी बातें कराता है. कोई बात नहीं इस उमर में हर कोई ऐसी बातें कराता है.” आंटी ने कहा. आंटी उठ खड़ी हुई और बगल में सटे आपने रूम की और चल डी. में भी फ्रेश होकर जिस बेड पर अभी आंटी के साथ यह सब चल रहा था उसी बेड पर प़ड़ गया. बेड पर पड़ा पड़ा कई देर आंटी के बड़े में ही सोचता रहा और ना जाने कब नींद आ गई.

इसके दूसरे दिन मेने माको शाम 5 बजे ही स्टोर से फोन कर बता दिया की मेने ईव्निंग शो की 2 टिकेट्स बुक करली है और वा 6 बजे तक तैयार होके स्टोर में ही आ जाय. आंटी 6 बजे स्टोर में पाहूंछ गई. आज हमने पुरानी पिक्चर ‘खूबसूरात‚ देखी. आंटी को यह साफ सुथरी पिक्चर बहुत ही अच्छी लगी. आज भी हमने बाहर ही रेस्टोरेंट में खाना खाया और 10.30 बजे घर पाहूंछ गये.

आज कुच्छ गर्मी थी सो घर पाहूंछ कर आंटी नहाने के लिए बाथरूम में चली गई. में भी आपने रूम में चला गया और शवर लेके नाइट ड्रेस चेंज कर ली. में आपने बेड पर पसार गया और एक मॅगज़ीन को पलटने लगा. में मॅगज़ीन में खोया हुवा था की आंटी की आवाज़ से की ‘क्या चल रहा है‚ से मेरा ध्यान आंटी की तरफ गया. एक बार ध्यान गया की में आंटी की तरफ देखते ही रह गया. आंटी बहुत ही आकर्षक नाइटी में थी. आंटी को नाइटी में में पहली बार देख रहा था. नाइटी में मेरी मद मस्त आंटी 35 साल की भारी पूरी बिल्कुल आधुनिक शहरी महिला लग रही थी.

“क्या घूर घूर के देख रहा है? जब मुझे इस रूप में देखना चाहता है, मेरी छ्होटी सी छ्होटी खुशी के लिए मारा जाता है तो में क्या मेरे प्यारे बेटे की इतनी सी इच्छा भी पूरी नहीं कर सकती. अब देखो ठीक से तुम्हारे लिए में पूरी शहरी बन गई हूँ.” आंटी ने कहा और मेरे पास बेड पर बैठ गई.

में: “आंटी इस नाइटी में तो तुम पिक्चर वाली रेखा जैसी एकदम जवान और मस्त दिख रही हो. देखा, इंसान जिस महॉल में रहता है, जो देखता है उसका असर होता ही है. आंटी सच सच बठाना, तुमको भी ये सब अच्छा लग रहा है ना.”

आंटी: “अच्छा क्यों नहीं लगेगा. तुम्ही तो कहते रहते हो की अभी तो में पूरी जवान हूँ और तेरे जैसा जवान तो किसी बुधिया को भी यह बात कह दे तो उस में जवानी आ जाय. पर आज तूने जो पिक्चर दिखाई, देख के मज़ा आ गया.”

में: “मज़ा आ गया ना? देखा, अशोक कुमार जैसा बुद्धा रेखा जैसी जवान लड़की को कैसे आपनी गर्ल फ्रेंड बनाता है. आंटी तुम भी मेरी गर्ल फ्रेंड बन जाओ.”

आंटी: “क्या में तुझे गर्ल दिखती हूँ? गर्ल फ्रेंड नहीं औरात फ्रेंड कहो. अब दोस्त बनाने की क्या दरकार है में तो आंटी रहते हुए भी तेरे साथ दोस्त जैसे सिनिमा देखती हूँ, पार्कोन की शायर कराती हूँ और दोस्त जैसे ही खुल के व्यवहार करने की चेष्टा कर रही हूँ.”

में: “में नहीं जानता, बस आज से तुम मेरी आंटी नहीं बल्कि एक दोस्त हो. तुम आपनी नज़र में एक औरात होगी पर मेरी नज़र में तो बिल्कुल कुँवारी लड़की हो. जब दोस्त की तरह तुम मेरे से व्यवहार कराती हो और मेरी नज़र में एक पूरी जवान इठलाती लड़की हो तो बताओ मेरी गर्ल फ्रेंड हुई या नहीं?

आंटी: “अच्छा बाबा तुम आपने आप को मेरा बॉय फ्रेंड समझते हो तो लो में तुम्हारी पक्की गर्ल फ्रेंड बन गई. अब खुश हो ना?”

“यह हुई ना बात. अब मज़ा आएगा. देखो दोस्ती में कोई भेद भाव नहीं होता. जो मेरा है वा सब तुम्हारा है और जो भी तेरे पास है वा सब मेरा है.” यह कह के मेने आंटी को आपनी बाँहू में जाकड़ लिया और उसके गाल को चूस्टे हुए पप्पी लेली.

आंटी: “लो हामी भरने की देर थी और तुम शुरू हो गये. में तो बस उस रेखा जैसी ही दूर दूर रहनेवाली गर्ल फ्रेंड बनूँगी.”

में: “पर आंटी सोचो कहाँ उसका अशोक कुमार जैसा 70 साल का बुद्धा बॉय फ्रेंड और कहाँ तुम्हारा 28 साल का गबरू जवान मस्त बॉय फ्रेंड. उसके निर्मल आनंद लेने में और मेरे निर्मल आनंद लेने में कुच्छ तो फ़र्क़ होगा ना? पर असली बात है निर्मल आनंद लेना. ऐसा स्वच्छ और निसंकोच आनंद जो दोनो को बराबर मिले; ना कोई दूरी हो और ना ही कोई भेद भाव.” मेरी बात सुन आंटी मंद मंद मुस्करा रही थी और में माके मुस्करते होंठों पर अंगुल फेरने लगा.

आंटी: “पिक्चर की यह निर्मल आनंद वाली बात तूने अच्छी पकड़ी. तो अब आंटी को आपनी गर्ल फ्रेंड बना के तू उससे निर्मल आनंद लेगा. पर ध्यान रखना में पिक्चर जैसे निर्मल आनंद की बात कर रही हूँ .”

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Re: चुदसी आंटी और गान्डू दोस्त sex hindi long story

Unread post by sexy » 19 Aug 2015 07:30

“अब तो तुम मेरी गर्ल फ्रेंड बन गई हो तो कल चलें उस पार्क की शायर करने जहाँ लोग आपनी गर्ल फ्र्िएंडों के साथ निर्मल आनंद लेते हैं.” मेने आंटी की आँखों में देखते शरारात भरे अंदाज़ में कहा.

आंटी: “ना बाबा नहीं लेना मुझे ऐसा निर्मल आनंद. बेशरम लोग कहीं के. छिपचिपी ही करनी है तो घर में बैठ कर करे, वहाँ पार्क में सब के सामने. तुम मुझे मॉडर्न बनाने के चक्कर में धीरे धीरे पिच्चे ला रहे हो. पहले तो विधवा से मुझे वापस सुहागन साहबित कर दिया. अब सुहागन से गर्ल यानी की कंवारी लड़की बना दिया और खुद मेरे बॉय फ्रेंड बन बैठे. आयेज जहाँ से आई वहीं वापस मत भेज देना.”

“अरे आंटी नहीं. तुम चाहोगी तो अब हम यहाँ से वापस आयेज की ओर बढ़ने लगेंगे. विधवा से वापस सुहागन बनने में सोच नेगेटिव रहती है जबकि कुँवारी लड़की जब सुहागन बनती है तो उसकी सोच पॉज़िटिव होती है.” मेने आंटी को इशारों इशारों में संकेत दे दिया की में तुम्हें आपनी सुहागन बनाना चाहता हूँ और में बॉय फ्रेंड से तुम्हारा सुहाग.

आंटी: “तो इसका मतलब की अब गर्ल फ्रेंड का किस्सा ख़त्म और वापस सुहागन आंटी चाहिए तुम्हें. दोस्त यह तुम्हारी ड्रामेबाज़ी अच्छी है.”

“हन, अब से तुम बिल्कुल एक सुहागन की तरह साज धज के रहो, शृंगार करो, मन से सारी नेगेटिव बातें निकाल दो और एक गर्ल की तरह बेबाक निसफ़िक़ार जिंदगी जियो और निर्मल आनंद लो.” यह कह कर मेने आंटी के गाल का चुम्मा ले लिए. आंटी मेरी और देख कर हंस रही थी. में आंटी के हंसते होंठ पर एक उंगली रख कर आपने होंठ पर आपनी जीभ फिराने लगा. मेने आपनी ओर से इशारा दे दिया की में तुम्हारे होंठों का रस पॅयन करना चाहता हूँ.

“तर्क करना तो कोई तुमसे सीखे, आपनी बात साहबित करके ही रहते हो. पर तुम्हारी बातें है बहुत गहरी. हम उचित-अनुचित, भले-बूरे, पाप-पुण्या इन दुनिया भर के लफडों में उलझे पड़े रहते हैं, और जो मन चाहे वा कर नहीं पाते और सोचते ही रह जाते हैं की दूसरे क्या सोचेंगे. किसी को भी कष्ट पाहूंचाए बिना जिस भी काम में मन को शांति मिले, आत्मा प्रसन्न हो वही निर्मल आनंद है.” आंटी ने एक दार्शनिक की भाँति कहा.

में: “हन आंटी, यही तो में तुम्हें कहता आ रहा हूँ. तुम्हारी और मेरी सोच कितनी मिलती है. जो में सोचता हूँ ठीक तुम भी वही सोचती हो. तभी तो तुमसे मेरा इतना मन मिलता है. जब से तुम यहाँ आई हो मुझे सिर्फ़ तुम्हारी कंपनी में ही मज़ा आता है. तुमसे मीठी मीठी बातें करने का च्छेद छज्जे करने का मज़ा लेने के लिए ही तो स्टोर से सीधा तेरे पास भागा आ जाता हूँ. घर से बाहर भी जितना मज़ा मुझे तुम्हारे साथ आ रहा है उतना आज तक नहीं आया. तुम मेरी इन बातों का कहीं बूरा तो नहीं मन रही?” मेरी बात सुन कर माने प्यार से मेरा गाल चींटी में भर लिया.

आंटी: “में तो खुद तेरी ऐसी प्यारी प्यारी बातें सुन बाग बाग हो जाती हूँ. तू जैसी मुझे बनाना चाहता है वैसी बनने की पूरी कोशिश कर तो रही हूँ. कोई कमी रह जाय तो मुझे बताते रहना.”

में: “आंटी तुम्हारे में और कमी, तुम तो भरपूर खजाना हो. तुम तो बस खूब सजधज के एक सुहागन की तरह बनाव शृंगार करके गहनों से आपने रूप में चार चाँद लगा के मेरी नज़रों के सामने रहा करो. मेरे मन में तो तुम्हारी ऐसी ही देवी जैसी च्चवि बसी हुई है.”

हम आंटी बेटे इस प्रकार कई देर बातें करते रहे. फिर रोज की तरह आंटी आपने कमरे में सोने के लिए चली गई. में बिस्तर पर कई देर पड़े पड़े सोचता रहा की आंटी मेरी कोई भी चीज़ का थोड़ा सा भी विरोध नहीं कराती है. पर में आंटी को पूरी तरह खोल लेना चाहता था की आंटी की मस्त जवानी का खुल के मज़ा लिया जाय. आंटी आधुनिक विचारों की, घूमने फिरने की, पहनने ओढ़ने की तथा मौज मस्ती की शौकीन थी. ऐसी औरात एक बार पाट जाती है तो आपने यार को जी खोल के मस्ती कराती है.

दूसरे दिन में रोज वाले समय पर घर आ गया. आज कहीं भी बाहर जाने का प्रोग्राम नहीं बनाया. खाने का काम समाप्त होने पर आंटी बाथरूम में नहाने चली गई और में कई देर सोफे पर बैठा सोचने लगा की आज आंटी का कौनसा रूप देखने को मिलेगा. कल आंटी मुझसे बहुत खुल के पेश आई थी, तो क्या जितना आतुर में हूँ उतनी ही आतुर आंटी भी है. फिर में भी आपने कमरे में जा बाथरूम में घुस गया. अच्छे से शवर लिया और बहुत ही मादक हल्की सी करीम आपने बदन पर लगा ली. में तैयार होकर बेड पर बैठा फिर माके बड़े में सोचने लगा. में आँखें मूंडे माकी सोच में डूबा हुवा था की माकी इस आवाज़ से मेरी तंद्रा टूटी,

“लगता है बड़ी बेसब्री से इंतज़ार हो रहा है.” मेने आँखें खोली और जैसे ही माकी तरफ देखा तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गई. माने शादी का जोड़ा पहन रखा था जो शायद उसने अब तक संभाल रखा था. माने सच्ची जारी का लाल घाघरा कमर में काफ़ी नीचे बाँध रखा था और उसीका मॅचिंग ब्लाउस पहन रखा था. इन सबके उपर उसने हल्के लाल रंग की झीनी चुनर ओढ़ न्यू एअर थी जिसे घूँघट के जैसे सर पे ले रखा था. माथे पर लाल बिंदिया भी लगा न्यू एअर थी. गले में हार, हाथों में कंगन; कहने का मतलब आंटी पूरी एक नाव व्यहता दुल्हन के रूप में थी. में आश्चर्यचकित हो माके इस अनोखे रूप को निहारे जा रहा था.

आंटी: “ऐसे क्या देख रहा है? माकी जैसी देवी की च्चवि तेरे मन में बसी हुई है बता वैसी लगती हूँ या नहीं? वैसे तो बहुत बोलता रहता है की में एक सुहागन के रूप में रहूं, साजून धाजून, शृंगार करूँ, गहने पहनून और जब तेरी इच्छा का मन रखते हुए इस रूप में आ गई तो तेरी सारी बोलती बंद हो गई.”

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Re: चुदसी आंटी और गान्डू दोस्त sex hindi long story

Unread post by sexy » 19 Aug 2015 07:30

आंटी की बात सुन में माके सामने खड़ा हो गया और आंटी को ज़ोर से बाँहू में भर लिया. फिर में माको साथ ले बेड पर बैठ गया और मेरी बाँहू में आंटी की पीठ आपने सीने पर कस ली. मुझे पक्का विश्वास हो गया की मेरी आंटी एक दुल्हन के रूप में मेरे साथ सुहाग रात मनाने आई है लेकिन यह करने की मुझे जल्दी नहीं थी. यह करने से पहले में उसे बिल्कुल खोल लेना चाहता था और पूरी बेशर्म बना देना चाहता था. मेने कहा,”लो आंटी कल मेने कहा और आज तुम मेरी सुहागन बन के आ गई.”

“तेरी सुहागन. क्या मतलब?” आंटी ने मेरी आँखों में आँखें डाल कर कहा.

में: “मेरा मतलब इस रूप में तुम ओर तो किसी के सामने जाने से रही तो केवल मेरी सुहागन हुई की नहीं. तुम्हे इस दुल्हन के रूप में देख कर आज में बहुत खुश हूँ और उससे बढ़ कर मेरे लिए खुशी की बात यह है की यह दुल्हन का रूप तुमने सिर्फ़ मेरे लिए धारा है.”

आंटी: “अब जब तूने आपने जीवन का लक्ष्या केवल मुझे खुशी देना बना लिया है तो में कैसे पिच्चे रह सकती हूँ. तुम मुझे इस रूप में देखना चाहते थे और अब देख कर बहुत खुश हो तो इससे बढ़ कर खुशी की बात मेरे लिए ओर क्या हो सकती है?”
में: “आंटी बड़ी बात यह है की इस प्रकार सुहागन की तरह रहने से तुम्हारे मन में विधवा वाली नकारात्मक भावना नहीं रहेगी ओर जीवन की हर वह खुशी, मौज मस्ती जो तुम पिच्छले 15 साल से नहीं ले सकी अब यहाँ बहुत ही एंजाय करते करते ले सकोगी. सोच जितनी सकारात्मक और खुली हुई होती है जिंदगी जीने का मज़ा भी उतना ही आता है. ” मेने आंटी को इशारों इशारों में कह दिया की अब सारी लाज शर्म छोड़ दो और आपने सगे बेटे के साथ खुल के रंगरेलियाँ मनाओ.

“यहाँ आने के बाद तुमने तो मेरी पूरी सोच ही बदल दी. गाँव के उस माहॉल में में कई बार सोचती थी की कभी मेरे जीवन में भी ऐशो आराम लिखा है या नहीं.” आंटी ने मेरे सीने में मुँह चुपाते हुए कहा.

“आंटी गाँव का वा महॉल अब बहुत पिच्चे छूट गया है. अब में तुम्हारे जीवन में खुशियाँ ही खुशियाँ भर दूँगा. सबसे बड़ी बात यह है की तुम ऐश करने की, रंगीन जिंदगी जीने की रंगीन और शौकीन तबीयत की औरात हो वहीं में शुरू से ही बहुत खुले विचारों का हूँ. वैसे में हर किसी के साथ कम खुलता हूँ पर जिससे एक बार खुल जाता हूँ उसके साथ आपना सब कुच्छ खुल के बाँटता हूँ.” अब मेने इस उन्मुक्त बहती गंगा में डुबकी लगाने का फ़ैसला कर लिया. मेने एक हाथ से आंटी की ठुड्डी उपर उताली और दूसरे हाथ की उंगली आंटी के होंठों पर फेरने लगा और साथ ही आपनी जीभ आपने होंठों पर फेरने लगा.

मेरी इस हरकत पर आंटी मेरी ओर देख हँसने लगी और थोड़ी सी आपनी जीभ बाहर निकाल दाएँ बाएँ चलाती हुई मुझे चिढ़ाने लगी की में आपने आप तुझे इनका जाम नहीं पिलाने वाली. मेरे लिए यह खुला निमंत्रण था और मेने आपना मुख नीचे करते हुए आंटी के मदभरे गुलाबी होंठों पर आपने होंठ रख दिए. मेने आंटी के होंठ आपने होंठ में जाकड़ लिए और मस्त होके आपनी मस्त जवान माके होंठों का रस पॅयन करने लगा. रस पॅयन करते करते एक हाथ आंटी के दाएँ पुस्त स्तन पर रख दिया ओर उसे हल्के हल्के दबाने लगा. माकी वा मस्त चूची काफ़ी बड़ी थी जो मेरे हाथ में पूरी नहीं समा रही थी और मुलायम होने के साथ साथ कसाव से भारी थी.

“मम्मी अब तुम मेरी सुहागन हो, आज से ना तो आपने आप को विधवा बोलना और ना ही समझना. सुहागन का मतलब जिसका सुहाग मौजूद हो ओर अब बताओ तुम्हारा सुहाग कौन हुवा?” मेने मम्मी की चूची कस के दबाते हुए कहा.

“तुम हुए और कौन हुवा और सुहाग होने का पूरा अधिकार जमा तो रहे हो. मन तो सदा से ही तुमको दिया हुवा था. धन की कोई बात ही नहीं; जो मेरा था वा सदा ही तुम्हारा था. जो टन बचा था उसके भी मुझे आपनी सुहागन बना के अधिकारी बन गये. इतने से मन नहीं भरा तो और कुच्छ भी चाहिए क्या?” आंटी ने शरारात भरे अंदाज़ में कहा.

“लो अब जब मुझे आपना सुहाग मन ही लिया है तो क्या इस प्रथम मिलन की घड़ी में इतने से काम चल जाएगा? देखती जाओ आज में तुझे कैसा निर्मल आनंद देता हूँ. मुझे पता है की पिच्छले 15 साल से तुम इस सुख के लिए तड़प रही थी. फ़र्ज़, शंका और शर्म के कारण तूने आपने इस लज़ीज़ जवान जिस्म की तम्मनाएँ दबा के न्यू एअर थी लेकिन अब वे पूरी तरह से भड़क गई है. तुम्हारी जवानी का कुँवा जो सुख चुका था वापस लबालब भर गया है. अब उस जवानी के कुनवे से में मेरी प्यास खुल के बुझावँगा. समझ रही हो ना में किस कुनवे की बात कर रहा हूँ.” अब में तो बेशर्मी पर उतार गया पर देखना चाहता था की आंटी इस बेशर्मी में कहाँ तक साथ निभाती है.

“सब समझती हूँ. तुम मेरी दोनों टाँगों के बीच में उभरे हुए टिल्ले के बीचों बीच खुदे कुनवे की बात कर रहे हो. लेकिन ध्यान रखना उस कुनवे के चारों ओर फिसलंभारी खाई भी है और आजकल वहाँ खार पतवार भी बहुत उगा हुवा है कहीं उलझ कर कुनवे में मत गिर जाना. दूसरी बात कुँवा बहुत गहरा है, पानी तक पाहूंचना आसान नहीं.” आंटी की यह बात सुन कर एक बार तो में हकबका गया की यह तो शेयर पर पूरी सवा शेयर निकली. पर मन ही मन बहुत खुश था. मेने सोचा भी नहीं था की सब कुच्छ इतनी जल्दी इतने मन चाहे ढंग से हो जाएगा. में आनंद के सातवें आसमान पर था.

“ऐसे गहरे कुनवे के पानी का ही तो में प्यासा हूँ. छ्होटे मोटे गड्ढे से मेरी प्यास नहीं बुझती. चिंता मत करो मेरे पास लूंबा मोटा और मजबूत रस्सा है और बड़ा सा बकेट भी है. में उस बकेट को रस्से के आयेज बाँधके तेरे गहरे कुनवे में उतारूँगा और देखना वा बकेट तेरे कुनवे का सारा पानी खींच लेगा. ठीक से समझ रही होना.” मेने कहा.

“जानती हूँ, तुम मेरी दोनों टाँगों के बीच वाले कुनवे में आपनीी दोनों टाँगों के बीच में लटके मोटे और लंबे रस्से के आयेज अंडे जैसा बकेट बाँधके उतारोगे और मेरे कुनवे को अच्छी तरह खंगाल खंगाल मेरे कुनवे के रसीले पानी से आपनी प्यास बुझाओगे.” आंटी ने नहले पर दहला मारा.

“हाय मेरी राधा रानी उसे रस्सा नहीं लंड बोलो. पूरा 11 इंच लूंबा और 4 इंच मोटा है. एकदम सिंगपूरी केले जैसा. एक बार देखोगी तो मचल जाओगी और पूरी लौंडिया बन जाओगी” यह कह कर मेने आंटी के होंठों को वापस मुख में ले लिया और आंटी के मुँह में आपनी लुंबी ज़ुबान डाल दी. यह चुंबन काफ़ी लूंबा चला.

“जिसका 4-5 इंच का होता है उसे नूनी बोलते हैं, जिसका 6-7 इंच का होता है उसे लंड बोलते हैं पर तुम्हारा तो 11 इंच लंबा है; उसे लंड नहीं हुल्लाबी लॅंड बोलते हैं. में अब उसे झेल पवँगी भी या नहीं. 15 साल से अधिक हो गये मेरी चुत में एक तिनका भी नहीं गया है. मेरी चुत सिकुड़के एक दम सांकड़ी हो गई है. मेरे राजा ऐसे हुल्लाबी लॉड के आयेज तो में सचमुच में लौंडिया हूँ.” आंटी पूरी बेशर्मी के साथ हंस के बोली. अब मेने आंटी की दोनो बड़ी बड़ी चूचियाँ ब्लाउस के उपर से ही आपने दोनों हाथों में भर ली और उन्हे निचोड़ निचोड़ दबाने लगा.
मुझे माके साथ पूरा बेशरम हो कर इस प्रकार खुली बातें करने में बहुत मज़ा आ रहा था और उससे भी ज़्यादा मज़े की बात यह थी की इस बेठककालूफ़ी और बेशर्मी में आंटी मुझसे भी बढ़ कर साहबित हो रही थी. मुझे पूरा भरोसा हो गया की में आंटी की मस्त उफनती जवानी को मनचाहे ढंग से भोगुंगा, आंटी के साथ खुल के व्यभिचार करूँगा.